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कभी ख़श ु ी 

, ​कभी उदासी 
कह ं अ धेरा , ​कह ं रौशनी ज़रा सी , 
जहाँ से जाना  , ​ फर वह  लौट आना  , 
कह ं-न-कह , ं   ​कभी न कभी  , ​हर तरफ है  वापसी 
 
सवेरे का होना  , ​रात का आना , 
फर सब ु ह होना है  वापसी 
मलना- बछड़ना  , ​ फर बड़े  दन बाद  मलना 
मर के  फर पन ु ज म लेना है  वापसी 
 
ठ क ह  कहा है   कसी ने,    ​ये द ु नया गोल है  , 
न शु आत , ​न अंत , ​न कोई छोर है  , 
मि ज़ल-दर-मि ज़ल  , ​सख
ु  से दःु ख  , ​गांव से शहर 

ये सब ह एक सफर , 
हर सफर क  है  ये आ खर  मंिज़ल  , 
यह  मंिज़ल है  वापसी........