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इ क़नामा

एहसास क डायर

अ नल के राय
1

मेर एक झलक  

इ क़ और बदलाव के लए लखने वाले अ नल के राय का ज म बहार के पटना िजले म ि थत एक छोटा सा


क़ बा हरसामचक म हुआ ह । ये इंजी नयर ह और ग णत पढ़ाने म काफ च रखते ह । ये काफ सहज़ और
बोलचाल क भाषा म लखते ह । इनका मानना ह क अपनी लेखन क भाषा इतनी सरल रखी जाएँ क एक
ाइमर तक पढ़ा यि त भी समझ सक ।"म मोह बत -लाइफ लव लक" इनक पहल उप यास ह । इनका एक
पता फेसबक
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हाँ..‘एहसास’, ये भी एक कमाल क चीज़ है , इस िज़ंदगी को कुछ मले या न मले पर कसी तरह 


का एहसास ज़ र मल जाता है और ऐसा ह एक एहसास मेर िज़ंदगी ने भी महसस ू कया था |   

इ ह एहसास क डायर है इ क़नामा ।  


कुछ ग़ज़ल के प म, कुछ मु तक के प म और कुछ क वताएं के प म ।
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💐तमु कहो तो सह !💐
राग छे ड़गे फर तमु कहो तो सह
मर मटगे फर तम ु कहो तो सह
छोड़ आये थे जो हम अधरू कहन
अब लखगे ये फर तम ु कहो तो सह ।।

या वे पल अब तु ह याद आती नह ं
या मेर याद तु ह 'अब' सताती नह ं
हाथ रखकर जो खायी थी तम ु ने क़सम
या वह हाथ अब कपकपाती नह ं ।।

इ क़ बन इस जवानी का या फायदा
तेरे बन इस रवानी का या फायदा
कह न पाए जो एहसास तेरा मेरा
बेजबु ाँ इस कहानी का या फायदा।।
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💐 तमु से ह.. 💐
चाहत क मेर दलकशी तम ु से है
िजंदगी क कसम िज़ दगी तम
ु से है ।

म नह ं जानता रब है या भी नह ं
मेर चाहत क हर बंदगी तम ु से ह ।

रात पनू म क हो या अमावस क अब


मेरे जीवन क हर चांदनी तम
ु से ह ।

बात यह है नह ं साथ तम
ु हो नह ं
बात यह है क ये दललगी तम ु से ह ।

कोई कुछ भी कहे फक पड़ता नह ं


अब सनम सफ यह आ शक़ तम ु से ह ।
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💐 एहसास क तौह न हो जायेगी 💐


रौशनी जब राह म खो जायेगी
फूल से खश
ु बू जद
ु ा हो जायेगी ।

हु न पर इतना गमु ाँ अ छा नह ं
हु न भी तो गम
ु शदु ा हो जायेगी।

इ क से खलवाड़ करना छोड़ दो


इ क काँट ह सदा बो जायेगी।

ऐसा नह ं क यार तु ह करते नह ं


पर क़दर चाहत क मेर खो जायेगी ।

दखु बहुत ह तम
ु से जद
ु ा होने का मगर
पर मेर एहसास क 'तौह न' हो जायेगी ।
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💐 ​व त क मांग ह.. 💐
व त क मांग ह यू चलना ह
ह से पहले तन को मलना ह ।

बात अब ह कहाँ दल क यहाँ


िज म क आग म ह जलना ह ।

कृ ण ह कौन अब बताना ज़रा


चाह क राह अब कुचलना ह ।

इ क़ क मार अब गवारा नह ं
दे ह क खस
ू बू तले गलना ह ।

नाम ह इ क़ का पता ह सब
इ क़ के नाम पे मचलना ह ।
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💐 हाँ, म इ क़ लखता हूँ ! 💐


बन आसमान चाँद लखता हूँ
बन बादल बरसात लखता हूँ
तम
ु म ख़द ु को ख़दु म तु हे लखता हूँ
हाँ, म इ क़ लखता हूँ ।

सखू ा सावन भींगी राते


दद तपण तेर यादे लखता हूँ
शम हया सब दर कनार कर
कहानी उस पार का लखता हूँ
हां, म इ क़ लखता हूँ।

अधरू वा हश सोचती नज़र


तु हार वाब क जहां लखता हूँ
शकवे ख़फ़ा वफ़ा बेवफ़ा
तेरे इ क़ का फ़साना लखता हूँ
हाँ, म इ क़ लखता हूँ ।
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💐 कहानी 💐
अब ये मत पछ ू या लख रहा हूँ
बचा है कुछ शेष वह लख रहा हूँ
तु हार माथे क बं दयाँ
नाक क नथु नयाँ
कान क बाल
तु हार होठ क लाल
कलाइय म इतराती
हर चू ड़य वो क खनक
तु हार पैर क शरारती
पायल क वो छनक
शायद इसी क कहानी लख रहा हूँ
ओढ़नी से अपने हु न को छपाना
तेरा वो शरमाना
नज़रे चरु ाना
दबी हुई होठ से मु कुराना
कुछ न करने को मना करना
फ़र ह द से गज़ ु र जाना
शायद उ ह पल का रवानी लख रहा हूँ
ना कहने का अंदाज़
मेर चाहत से तेरा वो एतराज़
मेर ह क़सम खा कर
मझु से ना मलने क बात
बेवफ़ा
मतलबी
धोखेबाज़
जैसे उपा धय से मझ ु े नवाज़ने क वो हालात
शायद उसी घड़ी क कहानी लख रहा हूँ
बचा है कुछ शेष वह लख रहा हूँ ।
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💐 इक मलु ाक़ात 💐
पता है
वो तम ु सा-ह दखती है
ख़द ु से डर हुई
सहमी हुई

वो तब भी नह ं जान पाया था
आज भी नह ं जान पाया हूँ
पर यार बहुत करती है
तु हार तरह ह उलझी हुई रहती है
कहती है
जब भी
अंधेर म आँखे खोलती हूँ
िज़ दगी रौशनी से भर जाती है
पलके तक जग ु नू बन जाती है
पछ ू ोगे नह ं य
यो क
तु हारे संग गज़ ु ार
हर ल ह क याद
उन अँधेर रात म मेरे संग रहती है
पर हर एक नयी सब ु ह
मेरे मन म इक डर-सा समा जाता है
इस भागती हुई िज़ दगी म
म कह ं कमज़ोर न हो जाऊं
ख़दु से लड़ न पाऊं
पता है
म इन बात को सन ु
मु कुरा दे ता हूँ
मेर इस मु कराहट से
वो और उलझ जाती है
तब म उसक उलझी हुई
आँख म झाक कर
कहता हूँ
पगल !
ये कोई नई बात नह ं
पहले भी म तम ु से मल चक ू ा हूँ
तु हे मझ ु से यादा ख़श ु रखने वाला
कोई और मल जाएगा
और म
तमु से फर कभी न कभी
कह ं कसी मोड़ पे मल जाऊँगा
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💐 याद ह हम 💐
चप ु -सा रहा करती थी तम ु
पर बात करती थी कुछ बहक -बहक
उलझी रहती थी ख़द ु से तम ु
या उलझ जाती थी ख़द ु को सल ु झाने म
तु हार इस सल ु झे हु ए उलझन से
म भी है रां हो जाता था
सोचता था
ये चाँद चादनी से लड़ रह है
या ख़फ़ा ह सरू ज क चमक ल रौशनी से

याद है हम
जब कताब से भड़ती थी तम ु
काजल म डूबी आँख क पलके
आपस म लड़ने लगती थी
लाख को शश करने पर भी
कताबे तु हारे सवाल का
जब ज़बाब न दे पाती थी
नाराज़गी से ओत- ोत ल ज़े तु हार
होठ क चमक बढ़ाती थी
याद है हम
चपु सा रहा करती थी तम

पर बात करती थी कुछ बहक -बहक ।
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💐 अ​ ब या- या लखूँ !!💐💐


तम
ु ह बताओं अब या- या लखूँ
वो भर दपु हर म कई लोग क पहर म
तु हार ग लय का च कर काटना लखूँ
क छत से तु हारा एक टूक ताकना लखूँ
तमु ह बताओं अब या- या लखूँ

कताब के बहाने तु हारा घर जाना लखूँ


रात भर जागकर नींद से खलवार कर
तु हारे संग गज़
ु ारे पल से लड़ना लखूँ
तु हार हँसी से मल दद से कहरना लखूँ
तमु ह बताओं अब या- या लखूँ

मेरा इज़हार, तु हारा इनकार फर इकरार


या संग जीने मरने का हमारा वो करार लखूँ
पानी के हर बद
ंू के साथ तु हरा गलना
उं ग लय क हर छुअन पे तु हारा ससकना
या उन सारे पल क कहानी लखूँ

तम
ु ह बताओं अब या- या लखूँ
तमु ह बताओं अब या- या लखूँ
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💐 सरु मई आँख 💐
कतने पहर के बाद
आज एक सरु मई आँख ने
मझ
ु े फर से मदहोश कर दया
म मड़ ु -मड़
ु कर दे खा
दे खता रहा जबतक ओझल न हुई
पर त नक ह दे र म सहम सा गया
कह ं ये फर वह हसरत तो नह ं
िजसे पाने क चाह म
म ख़दु से ज़द ु ा न हो जाऊं
अपनी हं सी से ख़फ़ा न हो जाऊं
खो न बैठूं फर से
अपने सपन को
कुछ कर गज़ ु रने के इस हलचल को
खद
ु को आसमां तक पहुँचाने के पहल को
म इसी सोच म डूबा ह था
क उसक झु फ़ो क बादल से
सावन क एक बू द मेरे मन को छू गयी
जो सोचा था वो मन म ह मीट गयी
सब जानते हुए भी
उन ग लय म फर से हो लया
फर से एक बार
मर- मटने के लए
उस सरु मई आँख म खो गया
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💐 ए​ क कहानी अपनी भी थी 💐
एक कहानी अपनी भी थी
कसी राजा-रानी से कम न थी
वो थी मेर याल क मि लका
म था उसके सपन का राजकुमार
चाहत से भर अपनी महल थी
ख़ु शय से भरा अपना स ाजय था
फूल क सेना थी
िजसका सेनाप त मोह बत थी
ना कोई बंधन था कसी समा क
ना डर था नफ़रत क गो लय क
उड़ता प रंदा सा वाब थे अपने
इ क़ से भरा साज थे अपने
एक कहानी अपनी भी थी
कसी राजा-रानी से कम न थी ।
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💐 चाहत 💐
बहुत दन हुआ जागे थोड़ा सोना चाहता हूँ
तु हार कंध पर सर रख रोना चाहता हूँ ।

सनु ा है एक नयी द ु नयाँ बसा ल है तम


ु ने
उस द ु नयाँ म आके थोड़ा जीना चाहता हूँ ।

और अभी भी बचे है दो बू द इस आवारा बादल के


तझ
ु पे बरस तम
ु हे न दयाँ बनाना चाहता हूँ ।

माना तु हे शौक है द दार-ए-बहार का


पर पतझड़ का फूल बन तु हे सवारना चाहता हूँ ।
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💐 ख़त 💐
इ क़ म इ क़ से इ क़ लख रहा हूँ
ये ख़त अज़नबी के पत लख रहा हूँ

तेर अनकह बात नजर क वो मल ु ाकात


ख़दु क ल ज़ म वो तेर ख़ामोशी लख रहा हूँ

तेरा छत पर वो आना जाना, खड़ कय से दे ख शमाना


ख़दु क नज़र से तेर शरारत लख रहा हूँ

छुप-छुप कर तेरा दे खना दे ख, अनदे खा कर मु कुराना


ख़दु क होठ से तेर वो मु कराहट लख रहा हूँ

उँ ग लय से ज़मीन पे लखना, लखकर फर मटकाना


तेर उन अधरु श द क कहानी लख रहा हूँ

इ क़ म इ क़ से इ क़ लख रहा हूँ
ये ख़त अज़नबी के पत लख रहा हूँ ।
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💐 क​ ोई...💐
ग़म म हँसना सीखा गया कोई
इ क़ बन रहना गया बता कोई ।

मेर याद क क ची डाल से


मीठ कोपल ले उड़ा गया कोई ।

िजंदगी बन गयी सफ़र ऐसी


रहनमु ा का नह ं पता कोई ।

नींद आती कहाँ सनम अब मझ


ु े
अधमरा सा गया बना कोई ।

अब दआ
ु क कसे ज़ रत ह
इ क़ म अब कहाँ बरु ा कोई ।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
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यार क बीच क डोर अं शका के लए...