…..

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व कायालय

ारा

तुत मािसक ई-प का

फरवर - 2011…..

NON PROFIT PUBLICATION

गु

FREE
E CIRCULAR
योितष प का फरवर 2011

िचंतन जोशी

संपादक

गु

गु

संपक

योितष वभाग

व कायालय

92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA

फोन

91+9338213418, 91+9238328785,

ईमेल

gurutva.karyalay@gmail.com,
gurutva_karyalay@yahoo.in,

वेब

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प का
फोटो

तुित

िचंतन जोशी,

व तक.ऎन.जोशी

ाफ स

िचंतन जोशी,

व तक आट

हमारे मु य सहयोगी

व तक.ऎन.जोशी

( व तक सो टे क इ डया िल)

 या आपको उ च अिधकार से परे शानी ह?
 या आपक अपने सहकमचार से अनबन होती ह?
 या आपके अिधन थ कमचार आपक बात नह मानते?
य द आपको अपने उ च अिधकार , सहकमचार , अिधन थ कमचार से परे शानी ह। आपके अनूकुल काय नह ं करते या
आपको करने नह ं दे त?े वह आपक बात नह ं मानत? बना वजह आपको परे शान करते ह? अन आव यक काय आपसे
करवाते ह। आपका मोशन

कवादे ते ह। उिचत काय करने पर भी आपके काय म नु श िनकालते ह? य द आप इसी

तरह क कसी सम या से

त ह तो आप उन अिधकार , सहकम , अिधन थकम या अ य कसी य

से गु

व कायालत ारा शा ो

विध- वधान से मं िस

ाण- ित त पूण चैत य यु

वशेष के नाम

वशीकरण कवच एवं

एस.एन. ड बी बनवाले एवं उसे अपने घर-ओ फस म था पत कर अ प पूजा, विध- वधान से आप वशेष लाभ ा कर
सकते ह। य द आप मं िस

वशीकरण कवच एवं एस.एन. ड बी बनवाना चाहते ह, तो संपक कर।

GURUTVA KARYALAY

Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,

फरवर 2011

3

वशेष लेख
वंसत पंचमी

5

सर वती उपासना का मह व

7

व ा ययन आव यक य ?

8

व ा ाि के वल ण उपाय(टोटके)

10

व ा ाि के वल न योग

12

सर वती अ ो रनामावलीः

13

सर वती यं (य

14

)

15

प र ा म सफलता ाि हे तु
व ा ाि के िलएवा तु के उपाय
योितष म व ा ाि एवं उ च िश ा के योग

16
17
20

व ा ाि म कावट के योग

25

योितष और व ा वचार
योितष से जाने व ा ाि के योग

27
28

आपके ब चे कैसे िलखते है ?

अनु म
संपादक य
सव काय िस

4
कवच

रािश र
ीसर वती तुित

फरवर -2011 मािसक त-पव- यौहार

52

19

ह चलन फरवर -2011

54

24

फरवर 2011 - वशेष योग

55

32

दै िनक शुभ एवं अशुभ समय

ान तािलका

55

सर वती तो

33

दन-रात के चौघ डये

56

जब ल मी, सर वती और गंगा को िमला शाप

34

दन-रात क होरा सूय दय से सूया त तक

57

सर वती आरती

34

ादश सर वती तो

34

वा तु परामश
योितष परामश

58
59

सर वती तो म ्

35

सव रोगनाशक यं /कवच

60

अथ

36

मं िस कवच

62

सर वती के विभ न मं से व ा ाि

37

YANTRA LIST

मािसक रािश फल

42

GEM STONE

जब सर वती ने कािलदास का अहं कार तोडा ?

45

BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION

सर वती पूजन से ब चे बनते ह महाबु मान?

47

सूचना

67

फरवर 2011 मािसक पंचांग

50

हमारा उ े य

69

ी सर वती चालीसा

63
65
66

फरवर 2011

4

संपादक य
य आ मय
बंधु/ ब हन
जय गु दे व
माघ शु ल पंचमी को वसंत पंचमी के

प म मनाया जाता ह, जो हं द ू सं कृ ित के

मुख

योहारो म से एक

योहार है , वसंत पंचमी के दन व ा क दे वी सर वती क पूजा क जाती ह।

पूरातन काल म भारत म ऋतुओं को छह भाग म बाँटा जाता था। उनम से एक भाग ह वसंत ऋतु, वसंत म तरहतरह के फूल पर बहार आजाती ह, खेत मे फसले चमकने लगती ह, आम के पेडो पार बौर आने लग जाते ह।
इस िलये वसंत ऋतु का
व णु और कामदे व क

वागत करने के िलए शु ल पंचमी के दन एक बड़ा ज

विध-वत पूजा होती ह। शा

उ ले खत कया गया ह।

ीकृ ण ने

वयं गीता म कहा है क बसंत ऋतु के

कट होते ह।

या कुंदद ु तुषार हार धवला या शु

या

ा यु

शंकर:

म बसंत पंचमी को ऋ ष पंचमी,

मनाया जाता ह, जसम
ी पंचमी इ याद नामो से

प म भगवान कृ ण

वृ तावता । या वीणा वर द ड मं डत करा या

भृ ितिभ दे वै सदा व दता । सा माम पातु सर वती भगवती िन:शेष जा या पहा ॥१॥

धारण करती ह, जनके हाथ म वीणा-द ड शोभायमान है , ज ह ने

प से

ेत प सना ।।

भावाथ: जो व ा क दे वी भगवती सर वती कु द के फूल, चं मा, हमरािश और मोती के हार क तरह

ेत कमल पर अपना आसन

ेत वण क ह और जो

ेत

हण कया है तथा

ा,

व णु एवं शंकर आ द दे वताओं ारा जो सदा पू जत ह, वह संपूण जड़ता और अ ान को दरू कर दे ने वाली माँ सर वती आप हमार

र ा कर।

माता- पता अपने ब च को अ छ से अ छ िश ा दे कर उनके जीवन को संवारने का हर संभव यास करते ह। कंतु
अ सर दे खने म आता है क सारे यास के बावजूद ब च क िश ा म तरह-तरह क बाधाएं आती रहती ह। इन बाधाओं को दरू
करने का हर संभव
यद व ा

यास ब चो एवं माता- पता को अव य करना चा हए।

ाि

म अवरोध होता है , तो अंधकार और संकोच आ जाते ह। वह ं

हो जाता है । व ता के िलए आव यक है क
जाती ह क हमार

व ा

ाि

ान क गित िनरं तर बनी रहे । इसी िलए दे वी सर वती क आराधना क

अथात हमार गित म कोई बाधा उप थत न हो, हमार

तो हम जीवन म भौितक और आ या मक सभी
गु

ान, व ा और धन का अभाव

योितष के फरवर -२०११ व ा

ाि

कार क संप य क

ाि

व ा

ाि

क गित बनी रह ,

होती रहे ।

वशेष को आप सभी पाठको क जानकार एवं अनुकूलता हे तु व ा

ा ी से जुड जानकार या एवं उससे संबंिधत उपायोका व तृ त वणन कया गया ह। जसे अपना कर साधारण से
साधारण
अशुभ

भी सरलता से लाभ उठा सक।

ह क दशा के कारण

संबंिधत यं

को अपने घर म

य द ज म कुंडली म उ च िश ा का योग हो, कंतु व ा ययन के समय

कावटे आने का योग हो या

कावटे आरह हो, तो संबंिधत

था पत करना लाभदायक होता ह।

उपायो को भी अपनाया जासकता ह।

हो के अशुभ

ह क शांित हे तु

ह से

भाव को कम करने हे तु अ य

िचंतन जोशी

फरवर 2011

5

वंसत पंचमी

 िचंतन जोशी
८ फरवर २०११ को ह द ू पंचांग व मी संवत ् 2067 माघ मास शु ल प

क पंचमी को वंसत पंचमी अथात सर वती पूजा के दन मां सर वती क पूजा
आरधना कर उनक कृ पा

करने हे तु वष के सव

दनो म से एक ह।

व ानो के मत से वंसत पंचमी का दन विभ न शुभ काय के शुभ आरं भ हे तु
अ यंत शुभ माना जाता ह।
वंसत पंचमी को सर वती जयंती, ऋ ष पंचमी,

ी पंचमी इ याद

नामो से भी मनाया जाता ह।
वंसत पंचमी अथात वंसत ऋतु के आगमन का

थम दन। व ानो

के मत से वंसत ऋतु का मौसम मनु य के जीवन म सकारा मक भाव, ऊजा,
आशा एवं व ास को जगाता ह। ह द ू सं कृ ित म वंसत ऋतु का

व ा क दे वी सर वती क पूजा-अचना के साथ कया जाता ह।

पूजन से व ा एवं

ान क

ाि

वागत
इनके

होती ह।

वंसत पंचमी के दन से भारत के कइ ह सो मे ब चे को

थम अ र

ान क शु वात क जाती है । एसी मा यता है क वसंत पंचमी के दन व ांभ

करने से ब चे क क वाणी म मां सर वती वयं वास करती और ब चे पर जीवन
भर कृ पा वषाती ह। एवं ब च म व ा एवं
मे

े ता, सदाचार, तेज वता जेसे स

और ब चा उ म मरण श

यु

वंसत पंचमी के दन दे वी सर वती के अलवा भगवान व णु,
ह। मा यता ह क भगवान

ीकृ ण वसंत पंचमी के दन

पंचमी के दन से ह होली का उ सव शु

ान का वकास होता ह ज से ब च

गुण का आगमन होना

ारं भ होता ह,

व ान होता ह।
ी कृ ण, कामदे व व रित क पूजा भी क जाती

प से

कट होते ह। इसी कारण से

ज म वसंत

हो जाता है । वसंत पंचमी के दन दांप य सुख क कामना से कामदे व और

उनक प ी रित क पूजा क जाती है । कामदे व क पूजा कर इसी पु षाथ क

ाि

क होती है ।

वंसत पंचमी के दन नये यवसाय का शुभ आरं भ या यवसाय हे तु नयी शाखा का शु भ आरं भ करना अ यंत शुभ माना
जाता ह। वसंत पंचमी के दन पूजा आरधना से मां क कृ पा से अ या म
सर वती पूजन -:शा
दन

ाना म वृ

होती ह।

के अनुशार वंसत पंचमी के दन व ा क दे वी सर वती का ज म हआ
था । वंसत पंचमी के

ाजी के मानस से दे वी सर वती
सर वती जी को बु

,

कट हई
ु थी।

ान, संगीत और कला क दे वी माना जाता ह। पौरा णक काल म भी व ा

माता- पता अपने ब चे को ऋ ष-मुिनय के आ म एवं गु कुल म भेजते थे।

ाि

के िलए

फरवर 2011

6
वसंत पंचमी के दन सुबह

नान इ याद के प यात

व छ कपडे पहन कर सर वती क पूजा-अचना क जाती है ।

वसंत पंचमी के दन वै दक मं , सर वची कवच, तुित आ द से दे वी क
वसंत पंचमी के दन सर वती क कृ पा

वसंत पंचमी के दन बालक को अ र

ान एवं व ारं भ भी कराने क परं परा ह।

िन य कम से िनवृ त होकर
मूित अपने स मुख

ेत व

हो इस िलये ब चो क

ाथना करना लाभदायक होता ह।

कताबे एवं लेखनी (कलम) क पूजा क जाती है ।

धारण करके उ र-पूव दशा म या अपने पूजा

थापन करे ।

सव

थम पूजा का

मां सर वती को

पूजा मे सफेद व , फ टक माला, चंदन, अ त, पु प, धूप-द प, नैवे
क कृ पा शी

ारं भ

ी गणेशजी क पूजा से करे तत प यात ह मां सर वती क पूजा कर।

ेत रं ग अ यंत

य है । इस िलये पूजा म

यादा से

यादा

मे

ेत रं ग क व तुओं का

ेत िम ान आद का

योग कर।

योग करे ज से मां

हो

मां सर वती के वै दक अथवा बीज मं ो का यथासंभव जाप करे । और सर वती
तो

थान म सर वती का िच -

तो , सर वती अ ो रनामावली,

एवं आरती कर के पूजा संप न करे ।

वसंत पंचमी क कथा:
एक दन

ाजी सम त लोक का अवलोकन करते हवे
ु भूलोक आये।

को मौन, उदास और

ाजी ने भूलोक पर सम त

या हन अव था म दे खा। जीवलोक क यह दशा दे खकर

सोचने लगे इन जीवो के क याण के िलये या उपाय कया जाएं? ज से सभी

ाणी-जंतुओं

ाजी अिधक िचंितत होगएं और

ाणी एवं जीव आनंद और

स न होकर

झुमने लगे। मन म इस वषय म िचंतन मनन करते हए
ु उ ह ने कमल पु प पर जल िछड़का तो, उस पु प म से दे वी
सर वती कट हई।
दे वी सफेद व

कए हए
ु थी।
भगवान

ा ने दे वी से कहा, आप सम त ा णय के कंठ म िनवास कर उ ह वाणी

जीव को चैत य एवं
आपके

धारण कए, गले म कमल क माला धारन कये, हाथ म वीणा एवं पु तक धारण

स न करना आपका काम होगा और व

दान करो। आज से सभी को

म आप भगवती सर वती के नाम से

िस

होगी।

ारा इस लोक का क याण कये जाने के कारण व त समाज आपका आदर एवं पूजा करे गा।

वंसत पंचमी के दन

ान और व ा क दे वी सर वती क पूजा-अचना क जाती है । दे वी सर वती क आराधना से

व ा आती है , व ा से वन ता, वन ता से पा ता, पा ता से धन और धन से सुख

होता है ।

ओने स
जो य
उ च िश ा

प ना धारण करने मे असमथ हो उ ह बुध
ाि

हे तु और

मरण श

के वकास हे तु ओने स र

उं गली या लॉकेट बनवा कर गले म धारण कर। ओने स र

का वकास होता ह।

ह के उपर

ओने स को धारण करना चा हए।

क अंगूठ को दाय हाथ क सबसे छोट

धारण करने से व ा-बु

ाि

हो होकर

मरण

फरवर 2011

7

सर वती उपासना का मह व


ह द ू धम के वै दक सा ह य म मं

संशोिधत हो रहे वै ािनक शोध से
क सकारा मक श

उपासना का मह वपूण

यह िस

थान ह। आज के आधुिनक युग म लगातार

हो चूका अनुभूत स य क म

जा ह हो इस िलए मं

के

व तक.ऎन.जोशी

योग का उिचत

ान, मं

म अ त
ु श

होती ह।

ले कन मं

मब ता और मं

का शु

उ चारण अित आव यक होता ह।
जैसे भीड म जाते हए
ु या बैठे हए

यान ह

म से जस

के नाम का उ चारण होता ह। उस

विन क और गित करता ह। अ य लोग उसी अव था म चल रहे होते ह या बैठे रहते ह

यान नह ं दे ते ह। उसी

कार सोएं हए

य म जस य

िनं ा भंग होती ह अ य लोग सोएं रहते ह या वशेष
उ चारण कर िन

त दे वी-दे वता क श

दे वी सर वती ह द ू धम के

माना जाता ह। दे वी का

व प च

यान नह ं दे ते। उसी

का

अथवा वशेष

के नाम का उ चारण होता ह केवल उसी

कार दे वी-दे वता के वशेष मं

का शु

को जा त कया जाता सकता ह।

मुख दे वी-दे वताओ म एक ह, जसे मन, बु
मा के समान

ेत उ जवल,

ेतव

धार ,

हाथ म वीणा, पु तक, माला िलए ह और एक हाथ वरमु ा म ह। म तक पर र
दे वी सर वती के पूजन से जातक को व ा, बु
सर वती

व नाना

,

ान और कला, क अिध ा ी दे वी

ेत हं स पर वरा जत, चार भुजाधार ,
ज डत मुगट शोभायमान ह।

कार क कलाओं म िस

एवं सफलता

होती ह।

ा क मानस पु ी ह।

शा ो म

दे वी सर वती को सर वती, महासर वती, नील सर वती कहा गया ह। दे वी सर वती क

व णु, महे श, दे वराज इ

और सम त दे वगण करते ह।दे वी सर वती क कृ पा से जड से जड

तुित

ा,

भी व ान बन

जाते ह। हमारे धम शा ो म इस के उदाहरण भरे पडे ह। जस म से एक उदाहरन कालीदास जी का ह। दे वी सर वती
का वशेष उ सव माघ मास के शु ल प

क पंचमी को अथात ् वस त पंचमी को मनाया जाता ह।

मं
एकमुखी

ा -Rs- 1250,2800

छह मुखी

दो मुखी

ा -Rs- 100,151

सात मुखी

िस

ा -Rs- 55,100

यारहमुखी

ा -Rs- 2800

ा -Rs- 120,190

बारह मुखी

ा -Rs- 3600

ा -Rs- 820,1250

तेरह मुखी

ा -Rs- 6400

तीन मुखी

ा -Rs- 100,151

आठ मुखी

चार मुखी

ा -Rs- 55,100

नौ मुखी

ा -Rs- 820,1250

चौदह मुखी

पंच मुखी

ा -Rs- 28,55

दसमुखी

ा -Rs- ........

गौर षंकर

ा -Rs- 19000
ा -Rs-

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फरवर 2011

8

व ा ययन आव यक

य?

 िचंतन जोशी
भारतीय शा कारो ने व ा वह न मनु य क
तुलना पशु से क ह। व ा एवं

ान ह मनु य क वशेषता

ह। पशुओं क तुलना म मनु य म

ान श

के कारण

कुछ वशेषता ह। परं तु अ ानी मनु य का जीवन िन य
प से ह पशुओं से गया-गुजरा ह। अ ानी मनु य को

ारा
को

ह। इन

वृ ित या

याओं के करने से कसी

ानी नह ं कहा जा सकता उसे अ ानी ह कहा

जाएगा।

यो क हर दे हधार जीव म सांस लेने, आहार

पचाने, जमाने और खचने क
कसी

मुख जानका रयाँ कसी ना

प म वतः ह बना यास के ह िमली हई
ु होती ह।

अपने जीवन म कसी दशा म गित करने का अवसर नह ं

जो जीव इतना ह जानते ह। व तुतः वे दे ह क कयाओं क

िमलता ह।

जानकार तक ह सीिमत ह।

अपने

जीवन

िनवाह क

मह वपूण

आव यकता भी क ठनाई से पूर कर पाता ह। उसे अनेक
अभाव , असु वधा और आप य से भर ज दगी जीनी पड़
सकती ह। जस
जीवन के हर
उिचत

ान क

कमी होती ह, उसको

े म सव अभाव होते रहते ह। य

गित के सभी रा ते उसे बंध से

ितत होते ह।

कोई भी मनु य अपने जीवन म व ा से वह न
एवं अ ानी न रह। इसिलए हमारे व ान ऋषीमुनीय ने
ािचन काल से ह हर य

के िलये उपयोगी

करने क आव यकता एवं अिनवाय बताई है ।
मनु य को

होने वाली व ा उसके

मु य आधार ह। इसिलये जस य
उसे

ान ाि

ान का

को व ा नह ं आती

से वंिचत रहना पड़ता ह।

हमारे शा ो के अनुशार
क और लेश से छुटकारा केवल
है ।

व ा

को जीवन म

ान से ह िमल सकता

योक अ ानी मनु य तो ज टल बंधनो म ह बँधा

रहता ह। उन बंधनो से बाहर िनकलने का उिचत

यास

नह ं कर पाता और उसका मन, शर र के बंधनो म पड़े हए

बंद क भांित क भोगने पड़ते ह। य

ान के अभाव

के कारण क ो को सहता ह रहता ह और उसे अंधकार म
भटकना ह पड़ता ह, य
ाि

को सह माग

ान

काश क

होने पर ह िमलता ह।
सृ ी के हर पशु-प

करने आ द शार रक

- ाणी को खाने, सोने, ब चे

वृ ितय को करने का

ान

कृ ित

ान वह ह, ज से मनु यने

अब तक संशोधन, प रवतन
कर मानव ने सम

वकिसता ह मनु य का

िश ण से य
जीवन म

ारा उपल धय को
का वकास

कया ह, यह

ान ह।

व का वकास होता ह।

को

वाभा वक सं कार एवं वंश

पर परा से चतुरता तो एक सीमा तक िमली हई
ु ह, परं तु

का वकास उसके

से ह संभव होता ह।

ान

के बीज इ र य कृ पा से मानवीय चेतना म बचपन से ह
व मान हो जाते ह। परं तु उस

ान का

वकास हर

नह ं कर पाता ह। उसका वकार य

के आस-

पास क अनुकूल एवं

ितकूल प र थतीय के आधार

पर होता ह। व ानो के मत से बना दसर
से कुछ िसखे

मनु य क बु म ा कसी काम क नह ं ह।
जैसे

कसी छोटे ब चे को जन प र थितय म

रहना पड़ता ह, ब चा उसी कार प र थितय के अनु प
ढल जाता है ।
जेसे

कसी अ ानी के ब चे और पढे -िलखे

सुसं कृ त के ब चे म जो अ तर दे खा जाता ह, वह अंतर
ब चे म ज मजात नह ं होता वह अंतर पर

थती,

वातावरण और संगित के भाव से होता है ।
जस

हो जाती ह, वह

को जीवन म उपयु

सु वधाय ा

सु वकिसत जीवन जीने क

प र थयाँ ा कर लेता ह। उसी

कार जस

को

फरवर 2011

9
जीवन म उपयु
मानिसक

सु वधा से वंिचत रहना पड़ता ह, वह लोग

से गई-गुजर दशा म रह जाते ह। इस िलये

जो य

को नी न प र थय म पड़ा नह ं रहना है , उन

के िलये व ा अ ययन करके अपने जीवन म उ कष

उपल धया ह, अबतक जस वशाल

ह, उससे भी लाभ उठाना आव यक होता ह। जो सीिमत
दायरे म या कुंटंु ब या प रवेश म
ह। य

क दशा म आगे बढ़ना संभव हो सकता ह।

दै िनक दनचया, कुंटंु ब एवं सामा जक प रवेश के

संपक म रहकर जो सीख, जो
मनु य के
वाला

ान

होता ह वह

वकास हे तु नाका फ ह अथवा

थोडे

ान से य

यो क

वकास

के वकास का काम नह ं चल सकता।

हे तु

मनु य

अबतक

व ा ाि
आज के आधुिनक युग म िश ा

जो

होना संभव नह ं

के वकास का एक ह उपाय ह, व ा ययन।
यो क

के

ारा कमाया और जमा कया

गया धन तो खच होता रहता ह और क
ले कन य

होने

ान सीिमत दायरे के कारण बहत
ु थोड़ा होता ह। उस

ान का सं ह कया

के

ारा उपा जत ान सुर

जेसे कसी

कुशा

त रहता ह।

के पास तो अ प

ान होता है ,

जससे पेट भरने क आव यकता क पूित जा सकती ह।
इस िलये जीवन म व ा ययन अित आव यक मानी
गई ह।

हे तु सर वती कवच और यं
ाि जीवन क मह वपूण आव यकताओं म से एक है । ह द ू धम म

व ा क अिध ा ी दे वी सर वती को माना जाता ह। इस िलए दे वी सर वती क पूजा-अचना से कृ पा
बु

होते रहे ह,

करने से

एवं ती होती है ।

आज के सु वकिसत समाज म चार ओर बदलते प रवेश एवं आधुिनकता क दौड म नये-नये खोज एवं
संशोधन के आधारो पर ब चो के बौिधक

तर पर अ छे

वकास हे तु

विभ न पर

ा,

ितयोिगता एवं

ित पधाएं होती रहती ह, जस म ब चे का बु मान होना अित आव यक हो जाता ह। अ यथा ब चा पर
ितयोिगता एवं

ित पधा म पीछड जाता ह, जससे आजके पढे िलखे आधुिनक बु

मूख अथवा बु ह न या अ पबु

ा,

से सुसंप न लोग ब चे को

समझते ह। एसे ब चो को ह न भावना से दे खने लोगो को हमने दे खा ह,

आपने भी कई सैकडो बार अव य दे खा होगा?
ऐसे ब चो क बु

को कुशा

एवं ती

हो, ब चो क बौ क

मता और

मरण श

का वकास हो इस

िलए सर वती कवच अ यंत लाभदायक हो सकता ह।
सर वती कवच को दे वी सर वती के परं म दलभ
तेज वी मं ो ारा पूण मं िस

कया जाता ह। ज से जो ब चे मं

और पूण चैत ययु

जप अथवा पूजा-अचना नह ं कर सकते वह वशेष लाभ

जो ब चे पूजा-अचना करते ह, उ ह दे वी सर वती क कृ पा शी

कर सके और

हो इस िलये सर वती कवच अ यंत

लाभदायक होता ह।

सर वती कवच : मू य: 280 और 370

सर वती यं :मू य : 280 से 1450 तक

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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फरवर 2011

10

व ा

ाि

के वल ण उपाय(टोटके)

 िचंतन जोशी

पूव क तरफ िसर करके सोने से व ा क
व ानो के मत से व ा
कुशा

एवं व ा,

ाि

ाि होती है ।

हे तु ४ मुखी एवं ६ मुखी

ान, उ म वाणी क

पढाई मेज पर फ टक का ी यं

लाल धागे मे धारण करने से य

क बु

ती ओर

ा होकर जीवन मे रचना मकता आित है

थापीत करने से मरण श

ती े होती ह एवं खराब वचार दरू होकर उ म कार

क िचंताधारा उ प न होती ह, एवं मां सर वती और ल मी का आिशवाद सदै व बना रे हता ह।

अपने पूजा थान पर सर वती यं
बनी रे हती ह।

थापीत कर ित दन धूप- द प करने से मां सर वती का आिशवाद एवं कृ पा सदै व

पढाई करते समय पूव या उ र दशा क तरफ मुख कर कर पढाई कर।

पढाई करते समय फेद या हलके रं ग के कपडो का चुनाव करे ताक एक ता बनी रह, गहरे रं ग या भडक ले रं गो वाले
कपडे पहनने से मानिसक अशांित उतप न होती ह, ज से एक ता भंग होती ह एवं पढाई मे मन नह लगता।


पढाई क कताब म मौली का टकडा
रखने से

कताब म मोर के पंख रखने से लाभ होता ह।

ान एवं व ा म लाभ ा होता ह।

ान मु ा का ित- दन मा ५ िमिनट योग करने से मरण श

कराने हे तु हम यास रत ह।)

क वृ

होती ह। (मु ा के अ य लाभ शी

उपल ध

पढाई करने वाली मेज(टे बल) पर शीशा नह ं रखना चह ये। शीशा रखने से मानिसक अशांित होती ह। पढाई मे मन नह ं
लगता।

पढाई के समय अपने पीछे खाली जगा न रखे अथात ठोस द वार क और पीठ कर के बेठे। खुली जगा पर नह बेठना
चा हये ये इ से आ म व ास क कमी रे हजाती है । खुली जगा वाले

थती म ब चे यादा समय तक पढाई करने के

बावजुद उसे अिधक याद नह रे हपाता ह।

अपनी बायीं (राईट हड) और पानी से भरा लास रख एवं इसे थोडा-थोडा पानी समय के अंतराल पर पीते रे हने से मरण

तेज़ होगी औए एका ता म वृ

होती ह।

मेज(टे बल) पर यथा संभव कम साम ी रखे उ से एका ता बढती है । यदा साम ी रखने से नकार मक श
एनज ) उतप न होती ह ज से पढाई मे मन नह ं लगता।


मेज(टे बल) को द वार से थोडा दरू रखे सटाकर न रख , इससे एका ता भंग होती ह।

रात को सोने से पूव चांद के लास मे पानी भरकर रखले और सुबह खाली पेट पानी पले एसा करने से िश ा के
सफलता ाि होती ह।

(नेगे टव

भोजन करते समय चांद के बरतनो का उपयोग करने से लाभ ा होता व ा

ाि म लाभ होता है ।

े मे

फरवर 2011

11

ब चो को सोमवार का त कर िशव मं दर म जलािभषेक करने से व ा और बु

बुध क होरा व ा-बु




व ानो के मत से काँसे के बतन म भोजन करने से बु
अंजीर को बादाम एवं प ता के साथ खाने से बु

ती होती ह।

बढ़ती ह।

ित दन सूय नम कार करने और सूय को अ य दे ने से बु
लोहे के बतन म भोजन करने से बु

वल

होती ह।

का नाश होता ह। (पकाने से बु

का नाश नह ं होता खाने से होता ह।) टे नलेस

नाश नह ं होती।

अ मी को ना रयल का फल खाने से बु

का नाश होता ह।

मरण श

को बल करने के िलये हमेशा कपूर एवं फटकर अपने साथ रख।

मरण श

को बल करने के िलये ा

अ य अचूक

बुधवार के दन मं

मं
ह।

और शंखपु पी का सेवन वशेष

पूण

िस

ाण

पूण

ाण

ित त एवं पूण चैत य यु

ित त एवं पूण चैत य यु

शु

अपनी पूजन

थान म या पढाई करने वाले

सर वती यं

थापीत करने से लाभ

से परामश लेकर कर।

भावशाली उपाय

िस

ाि होती ह।

अथात पढाई के िलये उ म होती ह।

ट ल के बतन म भोजन करने से बु

प ने (Emrald) र

सर वती कवच को धारण कर।

चार और छः मुखी

धारण करने से भी

मरण श

बढती

को अिभमं ीत कर धारण करने से लाभ होता ह।

हरे मरगच या हक क क माला से मं

थान या

म म मं

िस

पूण

ाण

ित त एवं पूण चैत य यु

होता ह।
जाप करने से एवं एक माला सर वती दे वी के िच

या यं

पर लगाने

से लाभ होता ह।

पर

ा म उ ीण होने हे तु लाल रं ग क कलम (पैन) ल तथा उसम कसी भी रं ग क

सुनहर रं ग क हो तो शुभ फल

मन क एका ता हे तु
ाणायाम से शर र म श

ित दन

याह हो तथा कलम (पैन) क कैप

होते ह।
ाणायाम कर। व ारं भ करने से पूर भी

का संचार होता ह और

ाणायाम करना लाभ

द होता ह।

फूित उ प न होती ह।

सोने से पूव सर वती मं का जप करे एवं सोते समय भी सर वती मं का जप करते रह।
प र ा के िलये

थान करे ने से पूव गणेश जी के िन न मं का यानपूव क जप करके घर से बाहर िनकले कर।

ॐ व तुंड महाकाय सूय को ट सम भः।
िन व नम ्कु मे दे व सव कायषु सवदा॥

प पर पर कुछ भी िलखने से पूव उपर छोटे अ रो म "ॐ ऎ"ं िलखे यद प र ा प

पर पैन-पैनिसक से िलखना

संभव न हो तो, अपनी दा हने हाथक (Right Hand) अनािमका (Index Finger) अंगूली को प र ा प
ऎ"ं िलखते हवे
ु घुमाद। फर हर प ने पर िलखने से पूव "ॐ ऎ ं" िलखना भी लाभ द होता ह।
उपरो

योग के करने से अव य लाभ

होता ह।

पर खाली "ॐ

फरवर 2011

12

व ा

ाि

के वल न

योग

 िचंतन जोशी
कई ब च को घंटो-घंटो पढाई करने के उपरांत भी
हआ
भूल जाते ह। एसी

मरण नह ं रहता। प र ा म उ र दे ते समय उसने पढा

थती म ब चे के साथ माता पता भी परे शान रहते ह क इतना पढने के उपरांत ब चे को

याद न ह रह पाता? इसका कारण काया ह? और उपाय

या ह? य द ब चा पढाई नह करता तो अलग बात होजाती ह,

परं तु पढने के प यार भी याद नह ं रहे तो इस मे ब चा करे तो
एसी

थती म व ा

ाि

हे तु एवं

मरण श

या कर? यह सबसे बड ं सम या हो जाती ह।

बढाने हे तु जो ब चे +10 से उपर के

लास म पढते ह उनके

िलये ह।

योग 1:
रा ी 8-9 बजे भोजन कर 30-45 िमिनट प यात बायीं (Left) करवट लेकर ढाई घंटे के िलये सोजाये, पुनः दाई (Right)
करवट लेकर ढाई घंटे के िलये सोजाये, तत प यात उठकर हाथ मुह धोकर सीधे बैठ कर पढाई शु
िनयिमत करने से अ व सिनय लाभ ा

होता ह। यह एक अनुभूत

कर द, एसा

योग ह

योग 2:
रा ी 8-9 बजे भोजन कर 30-45 िमिनट प यात सोजाए, रा ी को 2 बजे या 2.30 बजे उठकर हाथ मुह धोकर सीधे बैठ कर पढाई
शु करद इ से अपने आप पढाई म मन लगने लगेगा।

योग 3:
य द ब चो का मन अ यास म लगता न हो, तो शु ल प
प े सूय दे व को "ॐ सूयाय नमः" मं
इस

के

थम र ववार जो ईमली के 22 प े लेकर, उसमे से 11

का जप करते हएं
ु अपण कर। बाक बचे पान को आव यक पु तक म रखद।

योग से अ यास म मन लगने लगता ह एवं उ च िश ण क और मन एका

होता ह।

योग करने से लाभ:

वतमान समय म ब चे दन से लेकर रा ी 2-3-4 बजे तक पढाई करते रहते ह, और सुबह 5-6-7 बज उठ कर
फ़र से पढाई करना शु

करदे ते ह ज से पया

नींद न िमलने के कारण ब च को पढाई बोझ लगने लगती ह।

एवं जतना चाहे पढले ब चा प रणाम अनूकुल नह ं िमलपाता।

इसका कारण अती सरल ह। दन भर क थकावट के कारण, अपने दै िनक काय से वप रत बेठकर पढाई करने
के कारण एवं पया

नींद नह ं िमलने के कारण पढाइ के समय मन नह ं लग पाता। घर म अ य सद यो के

आवागमन के कारण ब च पढाई म एका ता नह ं होने के कारण भी एक ह

वषय को बार-बार लगातार पढते

रहना पडता ह इस मे समय क खपत अिधक होती ह, ज से ब चे तनाव सा महसूस करते ह।

कुछ ब चे सुबह ज द उठ कर पढाई करत ह एसी

थती म सुबह 5-6 बजे पढाई के िलये बेठने पर कुछ समय

के िलये एका ता रह पाती ह प यात घर वालो के जागने पर एका ता कम होने लगती ह।

इस िलये रा ी 8-9 बजे सोकर 2- 2.30 बजे उठने पर पढाई करने हे तु अिधक समय िमलजाता ह एवं वातावरण
म शांित होने के कारण एका ता लंबे समय तक बनी रहती ह।

फरवर 2011

13
37. ॐ सा व यै नमः ॥

74. ॐ शा

2. ॐ महाभ ायै नमः ॥

39. ॐ दे यै नमः ॥

76. ॐ शुभदायै नमः ॥

4. ॐ वर दायै नमः ॥

41. ॐ वा दे यै नमः ॥

6. ॐ प िनलयायै नमः ॥

43. ॐ ती ायै नमः ॥

8. ॐ प व

45. ॐ महाबलायै नमः ॥

॥ सर वती अ ो रनामावलीः ॥
1. ॐ सर व यै नमः ॥

38. ॐ सुरसायै नमः ॥

3. ॐ महामायायै नमः ॥

40. ॐ द यालंकारभू षतायै नमः ॥

5. ॐ

42. ॐ वसुदायै नमः ॥

ी दायै नमः ॥

7. ॐ प ा यै नमः ॥

44. ॐ महाभ ायै नमः ॥

9. ॐ िशवानुजायै नमः ॥

46. ॐ भोगदायै नमः ॥

11. ॐ

48. ॐ भामायै नमः ॥

कायै नमः ॥

10. ॐ पु तकभृते नमः ॥

47. ॐ भार यै नमः ॥

12. ॐ रमायै नमः ॥

49. ॐ गो व दायै नमः ॥

14. ॐ काम पायै नमः ॥

51. ॐ िशवायै नमः ॥

16. ॐ महापातक नािश यै नमः ॥

53. ॐ व

18. ॐ मािल यै नमः ॥

55. ॐ च डकायै नमः ॥

20. ॐ महाभुजायै नमः ॥

57. ॐ

22. ॐ महो साहायै नमः ॥

59. ॐ सौदाम यै नमः ॥

24. ॐ सुरव दतायै नमः ॥

61. ॐ सुभ ायै नमः ॥

26. ॐ महापाशायै नमः ॥

63. ॐ सुवािस यै नमः ॥

28. ॐ महांकुशायै नमः ॥

65. ॐ विन ायै नमः ॥

30. ॐ वमलायै नमः ॥

67. ॐ व ा पायै नमः ॥

32. ॐ व ु मालायै नमः ॥

69. ॐ

34. ॐ च

71. ॐ

यीमूतये नमः ॥

73. ॐ

गुणायै नमः ॥

ानमु ायै नमः ॥

13. ॐ परायै नमः ॥

50. ॐ गोम यै नमः ॥

15. ॐ महा व ायै नमः ॥

52. ॐ ज टलायै नमः ॥

17. ॐ महा यायै नमः ॥

54. ॐ व

19. ॐ महाभोगायै नमः ॥

56. ॐ वै ण यै नमः ॥

21. ॐ महाभागायै नमः ॥

58. ॐ

23. ॐ द या गायै नमः ॥

60. ॐ सुधामू य नमः ॥

25. ॐ महाका यै नमः ॥

62. ॐ सुरपू जतायै नमः ॥

27. ॐ महाकारायै नमः ॥

64. ॐ सुनासायै नमः ॥

29. ॐ पीतायै नमः ॥

66. ॐ प लोचनायै नमः ॥

31. ॐ व ायै नमः ॥

68. ॐ वशाला यै नमः ॥

33. ॐ वै ण यै नमः ॥

70. ॐ महाफलायै नमः ॥

35. ॐ च

72. ॐ

36. ॐ च

कायै नमः ॥

वदनायै नमः ॥

लेखा वभू षतायै नमः ॥

यावासायै नमः ॥

याचल वरा जतायै नमः॥

ा यै नमः ॥

ानैकसाधनायै नमः ॥

जायायै नमः ॥

काल ायै नमः ॥

प यै नमः ॥

75. ॐ शंभासुर मिथ यै नमः ॥
77. ॐ

वरा मकायै नमः ॥

78. ॐ र बीजिनह यै नमः ॥
79. ॐ चामु डायै नमः ॥

80. ॐ अ बकायै नमः ॥

81. ॐ मु डकाय हरणायै नमः ॥
82. ॐ धू लोचनमदनायै नमः ॥
83. ॐ सवदे व तुतायै नमः ॥
84. ॐ सौ यायै नमः ॥

85. ॐ सुरासुर नम कृ तायै नमः ॥
86. ॐ कालरा यै नमः ॥

87. ॐ कलाधरायै नमः ॥
88. ॐ

पसौभा यदािय यै नमः ॥

89. ॐ वा दे यै नमः ॥

90. ॐ वरारोहायै नमः ॥
91. ॐ वारा ै नमः ॥

92. ॐ वा रजासनायै नमः ॥
93. ॐ िच ांबरायै नमः ॥

94. ॐ िच ग धायै नमः ॥

95. ॐ िच मा य वभू षतायै नमः ॥
96. ॐ का तायै नमः ॥

97. ॐ काम दायै नमः ॥
98. ॐ व

ायै नमः ॥

99. ॐ व ाधरसुपू जतायै नमः ॥
100. ॐ

ेताननायै नमः ॥

101. ॐ नीलभुजायै नमः ॥

102. ॐ चतुवगफल दायै नमः ॥

103. ॐ चतुरानन सा ा यायै नमः॥
104. ॐ र म यायै नमः ॥
105. ॐ िनरं जनायै नमः ॥

106. ॐ हं सासनायै नमः ॥

107. ॐ नीलज घायै नमः ॥
108. ॐ
॥इित

व णुिशवा मकायै नमः॥

ी सर वित अ ो रशत नामाविलः॥

फरवर 2011

14

सर वती यं

(य

)

 िचंतन जोशी

सर वती यं
इस यं
यं

को अ गंध क

(य

)

याह अथवा रोली (कुमकुम) से अनार क कलम से भोजप

सुख जाने के प यात उसे अपने पूजा

या फेद कागज पर बनाले।

थान म अगली वसंत पंचमी तक रखले उ के बाद उसे बेहती पानी मे

वसजन कर दे एवं पुनः वसंत पंचमी पर नया यं बनाले।
आपGURUTVA KARYALAY

ारा संपूण

ाण- ित त एवं पूण चैत य यु

सर वती कवच एवं सर वती यं

सकते ह।

मं
सर वती कवच
मू य मा : 280 और 370

िस
सर वती यं
मू य : 280 से 1450 तक

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(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)

कर

फरवर 2011

15

प र ा म सफलता

ाि

हे तु

 िचंतन जोशी

रोज सुभह

नान आ दसे िनवृ त होकर

व छ कपडे पहन कर अपने इ

स मुख ३ अगरब ी जलाकर अपनी मनोकामना हे तु उनसे
उसके बाद ह पढाई आरं भ कर।

कोई भी एक सर वती मं
कर।

सर वती मूल मं
सर वती मं

के

ाथना करे ।

के ३,५ िमिनट जाप कर के अपनी पढाई शु

- ॐ ऎ ं सर व यै ऎ ं नमः।

- ॐ ऐं

सर वती गाय ी मं

-

१ - ॐ सर व यै वधमहे ,

मं

लीं महासर वती दे यै नमः।

भगवान

पु यै धीम ह । त नो दे वी चोदयात।

२ - ॐ वाग दे यै वधमहे काम रा या धीम ह । त नो सर वती: चोदयात।

अ य सभी जानकार आपको पूव के ईमेल म उप बध कराद गई ह।

प र ा (Exam) के

दन प र ा हे तु जाने से पूव भी इ

अगरब ी जलाकर अपनी मनोकामना हे तु उनसे

ाथना करे ।

के स मुख ३

प र ा (Exam) के िलये जाने से पूव दह +
ं िचनी(िम ी) अथवा गुड खाकर
िनकले।

प र ा के दन कपडे पहनते समय शट हो या पट अपना दाह ना (Right)
हाथ एवं दा हना (Right) पैर शट पे ट म पेहले डाले।

जुते एवं मोजे पहनते समय भी पहले जुते या मोजे दा हना (Right) पैर म
व ानो के अनुशार कमरे से बाहर िनकलते समय दा हना (Right) पैर पहले

बाहर िनकाले। पर
कर।

वर शा

ाक

के अनुसार पर

म भी पहले दा हना (Right)

वेश कर।

ाक

म भी वर के अनु प ह पैर बढ़ा कर

ी गणेश बु

कारक

और िश ा के

ह बुध के अिधपित दे वता

ह। प ना गणेश बुध के सकारा मक

भाव को बठाता ह एवं नकारा मक
भाव

को

गणेश के
म वृ

कम करता ह।. प न

भाव से यापार और धन

म वृ

पढाई हे तु भी

होती ह। ब चो क
वशेष फल

प ना गणेश इस के

बु

कूशा

भाव से ब चे

होकर

उसके

होती

ह। मानिसक अशांित को कम करने म
मदद करता ह, य
हर

व करण शांती

करती

ारा अवशो षत

दान करती ह,

के शार र के तं को िनयं त
ह।

जगर,

फेफड़े , जीभ,

म त क और तं का तं इ या द रोग
म सहायक होते ह। क मती प थर
मरगज के बने होते ह।

Rs.550 से Rs.8200 तक

ा हे तु जाते समय ात: आधा कलो दध
ू मं दर म दे ने से पर

पर

ा प का उ र िलखने से पूव गणेश जी का मरण करते हए
ु 11 बार “गं गणपतये नम:” मं का जाप कर। ऐसा करने

से पर
नोट:

ा म सफलता अव य िमलती है ।

वर चलना अथात: नाक के जस िछ

से

ा म सफलता

द ह

पर

िमलती है ।

पैर बढ़ा कर वेश

ा म जाते समय आपका जो वर चल रहा हो, उसी के

अनु प पैर पहले बाहर िनकाल। पर

प ना गणेश

आ म व ास म भी वशेष वृ

पहने।

िस

ास चल रहा हो उसे

वर चलना कहते ह।

फरवर 2011

16

व ा ाि के िलए वा तु के उपाय

 िचंतन जोशी
व ा अ ययन करते समय आने वाले व न-बाधा दरू कर उ म व ा

करने हे तु वा तु से संबंिधत उपाय से

आपका मगदशन कर रहे है ।

पढाई करते समय पूव या उ र दशा क तरफ मुख कर कर पढाई कर। व ानो के मत से पूव म मुख करके पढाई
करने से सूय क सकारा मक ऊजा ा होती ह एवं उ र म मुख करके पढाई करने से मन क एका ता म वृ
ब चो का अ ययन क

ईशान कोण म अिधक लाभ दायक माना गया ह। य द ईशान कोण म अ ययन क

होती ह।
क सु वधा

नतो तो पूव म बनाना लाभ दायक होता ह।
पढाई मेज पर

फ टक का ी यं

थापीत करने से

मरण श

ती े होती ह एवं खराब वचार दरू होकर उ म

कार

क िचंताधारा उ प न होती ह, एवं मां सर वती और ल मी का आिशवाद सदै व बना रे हता ह।
पढाई मेज पर
जीवन म

फ टक लोब (

टल

लोब) रखना भी लाभ दायक होता ह।

थर नह ं रहकर आगे बढ़ने क

लोब को रोज घुमाने से ब चे के मन म

ेरणा उ प न होती रहती है , जो उसे जीवन म आगे बढने का माग

दान

करती ह।
दरवाजे क ओर पीठ करके पढाई करने से

मरण श

कमजोर होती ह।

सीड , बीम एवं से फ के नीचे बैठकर अ ययन करने से अनाव यक िचंता एवं तनाव बढता ह।
अ ययन क

वाय य कोण म होने से पढाई म एका ता नह ं रहती एवं ज द याद नह ं रहता। य द याद रह जाये तो

वायु क भांित अ थरता रहती ह।
अ ययन क

म टे लीफोन, ट वी, मोबाईल, अ वे रयम, आईना, या अ य गितशील रहने वाली व तुए,ं उ च खपत वाले

व ुत उपकरण नह ं रखने चा हए। इन व तुओं के कारण एका ता म कमी आती ह।
अ ययन क

म कं यूटर को द

अ ययन क

म हमेशा द

ण-पूव म रखना चा हए। अ यथा द

ण या प

ण या प

म के म य म भी रखा जा सकता ह।

म क ओर िसर रखकर सोना चा हए।

ब चो के व ा ययन हे तु ईशा य म अ य कमरो से नीचा कमरा रखे।
अ ययन क

क द वार का रं ग ह का रखना लाभदायक होता ह।

पढाई करने के प यात कताब खुली नह ं रखनी चा हए। एसा माना जाता ह क खुली कताब नकारा मक ऊजा उ प न

करती ह। कताब हमेशा सु यव थत रखे। य द थोडे समय के िलये कताब रखकर कह ं जाना पडे तो डवाईडर के तौर
पर मोर पंख या मौली अथवा लाल रं ग क
य द अ ययन क

रबन रख कर उसे बंध करके जाये।

म नान गृ ह या शौचालय हो, तो उसका दरवाजा हमेशा बंद रख। खुले दरवाजे से नकारा मक ऊजा

िनकलती ह।
एक से अिधक ब चे घर म हो, तो अ ययन क

म प रवार क सामू हक फोटो लगाएं। ज से ब च म आपस म

िमलजुल कर काय करने क भावना उ प न ह एवं उनके बच म लडाई-झगड़े नह ं होते।
वा तु के इन उपाय को अपना कर व ा यास म आने वाली बाधाओं से सरलता से मु

ा क जा सकती है ।

फरवर 2011

17

योितष म व ा ाि एवं उ च िश ा के योग

 िचंतन जोशी,
ज म कुंडली का अ ययन कर मालूम कया जा सकता है
योितष शा

क जातक म उ च िश ा का योग ह नह ं ह।

के अनुशार व ा का वचार ज म कुंडली म मु यतः पंचम भाव से कया जाता ह। व ा एवं वाणी का

िनकट थ संबध होता ह। अतः व ा योग का वचार करने के िलए

व तक.ऎन.जोशी

और बुध क

तीय भाव भी सहायक होता ह।

थित से व ा ाि के िलये उपयोगी जातक का मानिसक संतल
ु न एवं मन क

आंकलन कया जाता ह। कई व ानो के अनुशार बुध तथा शु

थित से य

थती का

व ता एवं सोचने क श

का

वचार कया जाता है ।
दशम भाव से व ा से अ जत यश का वचार कया जाता है ।
जातक को उ च िश ा म सफलता
उपाय

या ह?

आज के आधुिनक युग म

होगी या नह ं। य द अवरोध उ प न करने वाले योग ह तो उसे दरू करने के

वयं के सवागीण वकास के िलए िश ा क भूिमका अहम होती ह। आज के दौर म चाहे

ी हो या पु ष िश ा सब के िलए आव यक होती है ।
व ानो के मत से
के वामी

ह क

योितष शा

के िस ांत के अनुसार िश ा का मु य वचार

थित से कया जाता ह। जातक क वाणी एवं

मरण श

तीय एवं पंचम भाव तथा इन भाव
का वचार बुध एवं

ान का वचार गु

से कया जाता ह।
उ च िश ा के योग
व ानो के अनुशार

तीय भाव म बृ ह पित और बुध के युित हो, तो जातक क िश ा और बु म ा उ म होती ह।

य द बुध, बृ ह पित और शु
य द बुध, गु

नवम थान म ह , तो उ च िश ा के योग बनते ह।

और शिन नवम थान म हो, तो उ च िश ा के योग बनते ह।

य द ज म कुंडली म बुध एवं गु बलवान हो, तो उ च िश ा के योग बनते ह।
य द ज म कुंडली म बुध का संबंध 2, 3, 4 और 9 भाव से हो, तो उ च िश ा के योग बनते ह।
य द ज म कुंडली म चतुथश 6, 8 या 12 व भाव म
एवं चतुथ भाव के कारण चं

थत हो या नीच रािश थ, अ त हो या श ु रािश म

थत हो

से पी ड़त हो, तो जातक का अशांत एवं चंचल होता ह उसका मन पढ़ाई म अिधक नह ं

लग पात।
यद

तीय भाव का

वामी या गु क या

य द पंचम भाव म बुध

य द क या

थत हो, तो उ च िश ा के योग बनते ह।

थत हो या बुध क पंचम भाव पर

य द पंचम भाव म गु और शु
य द पंचम भाव का

कोण म

क युित हो, तो उ च िश ा के योग बनते ह।

वामी पंचम भाव म ह गु या शु

कोण म बुध, गु

हो तो उ च िश ा के योग बनते ह।

एवं शु

के साथ युित बना रहा हो, तो उ च िश ा के योग बनते ह।

क युित हो, तो उ च िश ा के योग बनते ह।

फरवर 2011

18
य द जातक म गु
व ा ययन म अ
व ा ाि

का संबंध

तीय, चतुथ व नवम भाव से हो, या चतुथश का नवमेश से संबंध हो, तो जातक

त होते है ।

म सफलता के योग

योितष शा

के अनुशार जातक म ल न, ल नेश, चतुथ भाव, चतुथश और बुध क भूिमका व ा ययन म मह वपूण

मानी गई ह। इस भाव एवं भाव के

वामी से बुध का शुभ संबंध जातक को व ा

ाि

म अव य सफलता

दान

करता ह।
य द जातक म शिन का

भाव गु ,

तीय भाव,

तीयेश, चतुथ भाव, चतुथश पर हो, जातक को व ा ाि

म सफलता

दान करता ह।
गु

एवं शिन क नवम भाव म युित, जातक को व ा

य द जातक म पंचम भाव म शु
ाि

वामी पंचम भाव म

म सफलता

म सफलता

दान करता ह।

थत हो या बुध के साथ नवम भाव के

वामी क युित हो, तो

क युित हो या गु

और शु

क क युित हो, तो जातक क

व ा ययन

िच होती ह। संभवत जातक क आजी वका का मु य साधन उसक िश ा हो सकती ह।

य द जातक म

तीय भाव म गु

य द जातक म पंचम भाव का
दरू थ

ाि

दान करता ह।

दान करता ह।

य द जातक म एकादश भाव म बुध और गु
म गहर

म सफलता

थत हो, तो जातक को व ा

य द जातक म नवम भाव का
जातक को उ च िश ा

ाि

थान म व ा

य द जातक म ल न का
थान म व ा

या शु

थत हो, तो जातक अनेक व ाओं का जानकार होता ह।

वामी शुभ क

थान, उ च थ या िम गृ ह म

करता ह।
वामी ल नेश उ च

थती म हो या शुभ

ह यु

और

करने के योग होते है ।

य द जातक म पंचमेश नवम या दशम भाव म
य द जातक म पंचम भाव म शुभ

थान म

हो, तो जातक वदे श म या दरू थ

थत हो, तो जातक अनेक व ा का धनी होता ह।

ह शुभ रािश म

य द जातक म पंचमेश क दशम या एकादश भाव म
य द जातक म गु

थत हो, तो जातक को वदे श म या

थत हो, तो जातक व ान होता है ।
थत हो, तो जातक व ान होता है ।

थत हो, तो जातक को उ च िश ा

होती है ।

पढाई से संबंिधत सम या
या आपके लडके-लडक क पढाई म अनाव यक

प से बाधा- व न या

कावटे हो रह ह? ब चो को अपने पूण

प र म एवं मेहनत का उिचत फल नह ं िमल रहा? अपने लडके-लडक क कुंडली का व तृ त अ ययन अव य
करवाले और उनके व ा अ ययन म आनेवाली
बार म व तार से जनकार

कावट एवं दोषो के कारण एवं उन दोष के िनवारण के उपायो के

कर।

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फरवर 2011

19

सव काय िस
जस

म िस

को लाख
(लाभ)

कवच के

और प र म करने के बादभी उसे मनोवांिछत सफलताये एवं कये गये काय

ा नह ं होती, उस य

मुख लाभ: सव काय िस

शांत कर धारण करता य
उ नित ाि

कवच अव य धारण करना चा हये।

ारा सुख समृ

और नव

के जीवन से सव कार के द:ु ख-दा र
कार के शुभ काय िस

यवसाय करता होतो कारोबार मे वृ

ह के नकारा मक भाव को

का नाश हो कर सुख-सौभा य एवं

होते ह। जसे धारण करने से य

यद

होित ह और य द नौकर करता होतो उसमे उ नित होती ह।

कवच के साथ म सवजन वशीकरण कवच के िमले होने क वजह से धारण करता

क बात का दसरे

 सव काय िस

को सव काय िस

कवच के

होकर जीवन मे सिभ

 सव काय िस

कवच

ओ पर

भाव बना रहता ह।

कवच के साथ म अ ल मी कवच के िमले होने क वजह से य

सदा ल मी क कृ पा एवं आशीवाद बना रहता ह। ज से मां ल मी के अ

पर मां महा
प (१)-आ द

ल मी, (२)-धा य ल मी, (३)-धैर य ल मी, (४)-गज ल मी, (५)-संतान ल मी, (६)- वजय
ल मी, (७)- व ा ल मी और (८)-धन ल मी इन सभी
 सव काय िस

कवच के साथ म तं

होती ह, साथ ह नकार मन श
कवच के

होता ह।

यो का कोइ कु भाव धारण कता

ारा होने वाले द ु

पर नह ं होता। इस

भावो से र ाहोती ह।

कवच के साथ म श ु वजय कवच के िमले होने क वजह से श ु से संबंिधत

सम त परे शािनओ से

र ा कवच के िमले होने क वजह से तां क बाधाए दरू

भाव से इषा- े ष रखने वाले य

 सव काय िस

पो का अशीवाद


वतः ह छटकारा
िमल जाता ह। कवच के

का चाहकर कुछ नह

भाव से श ु धारण कता

बगड सकते।

अ य कवच के बारे मे अिधक जानकार के िलये कायालय म संपक करे :
कसी य

वशेष को सव काय िस

कवच दे ने नह दे ना का अंितम िनणय हमारे पास सुर

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त ह।

फरवर 2011

20

व ा ाि म कावट के योग

 िचंतन जोशी,
िश ा

ाि

व तक.ऎन.जोशी

म बाधा के योग

ज म कुंडली म उ च िश ा का योग होने पर भी कभी-कभी उ च िश ा ा नह ं कर पाता। इस का कारण ह, िश ा

ाि

कावट करने वाले योग।
व ानो के मत से

यादातर िश ा

ाि

य द पंचमेश 6, 8 या 12 व भाव म

के समय य द राहु क महादशा चल रह हो पढ़ाई म कावट आती है ।

थत हो या कसी अशुभ

जातक उिचत िश ा ा नह ं कर या उसक िश ा
य द जातक म गु

व म ् व ा वा नपानािन भु

अथातः धन, व ा, वाणी एवं

य द ज म कुंडली म

थत हो, शतृ ग ृ ह हो, तो िश ा

ाि

वयं के अिधकार क व तु इ या द का वचार
ह, अशुभ, पापी या ू र

थती म जातक को दरू थ

तीय भाव म अशुभ

ह से

हो, तो

म बाधा उ प न करता है ।

ु म॥ (फलद पका अ याय १
म ् द ा या थम ् प का वा कुटब

य द ज म कुंडली म अ म भाव म नीच
कर लेता ह। इस

थत हो या अशुभ

बाधा आती ह।

या बुध 3, 6, 8 या 12 व भाव म

फलद पका के अनुशार

ाि

ाि

ह के साथ

ोक १०)

तीय भाव से करना चा हए।

थत होने से भी जातक कई बार उ च िश ा क

थान या वदे श म व ा ययन के योग बनते ह।

थत हो या अशुभ

हो का

भाव हो, तो व ा ाि म बाधा हो सकती

ह।
य द ज म कुंडली म सूय, शिन एवं राहु क अलग-अलग
य द ज म कुंडली म अकेला गु

तीय भाव म

ी के

भाव के कारण व ा ाि म अिधक

थत हो, तो जातक ने

पाता ह।

नवर
शा
ज ड़त

वचन के अनुसार शु
ी यं

सुवण या रजत म िनिमत

कहलाता ह। सभी र ो को उसके िन

को अनंत ए य एवं ल मी क

ह। नव ह को

ी यं

ाि

पव

को लगते ह, वह गंगा जल के समान प व
वचन ह। इस

करके बनावाए जाते ह।

क हई
ु व ा का उिचत उपयोग नह ं हो

ी यं
के चार और य द नवर

जड़वा ने पर यह नवर

थान पर जड़ कर लॉकेट के

प म धारण करने से

को एसा आभास होता ह जैसे मां ल मी उसके साथ

ह क अशुभ दशा का धारण करने वाले

रहता ह एवं

अमृ त से उ म कोई औषिध नह ,ं उसी

ी यं

होती ह। य

के साथ लगाने से

ह। गले म होने के कारण यं

एसा शा ो

ज ड़त

कावटे आती ह।

नान करते समय इस यं

पर

पर

भाव नह ं होता

पश कर जो जल बंदु शर र

होता ह। इस िलये इसे सबसे तेज वी एवं फलदािय कहजाता ह। जैसे
कार ल मी

कार के नवर

ज ड़त

ाि
ी यं

के िलये
गु

ी यं

से उ म कोई यं

व कायालय

संसार म नह ं ह

ारा शुभ मुहू त म

ाण

ित त

फरवर 2011

21
य द ज म कुंडली म अकेला शु
य द ज म कुंडली म शु

तीय भाव म

अ म भाव म

थत हो, तो जातक के उ च िश ा के योग बनते ह।

थत हो कर

तीय भाव पर

ी होने पर िश ा ाि म बाधाएं हो सकती

ह।
य द ज म कुंडली म राहु 6,8 या 10 भाव म
अ ययन कसी

थत हो, तो जातक का व ा अ ययन म मन नह ं लगता, य द व ा

कार से पूण करले, तो भी जातक उस व ा का उिचत इ तेमाल नह ं कर पाता ह।

य द ज म कुंडली म शिन पंचम भाव या अ म भाव म

थत हो, तो भी िश ा अधुर रहती ह या िश ा

कसी ना कसी कारणो से बाधाएं उ प न होती ह। जातक

ाि

िश ा का उिचत इ तेमाल नह ं कर पाता ह।

िश ा म अवरोध उ प न करने वाले कारण
य द जातक म राहु अगर पंचम भाव म पंचमेश से युत या

हो और अशुभ

ह से पी ड़त हो, तो व ा

हण म

बाधा आती है ।

य द जातक म पंचमेश

ादश भाव म

से िनबल हो, तो िश ा

ाि

य द जातक म

तीय भाव का

थत होकर अ त हो या नीच रािश म

थत हो, या अ य

हो के अशुभ

भाव

कावट आती ह।
वामी नवम भाव म िनबल हो, पाप पी ड़त हो तो व ा ययन म बाधाएं उ प न होता

ह।
य द जातक म बुध और गु

िनबल हो,

क भाव म हो, अ त हो, अशुभ

तो व ा ययन म बाधा आती ह। जातक को उ म िश ा क
व ा अ ययन क आयु म य द अशुभ
से संबंिधत

ह अशुभ

शिन पंचम भाव से

ाि

ह से पी ड़त हो या नीच रािश म

थत हो,

नह ं होती है ।

ह क महादशा, अंतरदशा, शिन क साढ़े साती का भाव हो या गोचर म िश ा

थित म हो तो भी व ा ययन म बाधा आती ह।
कोण म गोचर कर रहा हो या गु

भाव पंचम का नाश होता ह ज से व ा

ाि

ित जातक क

कोण म गोचर कर रहा हो, तो िश ा के

मुख

कावटे आती ह।

य द जातक म पंचम भाव, पंचमेश, तृ तीयेश, बुध या गु
यवधान आता ह और िश ा के

पंचमेश से

पर एकािधक

ह का अशुभ

िच कम रहती ह। वशेष

भाव अशुभ

भाव हो, तो व ा

ाि

हो क महादशा या अंतरदशा

म होता ह।
व ा

ाि

नोट : य द

म आनेवाली बाधाओं से मु
ह क अशुभ

के िलये

ह शांित के उपाय करने चा हए।

थित के कारण या अ य कारण से व ा ाि म बाधा आ रह हो अथवा

या एका ता क कमी हो, सर वती कवच एवं यं

का

योग करने से लाभ

मरण श

कमजोर हो

होता ह।

सर वती कवच एवं यं
उ म िश ा एवं व ा

ाि

यु

और सर वती यं

सर वती कवच

के िलये वंसत पंचमी पर दलभ
तेज वी मं श

के

ारा पूण ाण- ित त एवं पूण चैत य

योग से सरलता एवं सहजता से मां सर वती क कृ पा

कर।

मू य:280 से 1450 तक

फरवर 2011

22
िश ा

ाि

क बाधाएं दरू करने के उपाय

य द ज म कुंडली म उ च िश ा का योग हो, कंतु व ा ययन के समय अशुभ
योग हो या

कावटे आरह हो, तो संबंिधत

लाभदायक होता ह।
ब चे को

हो के अशुभ

ल न के अनुशार र

ह से संबंिधत यं

ित बुधवार या पंचमी के

धारण से व ा
ाि

हे तु मा ण य धारण करना चा हये।

वृ ष ल न वाले जातक को व ा

ाि

हे तु प ना धारण करना चा हये।

िमथुन ल न वाले जातक को व ा

ाि

मेष ल न वाले जातक को व ा

ाि

हे तु ह रा धारण करना चा हये।

िसंह ल न वाले जातक को व ा

ाि

हे तु पीला पुखराज धारण करना चा हये।
ाि

ाि

क ल न वाले जातक को व ा

हे तु नीलम धारण करना चा हये।

 सभी

ाि

हे तु मूंगा धारण करना चा हये।

धनु ल न वाले जातक को व ा

ाि

हे तु ह रा धारण करना चा हये।

कुंभ ल न वाले जातक को व ा

ाि

हे तु प ना धारण करना चा हये।

मीन ल न वाले जातक को व ा

ाि

हे तु मोती धारण करना चा हये।

 पर ा म मनोनुकूल फल

करने हे तु तो कसी मास के शु ल प

दोष

मु

एवं

मू य पर

करने

कार के र

एवं उपर

आपक आव य ा अनुशार सभी
मू य एवं गुणव ा के आधार पर

हे तु पीला पुखराज धारण करना चा हये।

धनु ल न वाले जातक को व ा

कार के र

हे तु संपक कर।

हे तु नीलम धारण करना चा हये।
ाि

उपर

यापार

हे तु मूंगा धारण करना चा हये।

क या ल न वाले जातक को व ा

एवं उपर

एवं

ाि

था पत करना

 हमारे यहा सभी

कक ल न वाले जातक को व ा

वृ

को अपने घर म

दन चांद क शलाका को मधु म डु बाकर ब चे क

िलखे।

तुला ल न वाले जातक को व ा

कावटे आने का

भाव को कम करने हे तु अ य उपायो को भी अपनाया जासकता ह।

व ान बनाने के िलये

ज ा(जीभ) पर "ऎ"ं मं

ह क शांित हे तु

ह क दशा के कारण

करने हे तु संपक कर।

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क पंचमी से

लेकर अगले कृ ण प

क पंचमी

तक अथात 15 दन तक गणेश जी को १०८ दवा
ू "ॐ गं गणेशाय नमः" का जप करते हए
ु अ पत कर। पर

ा के िलये

जाते समय अपनी जेव म दा हनी तरफ दवा
ू लेकर जानेसे सफलता िमलती ह।




वसंत पंचमी के दन सर वती जी क पूजा करने के बाद फ टक माला पर ॐ ऐं सर व यै नमः मं का १००८ बार जप कर।
गु वार के दन धिमक थान पर धािमक पु तक दान करने से भी व ा लाभ होता ह।
बुधवार एवं गु वार को कसी ज र मंद ब चे को िश ा से सांबंिधत सहायता करने से लाभ
व ा

ाि

ित दन

हे तु

ी गणेशजी के

नान कर

ादश नाम का

होता ह।

मरण करने से िश ा से सांबंिधत संम याएं दरू होती ह। अतः

व छ कपडे पहन कर गणेशजी क

ितमा या िच

के सामने इस

ोक का अपनी

ा के

अनुशार पाठ कर।
शु ला बरं धरं देव शिशवण चतुभु जम।
सुमुख ैक द त

स नवदनं यायेत सवा वनोपशा तये॥

क पलो गजकणकः। लंबोदर

धू केतुग णा य ो भाल चं ो गजाननः।
ितमाह दोनो प ो क गणेश चतुथ को गणेश जी क
मं का १०८ बार जप करने से व ा लाभ होता ह।

वकटो वन नाशो वनायकः॥

ादशैतािन नामािनयः पठे छुणयाद डप॥

विधवत पूजा-अचना करके ॐ गं गणेशाय नमः या गं गणेपतये नमः

फरवर 2011

23
अ य उपाय
सर वती से संबंिधत मं

का िनयिमत जप करने से व ा म सफलता के िलए िन नो

मं

का जप करना

चा हए।

"ॐ

ीं ऐं वागवा दिन भगवती अहनमुख िनवािसिन सर वती ममा ये

इसके साथ ह बु
बु

के

मुख दे वता

थम पू य व न वनाशक

काशं कु

कु

ी गणेशजी का

वाहा ऐं नमः।"

यान करने से व ा और

का वकास होता ह एवं व ाअ ययन म आने वाली बाधाएं दरू होती ह।

य द जातक म िश ा से संबंिधत
बल

ह शुभ हो कर िनबल हो और अपना शुभ

दान करने के िलए उससे संबंिधत

य द जातक का क

िच िश ा के

सुनेला धारण करना चा हये या गु

ह का र

भी धारण कया जा सकता है ।

ित कम हो, तो उसे गु

(बृ पित) यं

एवं उ से संबंिधत र

पुखराज,

(बृ पित) से संबंिधत उपाय करने चा हये।

य द जातक का क

िच िश ा के

सफलता हे तु बुध यं

एवं उ से संबंिधत र

िस

भाव दे ने म असमथ हो, तो उसे

ित कम हो,

मरण श

एवं तक श

बढाने के िलए एवं िश ा म

प ना धारण करना चा हये या बुध से संबंिधत उपाय लाभदायक

होते ह।

ादश महा यं
यं

को अित

ािचन एवं दलभ
यं ो के संकलन से हमारे वष के अनुसंधान

 परम दलभ
वशीकरण यं ,

 सह ा ी ल मी आब यं

 मनोवांिछत काय िस

 पूण पौ ष ाि कामदे व यं

 भा योदय यं

 रा य बाधा िनवृ

.

ारा बनाया गया ह।

 आक मक धन ाि यं

यं

यं

 रोग िनवृ

यं

 गृ ह थ सुख यं

 साधना िस

 शी

 श ु दमन यं

उपरो

ववाह संप न गौर अनंग यं

सभी यं ो को ादश महा यं के प म शा ो

कये जाते ह। जसे

विध- वधान से मं

िस

यं
पूण

थापीत कर बना कसी पूजा अचना- विध वधान वशेष लाभ

ाण ित त एवं चैत य यु

कर सकते ह।

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फरवर 2011

24

रािश र
मूंगा

ह रा

प ना

मोती

माणेक

प ना

Red Coral

Diamond
(Special)

Green Emerald

Naturel Pearl
(Special)

Ruby
(Old Berma)
(Special)

Green Emerald

(Special)
Munga 5.25" Rs. 1050
Munga 6.25" Rs. 1250
Munga 7.25" Rs. 1450
Munga 8.25" Rs. 1800
Munga 9.25" Rs. 2100
Munga 10.25" Rs. 2800
** All Weight In Rati

तुला रािश:

Heera–10 cent Rs.
4100
Heera-20 cent Rs.
8200
Heera-30
cent Rs. 12500
Heera-40
cent Rs. 18500
Heera-50
cent Rs. 23500

All Diamond are Full
White Colour.

वृ

क रािश:

(Special)
Emerald - 5.25" Rs.
9100
Emerald 6.25" Rs. 12500
Emerald - 7.25" Rs.
14500
Emerald 8.25" Rs. 19000
Emerald 9.25" Rs. 23000
Emerald- 10.25"
Rs. 28000
** All Weight In Rati

Pearl - 5.25"

Rs. 910

Pearl - 6.25"

Rs. 1250

Pearl - 7.25"

Rs. 1450

Pearl - 8.25"

Rs. 1900

Pearl - 9.25"

Rs. 2300

Ruby – 2.25"
12500
Ruby – 3.25"
15500
Ruby – 4.25"
28000
Ruby - 5.25"
46000
Ruby - 6.25"
82000

Rs.
Rs.
Rs.
Rs.
Rs.

Pearl- 10.25" Rs. 2800
** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

(Special)
Emerald - 5.25" Rs.
9100
Emerald 6.25" Rs. 12500
Emerald - 7.25" Rs.
14500
Emerald 8.25" Rs. 19000
Emerald 9.25" Rs. 23000
Emerald- 10.25"
Rs. 28000
** All Weight In Rati

धनु रािश:

मकर रािश:

कुंभ रािश:

मीन रािश:

नीलम

नीलम

पुखराज

ह रा

मूंगा

पुखराज

Diamond
(Special)

Red Coral

Y.Sapphire

B.Sapphire

B.Sapphire

Y.Sapphire

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

Heera–10 cent Rs.
4100
Heera-20 cent Rs.
8200
Heera-30
cent Rs. 12500
Heera-40
cent Rs. 18500
Heera-50
cent Rs. 23500

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* उपयो

Munga 5.25" Rs. 1050
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Y.Sapphire -5.25" Rs.
30000
Y.Sapphire - 6.25" Rs.
37000
Y.Sapphire - 7.25" Rs.
55000
Y.Sapphire - 8.25" Rs.
73000
Y.Sapphire - 9.25" Rs.
91000
Y.Sapphire- 10.25"
Rs.108000

B.Sapphire - 5.25" Rs.
30000
B.Sapphire - 6.25" Rs.
37000
B.Sapphire - 7.25" Rs.
55000
B.Sapphire - 8.25" Rs.
73000
B.Sapphire - 9.25" Rs.
91000
B.Sapphire- 10.25"
Rs.108000

B.Sapphire - 5.25" Rs.
30000
B.Sapphire - 6.25" Rs.
37000
B.Sapphire - 7.25" Rs.
55000
B.Sapphire - 8.25" Rs.
73000
B.Sapphire - 9.25" Rs.
91000
B.Sapphire- 10.25"
Rs.108000

Y.Sapphire -5.25" Rs.
30000
Y.Sapphire - 6.25" Rs.
37000
Y.Sapphire - 7.25" Rs.
55000
Y.Sapphire - 8.25" Rs.
73000
Y.Sapphire - 9.25" Rs.
91000
Y.Sapphire- 10.25"
Rs.108000

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

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वजन और मू य से अिधक और कम वजन और मू य के र

एवं उपर

भी हमारे यहा यापार मू य पर उ ल ध ह।

फरवर 2011

25

योितष और व ा वचार

 िचंतन जोशी
हर माता- पता क कामना होती है क उनका ब च पर
उ च अंक का

ा म उ च अंक से उ ीण हो एवं उसे सफलता िमले।

यास तो सभी ब च करते ह पर कुछ ब च असफल भी रह जाते ह। कई ब च क सम या होती है

क कड़ मेहनत के बावजूद उ ह अिधक याद नह ं रह पाता, वे कुछ जबाव भूल जाते ह। जस वजह से वे ब च पर

म उ च अंक से उ ीण नह ं होपाते या असफल होजाते ह।
योितष शा

के अनुशार व ा का वचार ज म कुंडली म पंचम भाव से कया जाता ह। व ा एवं वाणी का िनकट थ

संबध होता ह। अतः व ा योग का वचार करने के िलए

और बुध क

थित से व ा ाि के िलये उपयोगी जातक का मानिसक संतुलन एवं मन क

कया जाता ह। कई व ानो के अनुशार बुध तथा शु
है ।

 शा ो के अनुशार बुध व ा, बु
होती है , चाहे वह कसी

 जातक म व ा क

तीय भाव भी सहायक होता ह।

और

कार क

ान का

थित से य
वामी

क व ता एवं सोचने क श

थती का आंकलन
का वचार कया जाता

ह ह, इस िलये 12 वष से 24 वष क उ

व ा ययन क

व ा हो, इस अ वध को बुध का दशा काल माना जाता ह।

थरता, अ थरता एवं वकास का आंकलन बृ ह पित (गु ) से कया जाता ह।

 वदे शी भाषा एवं िश ा का वचार शिन क

थित से कया जाता ह।

 योितष के अनुशार असफलता का कारण ब च क ज मकुंडली म चं मा और बुध का अशुभ भाव है ।
चं मा और बुध का संबंध व ा से ह,

चंचलता िलए होता है तो मन-म त क म

यो क मन-म त क का कारक चं मा है , और जब चं

अशुभ हो तो

थरता या संतुलन नह ं रहता ह, एवं बुध क अशुभता क वजह से ब च म

तक व कुशा ता क कमी आती है । इस वजह से ब च का मन पढाई मे कम लगता ह और अ छे अंक से ब चा
उ ीण नह ं हो पाता।

शा ो

मत के अनुशार दगा
ु बीसा यं

गया ह। दगा
ु बीसा यं

ारा य

दगा
ु बीसा यं

दभा
ु य को दरू कर य

के सोये हवे
ु भा य को जगाने वाला माना

को जीवन म धन से संबंिधत सं याओं म लाभ

आिथक सम यासे परे शान ह , वह य

य द नवरा

ाण

होता ह। जो य

ित त कया गया दगा
ु बीसा यं

को

थाि

लेता ह, तो उसक धन, रोजगार एवं यवसाय से संबंधी सभी सम य का शी ह अंत होने लगता ह। नवरा

ाण

ह, य

ित त दगा
ु बीसा यं

शी ह अपने यापार म वृ

पूण चैत य दगा
ु बीसा यं
ह।

को अपने घर-दकान
-ओ फस-फै टर म

एवं अपनी आिथक

था पत करने से वशेष लाभ

थती म सुधार होता दे खगे। संपूण

को शुभ मुहू त म अपने घर-दकान
-ओ फस म

ाण

कर

के दनो

होता

ित त एवं

था पत करने से वशेष लाभ

होता

मू य: Rs.550 से Rs.8200 तक

फरवर 2011

26

भारतीय ऋ ष मुिनओं ने व ा का संबंध व ा क दे वी सर वती से बताय ह। तो जस ब च क ज मकुंडली म
चं मा और बुध का अशुभ
स न कर उनक कृ पा ा

भावो हो उसे व ा क दे वी सर वती क कृ पा भी नह ं होती। एसे मे मां सर वती को
चं मा और बुध

ह के अशुभ

भाव कम कर शुभता

क जा सकती है ।

मां सर वती को स न कर उनक कृ पा ा करने का त पय यह कतई ना समजे क िसफ मां क पूजा-अचना करने से ब चा
पर

ा म अ छे अंक से उ ीण हो एवं उसे सफलता िमल जायेगी यो क मां सर वती उ ह ं ब च क मदद करती ह, जो ब चे

मेहनत मे व ास करे ते और मेहनत करते ह। बना मेहनत से कोइ मं -तं -यं पर

ा म अ छे अंक से उ ीण होने मे सहायता

नह ं करता है । मं -तं -यं के योग से एक तरह क सकार मक सोच उ प न होती है जो ब च को पढाई मे उ क

मरण श

का वकास करती ह।

ज म कुंडली म य द बुध व ह , िम
लेखन कला उ च कोट

ह , उ च थ हो या शुभ

हो तो जातक क िलखावट एवं

क होती ह।

ज म कुंडली म पंचम भाव म य द बृ ह पित (गु ) अकेला
प से

हो से

थत हो तो जातक के व ा ाि

थाई या अ थाई

ाभा वत हो सकती ह

ज म कुंडली म पंचम भाव म बुध एवं शु

क युित को भी व ा ाि

के िलये बाधन माना गया ह।

ज म कुंडली म पंचम भाव का वामी 6,8 या 12 भाव म हो तो जातक क म य भाग

क मा यिमक िश ा

ाभा वत हो सकती ह।

ज म कुंडली म बलवान शिन का

भाव भी पर

ा म हमेशा माना गया ह। इस योग म

यादातर ब चे पर

ाम

असफल होते दे खे गए ह।

मं
" ी यं " सबसे मह वपूण एवं श
है । जो न केवल दसरे
ू य

िस

फ टक ी यं

शाली यं है । " ी यं " को यं राज कहा जाता है यो क यह अ य त शुभ फ़लदयी यं

ो से अिधक से अिधक लाभ दे ने मे समथ है एवं संसार के हर य

है । पूण ाण- ित त एवं पूण चैत य यु

" ी यं " जस य

िस होता है उसके दशन मा से अन-िगनत लाभ एवं सुख क

के िलए फायदे मंद सा बत होता

के घर मे होता है उसके िलये " ी यं " अ य त फ़लदायी

ाि होित है । " ी यं " मे समाई अ ितय एवं अ

यश

मनु य क सम त शुभ इ छाओं को पूरा करने मे समथ होित है । ज से उसका जीवन से हताशा और िनराशा दरू होकर वह

मनु य असफ़लता से सफ़लता क और िनर तर गित करने लगता है एवं उसे जीवन मे सम त भौितक सुखो क ाि होित
है । " ी यं " मनु य जीवन म उ प न होने वाली सम या-बाधा एवं नकारा मक उजा को दरू कर सकार मक उजा का
िनमाण करने मे समथ है । " ी यं " क

थापन से घर या यापार के थान पर था पत करने से वा तु दोष य वा तु से

स ब धत परे शािन मे युनता आित है व सुख-समृ , शांित एवं ऐ य क ि होती है । गु
ाम से 75

ाम तक क साइज मे उ ल ध है

मू य:- ित

GURUTVA KARYALAY

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फरवर 2011

27

योितष से जाने व ा

ाि

के योग

 िचंतन जोशी
योितष शा
यो क

बृ ह पित क

पंचम भाव जातक के जीवन म मह वपूण

पंचम भाव िश ा, बु

?
ल नेश क

म कु डली के पंचम भाव को मह वपूण माना जाता ह।

िनधा रत होती ह।
पंचम भाव को

और

थान रखता ह।

यो क

ान का भाव है , जससे जातक के जीवन क

योितष म पंचम भाव को

कोण

दशा

थान भी कहा जाता ह।

योितष म बहत
ु ह शुभ माना गया है । जातक के िश ा से

स ब ध म भी वचार पंचम भाव से ह

कया जाता ह। इस िलए

कुंडली से िश ाका आंकलन करने हे तु भी पंचम भाव ह

योितष या

मुख माना गया

ह।

योितष म िश ा का आंकलन करने हे तु ल न म

थती, पंचम भाव म

थत

ह एवं पंचमेश क

थत

थती तथा िश ा के कारक

ह एवं

ह बुध एवं

थित से व ा का आंकल कया जासकता ह।

कुंडली म ल न, ल नेश, पंचम भाव, पंचमेश, बुध और बृह पित य द शुभ

हो के साथ हो या शुभ

हो से

हो तो िश ा के संबंिधत काय म बड़ सफलता अव य िमलती ह।
कुंडली म ल न, ल नेश, पंचम भाव, पंचमेश, बुध और बृ ह पित य द कमजोर
हो से यु

या

ी के कारण पी डत हो, तो िश ा संबंिधत काय म

कुंडली का व ेषण करते समय अ य शुभ, अशुभ ह का
श ु
नोट:

हो का उनपर

ह।

कावट का सामना करना पड सकता ह।
या युित संबंध एवं संबंिधत

ह के िम

योितष शा ो के अनुशार ल न के साथ म भाव कारक भी बदल जाते ह। इस िलए
ह अथातः भावेश एवं भाव के कारक ह को

कुंडली का व ेषण

कुंडली का व ेषण करते समय संबंिधत भाव एवं भाव के
यान म रखते हए
ु आंकलन कर कया गया व ेषण

होता

कुंडली का फलादे श करते समय हर छोट छोट बात का याल रखना आव यक होता ह अ यथा व ेषण कये

गये

का उ र

एवं

भाव दे खना भी अित आव यक होता ह।

सावधानी से करना उिचत रहता ह। व ानो के अनुशार
वामी

थित म ह या या अशुभ

टक नह ं होता।

मं

िस

दलभ
साम ी

ह था जोड - Rs- 370

घोडे क नाल- Rs.351

माया जाल- Rs- 251

िसयार िसंगी- Rs- 370

ब ली नाल- Rs- 370

णावत शंख- Rs- 550

मोित शंख- Rs- 550

जाल- Rs- 251

धन वृ

हक क सेट Rs-251

फरवर 2011

28

आपके ब चे कैसे िलखते है ?

 िचंतन जोशी
िलखावट के बारे म खास बात है क आपके ब चे कैसे िलखते है ?
ह ता र वशेष
ह।

के अनुशार आपके ब चे कैसे िलखते है यह बहोत मह वपूण है । आपके ब चे क िलखावट कैसी

यो क आपके ब चे क िलखावट म लेखन से उनके बारे म विभ न जानकार दे ता ह। जो बात आपके ब चे क

िलखावट मे है ? या वह बात कसी और के लेखन या कसी और क िलखावट मे है ?
िलखावट ब चे के जीवन मे अहम ह सा होता है जो
उ के जीवन क सफ़लता एवं असफ़लता िन

त करती है ।

आपके ब चे क िलखावट मे उनका

व और

उनके दल के बारे म दखाते है जो असलीयत मे वह होते ह।
िलखावट ब चे का वा त वक चेहरा होता है जो वह दिनया

को दखाना चहते या दखाते है ।

िलखावट दो तरह क होती ह, जस म एक होती
ह सावजिनक य

व और एक िनजी य

व जसके अंतर

का व ेषण करना आव य होता ह।
सावजिनक य

व के ब चे अपनी िलखावट पर

जोर डालते ह। एसी िलखावट वाले ब चे नेता, अिभनेता और संगीतकार के प पाएं जाते ह, जो एक " दखावे के कारोबार ' से
जुडे रहते ह। इस का मु य कारण होता ह क उ ह िनरं तर लोग क नजर म बने रे हना पड़ता ह।
िनजी य

व के ब चे अपनी िलखावट पर अिधक जोर नह ं दे ते। एसी िलखावट वाले ब चे छोटे -छोटे काय म

सफल होते ह, या म यम

ेणी के

यवसाय या नौकर से जुडे होते ह अथात एसे ब चे अपने

सावजिनक नह ं करना चाहते। अपने य

व को घर, प रवार या प रिचत य

व को अिधक

तक ह ं िसमीर रखना चाहते ह।

कसी ब चे क िलखावट को दे खकर जीवन के ित उसक मानिसकता, सफ़लता, काय करने के शैिल, लोगो से उसके
संबंध, पूण व ास और च र आ द का अनुमान सरलता से लगाया जा सकता है ।
िलखावट ब चे क संपुण मानिसक

थित को कट करती है ।

जो ब चे अपनी िलखावट मे सभी अ र एक ह आकार के िलखते हो ।

एसे ब चे अ यंत यवहारकुशल होते ह।

एसे ब चे अपने काय एवं इरदो पर ढ़ रहते ह।

एसे ब चे जो भी िनणय लेते ह, वह वतं होता है ।

एसे ब चे यवसाय से यादा नौकर मे सफ़ल हो एसा संभव है ।

29

एसे ब चो म ज द कामयाबी हासल करने क ती इ छा रहती है ।

एसे ब चो का य

एसे ब चो के वचार से भा वत होने वालो क सं या यादा होती ह।

फरवर 2011

व दसरो
को आक षत करने मे बल होता है ।

जो ब चे अपनी िलखावट मे थाम अ र काफ बडा िलखते हो ।

एसे ब चे उतना ह वल ण ितभा के घनी, समाज म काफ
लोक य होते है ।

एसे ब चे समाज मे उ चा पद ा करने वाले होता है ।

एसे ब चे दखावा करने मे माह र होते है ।

जो ब चे अपनी िलखावट मे पहला श द बडा व बाक के श द सु दर व
छोटे आकार म िलखते हो ।

एसे ब चे घीरे -घीरे उ चा पद ा करते हए
ु सव चा थान ा

करते है ।

एसे ब चे जीवन म पैसा बहत
ु कमाते है ।

एसे ब चे कई भूिम-भवनो के मािलक बनते है व समाज म काफ लोक य होते है ,

एसे ब चे कला ेिम व संकोची वभाव के उ म

एसे ब चे अपने प रवार का काफ नाम रोशन करते है ।

े णी के व ान होते है ।

जो ब चे अपनी िलखावट मे पहला श द बडा व बाक के श द अ प व छोटे आकार म िलखते हो ।

एसे ब चे जीवन को असामा य प से यतीत करते है ।

एसे ब च म हर समय ऊँचाई पर पहँु चने क ललक होती है , ले कन श ु क वजह से पहोच नह पाते।

एसे ब चे राजनीित, अपराघी, कूटनीित

एसे ब चे का जीवन असामा य प म यतीत होने के कारण प रवार के लोग क उपे ा का िशकार होता है ।

एसे ब चो को कोइ य

ले कन एसे ब चे दसरे
लोगो को आसनी से अपनी बातो मे उलझाना बखुबी जानते है ।

या बहत
ु बडा यापार बनते ह।

घोखा नह ं दे सकता। यह इनक वशेषता होती है ।

जो ब चे अपनी िलखावट अ प तथा ज द -ज द म िलखते हो ।

एसे ब चे अपने मन क बात कसी को नह बताने वाले।

एसे ब चे अपने मन क करने वाले लापरवाह होते ह।

एसे ब चो म हर समय दसरो
के िलये नाराजगी बनी रहती है ।

फरवर 2011

30

एसे ब चे दमाग से हर समय कुछ एसा सोचते रहते ह ज से वह ज द से ज द कामयाबी के िशखर पर पहोच सके।

ले कन एसे ब चो क

कसी भी ब चे के य

यादा तर सोच असफ़ल ह रहती है ।

गत एवं सामा जक यवहार को जानने का सरल तर का ह उसक िलखावट।

यहा हम आपक सु वधा हे तु इसे े णीय म वभाजीत कर रहे ह।

ब हमु खी य

अ तमु खी य

म यम ( यानी ना यादा ब हमु खी ना अ तमु खी)

ब हमुखी य

व,
व और

जो ब चे अपनी िलखावट को थोडा भार दे कर िलखते है , िलखावट क छाप एक पेपर से दसरे
ू पेपर पर जाती ह , अ रो को बडे एवं
गोलाई म िलखता ह , जसक िलखावट दायीं बाजुसे थोड झुकती हई
ु ह,

एसे ब चे समा जक जीवन म हर ईनसान के साथ िमलझुल कर काय करने मे व ार रखते ह। एसे ब चे समाज सेवा के िलये
अपना सब कुछ नौछावर करने हे तु त पर रे हते ह, एवं अपने कये गये काय हे तु गव अनुभव करते ह। कई एसे ब चो म समाज से
कुछ पाने क

बल इ छा दे खी जाती ह।

अ तमु खी य

जो ब चे अपनी िलखावट को हलके हाथ से िलखता ह, िलखावट क कोई छाप एक पेपर से दसरे
ू पेपर पर नह ं जाती ह , िलखावट
के अ र छोटे एवं अ प ट ह , जसक िलखावट बायीं बाजुसे थोड झुकती हई
ु ह,

एसे ब चे का समा जक जीवन बचपन म उपे ा का िशकार होने के कारण हन भावना, उदासी जेसे कारणो से अ तमु खी बनजाते
ह। एसे ब चो को समाज से यदा लगाव नह ं होता, एसे ब चे अपनी ह धून म रमे रहने वाले होते ह। उनका यवहार दसरो
के

ित अ छा नह ं रहता ले कन खुद दसर
से अ छे यवहार क सदै व आश लागये रहते ह। एसे ब चे अपने अंदरक बात कसी को

सरलता से नह ं बतात।

म यम य

व (ना ब हमु खी ना अ तमुखी)

जो ब चे अपनी िलखावट को ना हलके हाथ से नाह ं यदा जोर दे कर िलखता है , उनक क िलखावट सीघी होती ह, अ र छोटे
अथवा मधयम होकर एकदम प ट िलखते होते ह।
एसे ब चे का समा जक जीवन साम य होता ह। यह ब चे ना तो दखाने मे व ास रखते ह नाह ं छुपाने म। एसे ब चे हर समय
असाम य प र थती म होने पर भी सामा य बने रे हने का याश करते ह।

अनुसंधानो म दे खा गया ह क जो ब चे सीघा िलखते ह वह भ व य म गोते लगाने से वतमान म जीनेम अिधक व ास करते
ह। एसी िलखावट वाले ब चे बडे आ म- व ासी होते ह, उनक
एवं तकशा

म वशेष िच रखते ह।

वतं सोच के कारण िनणय लेने क

मता गजब क होती ह

फरवर 2011

31

जस ब चे क िलखावट का झुकाव दायीं तरफ होता ह वह य

ब हमु खी होते ह, जस कारण, सामा जक वृ

और यवहार

कुशलता का वशेष गुण इनम सरलता से दे खने िमलजाता ह। अपने काय क

शंसा क वशेष चाह रखते ह। एसे ब चे अिधक

कमशील होने से अपने भ व य को उ

म सदा कुछ न कुछ

आगे बढते रहने क

वल बनाने क िचंता के कारण य

बल इ छा रहती ह। एसे ब चो म भावना मक वृ

या मक काय करते हए

होने के कारण अ य लोग के ित संवेदनशील

होते ह तथा उनके बीच रहना भी पसंद करते ह।

जस ब चे क िलखावट का झुकाव बायीं ओर होता है वह ब चे शांत वाभाव के होते ह। एसे ब चो म अकेला जीवन बताने
क इ छा अिधक रहती ह। एसे ब चे थोडे संवेदनशील होते ह जस वजह से लोग उ ह डरपोक समझते ह। अपनी सोच एवं
प र थओं के कारण एसे ब चे हमेशा अपने आपम खोये रहरे ह। ज से वह सरलता से बाहर नह ं िनकल पाते जसके कारण
आसानी से वह िम नह ं बना पाते ह।

जस ब चे क िलखावट बार-बार बदती रहती ह वह ब चे अ थर मानिसकता वाले होते ह। एसे ब चे अिधक धन का अप यय
करने वाले, थोडे लापरवाह, हर जगह अपनी म ज चलाने वाले, ज

क म के होते ह। लोग इन पर शी

व ास नह ं कर पाते

य द कोइ कर ले तो उनका व ार बरकरार रखने म भी यह ब चे असमथ होते ह। इ ह मानिसक िचंता हर समय लगी रहती
ह। इनके यवसाय या नौकर म बार बार प रवतन होते रहते ह।

मं
" ी यं " सबसे मह वपूण एवं श

िस

फ टक ी यं

शाली यं है । " ी यं " को यं राज कहा जाता है

फ़लदयी यं है । जो न केवल दसरे
ू य

ो से अिधक से अिधक लाभ दे ने मे समथ है एवं संसार के हर य

फायदे मंद सा बत होता है । पूण ाण- ित त एवं पूण चैत य यु

" ी यं " जस य

यश

के िलए

के घर मे होता है उसके िलये

" ी यं " अ य त फ़लदायी िस होता है उसके दशन मा से अन-िगनत लाभ एवं सुख क
समाई अ ितय एवं अ

यो क यह अ य त शुभ

ाि होित है । " ी यं " मे

मनु य क सम त शुभ इ छाओं को पूरा करने मे समथ होित है । ज से उसका

जीवन से हताशा और िनराशा दरू होकर वह मनु य असफ़लता से सफ़लता क और िनर तर गित करने लगता है एवं
उसे जीवन मे सम त भौितक सुखो क ाि होित है । " ी यं " मनु य जीवन म उ प न होने वाली सम या-बाधा एवं
नकारा मक उजा को दरू कर सकार मक उजा का िनमाण करने मे समथ है । " ी यं " क

थापन से घर या यापार के

थान पर था पत करने से वा तु दोष य वा तु से स ब धत परे शािन मे युनता आित है व सुख-समृ , शांित एवं

ऐ य क ि होती है ।

गु

व कायालय मे " ी यं " 12 ाम से 75 ाम तक क साइज मे उ ल ध है

मू य:- ित

ाम Rs. 8.20 से Rs.28.00

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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फरवर 2011

32

ीसर वती

तुित

या कु दे द-ु तुषारहार- धवला या शु - व ावृ ता
या वीणावरद डम डतकरा या
या

ा युत- शंकर-

ेतप ासना ।

भृ ितिभदवैः सदा पू जता

सा मां पातु सर वती भगवती िनःशेषजा यापहा ॥ १॥
दोिभयु ा चतुिभः

ेता जपूण- वमलासन- सं थते हे

फ टकम णमयीम मालां दधाना

ेता बरावृ तमनोहरमंजुगा े ।

मनो - िसतपंकजमंजुला ये

व ा दाियिन सर वित नौिम िन यम ् ॥ ९॥
मात

वद य- पदपंकज- भ

यु ा

ह तेनैकेन प ं िसतम प च शुकं पु तकं चापरे ण ।

ये वां भज त िन खलानपरा वहाय ।

भासा कु दे द-ु शंख फ टकम णिनभा भासमानाऽसमाना

ते िनजर विमह या त कलेवरे ण

सा मे वा दे वतेयं िनवसतु वदने सवदा सु स ना ॥ २॥

भूव - वायु- गगना बु- विनिमतेन ॥ १०॥

आशासु राशी भवदं गव ल

मोहा धकार- भ रते

भासैव दासीकृ त- द ु धिस धुम ् ।

मातः सदै व कु

व दे ऽर व दासन- सु द र वाम ् ॥ ३॥

शी ं वनाशय मनोगतम धकारम ् ॥ ११॥

म द मतैिन दत- शारदे दं ु

सवदा सवदा माकं स निधं स निधं

ा जगत ् सृ जित पालयती दरे शः

यात ् ॥ ४॥

सर वतीं च तां नौिम वागिध ातृ- दे वताम ् ।
ितप

ते यदनु हतो जनाः

॥ ५॥

पातु नो िनकष ावा मितहे नः सर वती ।
ा ेतरप र छे दं वचसैव करोित या ॥ ६॥
शु ां

वचारसारपरमा- मा ां जग

या पनीं

वीणापु तकधा रणीमभयदां जा या धकारापहाम ् ।
ह ते

पा टकमािलकां वदधतीं प ासने सं थतां

व दे तां परमे र ं भगवतीं बु

दां शारदाम ् ॥ ७॥

वीणाधरे वपुलमंगलदानशीले
भ ाितनािशिन व रं िचहर शव

वासमुदारभावे ।

वीया खलावयव- िनमलसु भािभः

शारदा शारदा बोजवदना वदना बुजे ।

दे व वं

दये मद ये

श भु वनाशयित दे व तव
न या कृ पा य द तव

क ित दे ऽ खलमनोरथदे महाह
व ा दाियिन सर वित नौिम िन यम ् ॥ ८॥

कट भावे

युः कथंिचद प ते िनजकायद ाः ॥ १२॥

ल ममधा धरा पु ग र तृ ः

भा धृ ितः ।

एतािभः पा ह तनुिभर िभमा सर वती ॥ १३॥
सरसव यै नमो िन यं भ का यै नमो नमः
वेद- वेदा त- वेदांग- व ा थाने य एव च ॥ १४॥
सर वित महाभागे व े कमललोचने ।
व ा पे वशाला
यद र- पद

े।

भावैः ।

त सव
॥ इित

व ां दे ह नमो तु ते ॥ १५॥

ं मा ाह नं च य वेत ् ।

यतां दे व
ीसर वती

सीद परमे
तो ं संपूण॥

र ॥ १६॥

फरवर 2011

33

सर वती
शु लां

- वचार-सार-परमां आ ां जग - या पनीम।्

वीणा-पु तक-धा रणीमभयदां जा या धकारापहाम ् ॥
ह ते

फा टक-मािलकां वदधतीं प ासने सं थताम।्

व दे तां परमे र ं भगवतीं बु - दां शारदाम ् ॥१॥

तो

ो फु ल- ान-कूटे ह र-िनज-दियते दे व! संसार तारे ॥३॥

या

सा मां पातु सर वती भगवती िनःशेष-जा यापहा ॥२॥

े कमल-भव-मुखा भोज-भूत- व पे,

थूले नैव सू मेऽ य व दत- वभवे ना प व ान-त वे,

व े व ा तराले सुर-वर-निमते िन कले िन य-शु े ॥४॥

ोत का पाठ करने से भगवती सर वती का क ठ म वास होता है ।

सर वती
ॐ र व-

-म

पा प- काशे सकल-गुण-मये िनगु णे िन वकारे ।

ाऽ युत-शंकर- भृ ितिभदवैः सदा से वता,

ांि -प े।

प े प ोप व े णत-जनो मोद स पादिय ी,
ऐं ऐं

ेत-प ासना।

ैक-बीजे शिश- िच-कमले कल- वसृ -शोभे,

भ ये भ यानुकूले कुमित-वन-दवे व -व

या कु दे द-ु तुषार-हार-धवला या शु -व ावृ ता,
या वीणा वर-द ड-म डत-करा या

- पतामह- व णु-नुतं, ह र-च दन-कुंकुम-पंक-युतम ्!

मुिन-वृ द-गजे

-समान-युत,ं तव नौिम सर वित! पाद-युगम ् ॥१॥

शिश-शु -सुधा- हम-धाम-युत,ं

शरद बर- ब ब-समान-करम।्

बहु-र -मनोहर-का त-युतं, तव नौिम सर वित! पाद-युगम ् ॥२॥

कनका ज- वभू षत-भीित-युतं, भव-भाव- वभा वत-िभ न-पदम।्
भु-िच -समा हत-साधु-पदं , तव नौिम सर वित! पाद-युगम ् ॥३॥

मित-ह न-जना य-पारिमदं,

सकलागम-भा षत-िभ न-पदम।्

प र-पू रत- वशवमनेक-भवं, तव नौिम सर वित! पाद-युगम ् ॥४॥
सुर-मौिल-म ण- ुित-शु -करं ,
िनज-का त- वलाियत-च

वषया द-महा-भय-वण-हरम।्

-िशवं, तव नौिम सर वित! पाद-युगम ॥५॥

भव-सागर-म जन-भीित-नुतं,

ित-पा दत-स तित-कारिमदम।्

प रपूण-मनोरथ-धाम-िनिधं,

परमाथ- वचार- ववेक- विधम।्

वमला दक-शु - वशु -पदं , तव नौिम सर वित! पाद-युगम ् ॥६॥

सुर-यो षत-से वत-पाद-तमं, तव नौिम सर वित! पाद-युगम ् ॥७॥

तो
गुणनैक-कुल- थित-भीित-पदं ,

गुण-गौरव-ग वत-स य-पदम।्

कमलोदर-कोमल-पाद-तलं,तव नौिम सर वित! पाद-युगम ् ॥८॥
॥फल- ुित ॥
इदं
यः

तो ं

पठे त ्

सं यं

पाठ-मा े

यो

ात

महा-पु यं,
थाय,

जपे न यं,

भवेत ्

ा ो,

दय-कमल-म ये,
णव-मयमत य,

ह र-गु -िशव-योगं,
सकृ द प
मनसा
.
िनयमीत उपरो

णा

त य
जले

क ठे

वा प

-िन ो

द प-व

योिगिभः
वै,
तो

याये

प रक िततं।

यः

सर वती

थले

पुनः

पुनः

थतः।

वेद-सारे ।

यान-ग यकम ्

सव-भूत थमेकम।्

सः

भवे मु

का पाठ करने से देवी सर वती क

पूण कृ पा िमलती ह एवं मो

ाि

होती ह।

अ ल मी कवच
अ ल मी कवच को धारण करने से य
ल मी के अ

पर सदा मां महा ल मी क कृ पा एवं आशीवाद बना रहता ह। ज से मां

प (१)-आ द ल मी, (२)-धा य ल मी, (३)-धैर य ल मी, (४)-गज ल मी, (५)-संतान ल मी, (६)-

वजय ल मी, (७)- व ा ल मी और (८)-धन ल मी इन सभी

पो का

वतः अशीवाद

होता ह।

मू य मा : Rs-1050

फरवर 2011

34

जब ल मी, सर वती और गंगा को िमला शाप

 राकेश पंडा
ल मी, सर वती और गंगा तीनो नारायण के िनकट िनवास करती
थीं। एक बार गंगा ने नारायण के

ित अनेक कटा

बाहर चले गये क तु इस बात से सर वती

कये। नारायण तो

हो गयी। सर वती को

लगता था क नारायण गंगा और ल मी से अिधक
ने दोन का बीच-बचाव करने का

िन वकार जड़वत ् मौन दे खा तो जड़ वृ

ेम करते ह। ल मी

कया। सर वती ने ल मी को
अथवा स रता होने का शाप

दया। सर वती को गंगा क िनल जता तथा ल मी के मौन रहने पर
ोध था। उसने गंगा को पापी जगत का पाप समेटने वाली महानद

बनने का शाप दया। गंगा ने भी सर वती को मृ युलोक म नद बनकर
जनसमुदाय का पाप

ा ालन करने का शाप दया। तभी नारायण भी

वापस आ पहँु चे। उ ह ने सर वती को शांत कया तथा कहा एक पु ष
अनेक ना रय के साथ िनवाह नह ं कर सकता। पर पर शाप के कारण
तीन को अंश

प म वृ

अथवा स रता बनकर मृ युलोक म

कट होना

पड़े गा। ल मी !तुम एक अंश से पृ वी पर धम- वज राजा के घर
अयोिनसंभवा क या का

ाि

प धारण करोगी, भा य-दोष से तु ह वृ

होगी। मेरे अंश से ज मे असुर

त व

शंखचूड़ से तु हारा पा ण हण

होगा। भारत म तुम तुलसी नामक पौधे तथा पदमावती नामक नद के
प म अवत रत होगी। क तु पुन :यहाँ आकर मेर ह प ी रहोगी। गंगा,

तुम सर वती के शाप से मनु यो के पाप नाश करने वाली नद का
धारण करके अंश

प से अवत रत होगी। तु हारे अवतरण के मूल म

भागीरथ क तप या होगी, अत :तुम भागीरथी कहलाओगी। मेरे अंश से
उ प न राजा शांतनु तु हारे पित ह गे। अब तुम पूण

प से िशव के

समीप जाओ। तुम उ ह ं क प ी होगी। सर वती, तुम भी पापनािशनी
स रता के
प ी के
कृ य पर

प म पृ वी पर अवत रत होगी। तु हारा पूण
प म रहे गा। तुम उ ह ं के पास जाओ।
ोभ

उन तीन ने अपने

कट करते हए
ु शाप क अविध जाननी चाह । कृ ण ने

कहा किल के दस हज़ार वष बीतने के उपरा त ह तुम सब शाप-मु
सकोगी। सर वती
हई।

ा क

ा क

या होने के कारण

हो

नाम से व यात

॥सर वती आरती॥
आरती क जै सर वती क ,
जनिन व ा बु

क । आरती ..

जाक कृ पा कुमित िमट जाए।
सुिमरण करत सुमित गित आये,
शुक सनका दक जासु गुण गाये।

वा ण प अना द श

क ॥ आरती..

नाम जपत म छूट दये के।
द य

िशशु उध हय के।

िमल हं दश पावन िसय पय के।
उड़ाई सुरिभ युग-युग, क ित क । आरती
रिचत जास बल वेद पुराणा।
जेते

थ रिचत जगनाना।

तालु छ द वर िमि त गाना।
जो आधार क व यित सती क ॥ आरती
सर वती क वीणा-वाणी कला जनिन क ॥

ादश सर वती तो
दे वी सर वती क सु व यात

ादश

नामावली िन निल खत है ।
थमं भारती नाम

तीयं च सर वती।

तृ तीयं शारदा दे वी चतुथ हं सवा हनी ॥
प चमं जगती
स मं कुमुद

याता ष ं वागी र तथा।
ो ा अ मं

चा रणी ॥

नवमं बु दा ी च दशमं वरदाियनी।
एकादशं च

का त ादशं भुवने र ॥

ादशैतािन नामािन
ज ा े वसते िन यं

यं यः पठे नरः।
पा सर वती ॥

फरवर 2011

35

सर वती तो म ्


विनयोग: ऊँ अ य
गाय ी छ दः।

ी सर वती तो मं

ा ऋ षः।

धीं धीं धीं धारणा ये धृ ितमितनितिभनामिभः क तनीये

ी सर वती दे वता। धमाथकाममो ाथ

िन येऽिन ये िनिम े मुिनगणनिमते नूतने वै पुराणे ।

जपे विनयोगः।
आ ़ढ़ा
सा

पु ये

ेतहं से

ह ते

डं ती

मित च गगने द

द या बरकनकमयं

वीणां

वादयंती

णे चा सू ं वामे

पु तकं

वकरकरजपैः

ानग या

शा

व ानश दै ः।

द य पा करकमलधरा भारती सु स ना ॥१॥

ेतप ासना
अिचता
एवं

दे वी

मुिनिभः
या वा

शु लां

ेतग धानुलेपना

सवरऋ
् षिभः

सदा

दे वीं

वचार

तूयते

वांिछतं

सार

लभते

परमामा ां

वीणा-पु तक-धा रणीमभयदां
ह ते

फ टकमािलकां

व दे

तां

या

परमे र ं

वदधतीं
भगवतीं

कु दे दतु
ु षारहारधवला

या

वीणावरद डम डतकरा

या


सदा

नरः

जग


॥२॥

या पनीं।

जा या धकारापहाम।्

प ासने
बु

दां

सं थताम।्

शारदाम॥३॥

या

शुभव ावृ ता।

या

ेतप ासना।

ा युतशंकर भृ ितिभदै वै

सदा

व दता।

सा मां पातु सर वती भगवती िनःशेषजा यापहा॥॥४॥

भ ये

ैकबीजे

ऐं

ऐं

क प व प शोभे
व व

ांि प े

णजनमनोमोदसंपादिय

ह रिनजदियते

पा प काशे

कुमितवनदवे

प ोप व े

ानकूटे
ऐं

शिश िचकमले

भ यानुकूले

प े

सकल

दे व

जा यतु े

वेदा तवे े

मो दे मु

ूं

ूं

मोहे

व ानत वे

हम िचमुकुटे

व लक य ह ते

प रणतप ठते

मो दे

श ताम् ।
प रणतप ठते

दह

सुवण

माधव ीितमोदे

॥८॥

द ु रतं

पु तक य ह ते

कु

मम

त भव े ।

वमित वा त व वंसमीडे

वं क ववररसनािस

दे िस सा ये ॥९॥

तौिम वां वां च व दे मम खलु रसनां नो कदािच यजेथा
मा मे बु

ा भवतु न च मनो दे व मे यातु पापम ् ।

मा मे दःखं
कदािच

किचद प वषयेऽ य तु मे नाकुल वं

इ येतैः

ित दनमुषिस

शा े वादे क व वे सरतु मम धीमा तु कु ठा कदा प ॥१०॥
वाणी

ोकमु यैः

तौित यो भ

ु क ठः
वा पटमृ

वाच पतेर य व दत वभवो

न ो

या द ाथलाभैः सुतिमव सततं पाित तं सा च दे वी

सौभा यं त य लोके भवित क वता व नम तं
िन व नं

त य

व ा

भवित

सततं

याित ॥११॥
चा ु त ंथबोधः

क ित ैलो यम ये िनवसित वदने शारदा त य सा ात ् ।
द घायुल कपू यः

सकलगुणािनिधः

स ततं

राजमा यो

वा दे याः सं सादा जगित वजयी जायते स सभासु ॥१२॥
चार

िन वकारे

दह

िन यशु े

मतमु ख सुभगे जृ भ ण

गीग वा भारित

व पे

िनगु णे

व व पे

मु ध वाहे

कमलभवमुखांभोजभूते
गुणमये

ह रहरनिमते
मितमितमितदे

स तु ाकारिच े

सार वतो

माग मागतीत व पे भव मम वरदा शारदे

शु हारे ॥७॥

ूं

॥५॥

मातमातनम ते दह दह जडतां दे ह बु ं
व े

मातमा ाधत वे

ो फु ल

व े व ा तरा मे सुरवरनिमते िन कले िन यशु े ॥६॥

पु य वाहे

संसारसारे

थूले नैव सू मेऽ य व दत वभवे ना प

वजय ठाकुर

ती

मौनी

जनः

ये

योद यां

पाठा सकृ द ाथलाभवान ्

पठे

मा

सुभगो

वांिछतं

लोकेऽ म ना

॥ इित
.

॥१३॥

फलमा नोित
वयं

ो ं

पठे न यं
ीम

या वा दे वीं सर वतीम ् ॥१४॥

सवपाप विनमु ः

य ेन

योद यामेक वंशितसं यया

अ व छ नः

णेित

िनरािमषः

सर व यां
सोऽमृ त वाय

लोक व ु तः

संशयः

॥१५॥

तवं

शुभम ्

क पते

॥१६॥

ण वरिचतं सर वती तो ं संपूण म् ॥

फरवर 2011

36

॥अथ
॥दोहा॥
जनक

जनिन

पु

पदम

दरज
ु ,

म तक पर धा र ।

िनज

ब द मातु

सर वती, बु

बल दे दाता र ॥

पूण

जगत

म हमा

या

अिमत

रामसागर
मातु

तव,

अनंतु

के
तुह

पाप
अब


को,

ह तु

॥चौपाई॥
जय
जय

ीसकल

जय जय
करती

अमर

अ वनाशी

जय वीणाकार धार

सवार

चतुभु जधार

माता

व याता

सकल
तबह

बलरासी

सदा


जग

बु

सव

सुहंस
अ दर

पाप

धम

बु

जब
फक

होती

योित

तब ह मातु का िनज अवतारा ।
पाप

हन

करती

बा मी क
तब

साद

रामच रत
आद

कव

ित ह
केवल
करहु

मह
थे

ह यारा

जानै

संसारा

बनाई

पाई

व याता

माता

व ाना

नाना

रचे

पदवी
जो

को

भये

कृ पा

तुलसी
भये

जो

कािलदास
तेर

तारा

जी

से

सूर
और

ानी

और

कृ पा
कृ पा

आद
जो

रहे उ
आपक

सोई

ी सर वती चालीसा॥

मातु

अवल बा ।
अ बा

भवानी

द ु खत द न िनज दास ह जानी ॥

करई

अपराध

बहता

मेर

ते ह न धरइ िचत सु दर माता ॥
राखु

लाज

वनय

जनिन

अब

भाँित

अनाथ

बहते
ु र

तेर

अवलंबा


दगम

काज

धरा

दग

आद

हरनी

नृ प

को पत

मधु कैटभ जो अित बलवाना ।

सागर

म य

बाहयु

अित

तूफान

भूत

ेत

समर

हजार

पांच

ठाना

घोरा

फर भी मुख उनसे नह ं मोरा ॥

हो
नाम

बु

संशय

पु ह न

भई

खलहाला

ते ह ते मृ यु भई खल
पुरवहु

मातु

केर

सबै

छाँ ड

थे

व याता

करै

पाठ

माता

होय

पु

पापी

धूपा दक

छण

महु

संहारे उ

ते ह

र बीज

से

सुरमुिन

दय
धरा सब काँपी ॥

काटे उ िसर
बार

भरत

जम कदली ख बा ।

बार

बनऊं

या

द:ु ख

अथवा

संकट

मंगल

सब

होई

कोई

करइ
आतुर
पूज

िनत

एह
यह

सु दर

जावै

मातु

कर

हमेशा

आवै

ता ह

कलेशा

बारा

सारा

भवानी

हो

व णु

रामसागर

क जै कृ पा दास िनज जानी ॥

बखाना

अज सक हन मार

हो

द तका

नाम

अपार

तुम

र ाकार

और
है

दानव

हो

दरू

अनंत

ईशा

अव य

पाश

अना द

र हत

बंद

को समरथ तव यश गुन गाना ।

शता ी

भ ी

संकट

म वधे ता ह तू अ बा ॥

सुर नर मुिन सबको सुख द हा ॥

माई

सत

कराई

चढ़ावै

कर

बनवास

भाई
चालीसा

गुण

नवै

बािध

ए ह विध रावन वध तू क हा ।

जनक

पाठ

जाई

संगे

बंद

फेरे ऊ

नाहै

कोऊ

बु

शुंभिनशुंभा

मातु

चाहै

भंजे

िनकट

जो

के

रामच

िनगम

मृ ग

जगदं बा

जग िस
छण

समरथ

घेरे

जो

जो

माता

मारन

पोत

इसम

मेर

मु ड

तू

न हं

जपे

मनोरथ

चंड

ली हा ॥

को

बाधा

दर

मातु सहाय क ह ते ह काला ।
वपर त

कृ पा करहु जब जब सुखदाता ॥
कानन

से

क हा

दगा
नाम सकल जग

कृ पा करऊ जय जय जगदं बा ॥
व णु

पर

हे तु

॥दोहा॥
मातु

सूय

अ धकार

का त
मम

तव,

डू बन से र ा करहु, प ँ न म भव कूप ॥
बल

सुनहु

बु

व ा

सर वती

दे हु

मातु

मो ह,

राम सागर अधम को आ म तू ह ददातु ॥

फरवर 2011

37

सर वती के विभ न मं

से व ा

ाि

 िचंतन जोशी
यादातर

व ािथय

मरण श

कमजोर होती ह। ब चे को एवं

उसके माता- पता को एसा लगता ह, क ब चे का मन पढाई म नह ं
लगता, या ब चे जतनी मेहनत करते ह उ ह उसके अनु प फल
नह ं िमलता, पर

ा के

रहता ह, ब चे ने जो पढाई

म िलखते समय उसे भय
क ह वह प र ा प

िलखते समय भूल जाता ह, इ याद .., कारणो से ब चे
और माता- पता हमेशा परे शान रहते ह।
कुछ ब चे होते ह, जो एक या दो बार पढने पर
याद कर लेते ह, तो कुछ ब चे वह

पा य साम ी

अिधक समय पढने के उपरांत भी कुछ याद नह ं रहता।
एसा

यूं होता ह? इस का मु य कारण ह,

अनुिचत ढं ग से क गई पढाई या पढाई म एका ता क
कमी।

व ा अ ययन म आने वाली

कावटो एवं

बाधाओं को दरू करने हे तु शा ो म कुछ विश

मं ो का

उ लेख िमलता ह। जसके जप से पढाई म आने वाली
दरू होती ह एवं कमजोर याद श

सर वती मं :

या कुंदद ु तुषार हार धवला या शु

या वीणा वर द ड मं डत करा या
या

ा यु

शंकर:

इ याद म लाभ

व न
कावटे

होता ह।

वृ तावता ।

ेत प सना ।।

भृ ितिभ दे वै सदा व दता ।

सा माम पातु सर वती भगवती िन:शेष जा या पहा ॥१॥
भावाथ: जो व ा क दे वी भगवती सर वती कु द के फूल, चं मा, हमरािश और मोती के हार क तरह

धारण करती ह, जनके हाथ म वीणा-द ड शोभायमान है , ज ह ने

ेत कमल पर अपना आसन

ेत वण क ह और जो

ेत

हण कया है तथा

ा,

व णु एवं शंकर आ द दे वताओं ारा जो सदा पू जत ह, वह संपूण जड़ता और अ ान को दरू कर दे ने वाली माँ सर वती आप हमार

र ा कर।

सर वती मं

ो ं दे वी सू

से :

या दे वी सवभूतष
े ु बु

पेणसं थता।

नम त यै नम त यै नम त यै नमो नमः॥

फरवर 2011

38

व ा

ाि

के िलये सर वती मं :

घंटाशूलहलािन शंखमुसले च ं धनुः सायकं ह ता जैदघतीं धना त वलस छ तांशु तु य भाम।्
गौर दे हसमु वा

नयनामांधारभूतां महापूवाम

भावाथ: जो अपने ह त कमल म घंटा,
उ प ना,

सर वती मनुमजे शु भा द दै या दनीम॥्

शूल, हल, शंख, मूसल, च , धनुष और बाण को धारण करने वाली, गोर दे ह से

ने ा, मेघा थत चं मा के समान कांित वाली, संसार क आधारभूता, शुंभा द दै य का नाश करने वाली

महासर वती को हम नम कार करते ह। माँ सर वती जो

अ यंत सरल सर वती मं
ित दन सुबह

या यं

और

ान का संचार करती है ।

योग:

नान इ या द से िनवृ त होने के बाद मं

था पत कर । अब िच

धानतः जगत क उ प

के ऊपर

ेत चंदन,

क पूजा कर और अपनी मनोकामना का मन म

जप आरं भ कर। अपने सामने मां सर वती का यं

ेत पु प व अ त (चावल) भट कर और धूप-द प जलाकर दे वी

मरण करके

फ टक क माला से कसी भी सर वती मं

मन से एक माला फेर।
सर वती मूल मं :

ॐ ऎं सर व यै ऎं नमः।

सर वती मं :
ॐ ऐं

लीं महासर वती दे यै नमः।

सर वती गाय ी मं :

१ - ॐ सर व यै वधमहे,

पु यै धीम ह । त नो दे वी चोदयात।

२ - ॐ वाग दे यै वधमहे काम रा या धीम ह । त नो सर वती: चोदयात।
ान वृ

पर

हे तु गाय ी मं :

ॐ भूभु वः वः त स वतुव रे यं भग दे व य धीम ह िधयो यो नः चोदयात ्।

ा भय िनवारण हे तु:

मरण श

ॐ ऐं

िनयं ण हे तु:

व न िनवारण हे तु:

ॐ ऐं

ं ीं वीणा पु तक धा रणीम ् मम ् भय िनवारय िनवारय अभयम ् दे ह दे ह वाहा।

ॐ ऐं मृ यै नमः।

ं ीं अंत र सर वती परम र

या िच

णी मम सव व न बाधा िनवारय िनवारय वाहा।

क शांत

39
मरण श

बढा के िलए :

ऐं नमः भगवित वद वद वा दे व
पर

वाहा।

ा म सफलता के िलए :

१ - ॐ नमः

ीं

ीं अहं वद वद वा वा दनी भगवती सर व यै नमः

वाहा व ां दे ह मम

ं सर व यै

वाहा।

२ -जे ह पर कृ पा कर हं जनु जानी, क व उर अ जर नचाव हं
बानी।

मो र सुधा र हं सो सब भांती, जासु कृ पा न हं कृ पा अघाती॥
हं सा ढा मां सर वती का

यान कर मानस-पूजा-पूव क िन न

का २१ बार जप करे -”ॐ ऐं

वाग ्-वा दिन सौः
व ा

ाि

लीं ऐं

लीं सौः

ीं

ीं वद वद

ीसर व यै नमः।”

एवं मातृ भाव हे त:ु

व ा: सम ता तव दे व भेदा:

जग सु।

वयैकया पू रतम बयैतत ् का ते

अथातः- दे व! व

य: सम ता: सकला
तुित:

त यपरा परो

ः॥

क स पूण व ाएँ तु हारे ह िभ न-िभ न

व प ह। जगत ् म

जतनी

मूितयाँ ह। जगद ब! एकमा
कर रखा है । तु हार

याँ ह, वे सब तु हार
तुमने ह इस व

तुित

को

या हो सकती है? तुम तो


या
तवन

करने यो य पदाथ से परे हो।
उपरो

मं का जप हरे हक क या फ टक माला से

ित दन सुबह

१०८ बार कर, तदपरां
ु त एक माला जप िन न मं का कर।

ॐ ऐं

ं ीं लीं महा सर व यै नमः।

दे वी सर वती के अ य

भावशाली मं

एका रः
“ ऐ” ।
य र:

१ “आं लृ”ं ,।
२ “ऐं लृ”ं ।

फरवर 2011

फरवर 2011

40
य रः
“ऐं ं

व ”।

चतु र:
"ॐ ऎं नमः।"
नवा रः
“ॐ ऐं

ं सर व यै नमः”।

दशा रः

१ - “वद वद वा वा द यै
२- “ ं ॐ

वाहा”।

सौः ॐ सर व यै नमः”।

एकादशा रः

१ - “ॐ

ं ऐं

ं ॐ सर व यै नमः”।

२ - “ऐं वाच पते अमृ ते लुवः लुः”

३ - “ऐं वाच पतेऽमृ ते लवः लवः”।
एकादशा र-िच ताम ण-सर वतीः
“ॐ

ं ॐ सर व यै नमः"।

एकादशा र-पा रजात-सर वतीः

१ - “ॐ

२ - “ॐ ऐं

ं ॐ सर व यै नमः”।
ं ॐ सर व यै नमः”।

ादशा रः
“ ं वद वद वाग-् वा दिन

वाहा


अ त र -सर वतीः
“ऐं

ं अ त र -सर वती वाहा”।

षोडशा रः
“ऐं नमः भगवित वद वद वा दे व

अ य मं

ॐ नमः प ासने श द

“ॐ ऐं

ीं

पे ऎं

लीं वद वद वा दा दिन

लीं सर व यै बुधजन यै

वाहा”।

वाहा।

वाहा”।

फरवर 2011

41

“ऐं ं ीं लींस

“ॐ

ॐ पंचन ः सर वतीमय पबंित स ोतः सर वती तु पंच ा सो दे शे भव स रत।्

उपरो

लीं ंऐं लूं ीं नील-तारे सर वित

ां ं लीं लूंसःऐं

ं ीं लीं स : स :

ीं ऐं वा वा दिन भगवती अह मुख-िनवािसिन सर वित ममा ये

आव यक मं

का

ित दन जाप करने से व ा क

ाि

काशं कु

ं वाहा”।
कु

वाहा ऐं नमः”।

होती है ।

नोट :
नान आ द से िनवृ

मुहू त मे कये गए मं

अनुशार खाली म मं
मं

होकर

व छ कपडे पहन कर मं

का जप

ित दन एक माला कर।

का जप अिधक फलदायी होता ह। इ से अितर

अपनी सु वधाके

का जप कर सकते ह।

जप उ र या पूव क ओर मुख करके कर।

जप करते समय शर र का सीधा संपक जमीन से न हो इस िलए ऊन के आसन पर बैठकर जप
कर। जमीन के संपक म रहकर जप करने से जप

भगवान

ी गणेश बु

सकारा मक

भाव ह न होते ह।

मं

िस

और िश ा के कारक

भाव को बठाता ह एवं नकारा मक

यापार और धन म वृ

भाव से ब चे क बु

म वृ

कूशा

प ना गणेश

ह बुध के अिधपित दे वता ह। प ना गणेश बुध के
भाव को कम करता ह।. प न गणेश के

होती ह। ब चो क पढाई हे तु भी वशेष फल
होकर उसके आ म व ास म भी वशेष वृ

को कम करने म मदद करता ह, य

ारा अवशो षत हर व करण शांती

भाव से

द ह प ना गणेश इस के

होती ह। मानिसक अशांित

दान करती ह, य

के शार र

के तं को िनयं त करती ह। जगर, फेफड़े , जीभ, म त क और तं का तं इ या द रोग म सहायक होते
ह। क मती प थर मरगज के बने होते ह।

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फरवर 2011

42

मािसक रािश फल

 िचंतन जोशी
संबंिधत िचंता रह सकती ह। कसी से शी ता म संपक

मेष:
1 से 14 फ़रवर 2011 : नौकर - यवसाय म उनाित होगी।
भूिम- भवन-वाहन के
ह। श ु प

य- व य से लाभ

हो सकता

से सावधान रह आप पर झूठे आरोप लग सकते

है । आपक मानिसक िच ताओं म वृ
प रवार का

वा

हो सकती ह।

य िचंता का वषय हो सकता ह। नये

लोगो क िम ता से लाभ

सुख -शा त को बनाये रखने का

कर सकते ह। प रवार क
यास कर।

बनाने से बच।

िमथुन:
1 से 14 फ़रवर 2011: भौितक सुख साधनो म वृ
िलये अथवा

15 से 28 फ़रवर 2011: उ चािधका रय से लाभ

यावसाियक काय के िलये कज लेना पड

सकता ह। आपके

ारा मह व पूण काय हे तु कये गये

यास सफल होग। अपनी
क वृ ित का

के

मता से अिधक काय करे ने

याग कर। उचे

थानो से िगरने से चोट

लग सकती एवं वाहन से सावधानी बत आक मक

होगा। य द नौकर म ह तो

थानांतर हो सकता ह या

दघटना
होने के योग बन रहे ह।

नई नौकर

यवसाय म ह तो उ नती

15 से 28 फ़रवर 2011: पूण प र म से कये गये काय

क माग

हो स े ह,

स त ह गे। श ु प

पर आपका दबदबा

रहे गा। वाहन सावधानी से चलाये या वाहन से सावधान
रहे आक मक दघटना
हो सकती ह। कोई अ य सूचना

ा ी से मानिसक अशांित हो सकती ह।

ित लापरवाह

होने वाले धन लाभ को भा वत कर सकती है । भूिम-

भवन-वाहन से संबंिधत काय म लाभ ा होगा। मानिसक
रहने का

यास करे अ यथा उ च र चाप

के िशकार हो सकते है । जीवन साथी का सहयोग ा
और आपसी

होगी। मह व पूण योजनाएं

नह ं चुकगे । आपक

इ छाओं के

से सम याएं हो स

संबंिधत िचंता हो सकती ह।

1 से 14 फ़रवर 2011: आपक काय के

िचंतासे मु

गोपनीय रखे अ यथा वरोिध एवं श ु प
काय

वृ षभ:

से काय म सफलता

होगा

यार बढे गा। प रवार के साथ तीथ या ाओं पर

जाने के योग बन रहे ह।
15 से 28 फ़रवर 2011: पूण
म मनोवांिछत लाभ

यासो से कये गये काय

ा हो सकते है । काय म वशेष

रखने से उ च अिधकार के सहयोग से लाभ

िच

होगा।

कसी से वाद- ववाद करने से बचे अ यथा कानूनी
सम या म फंस ने के योग ह। माता के

वा

य से

लाभ उठाने से

वपर त होने वाले

ह। माता के

वा

य से

जीवन साथी का सहयोग ा

होगा और आपसी यार बढे गा।

कक:
1 से 14 फ़रवर 2011: मह वपूण काय को करने म आप
सफल ह गे। इस अविध म आपके उपर काय के दबाव के
चलते आपक लापरवाह आपको लंबे समय का नु शान कर
सकती ह। सावधान रहे । आव यकता से अिधक संघष करना
पड सकता है । मानिसक िच ताओं म कमी आयेगी। अपने
खाने- पीने का यान रखे अ यथा आपका का वा

य नरम

हो सकता है ।
15 से 28 फ़रवर 2011: सकारा मक
काय शैली बहत


अिधक

य होगी

कोण से आपक

ज से आय के एक से

ोत बन सकते ह। योजना पूव क

कये गये

फरवर 2011

43
काय स अपने

के हए
ु काय को कुशलता से पूरा करगे।

कृ ित म बदलाव से आपका

वा

य नरम रह सकता है ।

कर अ यथा

वा

य से संबंिधत परे शानीया सर उठा

सकती ह। आपको जल से संबंिधत

वा

य सम या हो

पा रवा रक असंतोष इस अविध के दौरान बढ सकता ह।

सकती ह। सावधान रहे । वाहन चलाते समय सावधान

पा रवार क लोगो से लंबे समय तक वैचा रक मतभेर रह

रहे । अनाव यकता खच म कमी आयेगी।

सकता ह।

तुला:

िसंह:
1 से 14 फ़रवर 2011: यह आपके जीवन म वतमान
वृ ित के अनुसार मि त फल

दान करे गा। आपको पूव

कम का फल इस समय िमलेगा। अपने बौ क
और काय कुशलता का उपयोग काय
का

ान

मता को बढाने

यास कर। पठन-पाठन, अ यापन एवं जीवन साथी

से आपको

स ना िमलेगी।

नह ं। मन को एका

व न-बाधाओं से घबराएं

और के

त रखने क

कोिशश

क जए।
15 से 28 फ़रवर 2011: अ

यािशत

ोत से आक मक

धन लाभ िमलने क संभावना है । नये काय क शु आत
न करे

व न क संभावना है । हताशा और िनराशा वाले

वचारो को

यागदे । लोग आपक

शंसा करगे। आपको

कान से संबंिधत परे शानी हो सकती ह। आपको अपने
वर ो

का

वशेषकर

आिशवाद िमल
गाड़

सकता

सावधान

रहे ।

ह।

अपनो

या ा करना
के

बचम

गलतफहिमयां पैदा हो सकती।

चूमेगी

यह

समय

2011: इस दौरान कोई मह वपूण

योजनाओं को पूरा करने म चुनौितय का सामना करना
पड सकता ह। इस अविध म आपको अपनी दनचाया एवं

पर अिधक

यान दे ने

क आव यकता हो

सकती ह। आपको वाहन सावधानी चलाना चा हये एवं
कसे य

वशेष से वाद ववाद करने से बचना चा हये।

आप मानिसक तनाव से

त हो सकते ह।

15 से 28 फ़रवर

2011: इस अविध म आपके अंदर

आ या मक श

का

वकास हो सकता ह। अिथक

थती म सुधार होगा। अनाव यक िचंताओं पर िनयं ण

िलये

पहले

से

अिधक

क क ठनाइयां

कम होगी एवं आपको समय के साथ सुख-सु वधाएं
होगी। सरकार और

साशन से लाभ

हो सकता

ह।इस दौरान आपके भीतर अिधक आ म व ासी और
साहसी हो सकते ह।

ेम से संबंिधत मामलो म आपको

सफलता और खुशीयां

होगी।

15 से 28 फ़रवर 2011: आपक
काय म हो सकती ह। दरू थ

िच एक से अिधक

थानो से लाभ

कर

सकते ह। आपको मह वाकां ी होकर अपनी उ नित के बारे

वचार कर लेना चा हये। लोग आपके य

सराहना करगे

व क

ज से आपके पद- ित ा म वृ

होगी।

य द इस दौरान आपम संतोष का भाग जा त होगा तो
आप का

वकास

क सकता ह। आपका मन

स न

रहे गा।

क:

1 से 14 फ़रवर

1 से 14 फ़रवर

आपके

भा यशाली सा बत होगा। आपके काय

वृ

क या:

काय

1 से 14 फ़रवर 2011: इस दौरान सफलता आपके कदम

2011: आपको नई नोकर

सकते ह या कसी नये
कर सकते ह। इस
ाि

यवसाय

कर

यवसाय का शुभारं भ

दौरान आपको शुभ समाचारो क

हो सकती ह। अपने प रवार एवं इ

िम ो के साथ

स नता अनुभव कर सकते ह। अ यािधक लाभ के

च कर म

कसी गलत

थानो पर पूं ज िनवेश हानी

कारक हो सकता ह। इस दौरान कज लेने से बचे।
15 से 28 फ़रवर 2011: इस दौरान आपको अपने

याशो

के अनु प लाभ

थानो

क अिधक

यवसायीक या ा लाभ

ाि

होगी। दरू थ

द हो सकती ह। ऑ ं ख से

फरवर 2011

44
संबंिधत रोग हो सकते ह। अनाव यक कसी से उलझने
से बचे अ यथा श ु एवं

वरोिध प

सकता ह। ऑ ं ख का वशेष

से नु शान हो

यान रखे। अपनी वाणी एवं

ोध पर िनयं ण रखे अपनो से र ते बगड सकते ह।

िनणय लेने म

कारण आपको नींद स ब धी परे शानी हो सकती है ।

कुंभ:
1 से 14 फ़रवर 2011: प र म एवं मेहनत से अिधक

धनु:

धन लाभ

1 से 14 फ़रवर
प रणामो

2011: इस दौरान आपको अनुकूल
ाि

होगी।

आपका

मन

संवेदनशील रह सकता ह। आपके

वलंब कर सकती ह। अ प िन ा के

अ यािधक

यासो से अपनी

कर सकते ह। इस अविध म

क गई

ाथना और पूजा से भ व य म लाभ िमलेगा। लोग
आपके य
म वृ

व क सराहना करगे ज से आपके पद- ित ा

होगी। पूं ज िनवेश एवं धन से संबंिधत लेन-दे न

अिधकतर सम याओं को दरू करने सफल हो सकते ह।

एवं मह वपूण िनणय इस दौरान करना लाभदायक रहे गा।

आपक मह वपूण योजनाओं से भ व य को बेहतर बनाया

अपने

जा सकता है । भूिम-भवन इ याद म

15 से 28 फ़रवर 2011: नई प रयोजनाओं को शु

िनवेश,

य- व य लाभ

कया गया पूं ज

द हो सकता ह।

करने हे तु समय फायदे मंद सा बत हो सकता ह।

आिथक लाभ क

संभावना है । ऋण संब धी काय

लेन-दे न शुभ फलदायी िस
वा

हो सकते ह।

य उ म रहे गा। अपने खान-पान का

कसी

का

आपका

यान रखे।

से वाद- ववाद म उलझने से परहे ज कर।

आपके मान-स मान म वृ

होगी।

1 से 14 फ़रवर 2011: एक से अिधक काय म आपक
िच हो सकती ह। लोग आपके य

व क सराहना करगे

होगी। पूं ज िनवेश एवं

धन से संबंिधत लेन-दे न एवं मह वपूण िनणय इस
दौरान करना क कार हो सकता ह। ऋण से स ब धत
लेन-दे न म अित र
भोजन आपक सेहत पर

सावधानी रखे। भूख से अिधक
ितकूल

यान रख।
करने

सकता ह। सहकमचार एवं उ चािधकार आपके मह व को
समझगे और आपके गुण क
इ याद

शंसा करगे। भूिम-भवन

म पूं ज िनवेश लाभ द रहे गा। नये लोगो से

िम ता हो सकती ह। वाणी एवं

ोध पर िनयं ण रखे

अ यथा आपके बने बनाये काय बगड सकते ह।

मीन:
1 से 14 फ़रवर 2011: आपके भौितक सुख साधनो म

मकर:

ज से आपके पद- ित ा म वृ

य का

और मह वपूण िनणय लेने हे तु समय फायदे मंद सा बत हो

15 से 28 फ़रवर 2011: इस अविध म नई प रयोजनाओं
को शु

वा

भाव डाल सकता है ।

15 से 28 फ़रवर 2011: इस अविध म क गई

ाथना

और पूजा से भ व य म लाभ िमलेगा। अनाच यक खच
करने से बचे अ यथा बडा नुकसान संभव ह। वाणी एवं
ोध पर िनयं ण रखे अ यथा आपके बने बनाये काय
बगड सकते ह। आपक मानिसक अ थतार मह वपूण

वृ

होगी। आपको व र

अिभ य

ओं के साथ अपने वचार

करने का अवसर िमल सकता है । पूव से चल

रहे काय म सामा य लाभ
श ु पर आपका

कर सकते ह। आपके

भाव रहे गा। आव यकता से अिधक

भाग-दौड के कारण आपको थकावट हो सकती ह। द ु

लोगो

क संगत म न पड़।

15 से 28 फ़रवर 2011: बौ क

मता का पूण उपयोग

कर उ चािधकार के सहयोग से सफलता
ह। भौितक सुख साधनो

क खर दार

कर सकते

कर सकते ह।

जीवन साथी और ब चो के साथ खुशी-खुशी समय बताने
का

यास करे । कसी से कलह एवं तकरार म न उलझ।

पूराने ऋण का भुगतान कर द।
खान-पान म सावधानी रखे।

वा

य उ म रहे गा

फरवर 2011

45

जब सर वती ने कािलदास का अहं कार तोडा ?


महाक व कािलदास अपने जमाने के महान
उनके कंठ

म सा ात सर वती का वास था।

वजय ठाकुर

व ान थे। मना जाता ह

खर व ान थे इस िलए

शा ाथ म उ ह कोई परा जत नह ं कर सकता था। अपने यश, ित ा
और स मान पाकर एकबार कािलदास को अपनी व ता का घमंड हो
गया। उ ह लगने लगा क उ ह ने संसार के सम त

कार के

ान

कर िलए ह और अब उनके िलए सीखने को कुछ बाक नह ं

बचा। उ ह एसा लगने लगा क उनसे बड़ा

ानी संसार म कोई

दसरा
नह ं। एक बार पड़ोसी रा य से शा ाथ का िनमं ण

पाकर कािलदास महाराजा व मा द य से अनुमित लेकर घोड़े

पर रवाना हए।
उन दनो गम का मौसम था, धूप काफ तेज़

थी और लगातार या ा से कािलदास को रा ते म

यास लग

आई। जंगल था और दरू तक पानी दखाई नह ं दे रहा था।
ू -फूट
जंगल म थोङ तलाश करने पर उ ह एक टट

झोपड़

दखाई द । पानी िमलने क आशा नझर आई तो वो उस झोपड़
क ओर बढ चले। झोपड़ के सामने कुआं था। कािलदास जी ने
सोचा क य द कोई झोपड़ म हो तो उससे पानी दे ने का अनुरोध
कया जाए।
कािलदास सोचह रहे थे क उसी समय झोपड़ से एक छोट
ब ची हाथ म मटका लेकर िनकली। ब ची ने मटके म कुएं से पानी भरा
और जाने लगी। कािलदास ब ची के पास जाकर बोले बािलके! बहत
यास लगी

है ज़रा पानी पला दो। ब ची ने कहा आप कौन ह? म आपको नह ं जानती पहले अपना प रचय द जए।
कािलदास को लगा क मुझे कौन नह ं जानता मुझे प रचय दे ने क

या आव यकता? फर भी यास से बेहाल

थे तो बोले, बािलके अभी तुम छोट हो। इसिलए मुझे नह ं जानती। घर म कोई बड़ा हो तो उसको भेजो। वो मुझे दे खते
ह पहचान लेगा। दरू-दरू तक मेरा बहत
ु नाम और स मान है । म बहत
ु बलवान य

हंू ।

कािलदास के बड़बोलेपन और अहं कार भरे वचन से अ भा वत बािलका बोली, आप अस य कह रहे ह। संसार म
िसफ दो ह बलवान ह और उन दोन को म अ छ तरह जानती हँू ।
य द आप अपनी

यास बुझाना चाहते ह तो उन दोन का नाम बाताएं? थोङ दे र सोचकर कािलदास बोले, मुझे

नह ं पता, तुम ह बता दो। मगर मुझे पानी पला दो। मेरा गला सूख रहा ह। बािलका बोली, दो बलवान ह अ न और

फरवर 2011

46
जल। भूख और यास म इतनी श

ह क बड़े से बड़े बलवान को भी झुका द। दे खए तेज़

यास ने आपक

या

हालत बना द ह।
किलदास च कत रह गए। लड़क का तक अका य था। बड़े से बड़े व ान को परा जत कर चुके कािलदास एक
ब ची के सामने िन
थोड़ा न

र खङे थे। बािलका ने पुनः पूछा स य बताएं कौन ह आप? वो चलने क तैयार म थी, कािलदास

होकर बोले, बािलके! म बटोह हंू । मु कुराते हए
ु ब ची बोली, आप अभी भी झूठ बोल रहे ह। संसार म दो ह

बटोह ह। उन दोन को म अ छ तरह जानती हँू , बताइए वो दोन कौन ह?”
तेज़

यास ने पहले ह कािलदास जी क बु

कर द । ब ची बोली, आप

ीण कर द थी। ले कन लाचार होकर उ ह ने फर अनिभ ता

वयं को बङा व ान बता रहे ह और ये भी नह ं जानते? एक

थान से दसरे

थान

तक बना थके जाने वाला बटोह कहलाता है । बटोह दो ह ह, एक चं मा और दसरा
सूय जो बना थके चलते रहते ह।

आप तो थक गए ह। भूख यास से बेदम हो रहे ह। आप कैसे बटोह हो सकते ह? इतना कहकर बािलका ने पानी से
भरा मटका उठाया और झोपड़ के भीतर चली गई।
अब तो कािलदास और भी दखी
हो गए। इतने अपमािनत वे जीवन म कभी नह ं हए।
यास से शर र क श

घट रह थी। दमाग़ चकरा रहा था। उ ह ने आशा से झोपड़ क तरफ़ दे खा। तभी अंदर से एक वृ
हाथ म खाली मटका था। वो कुएं से मटके म पानी भरने लगी। अब तक काफ

वन

ी िनकली। उसके

हो चुके कािलदास बोले, माते

यास से मेरा बुरा हाल है । भर पेट पानी पला द जए बङा पु य होगा।
बूढ माँ बोलीं, बेटा म तु हे जानती नह ं। अपना प रचय दो। म अव य पानी पला दँ ग
ू ी। कािलदास ने कहा,

म मेहमान हँू, कृ पया पानी पला द। तुम मेहमान कैसे हो सकते हो? संसार म दो ह मेहमान ह। पहला धन और दसरा

यौवन। इ ह जाने म समय नह ं लगता, स य बताओ कौन हो तुम ?

अब तक के सारे तक से परा जत हताश कािलदास बोले म सहनशील हंू । पानी पला द।नह ,ं सहनशील तो दो ह

ह। पहली, धरती जो पापी-पु या मा सबका बोझ सहती है , उसक छाती चीरकर बीज बो दे ने से भी अनाज के भंडार
दे ती है । दसरे
ू , पेड़

जनको प थर मारो

कािलदास लगभग मूछा क

फर भी मीठे फल दे ते ह। तुम सहनशील नह ं। सच बाताओ कौन हो?

थित म आ गए और तक- वतक से झ लाकर बोले, म हठ हंू । फर अस य। हठ

तो दो ह ह, पहला नख और दसरा
केश। कतना भी काटो बार-बार िनकल आते ह। स य कह

ा ण कौन ह आप?

पूर तरह अपमािनत और परा जत हो चुके कािलदास ने कहा, फर तो म मूख ह हंू ।

नह ं तुम मूख कैसे हो सकते हो। मूख दो ह ह। पहला राजा जो बना यो यता के भी सब पर शासन करता है ,

और दसरा
दरबार पं डत जो राजा को

चे ा करता है ।

कुछ बोल न सकने क

स न करने के िलए ग़लत बात पर भी तक करके उसको सह िस

करने क

थित म कािलदास वृ ा के पैर पर िगर पड़े और पानी क याचना म

िगङिगङाने लगे।
उठो व स, ये आवाज़ सुनकर जब कािलदास ने ऊपर दे खा तो सा ात माता सर वती वहां खड़ थी। कािलदास
पुनः नतम तक हो गए। दे वी सर वती जी बोली िश ा से

ान आता है न क अहं कार। तूने िश ा के बल पर

मान और ित ा को ह अपनी उपल ध मान िलया और अहं कार कर बैठे। इसिलए मुझे तु हारे च ु खोलने के िलए ये
वांग करना पड़ा। कािलदास को अपनी गलती समझ म आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े ।

फरवर 2011

47

सर वती पूजन से ब चे बनते ह महाबु मान?

 आलोक शमा
ह द ू परं पराम दे वी श

के तीन प दगा
ु , ल मी और सर वती क उपासना का वशेष मह व है । दे वी सर वती को व ा, बु

ान और कला क दे वी माना जाता ह। अतः इनके पूजन से दे वी सर वती क कृ पा ा होने पर य

ाि होकर उसके च र एवं य

को व ा और

,

ान क

व का वकास होता ह।

शा ो के जानकारे एवं व ानो के मत से व ा ा होने पर य

म वन ता आती ह, वन ता से पा ता बढती ह

और पा ता बढने से धन-संप ी बढती ह। अथात दे वी सर वती क कृ पा ा होने पर य

मानिसक प से ढ संक पी एवं

मजबूत बनता ह।
माघ शु ल क पंचमी अथातः वसंत पंचमी के दन सर वतीजी के पूजन का वशेष मह व होता ह। वसंत पंचमी के दन
दे वी का पूजन बहत
ु शुभ एवं लाभदायक माना जाता ह। बु

और व ा क कामना एवं सफलता ाि

हे तु वसंत पंचमी के दन

सर वती पूजा अ यंत लाभदायक रहती ह।
वसंत

पंचमी

वसंत पंचमी क

सुबह

के

दन

सर वतीजी

नान के प यात प व

कृ पा

ाि

आचरण,

हे तु

वशेष

पूजा

विध

और

वशेष

ाथना

व छ कपडे पहन कर दे वी सर वती का पूजन कर।

पूजन के िलए गंध, अ त (अखं डत चावल(, सफेद और पीले रं ग के फूल, सफेद चंदन, सफेद व

अ पत कर दे वी सर वती का

पूजन कर।
दे वी सर वती को खीर, दध
ू , दह , घी, िम ी, फल, सफेद ितल के ल डू , ना रयल का

प यात दे वी सर वती क इस तुित कर दे वी से व ा, बु

और

ान

सर वती क आरती कर।

ाि

क कामना करते हए
ु घी का द प जलाकर दे वी

या कु दे द ु तुषारहार धवला या शु व ावृ ता
या वीणावरद डम डतकरा या
या

ेतप ासना ।

ा युतशंकर भृ ितिभदवैः सदा व दता

सा मां पातु सर वती भगवती िनःशेषजा यापहा ॥१॥
शु लां

वचारसारपरमां ां जग यापनीं।

वीणा-पु तक-धा रणीमभयदां जा यांधकारपहाम।्
ह ते फा टक मािलकां वदधतीं प ासने सं थताम ्
व दे तां परमे र ं भगवतीं बु

साद चढ़ाएं।

दां शारदाम ् ॥2॥

फरवर 2011

48

नवर
शा

वचन के अनुसार शु

ज ड़त

ी यं

सुवण या रजत म िनिमत

कहलाता ह। सभी र ो को उसके िन

अनंत ए य एवं ल मी क
ी यं

ाि

के साथ लगाने से

कारण यं

ज ड़त

पव

औषिध नह ,ं उसी

के चार और य द नवर

थान पर जड़ कर लॉकेट के

जड़वा ने पर यह नवर

प म धारण करने से य

को

को एसा आभास होता ह जैसे मां ल मी उसके साथ ह। नव ह को

ह क अशुभ दशा का धारण करने वाले

रहता ह एवं

जल के समान प व
कार के नवर

होती ह।

ी यं

ी यं

नान करते समय इस यं

पर

पर

भाव नह ं होता ह। गले म होने के

पश कर जो जल बंद ु शर र को लगते ह, वह गंगा

होता ह। इस िलये इसे सबसे तेज वी एवं फलदािय कहजाता ह। जैसे अमृ त से उ म कोई
कार ल मी

ज ड़त

ी यं

ाि
गु

के िलये

ी यं

व कायालय

से उ म कोई यं

ारा शुभ मुहू त म

संसार म नह ं ह एसा शा ो

ाण

वचन ह। इस

ित त करके बनावाए जाते ह।

अ ल मी कवच
अ ल मी कवच को धारण करने से य
ह। ज से मां ल मी के अ

पर सदा मां महा ल मी क कृ पा एवं आशीवाद बना रहता

प (१)-आ द ल मी, (२)-धा य ल मी, (३)-धैर य ल मी, (४)-गज

ल मी, (५)-संतान ल मी, (६)- वजय ल मी, (७)- व ा ल मी और (८)-धन ल मी इन सभी
वतः अशीवाद

होता ह।

मू य मा : Rs-1050

मं
यापार वृ

कवच

बार हािन हो रह ह।
चैत य यु

यापार के शी
कसी

यापात वृ

िस

यापार वृ

कवच

उ नित के िलए उ म ह। चाह कोई भी यापार हो अगर उसम लाभ के

कार से यापार म बार-बार बांधा उ प न हो रह हो! तो संपूण
यं को

पो का

यपार

थान या घर म था पत करने से शी ह

ाण

यापार वृ

थान पर बार-

ित त मं

िस

पूण

एवं िनत तर लाभ ा

मू य मा : Rs.370 & 730

होता ह।

मंगल यं
( कोण) मंगल यं

को जमीन-जायदाद के ववादो को हल करने के काम म लाभ दे ता ह, इस के अित र

ऋण मु

हे तु मंगल साधना से अित शी

लाभ ा

मंगल यं

क पूजा करने से वशेष लाभ

होता ह।

को

होता ह। ववाह आ द म मंगली जातक के क याण के िलए

मू य मा

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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Rs- 550

फरवर 2011

49

गणेश ल मी यं
ाण- ित त गणेश ल मी यं
करने यापार म वशेष लाभ

को अपने घर-दकान
-ओ फस-फै टर म पूजन

होता ह। यं

के

एवं आिथक

थम सुधार होता ह। गणेश ल मी यं

आशीवाद

होता ह।

थान, ग ला या अलमार म

भाव से भा य म उ नित, मान- ित ा एवं
को

था पत

यापर म वृ

होती ह

था पत करने से भगवान गणेश और दे वी ल मी का संयु

Rs.550 से Rs.8200 तक

मंगल यं से ऋण मु
मंगल यं
मु
यं

को जमीन-जायदाद के ववादो को हल करने के काम म लाभ दे ता ह, इस के अित र

हे तु मंगल साधना से अित शी
क पूजा करने से वशेष लाभ

लाभ

होता ह।

होता ह।

ाण

को ऋण

ववाह आ द म मंगली जातक के क याण के िलए मंगल

ित त मंगल यं

गभपात से बचाव, बुखार, चेचक, पागलपन, सूजन और घाव, यौन श

के पूजन से भा योदय, शर र म खून क कमी,

म वृ , श ु वजय, तं मं के द ु

भा, भूत- ेत भय,

मू य मा

वाहन दघटनाओं
, हमला, चोर इ याद से बचाव होता ह।

Rs- 550

कुबेर यं
कुबेर यं

के पूजन से

वण लाभ, र लाभ, पैत ृ क स प ी एवं गड़े हए
ु धन से लाभ ाि

िलये कुबेर यं अ य त सफलता दायक होता ह। एसा शा ो

वचन ह। कुबेर यं

क कामना करने वाले य

के पूजन से एकािधक

से धन का

होकर धन संचय होता ह।

ता

पर सुवण पोलीस
(Gold Plated)

साईज
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

ता

पर रजत पोलीस

ता प पर
(Copper)

(Silver Plated)

मू य
640
1250
1850
2700
4600
8200

साईज
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

मू य
460
820
1250
2100
3700
6400

साईज
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

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के

मू य
370
550
820
1450
2450
4600

फरवर 2011

50

फरवर 2011मािसक पंचांग
द वार
1

माह

मंगल माघ

ितिथ

समाि

समाि

योग

समाि

कृ ण चतुदशी

30:27:25

पूवाषाढ़

10:51:48

20:24:37

उ राषाढ़

12:40:56

िस

20:22:11

करण

समाि

चं
रािश

17:48:03

धनु

चतु पद

19:11:53

मकर

20:34:45

नाग

08:01:00

मकर

2 बुध

माघ

कृ ण अमाव या

32:01:34

3 गु

माघ

कृ ण अमाव या

08:01:00

वण

14:48:49

4 शु

माघ

शु ल

ितपदा

09:55:43

धिन ा

17:16:20

व रयान

21:02:17

बव

09:55:43

कुंभ

5 शिन

माघ

शु ल

तीया

12:06:21

शतिभषा

19:58:51

पर ह

21:41:02

कौलव

12:06:21

कुंभ

6 रव

माघ

शु ल तृ तीया

14:32:54

पूवाभा पद

22:54:28

िशव

22:29:09

गर

14:32:54

कुंभ

7 सोम

माघ

शु ल चतुथ

17:06:00

उ राभा पद

25:54:45

िस

23:22:52

17:06:00

मीन

8 मंगल माघ

शु ल पंचमी

19:40:00

रे वित

28:52:11

सा य

24:12:49

बालव

19:40:00

मीन

9 बुध

माघ

शु ल ष ी

22:01:48

नी

31:33:41

शुभ

24:54:18

कौलव

08:53:22

मेष

10 गु

माघ

शु ल स मी

24:01:05

नी

07:33:54 Shukla

25:17:01

गर

11:05:46

मेष

11 शु

माघ

शु ल अ मी

25:25:39

भरणी

09:50:58

25:13:28

12:48:09

मेष

12 शिन

माघ

शु ल नवमी

26:07:05

कृ ितका

11:30:31

24:38:01

बालव

13:53:01

वृ ष

13 र व

माघ

शु ल दशमी

25:57:52

रो ह ण

12:25:59

वैध ृ ित

23:23:10

तैितल

14:09:07

वृ ष

14 सोम

माघ

शु ल एकादशी

24:58:00

मृ गिशरा

12:32:41

21:28:56

व णज

13:35:30

िमथुन

15 मंगल माघ

शु ल

ादशी

23:10:18

आ ा

11:49:41

18:56:15

बव

12:10:18

िमथुन

16 बुध

माघ

शु ल

योदशी

20:39:28

पुनवसु

10:20:43

आयु मान

15:48:51

कौलव

10:01:02

कक

17 गु

माघ

शु ल चतुदशी

17:34:52

पु य

08:15:11

सौभा य

12:10:29

गर

07:10:29

कक

18 शु

माघ

शु ल पू णमा

14:05:52

मघा

26:47:07

शोभन

08:11:30

बव

14:05:52

िसंह

यितपात

वषकुंभ
ीित

समाि
17:17:00

28:00:00

16:09:00

28:51:00

16:19:00

24:35:00

28:47:00

29:39:00

फरवर 2011

51

19 शिन

फा गुन कृ ण

ितपदा

10:23:44

पूवाफा गुनी

23:47:10

सुकमा

23:41:33

कौलव

10:23:44

िसंह

20 र व

फा गुन कृ ण

तीया

27:05:01

उ राफा गुनी

20:53:46

धृ ित

19:29:24

व णज

16:50:57

क या

21 सोम

फा गुन कृ ण

23:50:02

ह त

18:17:14

शूल

15:29:25

बव

13:23:47

क या

22 मंगल फा गुन कृ ण पंचमी

21:03:10

िच ा

16:06:55

गंड

11:50:03

कौलव

10:21:55

तुला

23 बुध

फा गुन कृ ण ष ी

18:52:51

वाती

14:31:17

वृ

08:39:43

गर

07:54:43

तुला

24 गु

फा गुन कृ ण स मी

17:25:38

वशाखा

13:35:57

27:53:46

बव

17:25:38

तुला

25 शु

फा गुन कृ ण अ मी

16:39:40

अनुराधा

13:22:47

हषण

26:20:55

कौलव

16:39:40

वृ

26 शिन

फा गुन कृ ण नवमी

16:36:48

जे ा

13:49:55

25:21:48

गर

16:36:48

वृ

27 र व

फा गुन कृ ण दशमी

17:11:25

मूल

14:56:25

िस

24:48:55

17:11:25

धनु

28 सोम

फा गुन कृ ण एकादशी

18:17:55

पूवाषाढ़

16:34:47

18:17:55

धनु

तृ तीयाचतुथ

मं
एकमुखी

ा -Rs- 1250,2800 छह मुखी

दो मुखी

ा -Rs- 100,151

याघात

यितपात

िस

24:41:21

बालव

29:03:00

29:08:00

07:46:00

13:51:00

ा -Rs- 55,100

यारहमुखी

ा -Rs- 2800

सात मुखी

ा -Rs- 120,190

बारह मुखी

ा -Rs- 3600

ा -Rs- 820,1250 तेरह मुखी

ा -Rs- 6400

तीन मुखी

ा -Rs- 100,151

आठ मुखी

चार मुखी

ा -Rs- 55,100

नौ मुखी

ा -Rs- 820,1250

चौदह मुखी

पंच मुखी

ा -Rs- 28,55

दसमुखी

ा -Rs- ........

गौर षंकर

ा -Rs- 19000
ा -Rs-

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फरवर 2011

52

फरवर -2011 मािसक त-पव- यौहार

1

2

वार

माह

ितिथ

मंगल

माघ

कृ ण

चतुदशी

बुध

माघ

कृ ण

अमाव या

समाि
30:27:25

32:01:34

मुख

त- योहार

िशव चतुदशी, मािसक िशवरा

त,

मौनी अमाव या, नान-दान- ा

हे तु उ म माघी

अमाव या, गंगा- नान मेला,

-सा व ी

त,

ापरयुगा द ितिथ,
3

गु

माघ

कृ ण

अमाव या

08:01:00

4

शु

माघ

शु ल

ितपदा

09:55:43

5

शिन

माघ

शु ल

तीया

12:06:21

6

रव

माघ

शु ल

तृ तीया

14:32:54

7

सोम

माघ

शु ल

चतुथ

17:06:00

नान-दान

मंगल

माघ

शु ल

पंचमी

19:40:00

मौनी

गु

नवरा

ारं भ, नवीन चं दशन

गौर तृ तीया, ग तर तृ तीया, सर वती तृ तीया,
वनायक चतुथ

त, ितल चतुथ , कु द चतुथ ,

(चं. उ.रा. 9.45)
रितकाम

ीपंचमी, सर वती-पूजा, त क पूजा,

महो सव,

गु

गोलवलकर

सर वती जयंती, पंचक समा (रा
9

बुध

माघ

शु ल

ष ी

22:01:48

शीतलाष ी, द र ताहरण
क द (कुमार) ष ी

गु

माघ

शु ल

स मी

24:01:05

त, मंदारष ी

त,

त,

स मी, आरो य स मी
पु स मी

जयंती,

1.55)

अचला रथ स मी, अचला स मी
10

अमाव या,

वेणी अमावस, पंचक ारं भ (रा.अ.2.51)

बसंत पंचमी,
8

अित र

त, सूय रथ

त, चं भागा स मी,

त, नमदा जयंती,

दगा
मी

त,

अ नपूणा मी

11

शु

माघ

शु ल

अ मी

25:25:39

12

शिन

माघ

शु ल

नवमी

26:07:05

13

रव

माघ

शु ल

दशमी

25:57:52

माघी वजयादशमी, श य दशमी,

14

सोम

माघ

शु ल

एकादशी

24:58:00

जया एकादशी

त,

भी मा मी,
गु

नवरा

नवमी

त,

पूण, िशिशर नवरा

पूण, महानंदा

ोण नवमी,

त, अजा एकादशी, सौर फा गुन

फरवर 2011

53
मा. ा,
15

मंगल

माघ

शु ल

ादशी

23:10:18

16

बुध

माघ

शु ल

योदशी

20:39:28

17

गु

माघ

शु ल

चतुदशी

17:34:52

18

शु

माघ

शु ल

पू णमा

14:05:52

भी म, ितल

शिन

फा गुन

कृ ण

ितपदा

10:23:44

दोष

त, गु

( ा.7.35 से रा

रव

फा गुन

कृ ण

21

सोम

फा गुन

कृ ण

22

मंगल

फा गुन

23

बुध

24

तीया

ादशी, वाराह

गोरखानाथ जयंती, पु य न
अंत 6.46 तक),

णी चतुदशी, माघी पू णमा त

नान दान हे तु उ म माघी पू णमा, दा डारो पणी
पू णमा, माघ- नान पूण,
त समा, छ पित िशवाजी जयंती,

सूय सायन मीन म
ऋतु

20

यामबाबा

ादशी, संतान ादशी त, ितल ादशी,

षोडशकारण
19

ादशी,

ात: 5.56 बजे, सौर वस त

ारं भ ,

27:05:01

मोढे र माता

ाक यो सव,

तृ तीया-चतुथ

23:50:02

संक ी गणेश चतुथ

कृ ण

पंचमी

21:03:10

फा गुन

कृ ण

ष ी

18:52:51

गु

फा गुन

कृ ण

स मी

17:25:38

25

शु

फा गुन

कृ ण

अ मी

16:39:40

सीता मी

त, वै कटा मी, जानक ज.

26

शिन

फा गुन

कृ ण

नवमी

16:36:48

समथ गु

ीरामदास जयंती, वीर सावरकर दवस,

27

रव

फा गुन

कृ ण

दशमी

17:11:25

28

सोम

फा गुन

कृ ण

एकादशी

18:17:55

त, (चं.उ.रा.9.27)

क तूरबा गांधी एवं मौलाना आजाद

मृ ित

दवस,
यशोदा माता जयंती,
काला मी

त,

ीनाथजी का पाटो सव, शबर

जयंती,

वामी

दयानंद सर वती जयंती,

शेखर

आजाद शह द दवस,
वजया एकादशी

त, रा ीय व ान दवस,

मंगल यं
( कोण) मंगल यं

को जमीन-जायदाद के ववादो को हल करने के काम म लाभ दे ता ह, इस के अित र

ऋण मु

हे तु मंगल साधना से अित शी

लाभ ा

मंगल यं

क पूजा करने से वशेष लाभ

होता ह।

को

होता ह। ववाह आ द म मंगली जातक के क याण के िलए

मू य मा

Rs- 550

फरवर 2011

54

ह चलन फरवर -2011

Sun

Mon

1

09:17:50

08:23:58

09:18:41

09:01:35

11:07:50

08:02:24

05:23:16

08:08:24

02:08:24

11:04:04

10:03:51

08:12:28

2

09:18:51

09:06:25

09:19:28

09:03:06

11:08:02

08:03:32

05:23:16

08:08:21

02:08:21

11:04:07

10:03:53

08:12:30

3

09:19:52

09:18:42

09:20:15

09:04:38

11:08:14

08:04:40

05:23:15

08:08:15

02:08:15

11:04:09

10:03:55

08:12:31

4

09:20:53

10:00:51

09:21:02

09:06:11

11:08:26

08:05:48

05:23:14

08:08:08

02:08:08

11:04:12

10:03:57

08:12:33

5

09:21:54

10:12:53

09:21:50

09:07:45

11:08:38

08:06:56

05:23:13

08:07:59

02:07:59

11:04:15

10:03:59

08:12:35

6

09:22:55

10:24:49

09:22:37

09:09:19

11:08:50

08:08:04

05:23:12

08:07:50

02:07:50

11:04:17

10:04:02

08:12:37

7

09:23:56

11:06:41

09:23:24

09:10:54

11:09:02

08:09:12

05:23:11

08:07:42

02:07:42

11:04:20

10:04:04

08:12:38

8

09:24:56

11:18:32

09:24:12

09:12:30

11:09:15

08:10:21

05:23:10

08:07:34

02:07:34

11:04:23

10:04:06

08:12:40

9

09:25:57

00:00:25

09:24:59

09:14:07

11:09:27

08:11:29

05:23:08

08:07:29

02:07:29

11:04:26

10:04:08

08:12:42

10

09:26:58

00:12:24

09:25:46

09:15:44

11:09:39

08:12:38

05:23:07

08:07:25

02:07:25

11:04:29

10:04:11

08:12:43

11

09:27:59

00:24:33

09:26:34

09:17:22

11:09:52

08:13:47

05:23:05

08:07:24

02:07:24

11:04:32

10:04:13

08:12:45

12

09:28:59

01:06:57

09:27:21

09:19:01

11:10:05

08:14:56

05:23:03

08:07:24

02:07:24

11:04:35

10:04:15

08:12:47

13

10:00:00

01:19:41

09:28:09

09:20:41

11:10:17

08:16:05

05:23:01

08:07:25

02:07:25

11:04:38

10:04:17

08:12:48

14

10:01:01

02:02:50

09:28:56

09:22:22

11:10:30

08:17:15

05:23:00

08:07:26

02:07:26

11:04:40

10:04:20

08:12:50

15

10:02:01

02:16:26

09:29:43

09:24:03

11:10:43

08:18:24

05:22:58

08:07:26

02:07:26

11:04:43

10:04:22

08:12:52

16

10:03:02

03:00:32

10:00:31

09:25:46

11:10:56

08:19:33

05:22:55

08:07:23

02:07:23

11:04:47

10:04:24

08:12:53

17

10:04:02

03:15:05

10:01:18

09:27:29

11:11:09

08:20:43

05:22:53

08:07:19

02:07:19

11:04:50

10:04:27

08:12:55

18

10:05:03

04:00:00

10:02:05

09:29:13

11:11:22

08:21:53

05:22:51

08:07:12

02:07:12

11:04:53

10:04:29

08:12:56

19

10:06:04

04:15:10

10:02:53

10:00:58

11:11:35

08:23:03

05:22:49

08:07:03

02:07:03

11:04:56

10:04:31

08:12:58

20

10:07:04

05:00:23

10:03:40

10:02:44

11:11:48

08:24:13

05:22:46

08:06:53

02:06:53

11:04:59

10:04:33

08:12:59

21

10:08:04

05:15:29

10:04:28

10:04:31

11:12:02

08:25:23

05:22:44

08:06:45

02:06:45

11:05:02

10:04:36

08:13:00

22

10:09:05

06:00:19

10:05:15

10:06:19

11:12:15

08:26:33

05:22:41

08:06:37

02:06:37

11:05:05

10:04:38

08:13:02

23

10:10:05

06:14:46

10:06:02

10:08:07

11:12:28

08:27:43

05:22:38

08:06:32

02:06:32

11:05:08

10:04:40

08:13:03

24

10:11:06

06:28:48

10:06:50

10:09:57

11:12:42

08:28:53

05:22:35

08:06:30

02:06:30

11:05:11

10:04:43

08:13:05

25

10:12:06

07:12:23

10:07:37

10:11:47

11:12:55

09:00:04

05:22:32

08:06:29

02:06:29

11:05:15

10:04:45

08:13:06

26

10:13:06

07:25:35

10:08:25

10:13:39

11:13:09

09:01:14

05:22:29

08:06:29

02:06:29

11:05:18

10:04:47

08:13:07

27

10:14:07

08:08:27

10:09:12

10:15:31

11:13:22

09:02:25

05:22:26

08:06:29

02:06:29

11:05:21

10:04:49

08:13:08

28

10:15:07

08:21:02

10:09:59

10:17:24

11:13:36

09:03:35

05:22:23

08:06:28

02:06:28

11:05:24

10:04:52

08:13:10

Ma

Me

Jup

Ven

Sat

Rah

Ket

Ua

Nep

Plu

फरवर 2011

55

फरवर 2011 - वशेष योग
काय िस
दनांक
6
9

योग

अमृ त योग

योग अविध

9

रा

10:53 से रातभर

12

दोपहर 11:29 से रातभर

ात: 4:50 से सूय दय तक

14

सूय दय से दन 12:31 तक

17

सूय दय से
रा

ात: 7:33 तक

ात: 4:50 से सूय दय तक

10

सूय दय से

12

दोपहर 11:29 से रातभर

20

14

सूय दय से दोपहर 12:31 तक

गु -पु यामृ त योग

17

सूय दय से

दनांक

20

स पूण दन-रात

24

दोपहर 1:35 से रातभर

25

सूय दय से दन 1:21 तक

15

दोपहर

27

सूय दय से दन 2:55 तक

19

रा

ात: 8:13 तक

ात: 8:13 तक

8:53 से रातभर

योग अविध
सूय दय से ात: 8:13 तक

17

पु कर योग
11:48 से रा

11:09 तक

11:46 से रातभर

योग फल :
काय िस

योग मे कये गये शुभ काय मे िन

त सफलता ा होती ह, एसा शा ो

पु कर योग म कये गये शुभ काय का लाभ दोगुना होता ह। एसा शा ो

वचन ह।

पु कर योग म कये गये शुभ काय का लाभ तीन गुना होता ह। एसा शा ो

दै िनक शुभ एवं अशुभ समय

वचन ह।

वचन ह

ान तािलका

गुिलक काल

यम काल

(शुभ)

(अशुभ)

समय अविध

समय अविध

समय अविध

र ववार

03:00 से 04:30

12:00 से 01:30

04:30 से 06:00

सोमवार

01:30 से 03:00

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

मंगलवार

12:00 से 01:30

09:00 से 10:30

03:00 से 04:30

बुधवार

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

12:00 से 01:30

गु वार

09:00 से 10:30

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

शु वार

07:30 से 09:00

03:00 से 04:30

10:30 से 12:00

शिनवार

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

09:00 से 10:30

वार

राहु काल
(अशुभ)

फरवर 2011

56

दन के चौघ डये
समय

र ववार

सोमवार

मंगलवार बुधवार गु वार

शु वार

शिनवार

06:00 से 07:30

उ ेग

अमृत

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

07:30 से 09:00

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

09:00 से 10:30

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

10:30 से 12:00

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

12:00 से 01:30

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

01:30 से 03:00

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

03:00 से 04:30

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

04:30 से 06:00

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

रात के चौघ डये

शा ो

समय

र ववार

सोमवार

मंगलवार

बुधवार गु वार

शु वार

शिनवार

06:00 से 07:30

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

07:30 से 09:00

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

09:00 से 10:30

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

10:30 से 12:00

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

12:00 से 01:30

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

01:30 से 03:00

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

03:00 से 04:30

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

04:30 से 06:00

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

मत के अनुशार य द कसी भी काय का ारं भ शुभ मुहू त या शुभ समय पर कया जाये तो काय म सफलता

ा होने क संभावना यादा बल हो जाती ह। इस िलये दै िनक शुभ समय चौघ ड़या दे खकर ा
नोट: ायः दन और रा

के चौघ ड़ये क िगनती

मशः सूय दय और सूया त से क जाती ह।

कया जा सकता ह।

येक चौघ ड़ये क अविध 1

घंटा 30 िमिनट अथात डे ढ़ घंटा होती ह। समय के अनुसार चौघ ड़ये को शुभाशुभ तीन भाग म बांटा जाता ह, जो

मशः शुभ,

म यम और अशुभ ह।

चौघ डये के

वामी

* हर काय के िलये शुभ/अमृ त/लाभ का

शुभ चौघ डया

म यम चौघ डया

अशुभ चौघ ड़या

चौघ डया

चौघ डया

चौघ डया

वामी ह

शुभ

गु

अमृ त
लाभ

चर

वामी ह
शु

वामी ह

उ ेग

सूय

चं मा

काल

शिन

बुध

रोग

मंगल

चौघ ड़या उ म माना जाता ह।
* हर काय के िलये चल/काल/रोग/उ े ग
का चौघ ड़या उिचत नह ं माना जाता।

फरवर 2011

57

दन क होरा - सूय दय से सूया त तक
वार

1.घं

2.घं

3.घं

4.घं

5.घं

6.घं

7.घं

8.घं

9.घं

र ववार

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

सोमवार

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

मंगलवार

मंगल

सूय

शु

बुध

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

बुधवार

बुध

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

गु वार

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

शु वार

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

शिनवार

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

चं

10.घं 11.घं 12.घं

रात क होरा – सूया त से सूय दय तक
र ववार

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

सोमवार

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगलवार

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुधवार

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु वार

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु वार

मंगल

सूय

शु

बुध

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिनवार

बुध

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

होरा मुहू त को काय िस
को समय से पूव

के िलए पूण फलदायक एवं अचूक माना जाता ह, दन-रात के २४ घंट म शुभ-अशुभ समय

ात कर अपने काय िस

व ानो के मत से इ छत काय िस

चं

के िलए

के िलए

योग करना चा हये।

ह से संबंिधत होरा का चुनाव करने से वशेष लाभ

होता ह।
 सूय क होरा सरकार काय के िलये उ म होती ह।
 चं मा क होरा सभी काय के िलये उ म होती ह।
 मंगल क होरा कोट-कचेर के काय के िलये उ म होती ह।
 बुध क होरा व ा-बु

अथात पढाई के िलये उ म होती ह।

 गु

क होरा धािमक काय एवं ववाह के िलये उ म होती ह।

 शु

क होरा या ा के िलये उ म होती ह।

 शिन क होरा धन-

य संबंिधत काय के िलये उ म होती ह।

फरवर 2011

58

वा तु परामश
गु

योितष प का के पाठको के सुझाव एवं अनुरोध पर गु

व कायालय

ारा वा तु से संबंिधत िनःशु क सेवा

दान क जारह ह।

य द आपका घर, दकान
, कायालय, उ ोग इ या द

आप शार रक, मानिसक एवं आिथक सम याओं से परे शान ह।

आपको उिचत महे नत करने पर भी उिचत फल क
हो, आप बार-बार लाभ के

थान य द वा तु दोष यु

ाि

नह ं हो रह

थान पर हानीं उठा रह हो,

तो संभ वत

आपका भवन वा तु दोष से यु

ह।

वा तु दोष के बार मे जानने और उसके समाधान के िलये गु

ह,

योितष प का के मा यम से आप हमारे कुशल एवं अनुभवी वा तु
वशेष

से िनःशु क परामश

िनिमत भवन क

कर सकते ह।

थित उसक बाहर एवं भीतर सजावट आपके अनुकूल ह या नह ं। जससे आप भवन म

बना तोड-फोड कये इनके सरल उपायो से केवल फेर-बदल कर के वशेष लाभ

कर सकते ह। वा तु

परामश हे तु फाम भर।
नोट: जो

उठाने का क

ई मेल से िनजी
कर। गु

अ यथा आपको गु

प म परामश

करना चाहते ह वह कृ या हमार भुगतान परामश सेवा का लाभ

व कायालय म फोन से संपक करने पर आपको ई मेल से िनजी

व कायालय लोग के मा यम से परामश

प म परामश

होगा। कृ या य द आप कसी सम या से

होगा।
त हो,

तो इस िनःशु क परामश सेवा का लाभ उठाये। नये भवन के िनमाण एवं बना कसी सम या के परामश नह ं दया
जायेगा।

गु

योितष वा तु परामश

नाम:
पता:
ई-मेल पता
फोन नंबर
सम या:

* साथ म भवन का दशा िलखा कर न शा भेजे ।

वा तु परामश फम इस पत पर भेजे या ई-मेल कर या हमारे

लोग

http://gurutvajyotish.blogspot.com/ पर

जाकर ओनलाईन फाम जमा करवा सकते ह। भवन का न शा इस ई-मेल पर भेज:े Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com,

गु

व कायालय

ारा नये भवन के िनमाण एवं संपूण वा तु परामश सु वधा उ ल ध ह।

फरवर 2011

59

योितष परामश
योितष से संबंिधत कसी भी
िन:शु क उ र एवं समाधान

कार क सम यओ का गु

व कायालय

लोग के मा यम से आप अपने

का

कर सकते ह।

नोट: जो बंधु केवल अपना भ व य, वषफल या रािशफल इ या द जानना चाहते ह। जो य
नह ं ह, वह कृ या भुगतान कर हमार

वशेष सेवाये

करने का क

कसी सम या से

कर।

योितष परामश
नाम:
पता का नाम
माता का नाम
पता:
ई-मेल पता:
फोन नंबर:
ज म दनांक:
ज म समय:
ज म

थान( जला):

एक

/सम या:

योितष परामश फम इस पत पर भेजे या ई-मेल कर या हमारे

लोग

http://gurutvajyotish.blogspot.com/ पर

जाकर ओनलाईन फाम जमा करवा सकते ह।

GURUTVA KARYALAY
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सूचना :
गु व कायालय से जुडे बंधुगण हो, िनयिमत पाठक हो या जो य
आिथक
से धन दे कर
सेवा ा करने म असमथ हो एसे य
चाहे वह कायालय म आते हो, फ़ोन पर हो, ई-मेल ारा
हो या ऑन लाइन हो, उन बंधु के िलये हमार यादातर सेवा िन:शु क ह।
िन:शु क सेवा दान करने का अथ यह कतई नह ं ह क हमारे पास कोई काय नह ं ह। इस िलये
वयं का एवं हमार समय न करने के बजाय िनःशु क सेवा का लाभ उ ह ा करने का मौका
द, जो य
वा तव म परे शान ह । यो क बना सम या के िन:शु क सेवा का लाभ उठाने के
कारण अ य लोग को सेवा ा करने म वलंब होता ह। तो कृ या अपना सहयोग बनाये रखे।

फरवर 2011

60

सव रोगनाशक यं /कवच
मनु य अपने जीवन के विभ न समय पर कसी ना कसी सा य या असा य रोग से
उिचत उपचार से

यादातर सा य रोगो से तो मु

होजाते ह, या कोइ असा य रोग से
पाता। डॉ टर
िलये य

िमल जाती ह, ले कन कभी-कभी सा य रोग होकर भी असा या

िसत होजाते ह। हजारो लाखो

नह ं हो

थती म लाभा

ाि

के

एक डॉ टर से दसरे
डॉ टर के च कर लगाने को बा य हो जाता ह।

एवं तं

उ लेख अपने

को विभ न रोग से

ताप से रोग शांित हे तु विभ न आयुवर औषधो के अित र

ंथो म कर मानव जीवन को लाभ

बु जीवो के मत से जो य
से

पये खच करने पर भी अिधक लाभ

ारा दजाने वाली दवाईया अ प समय के िलये कारगर सा बत होती ह, एिस

भारतीय ऋषीयोने अपने योग साधना के
मं

त होता ह।

जीवनभर अपनी दनचया पर िनयम, संयम रख कर आहार
यो क सम

संसार काल के अधीन ह। एवं मृ यु िन

और कोई टाल नह ं सकता, ले कन रोग होने क
मं

एवं तं

को कम करने का

यास हजारो वष पूव कया था।
हण करता ह, एसे य

िसत होने क संभावना कम होती ह। ले कन आज के बदलते युग म एसे य

त होते दख जाते ह।

इस िलये यं

दान करने का साथक

थती म य

रोग दरू करने का

के कुशल जानकार से यो य मागदशन लेकर य

यं ,

भी भयंकर रोग

त ह जसे वधाता के अलावा
यास तो अव य कर सकता ह।

रोगो से मु

पाने का या उसके

भावो

यास भी अव य कर सकता ह।

योितष व ा के कुशल जानकर भी काल पु षक गणना कर अनेक रोगो के अनेको रह य को उजागर कर
सकते ह। योितष शा

के मा यम से रोग के मूलको पकडने मे सहयोग िमलता ह, जहा आधुिनक िच क सा शा

अ म होजाता ह वहा

योितष शा

उपायोगी िस

ारा रोग के मूल(जड़) को पकड कर उसका िनदान करना लाभदायक एवं

होता ह।

हर य

म लाल रं गक कोिशकाए पाइ जाती ह, जसका िनयमीत वकास

जब इन कोिशकाओ के

म म प रवतन होता है या वखं डन होता ह तब य

उ प न होते ह। एवं इन कोिशकाओ का संबंध नव
ज मांग से दशा-महादशा एवं

हो क गोचर म

थती से

वाकषण बल
भाव से य

भावीत कता ह

के मा यम से

ठक उसी

को सकारा मक उजा

वा

य संबंधी वकारो

के

होता ह।

के ज मांग म

भाव को कम करने का काय सरलता पूव क कया जासकता ह। जेसे हर य

पृ वी का गु
सकारा मक

के शर र म

तर के से होता रहता ह।

हो के साथ होता ह। ज से रोगो के होने के कारणा

सव रोग िनवारण कवच एवं महामृ युंजय यं
हो के अशुभ

म ब

कार कवच एवं यं

होती ह ज से रोग के

थत कमजोर एवं पी डत
को

के मा यम से

ांड क उजा एवं
ांड

भाव को कम कर रोग मु

क उजा के
करने हे तु

सहायता िमलती ह।
रोग िनवारण हे तु महामृ युंजय मं
महामृ युंजय मं

से प रिचत ह।

एवं यं

का बडा मह व ह। ज से ह द ू सं कृ ित का

ायः हर

फरवर 2011

61

कवच के लाभ :

एसा शा ो

वचन ह जस घर म महामृ युंजय यं

था पत होता ह वहा िनवास कता हो नाना

कार क

आिध- यािध-उपािध से र ा होती ह।

पूण

ाण

ित त एवं पूण चैत य यु

सव रोग िनवारण कवच कसी भी उ

एवं जाित धम के लोग चाहे

ी हो या पु ष धारण कर सकते ह।

ज मांगम अनेक कारके खराब योगो और खराब

कुछ रोग सं मण से होते ह एवं कुछ रोग खान-पान क अिनयिमतता और अशु तासे उ प न होते ह। कवच
एवं यं

ारा एसे अनेक कार के खराब योगो को न

सव रोगनाशक कवच एवं यं

हो क

ितकूलता से रोग उतप न होते ह।

कर, वा

य लाभ और शार रक र ण

करने हे तु

सव उपयोगी होता ह।

आज के भौितकता वाद आधुिनक युगमे अनेक एसे रोग होते ह, जसका उपचार ओपरे शन और दवासे भी
क ठन हो जाता ह। कुछ रोग एसे होते ह जसे बताने म लोग हच कचाते ह शरम अनुभव करते ह एसे रोगो
को रोकने हे तु एवं उसके उपचार हे तु सव रोगनाशक कवच एवं यं

येक य

थती म उपचार हे तु सवरोगनाशक कवच एवं यं

जस घर म पता-पु , माता-पु , माता-पु ी, या दो भाई एक ह न
अिधक क दायक

जस य

थती होती ह। उपचार हे तु महामृ युंजय यं

ाण

से संपक कर।

ित त एवं पूण चैत य यु

फल द होता ह।

मे ज म लेते ह, तब उसक माता के िलये

फल द होता ह।

का ज म प रिध योगमे होता ह उ हे होने वाले मृ यु तु य क

उपचार हे तु सव रोगनाशक कवच एवं यं
नोट:- पूण

होता ह।

क जेसे-जेसे आयु बढती ह वैसे-वसै उसके शर र क ऊजा होती जाती ह। जसके साथ अनेक

कार के वकार पैदा होने लगते ह एसी

लाभादािय िस

एवं होने वाले रोग, िचंता म

शुभ फल द होता ह।
सव रोग िनवारण कवच एवं यं

के बारे म अिधक जानकार हे तु हम

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 Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client.
 Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our
Article dose not produce any bad energy.

Our Goal
 Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants
prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All
types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door
step.

फरवर 2011

62

मं िस कवच

मं िस कवच को वशेष योजन म उपयोग के िलए और शी
भाव शाली बनाने के िलए तेज वी मं ो ारा
.
शुभ महत
ू म शुभ दन को तैयार कये जाते है अलग अलग कवच तैयार करने केिलए अलग अलग तरह के
.
मं ो का योग कया जाता है .

य चुने मं िस कवच?

 उपयोग म आसान कोई ितब ध नह ं
 कोई वशेष िनित-िनयम नह ं
 कोई बुरा भाव नह ं
 कवच के बारे म अिधक जानकार हे तु
सव काय िस

कवच - 3700-/

ऋण मु

कवच सूिच

कवच – 730/-

सवजन वशीकरण कवच – 1050/-*

नव ह शांित कवच – 730/-

अ ल मी कवच – 1050/-

तं र ा कवच – 730/-

आक मक धन ाि कवच – 910/-

श ु वजय कवच – 640/-*

भूिम लाभ कवच – 910/-

पद उ नित कवच – 640/-

संतान ाि कवच – 910/-

धन ाि कवच – 640/-

काय िस

कवच – 910/-

ववाह बाधा िनवारण कवच – 640/-

काम दे व कवच – 820/-

म त क पृ

जगत मोहन कवच -730/-*

कामना पूित कवच – 550/-

पे - यापार वृ

*कवच मा

कवच – 730/-

वधक कवच – 640/-

व न बाधा िनवारण कवच – 550/-

वरोध नाशक कवचा– 550/-

वशीकरण कवच- 460/-* (2-3 य

के िलए)

प ी वशीकरण कवच – 460/-*
नज़र र ा कवच – 460/यापर वृ

कवच- 370-/

पित वशीकरण कवच – 370/-*
दभा
ु य नाशक कवच – 370/सर वती कवक – 370/- क ा+ 10 के िलए
सर वती कवक -280 / - क ा 10 तक के िलए
वशीकरण कवच – 280/-* 1 य

शुभ काय या उ े य के िलये

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(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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के िलए

63

YANTRA LIST
Our Splecial Yantra
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10

12 – YANTRA SET
VYAPAR VRUDDHI YANTRA
BHOOMI LABHA YANTRA
TANTRA RAKSHA YANTRA
AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA
PADOUNNATI YANTRA
RATNE SHWARI YANTRA
BHUMI PRAPTI YANTRA
GRUH PRAPTI YANTRA
KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA

फरवर 2011

EFFECTS
For all Family Troubles
For Business Development
For Farming Benefits
For Protection Evil Sprite
For Unexpected Wealth Benefits
For Getting Promotion
For Benefits of Gems & Jewellery
For Land Obtained
For Ready Made House
-

Shastrokt Yantra
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41

AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA
BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL)
BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL)
BHAGYA VARDHAK YANTRA
BHAY NASHAK YANTRA
CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta)
CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA
DARIDRA VINASHAK YANTRA
DHANDA POOJAN YANTRA
DHANDA YAKSHANI YANTRA
GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra)
GARBHA STAMBHAN YANTRA
GAYATRI BISHA YANTRA
HANUMAN YANTRA
JWAR NIVARAN YANTRA
JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA
YANTRA
KALI YANTRA
KALPVRUKSHA YANTRA
KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA)
KANAK DHARA YANTRA
KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA
KARYA SHIDDHI YANTRA
 SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA
KRISHNA BISHA YANTRA
KUBER YANTRA
LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA
LAKSHAMI GANESH YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA
MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA)
MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA

Blessing of Durga
Win over Enemies
Blessing of Bagala Mukhi
For Good Luck
For Fear Ending
Blessing of Chamunda & Navgraha
Blessing of Chhinnamasta
For Poverty Ending
For Good Wealth
For Good Wealth
Blessing of Lord Ganesh
For Pregnancy Protection
Blessing of Gayatri
Blessing of Lord Hanuman
For Fewer Ending
For Astrology & Spritual Knowlage
Blessing of Kali
For Fullfill your all Ambition
Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga
Blessing of Maha Lakshami
For Successes in work
For Successes in all work
Blessing of Lord Krishna
Blessing of Kuber (Good wealth)
For Obstaele Of marriage
Blessing of Lakshami & Ganesh
For Good Health
Blessing of Shiva
For Fullfill your all Ambition
For Marriage with choice able Girl

फरवर 2011

64
42

NAVDURGA YANTRA

Blessing of Durga

YANTRA LIST

43
44
45
46
47
48
49
50
51
52
53
54
55
56
57
58
59
60
61
62
63
64

EFFECTS

NAVGRAHA SHANTI YANTRA
NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA
 SURYA YANTRA
 CHANDRA YANTRA
 MANGAL YANTRA
 BUDHA YANTRA
 GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA)
 SUKRA YANTRA
 SHANI YANTRA (COPER & STEEL)
 RAHU YANTRA
 KETU YANTRA
PITRU DOSH NIVARAN YANTRA
PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA
RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA
RAM YANTRA
RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA
ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA
SANKAT MOCHAN YANTRA
SANTAN GOPAL YANTRA
SANTAN PRAPTI YANTRA
SARASWATI YANTRA
SHIV YANTRA

For good effect of 9 Planets
For good effect of 9 Planets
Good effect of Sun
Good effect of Moon
Good effect of Mars
Good effect of Mercury
Good effect of Jyupiter
Good effect of Venus
Good effect of Saturn
Good effect of Rahu
Good effect of Ketu
For Ancestor Fault Ending
For Pregnancy Pain Ending
For Benefits of State & Central Gov
Blessing of Ram
Blessing of Riddhi-Siddhi
For Disease- Pain- Poverty Ending
For Trouble Ending
Blessing Lorg Krishana For child acquisition
For child acquisition
Blessing of Sawaswati (For Study & Education)
Blessing of Shiv
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth &
65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA)
Peace
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth
66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA
For Bad Dreams Ending
67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA
VAHAN
DURGHATNA
NASHAK
YANTRA
For Vehicle Accident Ending
68
VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All
69 MAHALAKSHAMI YANTRA)
Successes
For Bulding Defect Ending
70 VASTU YANTRA
VIDHYA
YASH
VIBHUTI
RAJ
SAMMAN
PRAD
BISHA
YANTRA
For Education- Fame- state Award Winning
71
Blessing of Lord Vishnu (Narayan)
72 VISHNU BISHA YANTRA
Attraction For office Purpose
73 VASI KARAN YANTRA
Attraction For Female
 MOHINI VASI KARAN YANTRA
74
Attraction For Husband
 PATI VASI KARAN YANTRA
75
Attraction For Wife
 PATNI VASI KARAN YANTRA
76
Attraction For Marriage Purpose
 VIVAH VASHI KARAN YANTRA
77
Yantra Available @:- Rs- 190, 280, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above…..

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फरवर 2011

65
(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)

GURUTVA KARYALAY
NAME OF GEM STONE

Emerald
(प ना)
Yellow Sapphire
(पुखराज)
Blue Sapphire
(नीलम)
White Sapphire
(सफ़ेद पुखराज)
Bangkok Black Blue(बकोक नीलम)
Ruby
(मा णक)
Ruby Berma
(बमा मा णक)
Speenal
(नरम मा णक/लालड )
Pearl
(मोित)
Red Coral (4 jrh rd)
(लाल मूंगा)
Red Coral (4 jrh ls mij) (लाल मूंगा)
White Coral
(सफ़ेद मूंगा)
Cat’s Eye
(लहसुिनया)
Cat’s Eye Orissa (उ डसा लहसुिनया)
Gomed
(गोमेद)
Gomed CLN
(िसलोनी गोमेद)
Zarakan
(जरकन)
Aquamarine
(बे ज)
Lolite
(नीली)
Turquoise
( फ़रोजा)
Golden Topaz
(सुनहला)
Real Topaz (उ डसा पुखराज/टोपज)
Blue Topaz
(नीला टोपज)
White Topaz
(सफ़ेद टोपज)
Amethyst
(कटे ला)
Opal
(उपल)
Garnet
(गारनेट)
Tourmaline
(तुमलीन)
Star Ruby
(सुय का त म ण)
Black Star
(काला टार)
Green Onyx
(ओने स)
Real Onyx
(ओने स)
Lapis
(लाजवत)
Moon Stone
(च का त म ण)
Rock Crystal
( फ़ टक)
Kidney Stone
(दाना फ़रं गी)
Tiger Eye
(टाइगर टोन)
Jade
(मरगच)
Sun Stone
(सन िसतारा)
Diamond
(ह रा)
(.05 to .20 Cent )

GENERAL

MEDIUM FINE

100.00
370.00
370.00
370.00
80.00
55.00
2800.00
300.00
30.00
55.00
90.00
15.00
18.00
210.00
15.00
300.00
150.00
190.00
50.00
15.00
15.00
60.00
60.00
50.00
15.00
30.00
30.00
120.00
45.00
10.00
09.00
60.00
15.00
12.00
09.00
09.00
03.00
12.00
12.00
50.00

500.00
900.00
900.00
900.00
150.00
190.00
3700.00
600.00
60.00
75.00
120.00
24.00
27.00
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SUPER FINE

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1500.00 2800.00
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SPECIAL

2800.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
1000.00 & above
1900.00 & above
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3200.00 & above
280.00 & above
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Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus
*** Super fine & Special Quality Not Available Easily. We can try only after getting order
fortunately one or two pieces may be available if possible you can tack corres pondence about

BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION
We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual
Science in the modern context, across the world.
Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.
exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts

BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION
Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth
details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the
area of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mention
in the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from :

PHONE/ CHAT CONSULTATION
Consultation 30 Min.:
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RS. 1250/-*
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*While booking the appointment in Addvance

How Does it work Phone/Chat Consultation
This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized
discussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is of
consideration.
Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with a
confirmation whether the time is available for consultation or not.
 We send you a Phone Number at the designated time of the appointment
 We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment
 You would need to refer your Booking number before the chat is initiated
 Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.
 Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications
 We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is
sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.
 For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat
is recommended
 Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neck
In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for
properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.
All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T.
Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be
answered right away.
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फरवर 2011

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GURUTVA KARYALAY
Call Us:- 91+9338213418, 91+9238328785.
Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com, chintan_n_joshi@yahoo.co.in,

सूचना
 प का म कािशत सभी लेख प का के अिधकार के साथ ह आर

त ह।

 लेख कािशत होना का मतलब यह कतई नह ं क कायालय या संपादक भी इन वचारो से सहमत ह ।
 ना तक/ अ व ासु य
 प का म

मा पठन साम ी समझ सकते ह।

कािशत कसी भी नाम, थान या घटना का उ लेख यहां कसी भी य

वशेष या कसी भी थान या

घटना से कोई संबंध नह ं ह।

कािशत लेख

योितष, अंक

योितष, वा तु, मं , यं , तं , आ या मक

ान पर आधा रत होने के कारण

य द कसी के लेख, कसी भी नाम, थान या घटना का कसी के वा त वक जीवन से मेल होता ह तो यह मा
एक संयोग ह।

कािशत सभी लेख भारितय आ या मक शा
स यता अथवा

 अ य लेखको

ामा णकता पर कसी भी
ारा

से

े रत होकर िलये जाते ह। इस कारण इन वषयो क

कार क ज मेदार कायालय या संपादक क नह ं ह।

दान कये गये लेख/ योग क

ामा णकता एवं

भाव क ज मेदार कायालय या संपादक

क नह ं ह। और नाह ं लेखक के पते ठकाने के बारे म जानकार दे ने हे तु कायालय या संपादक कसी भी
कार से बा य ह।

योितष, अंक

योितष, वा तु, मं , यं , तं , आ या मक

व ास होना आव यक ह। कसी भी य
का अंितम िनणय
 पाठक

वशेष को कसी भी

ान पर आधा रत लेखो म पाठक का अपना
कार से इन वषयो म व ास करने ना करने

वयं का होगा।

ारा कसी भी

कार क आप ी

वीकाय नह ं होगी।

 हमारे ारा पो ट कये गये सभी लेख हमारे वष के अनुभव एवं अनुशंधान के आधार पर िलखे होते ह। हम कसी भी य
वशेष ारा योग कये जाने वाले मं - यं या अ य योग या उपायोक ज मेदार न हं लेते ह।
 यह ज मेदार मं -यं या अ य योग या उपायोको करने वाले य
मानदं ड , सामा जक , कानूनी िनयम के खलाफ कोई

क वयं क होगी। यो क इन वषयो म नैितक

य द नीजी

वाथ पूित हे तु

योग कता ह अथवा

योग के करने मे ु ट होने पर ितकूल प रणाम संभव ह।
 हमारे ारा पो ट कये गये सभी मं -यं या उपाय हमने सैकडोबार वयं पर एवं अ य हमारे बंधुगण पर योग कये ह
ज से हमे हर योग या मं -यं या उपायो ारा िन
 पाठक

क मांग पर एक ह लेखका पूनः

काशन से लाभ

हो सकता ह।

त सफलता ा हई
ु ह।

काशन करने का अिधकार रखता ह। पाठक को एक लेख के पूनः

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फरवर 2011

 अिधक जानकार हे तु आप कायालय म संपक कर सकते ह।
(सभी ववादो केिलये केवल भुवने र यायालय ह मा य होगा।)

गु

FREE
E CIRCULAR
योितष प का फरवर -2011

संपादक

िचंतन जोशी
संपक
गु

गु

योितष वभाग

व कायालय

92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
INDIA
फोन

91+9338213418, 91+9238328785
ईमेल
gurutva.karyalay@gmail.com,
gurutva_karyalay@yahoo.in,

वेब
http://gk.yolasite.com/
http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/

फरवर 2011

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हमारा उ े य
य आ मय
बंध/ु ब हन
जय गु दे व
जहाँ आधुिनक व ान समा हो जाता है । वहां आ या मक

ान ारं भ हो जाता है , भौितकता का आवरण ओढे य

जीवन म हताशा और िनराशा म बंध जाता है , और उसे अपने जीवन म गितशील होने के िलए माग ा नह ं हो पाता यो क
भावनाए ह भवसागर है , जसमे मनु य क सफलता और असफलता िन हत है । उसे पाने और समजने का साथक यास ह

े कर

सफलता है । सफलता को ा करना आप का भा य ह नह ं अिधकार है । ईसी िलये हमार शुभ कामना सदै व आप के साथ है । आप
अपने काय-उ े य एवं अनुकूलता हे तु यं ,

हर

एवं उपर

और दलभ
मं श

योग करे जो १००% फलदायक हो। ईसी िलये हमारा उ े य यह ं हे क शा ो
ाण- ित त पूण चैत य यु

सभी कार के य

सूय क

से पूण ाण- ित त िचज व तु का हमशा
विध- वधान से विश तेज वी मं ो ारा िस

- कवच एवं शुभ फलदायी ह र एवं उपर आपके घर तक पहोचाने का है ।

करणे उस घर म वेश करापाती है ।

जीस घर के खड़क दरवाजे खुले ह ।

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
Call Us - 9338213418, 9238328785
Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)

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FEB
2011

फरवर 2011

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