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अनुभूतियाँ (काव्य संग्रह)

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Summary

रावण

ढोल बाजे और नाद
कर रहे उन्माद
मध्य मै हूँ खडा
जैसे धरती में हूं गढा
मैं खडा शान्त
मेरे दरम्यान सब अशांत
वर्ष दर वर्ष प्रति वर्ष
बढ रहा मेरा कद
वर्तमान युग में
बौने होते राम
मेरे समक्ष
रावण

ढोल बाजे और नाद
कर रहे उन्माद
मध्य मै हूँ खडा
जैसे धरती में हूं गढा
मैं खडा शान्त
मेरे दरम्यान सब अशांत
वर्ष दर वर्ष प्रति वर्ष
बढ रहा मेरा कद
वर्तमान युग में
बौने होते राम
मेरे समक्ष
रावण

ढोल बाजे और नाद
कर रहे उन्माद
मध्य मै हूँ खडा
जैसे धरती में हूं गढा
मैं खडा शान्त
मेरे दरम्यान सब अशांत
वर्ष दर वर्ष प्रति वर्ष
बढ रहा मेरा कद
वर्तमान युग में
बौने होते राम
मेरे समक्ष

रावण

ढोल बाजे और नाद
कर रहे उन्माद
मध्य मै हूँ खडा
जैसे धरती में हूं गढा
मैं खडा शान्त
मेरे दरम्यान सब अशांत
वर्ष दर वर्ष प्रति वर्ष
बढ रहा मेरा कद
वर्तमान युग में
बौने होते राम
मेरे समक्ष

रावण

ढोल बाजे और नाद
कर रहे उन्माद
मध्य मै हूँ खडा
जैसे धरती में हूं गढा
मैं खडा शान्त
मेरे दरम्यान सब अशांत
वर्ष दर वर्ष प्रति वर्ष
बढ रहा मेरा कद
वर्तमान युग में
बौने होते राम
मेरे समक्ष

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