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CBSE Class 9/10 Hindi(B) Unseen Passage - कक्षा ९ / १० - हहंदी (ब)अपहठि गद्ांश

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अपहठि गद्ांश :

संसार के सभी धरम मे एक बाि समान है , वह है रन, ईसवर भकककित ।ापना दवारा हम अपने हद्

के भाव ।भु के समसुख रखिे है और कुछ न कुछ उस शकककिमान से माँगिे हैत जब हाम मारग हीं

सका िो हम गान करके है त परपरन का फक उनिमहो, इसके लकएकमे अपने अंदर उििम वविार

और एकाग मन उिपनन कोिे है कक्योक वविारही मिुप् को ड्ड पहुँििे है ्ा उससे सुरि करे है त

हमारे वविार ही हम ऊँिाई िक के जिे है ्ा ोफराई मे फंक दे िे हैत ्ह

मन ही हमारे लकए टु कािा है और ्ही आनंद की ओर के जािाहै त ्जुवरद के एक मंत के अिुमार

्ह मन बदा ही ।बक और िंिक है त ्ह जड होिे हुए भी सोिे - जागिे कभी भी िैन नहीं केिात

कजिनी दे र हम जागिे रहि है , उिनी दे र्ह कुछ न कुछ सोििा हुआ भटकिा रहिा है त अव ।शन

्ह उठिा है ोक मन जो अत्ंि गतिशीक है , उसको कसपर और वश मे कैसे ोक्ा जाएत मन को

वश मे करके का ्ह िािर नहीं ोक ्ह हो जाए और ्ह गतिहीन हो ही नहीं सकिात कजस ।कार

अलस का धमर उणाा है उस परकार िंिकिा मन का धमर है

उप्रककि गदिांश पढकर सही ववक्प िनकर लकखखए -

(क) संसार के सभी धमर मे समान है -

()... रकिन व ईशवर भकककि

( आरन व ।विन

(). पराना बईसवर भकककि

(8). ईशवर भकककि व भजन

(ख) मिुष ् ।ापरना कब करिा है ?

()... संध्ा काक मे

(). कोई मारग न सूने पर

(8) . आिकाक होने पर


(). कष्ट आने पर

(ग)..मिष्ु ् की पीडवा का कारणा है -

()... मनष्ु ् के कमर

(). मन की तनबरकिा

(90 की बु

र उद

(ग). मिुष्् की पीडवा का कारणा है -

()... महुष्िके कमर

(). मन की तनबरकिा

(8) .मिुष् की बु

() . मनमे उिसिन वविार

(घ). 'ऊँिाई िक के जाना और खाई मं फेकना' - से आश् है -

()... आरपरक ववकास व आरपरक अभाव

(). आकतमक उतपान व पिन

(1) -िामरक टट से उतपान व पिन

(6) . बौदरधक उत्ान व पिन

(ङ) '्जुवेद मे मन की कौन सी ववशेषिा बिाई गई है ?

()... ।बक और कसपर (6)... और एकग

(8). ग्बक और िंिक (6) . ।बक और गतिहीन

अपहठि गद्ांश :

दे श के ।पम राष््ि राजेद ।साद सादगी और ईमानदारी केलकए शुर से ववि्ाि पेत सविंतिा

आदोकन के

दौरान गाँधीजी ने उनह मीडड्ा ।भारी बना्ात कांगेस की गतिववरध्य की कौन सी खबर ।कालशि

होनी है कौन सी नहीं

इसका तनणार् राजेद बावू को करना होिा पात वह अखवार मे खबर भी खुद ही पहुँिािे पेत एक

बार वह इकाहाबाद के
कौड ।ेस गएत उस सम् कौड ।ेस के संपादक सी॰ वाई. रिंिामखणा पेत उनकी राजेद बानू से गहरी

दोसिी पीत जब

जेरा रस पहँि ि गेट पर बैठे िपरासी ने कहा, 'इस सम् आप उनसे नहीं लमक सकिेत उनके पास

कई बैठे

हुए हैत आपको इिजार करना पडेगात रज बाबू ने अपना काडर उसे दे िे हुए, कहा, 'ठीक है , ्ह उने दे

दोत जब वह

खाकी हो जाएँ िो सने बुका केगेत िपरासी ने काडर रिंिामखणा की मेज पर रख हद्ा | उस सम्

ठं ड ज्ादा पी और

ह्की बँूद बाँदी भी हो रही पीत राजेद बाबू भीग ग पेत का्ारक् के बाहर कुछ मजदरू अंगीढी

जकाकर आग िाप रहे

पेतराजेदर बाजू भी वहीं बैठ गएत काफर दे र वाद रिंिामखणा की नजर उस काडर पर पडी वह नंगे

पाँव दि हुए बाहर आए

और उनहयने िपरासी से पूछा, '्ह काडर दे ने वाके सजजन कहाँ है !' िपरासी ने कहा, 'वहाँ बैठ कर

आग िाप रह हं त मने

हे रक लक्ा पात रिंिामखणा को दे खकर राजे बाबू भी आ गएत दोनय गके लमकेत रिंिामखणा ने कहा,

'आज इसकी

गकिी से आपको बहुि िककी हुईत' ोफर वह िपरासी को डटे हुए बोके, िुमने राजर बावू को रोका

कक्य ? राजेद

बाबू का नाम सुनि ही िपरासी काँपने कगा और माफी माँगिे हुए बोका, मैने आपको पहनाना नहीं

साहबत मुझे कर

दे ' शेर बावू बोके, 'िुमने कोई गकिी की ही नहीँ िो मार को माँगिे होत िुमने अपनी ड्ूटी

ईमानदारी से तनभाई

है और आग भी इसी िरह तनभािे रहना त

उप्रककि गद्ांश को पढकर सही ववक्प िनकर लकखखए -

(क) _राद ब्ू की ोकन दो ववशेषिाओं का उ्केख कहानी मे ोक्ा ग्ा है ?

(9... सादगी व सचिाई

().. सचिाई व ईमानदारी

().. ईमानदारी व सादगी

(8) सादगी व किरव्तनष्ठ


(व). 'कीडर गेस" के िपरासी ने राजेद बाबू को अंदर नही जाने हद्ा कक्योक -

(9... संपादक रे स मे नहीं पे

(1). लमकने का सम् खतम हो ग्ा पात

(1) :संपादक ने मना ोक्ा पात

(ग) .िपासी दवारा रोकने पर राजर पर कक्ा ।भाव पडडा -

(}.. वे िप
ु िाप वापस कौटगए,
(₪). िपरासी की किरव्तनष्ठ से ।भाववि हुए

(#). रे स मे दाखखक हो गए

(8). िपरासी के व्वहर से कोरधि हो गए

(प). ठं ड मे भीग जाने पर राजेद बावरा मजदरू के साप आग िापना बिािा है -

(9... ्े बाबू की कष्ट सहहष्णाुिा () -_ गेर बाबू का कोध

(19 .्े बाबू की सादगी (8) ्ेर ब्ूका ब ड्णान

(ङ). गद्ांश का उपुककि शीषरक है -

()... दारी (1)... सम् िक

().. ईमानदारी का पाठ (6) . सतव की जीि