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फ लत यो तष

फ लत यो तष उस व ा को कहते ह जसम मनु य


तथा पृ वी पर, ह और तार के शुभ तथा अशुभ
भाव का अ ययन कया जाता है। यो तष श द का
यौ गक अथ ह तथा न से संबंध रखनेवाली व ा
है। इस श द से य प ग णत ( स ांत) यो तष का भी
बोध होता है, तथा प साधारण लोग यो तष व ा से
फ लत व ा का अथ ही लेते ह।

ह तथा तार के रंग भ - भ कार के दखलाई


पड़ते ह, अतएव उनसे नकलनेवाली करण के भी भ
भ भाव ह। इ ह करण के भाव का भारत,
बैबीलो नया, ख डया, यूनान, म तथा चीन आ द
दे श के व ान ने ाचीन काल से अ ययन करके ह
तथा तार का वभाव ात कया। पृ वी सौर मंडल का
एक ह है। अतएव इसपर तथा इसके नवा सय पर
मु यतया सूय तथा सौर मंडल के ह और चं मा का ही
वशेष भाव पड़ता है। पृ वी वशेष क ा म चलती है
जसे ां तवृ कहते ह। पृ वी फ लत यो तष उस
व ा को कहते ह जसम मनु य तथा पृ वी पर, ह
और तार के शुभ तथा अशुभ भाव का अ ययन कया
जाता है। यो तष श द का यौ गक अथ ह तथा न
से संबंध रखनेवाली व ा है। इस श द से य प ग णत
( स ांत) यो तष का नवा सय को सूय इसी म चलता
दखलाई पड़ता है। इस क ा के इद गद कुछ
तारामंडल ह, ज ह रा शयाँ कहते ह। इनक सं या है।
मेष रा श का ारंभ वषुवत् तथा ां तवृ के संपात ब
से होता है। अयन क ग त के कारण यह ब थर नह
है। पा ा य यो तष म वषुवत् तथा ा तवृ के
वतमान संपात को आरंभ ब मानकर, 30-30 अंश क
12 रा शय क क पना क जाती है। भारतीय यो तष
म सूय स ांत आ द ंथ से आनेवाले संपात ब ही
मेष आ द क गणना क जाती है। इस कार पा ा य
गणना णाली तथा भारतीय गणना णाली म लगभग
23 अंश का अंतर पड़ जाता है। भारतीय णाली
नरयण णाली है। फ लत के व ान का मत है क
इससे फ लत म अंतर नह पड़ता, य क इस व ा के
लये व भ दे श के व ान ने ह तथा तार के
भाव का अ ययन अपनी अपनी गणना णाली से
कया है। भारत म 12 रा शय के 27 वभाग कए गए
ह, ज ह न कहते ह। ये ह अ नी, भरणी आ द।
फल के वचार के लये चं मा के न का वशेष
उपयोग कया जाता है।
प रचय

हत च त त ल प (Hand-colored).

यो तषशा या ए ोलॉजी ( ीक भाषा ἄστρον


के श द ए ोन, या न "तारा समूह" -λογία और -
लॉ जया (-logia), या न "अ धयन" से लया गया है).
यह णा लय , था (tradition) और मत
(belief) का वो समूह है जसके ज़ रये आकाशीय पडो
(celestial bodies) क तुलना मक थ त और अ य
स बं धत ववरण के आधार पर व, मनु य क
ज़ दगी से जुड़े मामल और अ य सांसा रक वषय को
समझकर, उनक ा या क जाती है और इस स दभ
म सूचनाएं संग ठत क जाती ह। यो तष जाननेवाले
को यो तषी (astrologer) या एक भ व यव ा कहा
जाता है।'तीसरी सह ा द ई.पू. (3rd millennium
BC).[1][2] म इसके ाचीनतम अ भ ल खत लेख से
अब तक, यो तष के स ांत के आधार पर कई
था और अनु योग के न पादन आ है। सं कृ त,
शु आती खगोल व ान और अ य व ा को आकार
दे ने म इसने मह वपूण भू मका नभाई है।

आधु नक युग (modern era) से पहले यो तष और


खगोल व ान (Astrology and astronomy)
अ सर अ वभे माने जाते थे। भ व य के बारे म
जानना और दै वीय ान क ा त, खगोलीय अवलोकन
के ाथ मक ेरक म से एक ह। पुनजागरण से लेकर
१८ व सद के अंत के बाद से खगोल व ान का धीरे
धीरे व छे द होना शु आ। फलतः, खगोल व ान ने
खगोलीय व तु के वै ा नक अ ययन और एक ऐसे
स ांत के प म अपनी एक पहचान बनाई जसका
उसक यो तषीय समझ से कुछ लेना दे ना नह था।

यो तष का व ास है क खगोलीय पड क चाल
और उनक थ त या तो पृ वी को सीधे तरीके से
भा वत करती है या फर कसी कार से मानवीय
पैमाने पर या मानव ारा अनुभव क जाने वाली
घटना से स ब होती है।[3] आधु नक यो त षय
ारा यो तष को एक तीका मक भाषा (symbolic
language)[4][5][6], एक कला के प म या
भ व यकथन (divination),[7][8] के प म प रभा षत
कया गया है, जब क ब त से वै ा नक ने इसे एक छ
व ान (pseudoscience) या अंध व ास
(superstition) का नाम दया है।[9][10] प रभाषा
म अ तर के बावजूद, यो तष व ा क एक सामा य
धारणा यह है क खगोलीय प ड अपने म थान से
भूत और वतमान क घटना और भ व वाणी
(prediction) को समझने म मदद कर सकते ह। एक
मतदान म, ३१% अ म र कय ने यो तष पर अपना
व ास कट कया और एक अ य अ ययन के अनुसार,
३९% ने उसे वै ा नक माना है।[11][12][13][14]

वै ा नक आधार
यो तष के आधार पर शुभाशुभ फल हन क
थ त वशेष से बतलाया जाता है। इसके लये हम सू
से ग णत ारा ह तथा तार क थ त ात करनी
पड़ती है, अथवा पंचांग , या ना वक पंचाग , से उसे ात
कया जाता है। ह तथा न क थत त ण
प रवतनशील है, अतएव त ण म होनेवाली घटना
पर ह तथा न का भाव भी व भ कार का
पड़ता है। वा त वक ह थ त ात करने के लए
ग णत यो तष ही हमारा सहायक है। यह फ लत
यो तष के लये वै ा नक आधार बन जाता है।

कुंडली
कुंडली वह च है, जसके ारा कसी इ काल म
रा शच क थ त का ान होता है। रा शच
ां तच से संब है, जसक थ त अ ांश क
भ ता के कारण व भ दे श म एक सी नह है।
अतएव रा शच क थ त जानने के लये थानीय
समय तथा अपने थान म होनेवाले रा शय के उदय क
थ त ( वोदय) का ान आव यक है। हमारी घ ड़याँ
कसी एक न त या यो र के म यम सूय के समय को
बतलाती है। इससे सार णय क , जो पंचाग म द रहती
ह, सहायता से हम थानीय प काल ात करना होता
है। थानीय प काल को इ काल कहते ह। इ काल म
जो रा श पूव तज म होती है उसे ल न कहते ह।
ता का लक प सूय के ान से एवं थानीय रा शय के
उदयकाल के ान से ल न जाना जाता है। इस कार
रा शच क थ त ात हो जाती है। भारतीय णाली
म ल न भी नरयण लया जाता है। पा ा य णाली म
ल न सायन लया जाता है। इसके अ त र वे लोग
रा शच शरो ब (दशम ल न) को भी ात करते ह।
भारतीय णाली म ल न जस रा श म होता है उसे ऊपर
क ओर लखकर शेष रा शय को वामावत से लख दे ते
ह। ल न को थम भाव तथा उसके बाद क रा श को
सरे भाव इ या द के प म क पत करते ह1 भाव क
सं या उनक कुंडली म थ त से ात होती है। रा शय
का अंक ारा तथा ह को उनके आ र से
कर दे ते ह। इस कर का रा शच कुंडली कहलाता है।
भारतीय प त म जो सात ह माने जाते ह, वे ह सूय,
चं , मंगल आ द। इसके अ त र दो तमो ह भी ह,
ज ह रा तथा केतु कहते ह। रा को सदा ां तवृ
तथा चं क ा के आरोहपात पर तथा केतु का
अवरोहपात पर थत मानते ह। ये जस भाव, या जस
भाव के वामी, के साथ थत ह उनके अनुसार इनका
फल बदल जाता है। वभावत: तमो ह होने के कारण
इनका फल अशुभ होता है। पा ा य णाली म (1) मेष,
(2) वृष, (3) मथुन, (4) कक, (5) सह, (6) क या,
(7) तुला, (8) वृ क, (9) धनु, (10) मकर, (11) कुंभ
तथा (12) मीन रा शय के लये मश: न न ल खत
च ह :

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11. 12
(1) बुध, (2) शु , (3) पृ वी, (4) मंगल, (5) गु , (6)
श न, (7) वा णी, (8) व ण, तथा (9) यम ह के लये
मश: न न ल खत च  :

123456789

तथा सूय के लये और चं मा के लये यु होते ह।

भाव क थ त अंक से क जाती है। प ल न


को पूव ब (वृ को आधा करनेवाली रेखा के बाएँ छोर
पर) लखकर, वहाँ से वृ चतुथाश के तु य तीन भाग
करके भाव को लखते ह। ह जन रा शय म हो उन
रा शय म लख दे ते ह। इस कार कुंडली बन जाती है,
जसे अं ेजी म हॉरो कोप (horoscope) कहते ह।
यूरोप म, भारतीय सात ह के अ त र , वा णी, व ण
तथा यम के भाव का भी अ ययन करते ह।
फल का ान
इस लेख को व कफ़ाइ करने क आव यकता हो सकती है ता क
यह व कपी डया के गुणव ा मानक पर खरा उतर Learn
सके। more

इस लेख क न प ता ववा दत है।


कृपया इसके वाता पृ पर चचा दे ख।

फल के ान के लये रा शय के वभाव का अ ययन


करना पड़ता है। कुंडली के व भ भाव से हमारे जीवन
से संबंध रखनेवाली व भ बात का पता चलता है,
जैसे थम भाव से शरीर संबंधी, सरे भाव से धन
संबंधी आ द।[कृपया उ रण जोड़] जस भाव म जो रा श हो
उसका वामी उस भाव का वामी होता
है।[कृपया उ रण जोड़] एक ह रा श पर व भ कार
से करण फकता है।[कृपया उ रण जोड़] अतएव कुंडली म
हक भी पूरी या कम मानी जाती है। ह जस
ह थान पर अ य धक भाव रखता है उसे उ च तथा
उससे सातव भाव को उसका नीच कहते ह। सूय के
सा य से ह हम कभी कभी दखाई नह पड़ते; तब वे
अ त ए कहलाते ह। इसी कार व भ थ तय म
ह के भाव के अनुसार उ ह बाल, युवा तथा वृ
कहते है। ह के अ य ह वभाव क स शता अथवा
वरोध के कारण म अथवा श ु होते
ह।[कृपया उ रण जोड़] अतएव फ लत के लये ह के
बलाबल को जाना जाता है। जो ह युवा, अपने थान
अथवा उ च म थत हो तथा अपने म से युत अथवा
हो, उसका भाव ब त होता है।[कृपया उ रण जोड़]इसी

कार वह भाव जो अपने वामी से युत अथवा हो


और जसम शुभ ह ह , पूण फल दे ता
है।[कृपया उ रण जोड़] इस कार ह के बलाबल, उनक
थ त तथा उनपर अ य ह का भी वचार कया जाता
है। इसके साथ प र थ तय तथा मनु य क दशा का भी
वचार कया जाता है।[कृपया उ रण जोड़] इ ह सब कारण
से फ लत बताना अ त क ठन काय है। जो लोग ग णत
यो तष के ान के बना फल बताते ह, वे ठ क नह
बता सकते।[कृपया उ रण जोड़] चूँ क अ धकांश यो तषी
ऐसे ही पाए जाते ह, इस लये कुछ लोग को इस व ा
क वै ा नकता पर संदेह होने लगा है। हमारे जीवन के
ऊपर सबसे अ धक सूय तथा चं मा का भाव पड़ता
है[कृपया उ रण जोड़], अतएव पा ा य दे श म सूय थत
रा श (सूयकुंडली) तथा चं थत रा श (चं कुंडली) को
वशेष मह व दे ते ह। सूय दय क थर वृ य का
तथा चं मा त ण चल मान सक वृ य का बोधक
है।[कृपया उ रण जोड़] अतएव भारत म चं कुंडली को
मह व दया जाता है। पा ा य दे श म भी अब लोग इसी
वचारधारा को य दे रहे ह। चूँ क सूय अथवा चं एक
रा श म ब त समय तक रहते ह, अत: इनक कुंड लय
से व भ य पर होनेवाले भाव का ठ क
अ ययन नह कया जा सकता। प ल न शी बदलता
रहता है, अतएव ल नकुंडली को क वा त वक
ज मकुंडली माना जाता है। सू म फल के लये होरा,
े काण, नवांश कुंड लय का उपयोग कया जाता है।

हदशा
ह का वशेष फल दे ने का समय तथा अव ध भी
न त है। चं न े का तीत तथा संपूण भो यकाल
ात होने से हदशा ात हो जाती है। ह अपने
शुभाशुभ भाव वशेष प से अपनी दशा म ही डालते
ह। कसी ह क दशा म अ य ह भी अपना भाव
दखलाते ह। इसे उन ह क अंतदशा कहते ह। इसी
कार ह क अंतर, यंतर दशाएँ भी होती है। ह
क पार प रक थ त से एक योग बन जाता है जसका
वशेष फल होता है। वह फल कस समय ा त होगा,
इसका नणय ह क दशा से ही कया जा सकता है।
भारतीय णाली म वशो री महादशा का मु यतया
योग होता है। इसके अनुसार येक मनु य क आयु
120 वष क मानकर ह का भाव बताया जाता है।

शाखाएँ
फ लत यो तष क कई शाखाएँ ह। पा ा य यो तष म
इनक सं या छह है:

(1) य तथा व तु के जीवन संबंधी यो तष


(2) यो तष,
(3) रा तथा व संबंधी यो तष,
(4) वायुमंडल संबंधी यो तष,
(5) आयुवद यो तष तथा
(6) यो तषदशन।
भारतीय यो तष म केवल जातक तथा सं हतास दो
शाखाएँ ही मु य ह। पा ा य यो तष क (1), (2) तथा
(3) शाखा का जातक म तथा शेष तीन का सं हता
यो तष म अंतभाव हो जाता है।

घटक
इस Please state that these are all beliefs or add
reliable citations को व कफ़ाइ करने क आव Learn
यकता more
हो


गृह English Nameraju tripati लmaleग व शोतरी दशा (वष)21 8 1986

सूय Sun पु लंग 6

चं Moon ी लग 10

मंगल Mars पु लंग 7

बुध Mercury नपुंसक 17

बृह प त Jupiter पु लंग 16

शु Venus ी लग 20

शन Saturn पु लंग 19

रा Dragon’s Head पु लंग 18

केतु Dragon’s Tail पु लंग 7


रा एवं केतु वा त वक गृह नह है इ हे छाया ह मना
गया है।

ह क आपसी म ता-श ुता इस कार है।

गृह म श ु सम

सूय चं , मंगल, गु शु , श न बुध

चं सूय, बुध मंगल, गु , शु , श न

मंगल सूय, चं , गु बुध शु , श न

बुध सूय, शु चं मंगल, गु , श न

गु सूय, चं , मंगल बुध, शु शन

शु बुध, श न सूय, चं , मंगल गु

श न बुध, शु सूय, चं मंगल, गु

रा श
रा श English Name वभाव रा श वामी

मेष Aries चर मंगल

वृषभ Taurus थर शु

मथुन Gemini दो वभाव बुध

कक Cancer चर चं

सह Leo थर सूय

क या Virgo दो वभाव बुध

तुला Libra चर शु

वृ क Scorpio थर मंगल

धनु Sagittarius दो वभाव गु

मकर Capricorn चर शन

कु भ Aquarius थर शन

मीन Pisces दो वभाव गु

य द 360° को 12 से वभा जत कया जाए तो एक


राशी 30° क होती है।


# न ताथी न वामी पद 1 पद 2 पद 3 पद 4

1 अ नी 0 - 13°20' मेष केतु चु चे चो ला

2 भ रणी 13°20' - 26°40' मेष शु ली लू ले पो

3 कृ का 26°40' मेष - 10°00' वृषभ सूय अ ई उ ए

4 रो हणी 10°00' - 23°20' वृषभ चं ओ वा वी वु

5 ृगशीरा 23°20' वृषभ - 6°40' मथुन मंगल वे वो का क

6 आ ा 6°40' - 20°00' मथुन रा कु घ ङ छ

7 पुनवसु 20°00' मथुन- 3°20' कक गु के को हा ही

8 पु य 3°20' - 16°20' कक शन हे हो ड

9 आ ेषा 16°40' कक- 0°00' सह बुध डी डू डे डो

10 मघा 0°00' - 13°20' सह केतु मा मी मू मे

11 पूवा फा गुनी 13°20' - 26°40' सह शु नो टा ट टू

12 उ र फा गुनी 26°40' सह- 10°00' क या सूय टे टो पा पी

13 ह त 10°00' - 23°20' क या चं पू ष ण ठ

14 च ा 23°20' क या- 6°40' तुला मंगल पे पो रा री

15 वा त 6°40' - 20°00 तुला रा रे रो ता

16 वशाखा 20°00' तुला- 3°20' वृ क गु ती तू ते तो

17 अनुराधा 3°20' - 16°40' वृ क शन ना नी नू ने

18 ये ा 16°40' वृ क - 0°00' धनु बुध नो या यी यू

19 मूल 0°00' - 13°20' धनु केतु ये यो भा भी

20 पूवाषाढ़ा 13°20' - 26°40' धनु शु भू धा फा ढा

21 उ राषाढ़ा 26°40' धनु- 10°00' मकर सूय भे भो जा जी

22 वण 10°00' - 23°20' मकर चं खी खू खे खो

23 ध न ा 23°20' मकर- 6°40' कु भ मंगल गा गी गु गे

24 शत भषा 6°40' - 20°00' कु भ रा गो सा सी सू

25 पूवाभा पदा 20°00' कु भ - 3°20' मीन गु से सो दा द

26 उ राभा पदा 3°20' - 16°40' मीन शन थ झ ञ

27 रेवती 16°40' - 30°00' मीन बुध दे दो च ची


य द 360° को 27 से वभा जत कया जाए तो एक
न 13°20'(तेरह ड ी बीस मनट) का होता है,
अथात एक राशी मे सवा-दो (2.25) न होते है।

गहरा व ास
ाचीन काल से ही यो तष म गहरा व ास च लत
था, जो क हम टक (Hermetic) मै सम के श द
"जैसा ऊपर, वैसा नीचे" के सार म भी समा हत है।
टाइको ाहे ने यो तष पर अपने अ ययन म एक समान
सारांश दया है: "स पसीएनडो दे पसीयो", ऊपर
दे खकर भी म नचे दे खता ँ".[15] हालां क, यह स ांत
जसके अनुसार वग म घ टत घटना का तबब
पृ वी पर भी अवलो कत होता है, नया भर म ब त सी
यो तष पर परा का ह सा है, प म म ऐ तहा सक
प से यो तष के पीछे काम करने वाली यावली पर
यो त षय के बीच बहस होती आई है। इस पे यह
ववाद भी है क आकाशीय पड या केवल च ह मा
ह या यह घटना क पूवसूचना ह, या फर वे वा तव म
कसी कार क श या फर तं से वा त वक
घटना का संचालन करते ह।

भले ही खगोलीय यां क (celestial mechanics)


और थलीय ग तक (dynamics) के बीच स ब ध
सबसे पहले इसाक यूटन के गु वाकषण
(gravitation) के सावभौ मक स ांत क खोज से
सामने आया, ले कन खगोलीय पड का गु वाकषण
ही उनके यो तष भाव को ज म दे ता है यह बात
कसी वै ा नक अनुसंधान ारा नह कही गई, न ही
कसी यो तष ने इसका समथन कया।
अ धकतर यो तष पर पराएं वा त वक या अनुमा नत
आकाशीय पड क सापे थ त और ग त पर
आधा रत होती ह या फर कसी समय और थान पर
ई घटना म लए गए या गणना म शा मल खगोलीय
व प पर आधा रत होते ह। ये मु यतः ह - यो तष ह
(astrological planets), बौने ह (dwarf
planets), ु ह (asteroids), तार (star), चं
आसं ध (lunar node), अरबी भाग (Arabic parts)
और का प नक ह (hypothetical planets). इस
कार क उ लेखनीय आभासी थ त को
उ णक टबंधीय (tropical) या तारामंडल (sidereal),
एक ओर से बारह च ह (signs) के रा शच
(zodiac) और सरी ओर से थानीय तज
(horizon) (आरोही (ascendant)-अवरोही
(descendant) अ ) और म य-आकाशीय
(midheaven) - इमम कोएली (imum coeli) अ
के ारा प रभा षत कया गया है।

यह उ रवत ( थानीय) ढांचा व श प से बारह


यो तष घर (astrological houses) म वभा जत
कया गया है। इसके अलावा, ये यो तष के व भ
पहलु (astrological aspects) या मतीय/कोणीय
और व भ खगोलीय पड और कोण के बीच स ब ध
था पत करता है।

भव यक वृ त और घटना क भ व यवाणी
करने का यो तष का दावा दो मु य व धय पर
आधा रत है, प मी यो तष म: यो तष संबंधी
पारगमन (astrological transit) और यो तष
स ब धी गमन (astrological
progression). यो तष स ब धी पारगमन म ह क
ग त के आधार पर ा या क जाती है य क अंत र
और कुंडली से होकर गुज़रते समय उनक ग त
मह वपूण होती है। यो तष गमन म ज म कुंडली तय
प तय के अनुसार समय मे आगे क ओर बढती है।
वै दक यो तष म न कष पे प ँचने के लए ह
अव धय पर यान दया गया है जब क पारगमन का
योग समय से जुड़ी मह वपूण घटना म कया जाता
है। अ धकांश प मी यो त षय ने भी घटना का
पूवानुमान लगाना छोड़ दया है, उसके बदले वे सामा य
वृ य और घटना पर यान क त करते ह।
तुलना मक से, वै दक यो तष, वृ य और
घटना दोन क भ व यवाणी करते ह। संशईवा दय
के अनुसार प मी यो त षय का ये तरीका माण
यो य अनुमान लगाने से बचाता है और उ ह मह वपूण से
वे छत और असंबं धत घटना का अ भ ाय अपने
सु वधानुसार बताने का साम य दे ता है।[16]
अतीत म, यो तष अ सर आकाशीय पड के नकट
अवलोकन और उनक चाल पर आ त रहते थे।
आधु नक यो तषी, खगोल वद (astronomer) के
दोवारा दए ए आंकड जो क एक खगोलीय सारणी
एफेमेरीडस (ephemerides) के प म होते ह, जो
खगोलीय पड क समय के साथ बदलती रा श च
थ त को दशाती है।

परंपराएं
इ ह भी दे ख: यो तष परंपरा , कार और
णा लय क सूची (List of astrological
traditions, types, and systems)
रा श च (Zodiac) च , १६ व शता द यूरोप, एक का च

यो त षय क ब त सारी परमपराएँ ह, जनम से कुछ


यो तष स ांत और सं कृ तय के सारण के कारण
एक सी वशेषता वाली होती ह अ य सरी परंपरा
का वकास वलगन म आ और उनके यो तष स ांत
अलग ह, हालां क उनम भी एक ही खगोलीय ोत से
लए जाने के कारण कुछ सामा य वशेषताएं होती ह।

वतमान परंपराएँ
आधु नक यो त षय ारा जन मु य पर परा का
इ तेमाल कया जाता है, वो ह:

वै दक यो तष (Vedic astrology)
प मी यो तष (Western astrology)
चीनी यो तष (Chinese astrology)

वै दक और प मी यो तष समान वंश के ह जैसे क


यो तष क कु डल णाली (horoscopic
systems), दोन पर परा म यान एक यो तष
सारणी या कुंडली (horoscope) के नमाण, खगोलीय
त व के तुतीकरण और कसी घटना क जानकारी
के लए सूय, चं मा और ह क थ त का
ान.हालां क, वै दक यो तष, रा श च के च ह को
मूल न (constellation) से मलाकर न रा श
च (sidereal zodiac) का योग करती है, जब क
प मी यो तष उ णक टबंधीय रा श च (tropical
zodiac) का इ तेमाल करते ह। वशु के पूव नणय
के कारण (precession of the equinoxes),
स दय बाद, प मी यो तष के बारह रा श च ह का
उनके मौ लक न क तरह आकाश के समान भाग
से स ब ध नह रहा. हाव क से, प मी यो तष
म च ह और न के बीच स ब ध टू ट गया है, जब क
वै दक यो तष म अभी भी इसका सव च मह व है।
दोन स यता के बीच अ य मतभेद म शा मल ह- २७
(या २८) न (nakshatra) या चं भवन के योग
जनका उपयोग भारत म वै दक काल से कया जा रहा
है और ह क अव ध क णाली ज ह दशा
(dashas) के नाम से जाना जाता है।

चीनी यो तष म एक पूणतया व भन् परंपरा का


वकास आ है। इस म प मी और भारतीय यो तष से
वपरीत आकाश का वभाजन बारह रा श च के थान
पर आकाशीय भूम य रेखा ारा कया जाता है।
चीनीय ने एक ऐसी णाली वक सत क जसम हर
च ह दन के बारह 'दोहरे घंट ' और साल के बारह
महीनो से स ब माना जाता था। रा श च का येक
च ह अलग अलग साल पर शासन करता है और चीनी
ां डक के पंच त व णाली के साथ जुड़कर ६०
(१२ x ५) वष च दे ता है। यहाँ यह श द, चीनी
यो तष सु वधा के लए योग कया गया है, ले कन
को रया (Korea), जापान, वयतनाम, थाईलड और
अ य ए शयाई दे श म ठ क इसी परंपरा के सं करण
व मान ह।

आधु नक समय म, ये पर पराएं एक सरे के अ धक


संपक म आई ह, यान दे ने वाली बात ये है क भारतीय
और चीनी यो तष प म म चा रत हो रही है, जब क
प मी यो तष क जानकारी अभी भी ए शया म
स मत है। प मी नया म यो तष व ान म
आधु नक समय म काफ़ व वधता आई है। नए
आ दोलन दखाई दए ह जसने अलग अलग कोण
पर यान क त करते ए पारंप रक यो तष को
अ वीकार कर दया है, जैसे क म य ब पर यादा
ज़ोर दे ना, या फर यादा मनोवै ा नक कोण .हाल
ही म ए कुछ प मी वकास:

आधु नक उ णक टबंधीय और न कुंडली यो तष


ा ड जीव व ान (Cosmobiology)
मनोवै ा नक यो तष (Psychological
astrology)
ज म च ह यो तष (Sun sign astrology)
यो तष का है बग कूल (Hamburg School of
Astrology)
व ण यो तष (Uranian astrology), है बग
कूल का उपसमु चय

ऐ तहा सक परंपरा

अपने लंबे इ तहास के दौरान, यो तष व ान ने कई


े म शोहरत ा त क और प रवतन के साथ-साथ
इसम वकास भी आ। ऐसी कई यो तष पर पराएं ह
जनका ऐ तहा सक मह व है, मगर आज वो ब त कम
योग म आते ह। यो त षय क उनम अभी भी च
बरकरार है और वे उसे एक मह वपूण संसाधन के प
म दे खते ह। यो तष के ऐ तहा सक से मह वपूण
परंपरा म शा मल ह:
अरबी और फारसी यो तष (Arab and Persian
astrology) (म यकालीन म य पूव)
बेबीलोन यो तष (Babylonian astrology)
( ाचीन, म यपूव)
म यो तष (Egyptian astrology)
हेले न टक यो तष (Hellenistic astrology)
(शा ीय पुरातनता)
मायां यो तष (Mayan astrology)

प मी, चीनी और भारतीय यो तष के इ तहास


(history of astrology) क चचा इ तहास के मु य
लेख म क गई है।

गु त परंपराएं
१७ व सद क रसायन व ा पाठ से उ रण और तीक.

कई सूफ़ या गु त परंपरा को यो तष से जोड़ा गया


है। कुछ मामल म, जैसे क बाला (Kabbalah) म,
यो तष के अपने पारंप रक त व को तभा गय ारा
इ कठा करके अंतभूत कया जाता है। अ य मामल म,
जैसे क आगम भ व यवाणी म, ब त से यो तषी
यो तष के अपने काम म पर परा को स म लत
करते ह। गु त परंपराएं म न न- ल खत चीज़ शा मल
ह, ले कन गु त परंपराएं इतने तक ही सी मत नह ह:

रसायन व ा (Alchemy)
ह तरेखा-शा (Chiromancy)
गूढ़ यो तष (Kabbalistic astrology)
च क सा यो तष (Medical astrology)
सं या व ान (Numerology)
रो स ु सयन (Rosicrucian) या "रोज ॉस"
टै रो ारा भ व यकथन (Tarot divination)

इ तहास के अनुसार, प मी नया (Western


World) म रसायन व ा वशेषत: समवग था और
यो तष क पारंप रक बा बल-यूनानी शैली से मला
आ था; कई मायन म ये मनोगत (occult) या गु त
ान को खोजने म एक सरे के पूरक थे।[17] यो तष ने
रसायन व ा क चार सं था पत त व (classical
elements) क अवधारणा का ाचीनकाल से लेकर
वतमान समय तक उपयोग कया है। परंपरागत प से,
सौर-मंडल के सात ोह म से येक का अपना भु व
े या अ धरा य है और वो न त धातु पर आ धप य
रखता है।[18]

रा श च

रा श च (Zodiac) ६ वी सद म आराधनालय बीट अ फा,


इज़राइल.

रा श च , न का एक घेरा या समूह है जसके


मा यम से सूय, चं मा और ह आकाश म पारगमन
करते ह। यो त षय ने इन न पर यान दया और
उनको कुछ व श मह व दया. समय के साथ-साथ
उ ह ने बारह न क व श ता को यान म
रखकर उस पर आधा रत बारह रा श च ह (signs)
क एक णाली बना ली. (मेष (Aries), वृषभ
(Taurus), मथुन (Gemini), कक (Cancer), सह
(Leo), क या (Virgo), तुला (Libra), वृ क
(Scorpio), धनु (Sagittarius), मकर
(Capricorn), कुंभ (Aquarius) और मीन
(Pisces)). प मी और वै दक रा श च का
कु ड लनी यो तष क पर परा म एक ही मूल है,
इस लए दोन एक सरे से ब त से मायने म समान ह।
सरी ओर चीन म, रा श च का अलग तरीके से
वकास आ था। हालां क ची नय का भी एक बारह
च ह वाला तं है (जानवर के नाम पर आधा रत),
चीनी रा श च शु पंचांग च का हवाल दे ता है, इसम
प मी और भारतीय रा श च से जुड़ा आ कोई
समक न नह है।

बारह रा श च क सव न बात ये है
क सूय और चं मा क अंतः या को ही
यो तष के सभी प म के माना गया
है।

प मी यो त षय के एक बड़े ह से ने आकाश को ३०
अंश के बारह बराबर खंड म बाटने वाले
उ णक टबंधीय रा श च को अपने काम का आधार
बनाया जसक शु आत मेष के पहले ब से होती है,
जहाँ आकाशीय भूम य रेखा (celestial equator)
और ां तवृ (ecliptic) (आकाश के मा यम से सूय
के पथ), उ री गोला के वलय वषुव (equinox) पर
मलते ह। वशु के पुर सरण के कारण
(precession of the equinoxes), पृ वी का
अंत र म घूणन करने का रा ता धीरे धीरे बदलता है,
इस णाली म रा श च च ह का समान नाम वाले
न (constellation) से कोई संबंध नह है, ब क
वो महीन और ऋतु के संरेखन म (सीध म) रहते ह।

वै दक यो तष क पर परा का पालन करने वाले और


अ प सं या म या न कुछ प मी यो तषी समान न
रा श च उपयोग करते ह। यह रा श च उसी समान
प से वभा जत ां तम डल का योग करता है
ले कन रा श च ह के समान नाम वाले वचाराधीन
न क थ त के लगभग संरेखन म रहता है। न
रा श च उ णक टबंधीय रा श च से अयाना सा
(ayanamsa) कही जाने वाली री से बराबर री से
अलग है, जो क वशु के झुकाव के साथ-साथ आगे
बढ़ता है। इसके अलावा, कुछ न ाता (अथात्
यो तषी जो न तकनीक का योग करते ह)
वा त वक, असमान रा शच के न को अपने काम
म इ तेमाल करते ह।

कु ड लनी यो तष
यो तष घर और ह एवं च ह के लए बनाऐ गये
श प के नमूने को द शत करने वाली

१८ व सद आइसलड क पांडु ल प.
कुंडली यो तष (Horoscopic astrology) णाली,
भूम य (Mediterranean) े और वशेष प से
हेले न टक म (Hellenistic Egypt) के आस-पास
के े म सरी या पहली शता द के शु आती दौर म
वक सत ई.[19] ये पर परा समय के व श ण पर
वग या कुंडली के - आयामी आरेख से स ब है।
यह च वशेष नयम और दशा नदश के आधार पर
खगोलीय पड के संरेखण म छपे अथ को समझने के
लए योग म लाये जाते ह। एक कुंडली क गणना
सामा यतः एक वशेष के ज म के समय या फर
कसी उ म या घटना के शु आत म क जाती है, यूं क
उस समय के आकाशीय सरेखण को उन वषय क
कृ त का नधारक माना जाता है जनके बारे म हम
जानना चाहते ह। यो तष के इस प का एक व श
ल ण जो इसे सर से अलग करता है वो है - परी ा के
वश ण, जसे अ यथा पधान के प म भी जाना
जाता है। पर ां तवृ (ecliptic) क पृ भू म के
सामने, पूव तज क बढ़ने वाली ड ी क
गणना.कुंडली का यो तष नया भर म फैले यो तष
का सवा धक भावशाली प है, ख़ास तौर पर
अ का, भारत, यूरोप और म य पूव म और भारतीय
(Indian), म य कालीन और आधु नक प म यो तष
स हत कुंडली यो तष क कई मु य थाएँ,
हेले न टक पर परा से उ प ईह

कुंडली

च :Horoscope-handdrawn.jpgएक ह त-
ल खत

ज मकुंडली (horoscope).
कु ड लनी यो तष का के और उसक शाखाएं,
कुंडली या यो तष के लेखा च क गणना है। यह -
आयामी रेखा च तु त, दए गए समय और थान पर,
पृ वी पर थ त के सहारे, वग म आकाशीय पड क
आभासी थ त को दशाता है। कुंडली भी बारह व भ
खगोलीय गृह (houses) म वभा जत ह जो जीवन के
वभ े का नधारण करते ह। कुंडली म जो गणना
होती है उसम ग णत और सरल रेखाग णत शा मल होती
है जो क वग य नकाय क प थ त और समय
का खगोलीय सारणी पर आधा रत होती है। ाचीन
हेले न टक यो तष म आरोह कुंडली के पहले
आकाशीय गृह को प रल त करता था। यूनानी म
आरोह के लए होरो कोपोस श द का इ तेमाल कया
जाता था जससे होरो कोप श द क उ प
ई.आधु नक समय म, यह श द यो तष लेखा- च को
दशाता है।
कुंडली यो तष क शाखाएं

कुंडली यो तष क पर परा को चार शाखा म


वभा जत कया जा सकता है जो क व श वषय या
उ े य क ओर न द ह। अ सर, ये शाखाएं एक
अनूठे कार क तकनीक का समु चय या फर भ
े के लए णाली के मूल स ांत के व भ योग
का इ तेमाल करती ह। यो तष के कई अ य उप-
समु चय और योग का आर भ चार मौ लक शाखा
से आ है।

नवजात यो तष (Natal astrology), क


ज म-प ी का अ ययन है जसके आधार पर
के बारे म और उसके जीवन के अनुभव के बारे म
जानकारी ा त क जाती है।
कता चक यो तष (Katarchic astrology) म
चुनावी (electional) और घटना यो तष दोन
शा मल ह। इनम से पहले यो तष म यो तष के
ान का उपयोग कसी उ म या उप म को शु
करने के लए शुभ घड़ी का पता लगाने के लए कया
जाता है और बाद वाले का उपयोग कसी घटना के
होने के समय से उस घटना के बारे म सब कुछ
समझने के लए कया जाता है।
तघंटा यो तष (Horary astrology) म
यो तषी कसी का जवाब, उस को पूछे
जाने के ण का अ धयन करके दे ता है।
सांसा रक या व यो तष (Mundane or world
astrology), मौसम, भूकंप और धम या रा य के
उ यन एवं पतन स हत नया म होने वाली व भ
घटना के बारे म जानने के लए यो तष का
अनु योग. इसम यो तष युग (Astrological
Ages), जैसे क कुंभ युग (Age of Aquarius),
मीन युग, इ या द शा मल ह। येक युग क ल बाई
लगभग २,१५० साल होती है और नया म कई लोग
इन महायुग को ऐ तहा सक और वतमान घटना
से स ब मानते ह।21 8 1986

यो तष का इ तहास
े स रचेस हयूरेस ड डक ड बेरी (Très Riches
Heures du Duc de Berry) से
15 व सद म नकाय के े क छ व च शरीर के ह स और
रा शच य संकेत के बीच संबंध को दशाता है।

उप

यो तष के जो स ांत बाद म ए शया, यूरोपऔर म य


पूव म वक सत ए उनका वणन ाचीन बा बल
(Babylonians) म भी है और खगोलीय च ह क
उनक णाली सरी सह ा द ईसा पूव के म य म
संक लत क गई।[20] बाद म खगोलीय च ह क यह
णाली य या अ य प म बा बल से भारत,
म य पूव और म म फैली, जहाँ यह पहले से व मान
यो तष के वदे शी प के साथ मल गई।[21] बा बल
क यो तष म म आर भ म चौथी शाता द के म य
ईसा पूव म आई थी और सरी और पहली शाता द के
शु आत म ऐले जे या क वजय के बाद
(Alexandrian conquests), यह बा बल यो तष,
म स यता के द णी यो तष से म त हो गई और
कुंडली यो तष का नमाण कया। (horoscopic
astrology) यो तष के इस नवीन ा प क उ प
ऐले जे या म (Alexandrian Egypt) क मानी
जाती है, ज द ही ये ाचीन नया म यूरोप, म य पूव
और भारत म फैल गई।

आधु नक युग के पहले

खगोल व ान और यो तष के बीच अ तर जगह जगह


पर अलग है, वे ढ़ता से ाचीन भारत[22][23], ाचीन
बा बल और म यकालीन यूरोप (medieval Europe)
से जुड़ी ई है, ले कन हेले न टक नया
(Hellenistic world) से एक हद तक अलग है।
यो तष और खगोल व ान (astrology and
astronomy) के बीच पहला श दा थक (semantic)
अ तर ११ व सद म फारसी खगोल (Persian
astronomer) अबू- रेहान-अल- ब नी (Abū
Rayhān al-Bīrūnī)[24] ारा दया गया था। ( यो तष
और खगोल व ान (astrology and astronomy)
दे ख).

यो तष उ म से ा त कये गए खगोलीय ान का
व प इ तहास म ाचीन भारत से लेकर माया स यता
से म यकालीन यूरोप तक कई सं कृ तय म दोहराया
गया है, . इस ऐ तहा सक योगदान को दे खते ए,
यो तष को रसायन व ा (alchemy) क तरह छ
व ान (pseudoscience) के साथ-साथ ोटो साइंस
(protoscience) कहा जाने लगा (प मी यो तष
तथा रसायन व ा नीचे से दे ख).
आधु नक युग से पहले कभी यो तष को बना
आलोचना के वीकार नह कय गया; हेले न टक
संशयी लोग , ग रजाघर अ धका रय और म यकालीन
मु लम खगोलशा य (Muslim astronomers)
जैसे क अल-फराबी (Al-Farabi), (अलफरे बउस),
इ न-अल- हेथम (Ibn al-Haytham), (आ हाज),
अबू-रेहान-अल- ब नी (Abū Rayhān al-Bīrūnī),
ऐ वसेना (Avicenna) और ऐ वरोज़ ने इसे काफ
चुनौ तयां द . यो तष को झूठा ठहराए जाने के
वै ा नक ( यो तष शा य ारा योग कए जाने वाले
तरीके अनुमान पर आधा रत (conjectural) थे न क
योग (empirical) पर) और धा मक ( ढवाद
इ लामी व वान (Islamic scholars) से ववाद)
दोन ही कारण थे।[25] इ न क़ यम-अल ज ज या
(Ibn Qayyim Al-Jawziyya) ने (१२९२-१३५०)
अपने म थ डार अल-सा केदाह म यो तष और
भ व यवाणी (divination) का खंडन करने के लए
योगा त तक का इ तेमाल कया है।[26]

कई मुख वचारक , दाश नक और वै ा नक , जैसे क


पाइथागोरस, लेटो, अर तू (Aristotle), गैलेन
(Galen), पारासेलसस (Paracelsus), गरोलामो
काडन (Girolamo Cardan), नकोलस कोप नकस
(Nicholas Copernicus), ताक अल- द न (Taqi
al-Din), ताईको ाहे, गैली लयो गैलीली, जोहा नस
के लेर, काल जंग (Carl Jung) और सर ने या तो
यो तष के स ांत का योग कया या यो तष म
उ लेखनीय योगदान दया.[2][27]

आधु नक कोण
आधु नक समय म यो तष वहार म कई नवरचनाएं
ई ह।
प मी यो तष

२० व शता द के म य के दौरान, अ ेड व े
(Alfred Witte) और उनके बाद रहो ड इबरट न
(Reinhold Ebertin) ने के ब के कुंडली
इ तेमाल के (midpoints in Astrology)
व ेषण म अ गामी रहे. ( यो तष म क ब )
१९३० के दशक से १९८० के दशक तक डेन यार
(Dane Rudhyar), लज़ ीन (Liz Greene) और
ट फेन अरोयो (Stephen Arroyo) स हत कई
यो तष शा य ने मनोवै ा नक व ेषण
(astrology for psychological analysis) के
लए यो तष का योग कया, जनम से कुछ काल
ज़ंग (Carl Jung) जैसे महान मनोवै ा नक भी थे।
१९३० के दशक म डॉन नेरोमन (Don Neroman),
"ए ो जयो ाफ " के नाम से एक थानीय यो तष
शा (Locational Astrology) को वक सत
करके इसे यूरोप म लोक य भी बनाया. १९७० के
दशक म अमे रका के यो तषी जम ले वस ने (Jim
Lewis)आ ोकाट ाफ नाम क
(Astrocartography). एक लोक य और अलग
कोण वक सत क . दोन ही तरीक से थान म
प रवतन के साथ जीवन क थ तय म आने वाले
बदलाओ को जाना जाता है।

वै दक यो तष

१९६० के दशक म,एच.आर.शेषा (H.R.


Seshadri Iyer) अ यर ने योग ब को जोड़कर
एक णाली शु क जो क प म म लोक य ई.
१९९० के दशक के शु आती दौर से, भारतीय वै दक
यो तष शा ी और लेखक वी. के. चौधरी (V.K.
Choudhry) ने ज मप ी पढने के लए
(Systems' Approach for Interpreting
Horoscopes) णाली कोण (भ व य बताने
वाला यो तष) यो तष, क एक सरल णाली क
रचना क .[28] यह णाली यो तष, यो तष जानने
क को शश कर रहे ह लोग क मदद करती है, इसे
"एस ए" भी कहते ह।
वग य के. एस. कृ णामू त (K. S.
Krishnamurti) ने वचाराधीन ह क दशा
(dasha) के अनुपात को तार (stars) से उप-
वभा जत करके तार के व ेषण पर आधा रत
कृ णामू त प त का वकास कया, यह णाली "के
पी" और "उप स ांत" के नाम से जानी जाती है।

नया क सं कृ त पर भाव
यो तष व ान का प मी तथा पूव सं कृ तय पर
गहरा भाव पड़ा है। म य कालीन युग म, जब श त
लोग यो तष म व ास करते थे, व गक पड को ान
क णाली और उनके नीचे थत संसार का परावतन
करने वाली णाली के प म माना जाता था।

यो तष ने व ान भाषा और सा ह य दोन को भा वत
कया है। उदाहरण के लए, इ लुए ज़ा या जुकाम
(influenza) श द म यकालीन लै टन श द
इ लुए शय से लया गया, इसका नाम ऐसा इस लए
पड़ा य क च क सक का मानना था क महामारी
तकूल ह और तारक य भाव क वजह से फैलती
है।[29] श द आपदा, " डसा टर" इटा लयन श द
डसै ो से लया गया है जो क एक "नाकारा मक
उपसग"[30] डस और लै टन श द ऐ टर " तारा" से
ु प है, जसका मतलब है बुरे तारे या " -न ".
वशेषण, " यूने टक" ( यूना/च मा), "मेकयु रअल"
(मकारी), "मैथु नक", (शु ) साम रक, (मंगल
(Mars)), "आन दत" (बृह प त/ जोव) और "सीसक"
(श न) पुराने श द ह जनका योग उन गत गुण
को बताने के लए कया जाता था जो ह के यो तष
ल ण से सबसे यादा मलते थे या भा वत होते थे,
इनमे से कुछ गुण ाचीन रोमन दे वता के गुण से
ु प ह और उनका नाम भी उसी आधार पर रखा
गया है। सा ह य म, कई लेखक वशेषकर जओ े
चौसर (Geoffrey Chaucer)[31][32][33] और
व लयम शे स पयर,[34][35] ने अपने पा का वणन
करने के लए यो तष के चन का योग कया और
इस तरीके से उस ववरण म बारीक पैदा क . हाल ही
म, मचेल वाड ने कहा था क ो नका स ऑफ़
नार नया (Chronicles of Narnia) के रच यता
सी.एस.लुईस (C.S. Lewis) ने अपनी रचना को सात
वग के पा और च ह से सराबोर कया। अ सर,
यो तष तीक को समझने वाले सा ह य क सराहना
करने क आव यकता है।

कुछ आधु नक वचारक वशेषकर, काल जंग[36] का


व ास था क यो तष म दमाग को पढने और भ व य
बताने क ताकत है श ा के े म यो तष म य
कालीन यूरोप (medieval Europe) क व
व ालयी श ा (university education) म
त ब बत होता है, जसे सात पृथक े म वभा जत
कया गया था, जनमे से येक एक ह ारा तुत
कया जाता था और उसे सात वतं कला (liberal
arts) के प म जाना जाता था। दांते अली घरी ने
वचार कया क ये कलाएं जो आज उस व ान म बदल
चुक ह, जसे हम भली भा त जानते ह, उसी ढाँचे म
फट बैठती ह जसम ह को फट कया जाता है।
संगीत म यो तष शा का सबसे स उदाहरण है,
टश संगीतकार गु तव हो ट (Gustav Holst) ारा
बनाया गया ऑक ा सूट, "द लैनेट्स (The
Planets)", जसका ढांचा ह के यो तष च ह पर
आधा रत है।

यो तष और व ान
ां सस बेकन (Francis Bacon) और वैजा नक
ा त के समय से शु ई वै ा नक श ण क नई
शाखाएं, ायो गक अवलोकन पर आधा रत
णालीब ायो गक ेरणा के तरीक पर आधा रत
होने लगी.[37] इस ब पर, यो तष शा और
खगोल म त अलग-अलग हो गए, खगोल म त एक
के य या मु य व ान के प म उभरा जब क
यो तष शा कृ त वै ा नक ारा एक अंध व ास
या एक गु त व ान के प म दे खा गया। यह अलगाव
अठारहवी और उ ीसव सद के दौरान और तेज़ हो
गया।[38]साँचा:Infobox Pseudoscience

समकालीन वै ा नक जैसे क रचड डौ कस


(Richard Dawkins) और ट फेन हाउ कस
(Stephen Hawking) ने यो तष शा को
अवै ा नक कहा[39][40] और पै स फक खगोल म त
समाज (Astronomical Society of the Pacific)
के ऐन यू ाकनोई (Andrew Fraknoi) ने इसे छ
व ान कहा.[41] १९७५ म, अमरीक मानववाद संगठन
(American Humanist Association) ने यो तष
शा म व ास करने वाल के स दभ म कहा क वो
लोग यो तष म व ास करते ह जब क उनके व ास
का कोई मा णत वै ा नक आधार नह है ब क उसके
ख़लाफ़ कई माण ह।[10] यो त वद काल सेगन ने
पाया क वो इस व पर हता र नह कर सकते,
इस लए नह क वो ये सोचते है क यो तष मा य है
ब क इस लए यूं क उ ह लगता है क इस व का
लहजा स ावाद (authoritarian) है।[42][43] सेगन ने
कहा क वो एक ऐसे व पर ह ता र करने के
इ छु क होते और यो तष के व ास के मु य सधा त
को नकारते, जो इस व से यादा व ासो पादक
और इस से कम ववाद पैदा करने वाला होता.[44]

भले ही एक समय म यो तष शा का बड़ा ही स मत


थान रहा हो, ले कन २० वी शता द क शु आत से ही
ये यो तष शा य के बीच अनुसंधान का वषय रहा
है। २० वी शता द म नवजात यो तष अनुसंधान के
ऐ तहा सक अ धयन म, यो तष आलोचक जैफरे डीन
और सह लेखक ने एक मुकु लत अनुसंधान काय का
उ पादन कया, जो क ाथ मक प से यो तष
शा दय के समुदाए म ही रहा.[45]
अनुसंधान

मंगल भाव (Mars effect): स खला ड के ज म सा रणी म


मंगल क दै नक थ त (diurnal position) म प रवतन से आने
वाली आपे क आवृ .

अ धयन यो तष अनुमान और कायकारी तरीके से


नकाले गए (operationally-defined) प रणामो के
बीच सां यक य मह व (statistically significant)
से स ब ध था पत करने म बार बार असफल रहे ह।[9]
यो तष म भाव आकार (Effect size) के अ धयन
इस न कष पर प ँचते ह क यो तष अनुमान क
औसत सट कता संयोग से होने वाली चीज़ से यादा
नह है और यो तष का क थत द शन
आलोचना मक न र ण के समय पूरी तरह गायब हो
जाता है।[46]सं ाना मक (cognitive) वहार
(behavioral), शारी रक और अ य प रवतनशील
घटक क जांच के लए अ धयन करते समय, "टाइम
ट् व स (time twins)" के एक यो तष अ धयन ने ये
द शत कया क मानव ल ण ज म के समय सूय, चं
और ह से भा वत नह होती.[46][47] यो तष पर
संशय करने वाल का ये भी कहना है क यो तष
ा या और कसी के व के ववरण क
क थत (fact) सट कता इस वजह से है यूं क लोग
सकारा मक ' ब या हट् स' को बढ़ा-चढा कर लेते
ह और जो कुछ भी पसंद नह आता या फट नह होता
उसे नज़र अंदाज़ कर दे ते ह वशेषकर तब जब ववरण
के लए अ प भाषा का योग कया गया ह (vague
language is used).[46] वे यह भी तक दे ते ह क
अ नयं त श पकृ तय के कारण यो तष के सा य
को अ सर गलत प म दे खा जाता है।[48] "ए ो -
ट् व स" के १५, ००० नमून का एक बड़े पैमाने पर
अ ययन, २००६ म का शत आ था। इसने ज म क
तारीख और सामा य बु और व के गत
अ तर के बीच स ब ध क जांच क और इस न कष
पर प ँचा क दरअसल इनके बीच कोई स ब ध है ही
नह .[49] यह भी पाया गया है क रा श च और
तभा गय के गत गुण के बीच कोई र ता नह
होता है।[49]

ांसीसी मनोवै ा नक और सां यक वद माइकल


गौकुए लन (Michel Gauquelin) ने दावा कया क
उ ह ने कुछ ह क थ त और कुछ मानवीय गुण जैसे
वृ त या पेशे के बीच स ब ध पाया है।[50] गौकुए लन के
सबसे ापक प से ात दावे को मंगल भाव
(Mars effect) के प म जाना जाता है, जो क मंगल
ह से स ब ध द शत करते ए ये दखाता है क आम
आदमी क तुलना म कसी स खलाडी के ज म के
समय मंगल ह ायः आकाश म कुछ व श थ तय
म होता है यही दावा रचड तनस (Richard Tarnas)
ने अपनी कृ त ांड और मान सकता म भी कया है
इसमे उ ह ने ह क थ त और ऐ तहा सक से
मह वपूण घटना और लोग के बीच संबंध क खोज
क है १९५५ म इसके मूल काशन से, मंगल भाव, इसे
खा रज करने वाले कई आलोचना मक अ यन और
संशयी (skeptical) काशन का वषय रहा
है,[51][52][53] और साथ ही मंगल भाव के मूल दाव
का समथन करने वाले या उसे व तृत करने वाले कई
अ धयन भी सीमा त प (fringe journals) म
का शत ए ह।[54][55] गौकुए लन क खोज पर
व ान क मु यधारा ने वशेष यान नह दया.

च :Cellarius ptolemaic system.jpgद


टोलेमैक णाली (Ptolemaic system), ऐ आस सेले रअस
(Andreas Cellarius), १६६०/६१ ारा व णत.

अनुसंधान म बाधाएं

यो तषशा य का तक है क आज यो तष शा म
वै ा नक अनुसंधान करने म कुछ मह वपूण बाधाएं
ह,[56][57] जसम शा मल है - धन क कमी, यो तष
शा य ारा व ान और सां यक म पृ भू म क
कमी,[58] और संशय करने वाल एवं वै ा नक का
यो तष शा म पया त प से द ना होना[56][57][59]
यो तष शा म वै ा नक अनुस धान (scientific
research) के े म का शत प क सं या ब त
कम है (यानी वै ा नक अनुसंधान क तरफ़ न द
यो तष प या यो तष अनुसंधान का काशन करने
वाले वै ा नक प (scientific journal) दोन ही कम
सं या म ह) कुछ यो तष शा य का मानना है क
आज यो तष का काम करने वाले कुछ लोग वै ा नक
जांच का योग इस लए करते ह यूं क उ ह लगता है
क दै नक प से ाहक के साथ काम करने से उनका
गत स यापन (personal validation)
होगा.[57][60]

यो तष शा य ारा दया गया एक और तक है क


यो तष के यादातर अ ययन म यो तष अ यास क
कृ त त ब बत नह होती और वै ा नक प त
(scientific method) यो तष पर लागू नह
होती.[61][62] यो तष पर वचार रखने वाले कुछ लोग
का तक है क यो तष के वरो धय के इरादे और
मौजूदा नज रए के चलते यो तष क सट कता मालूम
करने के लए होने वाले ोयोग म, चेतन या अचेतन
प से, जाँची जाने वाली प रक पना के नमाण, जांच
के संचालन और प रणाम क सूचना प पात पूण ढं ग से
द जाती ह .[2][9][10][59][63]

ारं भक व ान, वशेषकर या म त और खगोल म त / यो तष,


म य कालीन व ान (medieval scholars) क सोच के अनुसार
दै वीय श से जुड़े ए थे। १३ वी शता द क पांडु ल प म, द
ु ु
क पास, ई र क कृ त (creation) का एक तीक है, जैसा क कई
लोग का मानना था - एक वृ (circle) म कुछ ऐसा होता था जो
ब कुल ही दै वीय या स पूण था

तं

यो तषी यो तष के भौ तक तं को तुत करने म


लगातार वफल रहे ह,[64][65] और कुछ आधु नक
यो तषी मानते ह क वग य नकाय और सांसा रक
घटना म कारण और प रणाम का एक सीधा र ता
ह।[57]ए ोना मकल सोसाइट ऑफ़ द पै स फक
(Astronomical Society of the Pacific) ारा
का शत एक स पादक य म ये लखा गया है क ऐसा
कोई भी माण नह है जस से क ये कहा जा सके क
आकाशीय पड का थलीय मामल को भा वत करने
म कोई योगदान हो सकता है[9] कुछ शोधकता का
मानना है क यो तष के े ण और घटना के बीच
ठ क उसी तरह का अकारण (acausal) और शु प
से सहसमब ता (correlative) का र ता है, जैसे क
काल जंग दए गए समका लक (synchronicity)
स ांत म बताया गया है।[66] सर भ व यवाणी
(divination) म इसका आधार दे खते ह।[67] फर भी
कुछ का ये तक है क योग पर आधा रत सहस ब ध
वयं अप न ऐ प टे मोलाजी (epistemologically) के
बल पर खड़े हो सकते ह और उ ह कसी भी स ांत या
तं के सहारे क ज रत नह है।[59] कुछ पयवे क के
लए, ये गैर-यं वाद अवधारणाएं इस बात क
वहा रकता पर च ह लगाती ह क यो तष को
वै ा नक मा यता द जाए और कुछ ने तो यो तष म
वै ा नक प त के योग को पुरी तरह अ वीकार कर
दया है।[59] सरी ओर कुछ यो तष, ये मानते ह क
य द पया त प र कृत व ेषणा मक तरीक का उपयोग
कया जाए तो यो तष, वै ा नक प त के अधीन है
और अपने इस कोण का समथन करने के लए वो
इस े म कई पथ दश अ धयन भी करते ह[68]
नतीजतन, कई यो त षय ने सां यक य स यापन पर
आधा रत यो तष का अ धयन जारी रखने क वकालत
क .[69]

इ ह भी दे ख
यो तष णा लयां
यो तष युग (Astrological age)
यो तष के पहलु (Astrological aspects)
यो तष संगठन (Astrological organizations)
यो तष च ह (Astrological sign)
यो तष तीक (Astrological symbols)
दा लयू रेन (Da Liu Ren)
भाव ( यो तष) (House (astrology))
यो त षय क सूची (List of astrologers)
यो तष परंपरा , कार और णा लय क सूची
(List of astrological traditions, types,
and systems)
यो तष म ह (Planets in astrology)
वी मेन ं जया (Qi Men Dun Jia)
रा श च (Zodiac)
ौ ो गक और व ान के संबंध म यो तष
व ान
यो तष व ान और खगोल व ान (Astrology
and astronomy)
यो तष व ान और क यूटर (Astrology and
computers)
स दभ
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यो तष अनुसंधान प त, खंड १: एक आई एस
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अंतरा ीय समाज (लॉस एं ज लस १९९५) आई
एस बी एन ०-९६४६३६६-०-३
62. जी पेरी, हम कैसे जाने क जो हम सोचते ह वो
हम जानते है। यो तष अनुसंधान म उदाहरण से
प त तक, यो तष अनुस धान प त, खंड १ :
आई एस ए आर, संकलन यो तष अनुसंधान के
लए अंतरा ीय समाज या इंटरनेशनल सोसाइट
फॉर ए ोना मकल रसच (लॉस एं ज लस
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67. जेफरी को न लयस, यो तष का पल.एक अ य
यान वशेष और यो तष, उ सव अरोरा का
तक है " अगर १००% सट कता ा त करनी है तो
हम सभी अ पताल और च क सालय को बंद
कर दे ना चा हये.वै ा नक च क सा उपकरण
और दवा म ु टय और ग़लत गणना का एक
लंबा इ तहास है। यही हाल कं यूटर और
इले ा नक दोन का भी है। हम बजली से चलने
वाले उपकरण और औजार का खंडन बस
इस लए नह करते ह यूं क वे सफल नह रहे ह
ब क इस लए करते ह क हम इन ग़ल तय के
कारण का पता लगाने का काम करते ह .द
वेसे स ए ोलौजर (बोनमाउथ, २००३.)
68. डी . को े न, यो तष के माण क ओर: ग णत
यो यता के लए एक यो तष ह ता र या
टु वाड् स अ ूफ़ ऑफ़ ए ोलाजी :एन
ए ो स नेचर फॉर मैथेमे टकल ए ब लट ,
अंतरा ीय यो तष आई एस ए आर शीतकालीन-
वसंत व त २००५, अंक ३३ # २
69. एम्. पोटगर (एड), यो तष अनुसंधान प तय
का संकलन, खंड १ : आई एस ऐ आर
ऐ थोलौजी. यो तष अनुसंधान का अंतरा ीय
समाज (लास एंजे स १९९५) आई एस बी एन
०-९६४६३६६-०-३

इ ह भी दे ख
खगोल शा (Astronomy)
स ा त यो तष (Theoretical astronomy)
अंक यो तष (Numerology)

बाहरी क ड़याँ
यो तष व कोश (गूगल पु तक ; लेखक - ह रद
शमा)
वै दक यो तष ( वनय झा क वै दक यो तष पर
)
हद यो तष
भारतीय यो तष
यो तष” व ान नह , कोरी क पना और अनुमान है
(ताक झांक)
सच यो तष श ा-स हत ख ड (गूगल पु तक;
लेखक - बी एल ठाकुर)
" वर+ व ान"&source=gbs_navlinks_s
यो तष शा म वर व ान का मह व (गूगल
पु तक; लेखक - केदारद जोशी)
यो तष और व ान
यो तष और व ान , यो तष और व ान पर एक
ववेचना मक .
यो तष जांच या द ए ोटे ट , एनी योग के
हवाले से यो तष क भ व यवाणी करने क श
(predictive power) के परी ण का एक ववरण
है।
रचड डौ कस (Richard Dawkins) ारा यो तष
पर लखी गई एक ववेचना, सतार का वा त वक
ेम या द रीअल रोमांस इन द टास .
यो तष प या ए ोफेसेज़ , एक अनुसंधान
प रयोजना, जससे यो तष के आधु नक वै ा नक
व प को द शत करने के लए कसी वषय के
सूय, चं और आरोही च ह और त वीर को
मलाकर यो तष के सां यक से संबंध का पता
लगाया जाए.
यो तष और धम
इ लाम म यो तष
इ लाम म यो तष हराम
जोसेफ जॉन डेवी (Joseph John Dewey) ारा,
नए और पुराने वधान म यो तष .
यो तष: धम और ायो गक त य के म य ,
डॉ॰गु ताव-एडॉ फ शोएनेर ारा र चत एवं शेन
डे सोन ारा अनुवा दत यो तष नबंध.
म यकालीन यो तष व ान , टश लाइ ेरी से
एक ान भ डार.
य द धम म यो तष
ोफेसर ारा, यो तष व ान अनुसंधान क ,
बल ेड जोआना लु सक गै जक

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ना कया गया हो।