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Class – 12th MANJIL BATCH - 2026 Physics

Page ।
1

बिहार में इं टर की िेहतरीन तैयारी के [Link]


लिए आज ही YouTube पर Disha Science Classes से जुड़ें। Mob–6201320598, 7700879453
Class – 12th MANJIL BATCH - 2026 Physics
 भौबतकी (Physics):- भौबतकी को अंग्रेजी में Physics और बिद्युत उजाथ का अध्ययन बकया जाता है उसे स्थिर -
कहते हैं। िैद्युबतकी कहते हैं।
 Physics शब्द की उत्पबि Greek भाषा के शब्द ▪ स्थिर िैद्युबतकी:- रूका हुआ आिेश का अध्ययन
Fusis से हुआ है लजसका अर्थ होता है “प्रकृ बत” उदाहरण,
 बिज्ञान की िह शाखा लजसके अंतर्थत प्रकृ बत में होनेिािी (i) सूखे मौसम में स्वेटर उतारते समय चट-चट की आिाज
Page ।
घटनाओं का अध्ययन बकया जाता है, उसे भौबतकी कहते सुनाई देना।
2
हैं। (ii) आकाश में बिजिी का चमकना
 12िीं भौबतकी के मुख्यतः तीन शाखाओं का अध्ययन (iii) प्लालिक की कं घी या किम को िािों में रर्ड़ने पर
बकया जाता है। हिकी िस्तु या धूिकण को आकबषथत करना।
1.बिद्युत चुं िकत्व(Electromagnetism) ❖ स्थिर िैद्युबतकी के अनुप्रयोर् (उपयोर्) (Application
2.प्रकालशकी(Optics) of Electro Static)
3.आधुबनक भौबतकी(Modern Physics) (i) बिजिी के चमकने एिं िादि र्रजने जैसी घटनाओं को
 बिद्युत चुम्बकत्व (Electromagnetism):- भौबतकी समझना।
की िह शाखा लजसके अंतर्थत बिद्युत और चुम्बकत्व के (ii) सं धाररत्र (Capacitor) के कायथ लसद्ांत को समझना।
िीच सं िं धों का अध्ययन बकया जाता है, उसे बिद्युत (iii) िान डी ग्राफ जबनत्र (उच्च बिभि के स्त्रोत) के कायथ
चुम्बकत्व कहते हैं। लसद्ांत को समझना।
 इसमें प्रमुख बिषय शाबमि हैं जो बनम्नलिलखत है- स्थिर िैद्युबतकी
1️. स्थिर िैद्युबतकी (Electrostatics) – स्थिर आिेशों का
अध्ययन
2️.बिद्युत धारा (Current Electricity) – प्रिाबहत बिद्युत
Ch- 01 Ch- 02
का अध्ययन
िैद्युत आिेश तर्ा क्षेत्र स्थिरिैद्युत बिभि तर्ा धाररता
3️.चुम्बकत्व और द्रव्य (Magnetism and Matter) –
(Electric Charge and Field)(Electrostatics Potential and
चुम्बकीय पदार्ों और उनके र्ुणों का अध्ययन
Capacitance)
4️.बिद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic
Induction) – जि कोई चािक चुम्बकीय क्षेत्र में र्बत Chapter.- 01
करता है तो उसमें प्रेररत धारा उत्पन्न होती है
िैद्युत आिेश तर्ा क्षेत्र (Electric Charge And Field)
5️.प्रत्यािती धारा (Alternating Current – AC) –
पररपर् में पररिती धारा का अध्ययन  आिेश का इबतहास (History of Electric
6️. िैद्युत चुम्बकीय तरंर्े (Electromagnetic Waves)- Charge):- आज से िर्भर् 2600 िषथ पूिथ यानी
मैक्सिेि समीकरण (Maxwell’s Equations) – जो 600 ई० पूिथ (B.C) यूनानी दाशथबनक र्ेल्स ने एम्बर
बिद्युत और चुम्बकत्व के चार मूिभूत समीकरणों का समूह है (Amber) को फर से रर्ड़ा तो एम्बर हल्की िस्तु जैसे
(◔◡◔) धूिकण, कार्ज़ के टू कड़े ..... आबद को अपने ओर
❖ बिद्युत (Electricity):- बिज्ञान की िह शाखा लजसमें आकबषथत करने िर्ा।
आिेश या आिेलशत िस्तुओ ं के िैद्युत प्रभािों का अध्ययन  एम्बर एक पीिा भूरा र्ोंद जैसा पदार्थ होता है।
बकया जाता है, उसे बिद्युत कहते हैं।  सन् 1600 ई० में बिलियम बर्ल्बटथ ने यह प्रमालणत
➢ बिद्युत का अध्ययन मुख्यतः दो अििा में बकया जाता है। बकया की एम्बर और फर जैसे र्ुण अन्य पदार्थ जैसे कााँ च
(i) बिराम (Rest/Static) और रेशम, एम्बर और ऊन तर्ा एिोनाइट और ऊन में
(ii) र्बत (Motion) भी पाया जाता है।
(i) स्थिर िैद्युबतकी (Electro Static/Static जैसे
Electricity):- िैद्युबतकी की िह शाखा लजसके अंतर्थत रूका (i) कााँ च रेशम में → कााँ च धनात्मक, रेशम ऋणात्मक।
हुआ आिेश से उत्पन्न बिद्युत िि, बिद्युत क्षेत्र, बिद्युत बिभि (ii) एम्बर और ऊन में → एम्बर ऋणात्मक ऊन धनािेश।

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(iii) एिोनाइट और ऊन में → एिोनाइट ऋणात्मक, ऊन बिद्युत आिेश का Electron लसद्ांत
धनािेश।  प्रत्येक पदार्थ अत्यं त सूक्ष्म
 बिलियम बर्ल्बटथ ने अपने इस कायथ को डी मैर्नेट में कणों से बमिकर िना है, लजसे
प्रकालशत बकया। परमाणु कहते हैं।
❖ बिलियम बर्ल्बटथ के िाद:  प्रत्येक परमाणु का समस्त भार
Page ।
✓ 1646 में सर Thomus Brown ने Electricity उसके के न्द्रीय भार् में समाबहत
3
शब्द का प्रयोर् सिसे पहिे बकया। होता है, लजसे नालभक कहते
✓ Electricity शब्द ग्रीक भाषा के शब्द Elektron से हैं।
उत्पन्न हुआ है। लजसका अर्थ एम्बर (Amber) है।  प्रत्येक परमाणु तीन प्रकार के मूि कणों से बमिकर िना
❖ िैद्युत आिेश (electric Charge):- िैद्युत आिेश होता है
पदार्थ का िह र्ुण है, लजसके कारण से पदार्थ में बिद्युतीय (i) Electron -ऋणािेलशत कण
तर्ा चुम्बकीय प्रभाि उत्पन्न होता है। • द्रव्यमान: 9.1093 × 10−31 𝑘𝑔
 िैद्युत आिेश पदार्थ का मौलिक र्ुण है। • आिेश: −1.6 × 10−19 𝐶
✓ िैद्युत आिेश को 𝑄 या 𝑞 से सूलचत बकया जाता है। • यह नालभक के चारों ओर कक्षा (Shell) में र्बत
✓ 𝑄 से शब्द िैबटन शब्द (Quantitas) से उत्पन्न हुआ है, करता है।
लजसका अर्थ मात्रा (Quantity) होता है। (ii) प्रोटॉन- धनािेलशत कण
✓ आिेश एक अबदश रालश है। • द्रव्यमान ∶ 1.67 × 10−27 𝑘𝑔
✓ आिेश का S.I मात्रक:- कू िॉम (C) • आिेश: +1.6 × 10−19 𝐶
1 बमिी कू िॉम (𝑚𝐶) = 10−3 𝐶 • यह नालभक में स्थित होता है।
1 माइक्रो कू िॉम (𝜇𝐶) = 10−6 𝐶 (iii) न्यूटरॉन -िैद्युत उदासीन कण:
1 नैनो कू िॉम (𝑛𝐶) = 10−9 𝐶 • द्रव्यमान: 1.67 × 10−27 𝑘𝑔
• आिेश: शून्य (0 𝐶)
1 बपको कू िॉम (𝑃𝐶) = 10−12 𝐶
• यह भी नालभक में स्थित होता है।
✓ आिेश का 𝐶. 𝐺. 𝑆 मात्रक- िे ट कू िॉम (𝑒. 𝑠. 𝑢) या नालभक (Nucleus) की बिशेषताएाँ
✓ नालभक की बत्रज्या −10−15 मीटर (फमी की कोबट)
फ्रेंकलिन
होता है।
1 𝐶 = 3 × 109 िे ट कू िॉम (𝑒. 𝑠. 𝑢) ✓ नालभक के चारों ओर Electron एक बनलित कक्षा में
1
1 िे ट कू िॉम = 3 × 10−9 𝐶 = 3.3 × 10−10 𝐶 चक्कर िर्ता है।
✓ आिेश का सिसे िड़ा मात्रक:- फैराडे (बिद्युत अपघटनी नालभक के मौलिक कण (Nucleons)
में) नालभक (Nucleus) में दो प्रकार के मौलिक कण होते
1 फैराडे = 96500 𝐶 (िर्भर्) हैं:
✓ आिेश का सिसे छोटा मात्रक:- फ्रेंकलिन या 𝑒. 𝑠. 𝑢 1.प्रोटॉन (Proton) – धनािेलशत कण (+𝑣𝑒)
(िे ट कू िॉम) 2.न्यूटरॉन (Neutron) – उदासीन कण (0 आिेश)
1
1 फ्रेंकलिन = 1𝑒𝑠𝑢 = 1 िे ट कू िॉम = 3 × 10−9 𝐶 = परमाणु का बिद्युत उदासीन (Electrically Neutral) होना
3.3 × 10−10 𝐶 ✓ सामान्य रूप से बकसी परमाणु में प्रोटॉन और इिेक्ट्रॉन की
✓ आिेश का बिद्युत चुम्बकीय मात्रक:- एि कू िॉम (𝐴𝑏 सं ख्या िरािर होती है।
Coulomb) ✓ चूाँ बक प्रोटॉन (+𝒗𝒆) और इिेक्ट्रॉन (−𝒗𝒆) के आिेश
1 𝐴𝑏𝐶 = 10 𝐶 पररमाण में समान होते हैं , िे एक-दूसरे को सं तुलित कर देते
1
1 कू िॉम = 10 एि कू िॉम हैं। इस कारण परमाणु िैद्युत रूप से उदासीन (Neutral)
✓ आिेश का बिमीय सूत्र- [𝐴𝑇] या [𝐼𝑇] या [𝑀0 0
𝐿 𝑇𝐴] होता है ।
परमाणु का आिेलशत(Electrically Charged) होना

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✓ परमाणु तभी आिेलशत होता है जि उसमें इिेक्ट्रॉनों की सं ख्या है , लजससे यह ऋणािेलशत हो जाता है।
घटती या िढ़ती है। Glass Rod ⇒ Positive Charge
✓ जि बकसी परमाणु में प्रोटॉन के अपेक्षा Electron में कमी Silk Cloth ⇒ Negative Charge
हो जाये तो परमाणु धनािेलशत हो जाता है, जि बकसी परमाणु (ii) जि प्लालिक की छड़ को ऊन से रर्ड़ा जाता है ,
में Proton के अपेक्षा Electron अलधक हो जाये तो • इिेक्ट्रॉन ऊन से प्लालिक की छड़ पर चिे जाते हैं।
Page ।
परमाणु ऋणािेलशत हो जाता है। • यानी, ऊन अपने कु छ इिेक्ट्रॉन खो दे ती है , और
4
Note: िस्तु के आिेलशत होने का कारण • प्लालिक की छड़ इिेक्ट्रॉन प्राप्त कर िेती है।
 बकसी िस्तु को आिेलशत करने में के िि इिेक्ट्रॉन ही  प्लालिक की छड़: इिेक्ट्रॉन प्राप्त करती
लजम्मेदार होते हैं , क्ोंबक:इिेक्ट्रॉन हल्के होते हैं और है → ऋणािेलशत होती है

आसानी से िानांतररत हो सकते हैं।  ऊन: इिेक्ट्रॉन खोती है → धनािेलशत होती है

 प्रोटॉन नालभक में अत्यलधक िि (Strong Nuclear


Force) से िं धे होते हैं, इसलिए िे परमाणु के िाहर नहीं
आ सकते।
द्रव्यमान में पररितथन:
इिेक्ट्रॉन के आने से िस्तु का द्रव्यमान िढ़ता है।  सन् 1750 में, िेंजाबमन फ्रेंकलिन ने आिेश के दो प्रकारों
इिेक्ट्रॉन के जाने से िस्तु का द्रव्यमान घटता है। को धनात्मक (Positive) और ऋणात्मक (Negative)
महत्वपूणथ तथ्य (Important Notes): नाम बदए।
 जि बकसी िस्तु को आिेलशत बकया जाता है तो उसका कै से नाम बदए र्ए र्े?
द्रव्यमान िढ़ या घट सकता है जि बकसी िस्तु को  िेंजाबमन फ्रेंकलिन ने कााँ च को रर्ड़ने से उत्पन्न आिेश को
ऋणािेलशत बकया जाता है तो, उसका द्रव्यमान िढ़ जाता धनात्मक (Positive) और रेलजन (जैसे एिोनाइट) को
है ,चूाँ बक electron का द्रव्यमान = 9.1 × 10 −31
𝑘𝑔 रर्ड़ने से उत्पन्न आिेश को ऋणात्मक (Negative) नाम
🔋आिेश के प्रकार (Types of Charge) बदया।
(i) धनात्मक/धनािेश (Positive Charge) (+𝑣𝑒) कु छ पररभाबषक शब्द
(ii) ऋणात्मक/ऋणािेश (Negative Charge) (−𝑣𝑒)  आिेश की ध्रुिता (Polarity to Charge):- बकसी
(i) धनात्मक/धनािेश :- जि बकसी िस्तु में Proton की िस्तु पर उपस्थित आिेश धनात्मक (+) है या ऋणात्मक
सं ख्या, Electron से अलधक होती है, तो िह िस्तु (-), यह बनधाथररत करने िािे र्ुण को आिेश की ध्रुिता
धनािेलशत कहिाती है। कहते हैं।
📌 Proton > Electron ⇒ धनािेश  आिेश की का अर्थ → "आिेश की ध्रुिता" के िि यह
(ii)ऋणात्मक / ऋणािेश (Negative Charge):- िताती है बक कोई िस्तु धनािेलशत है या ऋणािेलशत।
जि बकसी िस्तु में Electron की सं ख्या, Proton से ▪ उदाहरण:- कााँ च की छड़ को रेशम के कपड़े से रर्ड़ने पर
अलधक होती है, तो िह िस्तु ऋणािेलशत कहिाती है। कााँ च धनािेलशत होता है, और रेशम electron ग्रहण
📌 Electron > Proton ⇒ ऋणािेश करके ऋणािेलशत हो जाता है
उदाहरण (Example): ▪ आिेश की ध्रुिता के बनयम (Law of Polarity of
जि कााँ च की छड़ को रेशम के कपड़े पर रर्ड़ा जाता है: Charge)
• कााँ च की छड़ (Glass Rod): यह इिेक्ट्रॉन खो
(i) सजातीय आिेश (Like Charges):- जि दो िस्तुओ ं
देती है , लजससे यह
पर एक जैसे प्रकार के आिेश हों — यानी दोनों धनात्मक (+)
धनािेलशत हो जाती है।
• रेशम का कपड़ा: यह िो या दोनों ऋणात्मक (–) तो उन्हें सजातीय आिेश कहते हैं।

इिेक्ट्रॉन प्राप्त कर िेता 👉 सजातीय आिेश एक-दूसरे को प्रबतकबषथत (Repel)


करते हैं।

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📌 यबद दो धनािेलशत (+, +) िस्तुएं पास िाई जाएाँ , तो िे • ऐसी िस्तुएाँ सामान्यतः बकसी अन्य आिेलशत िस्तु को
एक-दूसरे को दूर धके िेंर्ी। प्रबतकबषथत या आकबषथत नहीं करतीं, जि तक बक िे

➢ यबद दो ऋणािेलशत (-, -) िस्तुएं पास िाई जाएाँ , तो िे प्रभाबित होकर आिेलशत
न हो जाएाँ (induced
भी एक-दूसरे को दूर धके िेंर्ी।
charge)।
➢ (ii) बिजातीय आिेश(Unlike charge):- जि दो Page ।

िस्तुओ ं पर बिपरीत प्रकार के आिेश होते हैं — 5


स्वणथपत्र बिद्युत दशी (Gold leaf Electroscope)
एक पर धनात्मक (Positive +) और दूसरे पर
िह उपकरण लजसकी सहायता से यह पता िर्ाया जाता है बक
ऋणात्मक (Negative –) तो उन्हें बिजातीय आिेश
बकसी िस्तु पर आिेश है या नहीं, उसे स्वणथपत्र बिद्युतदशी
(Unlike Charges) कहा जाता है।
(Gold Leaf Electroscope) कहते हैं।
👉 बिजातीय आिेश एक-दूसरे को आकबषथत (Attract)
❖ स्वणथपत्र बिद्युत दशी की सं रचना (construction of
करते हैं।
Gold leaf Electroscope)
📌 यबद दो िस्तुओ ं पर बिपरीत आिेश होते हैं, तो िे एक-
इसमें मुख्यतः चार भार् होते है
दूसरे की ओर लखं चते हैं, अर्ाथत् आकषथण िि उत्पन्न होता है।
1. धातु की कु ण्डी (धातु की टोपी) (Metal Knob)
2. धातु की छड़ (Metal Gold)
3. दो स्वणथ पत्र (Gold Leaves)
याद रखने का बटर क:
4. कााँ च की लखड़की (Glass windows)
"समान आिेश – दूर-दूर"
 इसमें एक कााँ च के िॉक्स में
"बिपरीत आिेश – पास-पास" धातु की एक छड़ ऊध्वाधथर िर्ी
 इस बनयम को बिद्युत आकषथण एिं प्रबतकषथण का बनयम होती है, लजसके बनचिे लसरे पर
कहा जाता है। इसका र्लणतीय बनरूपण कू िॉम्ब के बनयम सोने के दो पबियााँ िर्ी होती है
द्वारा बकया जाता है, लजसे 1785 में चाल्सथ ऑर्लिन डी छड़ के उपरी लसरा पर एक
कू िॉम्ब ने प्रबतपाबदत बकया र्ा। कु ण्डी (Knob) होती है।
❖ आिेलशत िस्तु (Charge Body):- जि बकसी िस्तु पर ❖ कायथप्रणािी
आिेश उपस्थित होता है, तो उस िस्तु को आिेलशत िस्तु ➢ जि बकसी आिेलशत िस्तु को
कहते है। धातु की कुं डी (टोपी) से स्पशथ कराया जाता है, तो िह
✓ आिेलशत िस्तु पर Electron अबतररक्त या कम हो आिेश धातु की छड़ के माध्यम से होकर सोने की पतिी
सकता है। पबियों (gold leaves) तक पहुाँचता है। चूं बक दोनों
अनािेलशत िस्तु / बनरािेलशत िस्तु पत्रों (leaves) पर समान प्रकार का आिेश आ जाता है,
(Uncharged or Neutral Body) इसलिए िे एक-दूसरे को प्रबतकबषथत (repel) करते हैं
जि बकसी िस्तु पर कोई शुद् आिेश (Net Charge) नहीं और फै ि जाते हैं।
होता है, अर्ाथत् उसमें उपस्थित धनात्मक और ऋणात्मक स्वणथपत्र बिद्युतदशी के प्रमुख उपयोर्
आिेश की मात्रा समान होती है, तो ऐसी िस्तु को अनािेलशत (Uses of Gold Leaf Electroscope)
(Uncharged) या बनरािेलशत / उदासीन (Neutral)कहा (i) आिेश का पता िर्ाने में
जाता है। यह यह जांचने के लिए उपयोर् होता है बक कोई
बिशेषताएाँ : िस्तु आिेलशत है या नहीं।
• अनािेलशत िस्तु बिद्युत रूप से सं तुलित यबद स्वणथपत्र फैि जाएाँ तो िस्तु आिेलशत है।
(Electrically balanced) होती है। (ii) आिेश के प्रकार या प्रकृ बत बनधाथरण करने में
• इसमें उपस्थित धनािेश (+) और ऋणािेश (–) की
यह यह िताने में मदद करता है बक बकसी िस्तु पर
सं ख्या िरािर होती है।
धनात्मक (+) या ऋणात्मक (–) आिेश है।

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पहिे से ज्ञात आिेश िािी िस्तु से तुिना करके ठं डा बकया जाता है, तो इसकी चािकता घट जाती है और यह
जांच की जाती है। कु चािक (Insulator) जैसा व्यिहार करने िर्ता है।

(iii) बकसी िस्तु की चािकता (Conductivity) की (ii) बिद्युतरोधी / अचािक (Insulator)


िह पदार्थ जो अपने से होकर बिद्युत आिेश को प्रिाबहत नहीं
जााँ च में
होने देता, उसे बिद्युतरोधी (अचािक) कहते हैं।
यबद कोई िस्तु आिेश को र्ुजरने दे (और स्वणथपत्र Page ।
इनमें स्वतं त्र इिेक्ट्रॉन नहीं होते।
6
फै ि जाएाँ ), तो िह चािक (conductor) है; बिद्युत धारा को िहुत अलधक अिरोध बमिता है।
यबद आिेश न पहुाँचे, तो िह कु चािक इन्हें परािैद्युत (Dielectric) भी कहते हैं।
(insulator) है। उदाहरण:
(iv) बिद्युत प्ररेण की प्रबक्रया को समझने में • कााँ च, प्लालिक, नायिॉन, सुखी िकड़ी
• िैकेिाइट, शुष्क िायु, रिर
इससे इिेक्ट्रोिै बटक इंडक्शन (Electric
(iii) अधथचािक (Semiconductor)
Induction) को सरिता से समझाया जा सकता है।
िह पदार्थ लजसकी चािकता चािक और अचािक के िीच
बिना स्पशथ के भी आिेलशत िस्तु स्वणथपत्र को
होती है, उसे अधथचािक कहते हैं।
प्रभाबित करती है। इनमें बिद्युत चािकता सीबमत होती है।
नोट:- स्वणथपत्र बिद्युतदशी से यह तो पता िर्ाया जा ताप िढ़ाने या अशुबद् बमिाने पर इनकी चािकता िढ़
सकता है बक िस्तु आिेलशत है, िेबकन के िि इसकी जाती है।
सहायता से यह साफ़-साफ़ नहीं िताया जा सकता बक इनमें Electrons और Holes दोनों प्रकार के आिेश
आिेश धनात्मक है या ऋणात्मक, जि तक तुिना न की िाहक होते हैं।
जाए। उदाहरण:
नोट: यह उपकरण िहुत सं िेदनशीि होता है और छोटे - • लसलिकन (𝑆𝑖), जमेबनयम (𝐺𝑒)
से-छोटे आिेश की उपस्थिबत को भी प्रदलशथत कर सकता है। • र्ैलियम आसेनाइड (𝐺𝑎𝐴𝑠)
चािक तर्ा बिद्युतरोधी (Conductor and Insulator) • कािथन डाइऑक्साइड (𝐶𝑂₂) [बिशेष पररस्थिबत में]
पदार्ों को चािकता (Conductivity) के आधार पर भू सं पकथ न (Earthing या Grounding)
तीन भार्ों में िााँ टा र्या है: भू-सं पकथ न एक सुरक्षा उपाय है, लजसमें बिद्युत उपकरणों या
(i) चािक (Conductor) आिेलशत बपं ड को एक चािक के माध्यम से पृथ्वी (Earth)
(ii) बिद्युतरोधी / अचािक (Insulator) से जोड़ा जाता है ताबक उसमें उपस्थित अबतररक्त आिेश या
(iii) अधथचािक (Semiconductor) करंट पृथ्वी में चिा जाए।
(i) चािक (Conductor) या
िह पदार्थ जो अपने से होकर बिद्युत आिेश को आसानी से िह प्रबक्रया लजसमें बकसी आिेलशत िस्तु का आिेश पृथ्वी के
प्रिाबहत (िानांतररत) होने देता है, उसे चािक कहते हैं। सार् साझा बकया जाता है, उसे भू-सं पकथ न (Earthing)
इनमें िहुत िड़ी सं ख्या में स्वतं त्र इिेक्ट्रॉन होते हैं। कहते हैं।
बिद्युत धारा को कम अिरोध बमिता है। भू-सं पकथ न का उद्दे श्य:
उदाहरण: 1. बिद्युत झटके से सुरक्षा
• तााँ िा (Cu) 2. अबतररक्त करंट को पृथ्वी में प्रिाबहत करना
• चााँ दी (Ag) – सिसे अच्छा चािक 3. उपकरणों की सुरक्षा और दीघाथयु िढ़ाना
• सोना (Au), िोहा (Fe), ग्रेफाइट, अम्ल भू–सं पकथ न के िाभ (Benefits of Earthing)
Note:- पारा (Hg) सामान्य तापमान पर एक धातु है 1. बिद्युत झटकों से सुरक्षा:
और यह बिद्युत का अच्छा चािक होता है।, िेबकन जि इसे उपकरणों में करंट िीक होने पर शरीर में प्रिाबहत
िहुत ठं डे तापमान (Near 0 Kelvin या −273°𝐶) तक होने की िजाय करंट सीधे पृथ्वी में चिा जाता है।

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2. अत्यलधक िोल्टे ज से सुरक्षा: 2️. उदासीन तार (Neutral Wire)
िोल्टे ज िढ़ जाने पर अलधशेष धारा पृथ्वी में प्रिाबहत रंर्: कािा (Black)
हो जाती है। कायथ:यह फे ज तार से प्रिाबहत धारा को िापस बिद्युत
3. बिद्युत सबकथ ट की सुरक्षा: स्रोत तक पहुाँचाने का काम करता है।
शॉटथ सबकथ ट या ओिरिोबडंर् की स्थिबत में उपकरणों • इसमें िोल्टे ज िर्भर् शून्य होता है। Page ।
7
को नुकसान से िचाता है। महत्व: बिद्युत पररपर् को पूरा करता है।
4. धातु के उपकरणों की क्षबत से िचाि: 3️. भू-सं पकथ तार (Earth Wire / Ground Wire)
उपकरणों की िाहरी धातु सं रचना सुरलक्षत रहती है, रंर्: हरा (Green)
लजससे झटका िर्ने का खतरा नहीं रहता। कायथ:
भू–सं पकथ न का उपयोर् (Uses of Earthing): • इसका उपयोर् सुरक्षा के लिए बकया जाता है।
1. घरों ि इमारतों में – घरेिू उपकरणों की सुरक्षा • सामान्यतः इसमें कोई आिेश नहीं होता है।
के लिए • बिद्युत उपकरण में बकसी खरािी के कारण यबद धारा
2. उद्योर्ों ि फैस्थक्ट्रयों में – भारी मशीनों की सुरक्षा िीक होती है तो यह उसे पृथ्वी में प्रिाबहत कर देता
हेतु है।
3. हाई-टें शन पािर िाइनों में – अत्यलधक िोल्टे ज सुरक्षा: यह बिद्युत झटकों को रोकने में सहायता
से िचाि हेतु करता है।
4. इिेक्ट्रॉबनक उपकरणों में – जैसे: कं प्यूटर, सं योजन: इसे पृथ्वी में र्हरी धातु की प्लेट या छड़
बफ्रज, टीिी, िॉलशं र् मशीन आबद से जोड़ा जाता है।
बिशेष बिं दु : आिेशन (Charging)
भू-सं पकथ तार को पृथ्वी में र्हराई तक र्ाड़ी र्ई धातु की प्लेट बकसी िस्तु में इिेक्ट्रान की सं ख्या में कमी या िृबद् होने की

या छड़ से जोड़ा जाता है, ताबक करंट सुरलक्षत रूप से पृथ्वी में प्रबक्रया को आिेशन कहते है
आिेशन की बिलधयााँ (Methods of Charging)
प्रिाबहत हो जाए।
➢ आिेशन की मुख्यतः तीन बिलधयााँ होती है
घरों में बिद्युत आपूबतथ के लिए प्रयुक्त तीन प्रकार के तार
1. प्रेरण द्वारा आिेशन (Charging By Induction)
1️. बिद्युन्मय तार (Live Wire / Phase Wire) 2. सं िहन या चािन द्वारा आिेशन (Charging By
2️. उदासीन तार (Neutral Wire) Conduction)
3️. भू-सं पकथ तार (Earth Wire / Ground Wire) 3. घषथण द्वारा आिेश (Charging By Friction)
1️. बिद्युन्मय तार (Live Wire / Phase Wire) 1. प्रेरण द्वारा आिेशन:- जि बकसी चािक िस्तु के पास एक
आिेलशत िस्तु को बिना छु ए िाया जाता है, तो चािक में
रंर्: िाि, पीिा, नीिा
मौजूद आिेश पुनव्यथिस्थित होकर उसके एक लसरे पर बिपरीत
कायथ
आिेश जैसा प्रभाि उत्पन्न करता है। इसे प्रेरण द्वारा आिेशन
• इसे फेज तार भी कहा जाता है।
कहते हैं।
• बिद्युत धारा इसी तार के माध्यम से उपकरण तक नोट:- प्रेरण द्वारा आिेशन में नया आिेश उत्पन्न नहीं
पहुाँचती है। होता,यह के िि आिेशों के पुनबिथन्यास (redistribution
• इसमें सामान्यतः 220–240 V का िोल्टे ज होता of charges) की प्रबक्रया है।
है।
सािधानी: इसमें हमेशा धारा (करंट) होता है, स्पशथ करने
पर झटका िर् सकता है

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उदाहरण:- इस प्रबक्रया को चािन द्वारा आिेशन (Charging by
(i) सिसे पहिे हम एक चािक र्ोिा Conduction) कहते हैं।
िेते है, लजसे अचािक िै ण्ड पर रखते है, महत्वपूणथ बिन्दु –
जो उदासीन है। 1. इस बिलध द्वारा के िि चािक को आिेलशत बकया जा सकता
(ii) र्ोिे के पास एक धनािेलशत छड़ है,बिद्युत्रोधी को नहीं क्ोबक स्पशथ बिन्दु पर चािक को प्राप्त
Page ।
िाते है, जो र्ोिे के सम्पकथ में नही आिेश तुरन्त इसके पृष्ठ पर बितररत हो जाता है।
8
है। ऐसी स्थिबत में र्ोिे में उपस्थित 2. चािक पर आिेश की प्रकृ बत िही है जो बक आिेशन छड़
इिेक्ट्रॉन को धनािेलशत अपने और पर।
आकबषथत करता है लजससे िायााँ भार् 3. घषथण द्वारा आिेशन (Charging by Friction):- जि
ऋणािेलशत तर्ा दायााँ भार् दो अन्य अिर् – अिर् िस्तुओ ं को आपस में रर्ड़ा जाता है
धनािेलशत हो जाता है तो इिेक्ट्रॉन का िानांतरण के एक िस्तु धनािेलशत तर्ा
(iii) र्ोिे के दायााँ भार् को पृथ्वी से भू- सं कबषथत कर देते है दूसरा ऋणािेलशत हो
लजससे कु छ इिेक्ट्रॉन पृथ्वी से जाता है इस बिलध को
र्ोिे पर आ जाता है और दायााँ घषथण द्वारा आिेशन कहते
भार् का धनािेश पृथ्वी में चिा है।
जाता है महत्वपूणथ बिन्दु –
(iv) र्ोिे का भुसम्पकथ पर 1.यह लसफथ बिद्युतरोधी के लिए उपयुक्त है, चािक के लिए
र्ोिे में प्रेररत ऋणािेश बनकट िािे लसरे पर िना रहता है तर्ा नही
धनािेलशत छड़ को र्ोिे के 2.इस बिलध में दोनों िस्तु पर बिपरीत प्रकृ बत का आिेश उत्पन्न
समीप से हटा िेने पर र्ोिे होता है,जैसे:- कााँ च की छड़ और रेशम का िस्त्र
पर लसफथ ऋणािेश शेष िैद्युत आिेश के मूि र्ुण
िचता है। इस प्रकार (Basie Properties of Electric Charge)
बिपरीत प्रकृ बत का आिेश (1) आिेशों की योज्यता (Additivity of Charge)
बितररत हो जाता है। िैद्युत आिेश योर्ात्मक होता है,
प्रेरण द्वारा आिेशन प्रभािी रूप से के िि चािक पदार्ों अर्ाथत् बकसी िस्तु का कु ि आिेश उसमें उपस्थित धनात्मक

के लिए होता है , क्ोंबक इसमें इिेक्ट्रॉनों का पुनबिथन्यास तर्ा ऋणात्मक आिेशों के िीजर्लणतीय योर् के िरािर होता
है।
आिश्यक होता है, जो के िि चािकों में सं भि है।
 आवेश ों क वास्तववक सों ख्याओों की भााँ वि ज डा जा सकिा
स्थिर िैद्युत प्रेरण के कारण ही आिेलशत िस्तु, उदासीन
है अथवा आवेश द्रव्यमान की भााँ वि अविश राशश है
िस्तु को अपनी ओर आकबषथत करती है  यवि वकसी वनकाय में 𝑛 आवेश 𝑞1 , 𝑞2 , 𝑞3 … 𝑞n , हैं
उदाहरण: ि वनकाय का कु ल आवेश
जि एक आिेलशत स्के ि को सूखे कार्ज के टुकड़ों के 𝑞 = 𝑞1 + 𝑞2 + 𝑞3 + ⋯ + 𝑞𝑛
पास िाया जाता है,तो कार्ज के टु कड़ों में बिपरीत आिेश 2. बिद्युत आिेश का सं रक्षण (Conservation of
Electric Charge)
प्रेररत होता है और िे स्के ि की ओर आकबषथत होने िर्ते हैं।
(i) बकसी बििबर्त बनकाय (Isolated System) का कु ि
2. सं िहन या चािन द्वारा आिेश (Charging by
आिेश बनयत रहता है।
Conduction):- जि बकसी आिेलशत िस्तु (Charged
(ii) बिद्युत आिेश को न तो उत्पन्न बकया जा सकता है, और न
Object) को बकसी अचािक या चािक िस्तु से स्पशथ
ही नष्ट बकया जा सकता है, इसे के िि एक बपं ड से दुसरे बपं ड
कराया जाता है, तो िह
में िानातररत बकया जा सकता है।
आिेश उस िस्तु की
इसे ही आिेश का सं रक्षण लसद्ांत कहते है।
सतह पर फैि जाता है।

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जैसे:- कााँ च के छड़ और रेशम के कपड़े को रर्ड़ने पर कााँ च के 𝑛=
𝑞
=
10
छड़ पर लजतना धनािेश उत्पन्न होता है, उतना ही रेशम के 𝑒 1 ⋅ 6 × 10−19
= 0 ⋅ 625 × 1019
कपड़े पर ऋणािेश इस प्रकाश कााँ च के छड़ और रेशम के
= 6 ⋅ 25 × 1018
कपड़े को यबद एक बनकाय मान लिया जाए तो नेट आिेश
1 कु िॉम ऋणािेश में िर्भर् 6.25 × 1018 इिेक्ट्रॉन होते
शून्य है जो रर्ड़ने से पहिे र्ा।
हैं। Page ।
3. आिेश का क्ांटमीकरण (Quantization of
9
❖ िैद्युत आिेश तर्ा द्रव्यमान में अंतर (Difference
Charge)
Betweet Electric Charge and Mass)
बकसी िस्तु पर कु ि आिेश एक मूि आिेश (Elementry
आिेश (Charge) द्रव्यमान (Mass)
Charge) 𝑒 के पूणाांक र्ुणज (Intergral Multijple)
होता है 1. िैद्युत आिेश धनात्मक 1. द्रव्यमान हमेशा

अतः बकसी िस्तु पर आिेश की मात्रा हो सकती है। , ऋणात्मक तर्ा शून्य हो धनात्मक होता है

𝑞 = ± 𝑛𝑒 जहााँ 𝑛 = ±1, ±2, ±3 … … … .. सकता है

𝑒 = मूि आिेश (Fundamental Charge) 2. आिेश क्ांटमीकरण 2. द्रव्यमान का


𝑒 = 1 ⋅ 6 × 10−19 𝐶 होते है। क्ांटमीकरण अभी तक
मूि आिेश (Elementary Charge):- बकसी िस्तु पर 𝒒 = ±𝒏𝒆 िाबपत नही हुआ है।
आिेश का न्यूनतम मान इिेक्ट्रॉन या प्रोटोन के आिेश के 3. िैद्युत आिेश बपण्ड के 3. बकसी बपण्ड का
िरािर होता है, लजसे मूि आिेश कहते है। र्बत पर बनभथर नही करता द्रव्यमान उसके र्बत के
▪ इिेक्ट्रॉन का आिेश = −1 ⋅ 6 × 10−19 𝐶 है। सार् िढ़ जाता है।
▪ प्रोटोन का आिेश = +1 ⋅ 6 × 10−19 𝐶 4. आिेश के कारण 4. द्रव्यमान के कारण
दोनों का पररमाण (magnitude) समान होता है, परंतु बिद्युतीय तर्ा चुम्बकीय र्ुरुत्विीय प्रभाि उत्पन्न
लचह्न (sign) लभन्न होता है। प्रभाि उत्पन्न होता है। होता है।
मूि आिेश को आिेश का क्ांटम कहते है। 5. आिेश सं रलक्षत है। 5. द्रव्यमान भी सं रलक्षत
मूि आिेश = आिेश का क्ांटम है िेबकन आइिीन के
मूि आिेश (Elementary Charge) िह सिसे छोटा समीकरण 𝐸 = 𝑚𝑐 2 के
आिेश है जो स्वतं त्र रूप से बकसी कण पर पाया जा सकता है। अनुसार द्रव्यमान को
इसी कारण इसे आिेश का क्ांटम (Quantum of ऊजाथ को द्रव्यमान में
Charge) कहा जाता है। िदिा जा सकता है
बकसी भी िस्तु पर आिेश कमी भी लभन्न जैसे
𝑒 𝑒 3𝑒 −5𝑒
±2,±3,± , … … ….आबद सं भि नही है कू िाम्ब का बनयम (Coulomb’s law) या स्थिर िैद्युत िि
2 3
आिेश का क्ांटमीकरण / पररमाणीकरण को ही आिेश का बनयम (Law of Electro Statics Force)
का परमाणुकता (Atomicity of Charge) कहते है।
 यह एक प्रयोर्ात्मक रूप से सत्याबपत बनयम है। फ्रांसीसी िैज्ञाबनक चाल्सथ ऑर्लिन कू िॉम ने 1785 में अपने
 सन 1830 में फैराडे ने इसकी झिक डी जिबक बमलिकन प्रयोर्ों के आधार पर बिं दु आिेशों के िीच िर्ने िािे िि के
ने 1912 में तेि – िुाँ दे प्रयोर् द्वारा इसे पूरी तरह से लिए एक बनयम प्रबतपाबदत बकया, लजसे कू िॉम का बनयम
िाबपत कर बदया। कहा जाता है।
 आिेश के क्ांटमीकरण से यह भी स्पष्ट हुआ बक आिेलशत इस बनयम के अनुसार,
िस्तु पर आिेश सतत पररमाण (Continuous "दो स्थिर बिंदु आिेशों के िीच िर्ने िािा िि – (i) उन
Amount) में न होकर असतत बििक्त (Discrete) दोनों आिेशों के पररमाण के र्ुणनफि के समानुपाती तर्ा
पररमाण में होता है
(ii) उनके िीच की दूरी के िर्थ के व्युत्क्रमानुपाती होता है।"
1. कु िॉम आिेश में बकतने इिेक्ट्रॉन होते है।
उिर:- 𝑞 = 𝑛𝑒 से

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यबद दो बिं दु आिेश 𝑞1 और 𝑞2 बनिाथत में एक दुसरे से 𝑟 दुरी क्ोंबक बिद्युतशीिता बकसी तत्व की इिेक्ट्रॉन त्यार्ने
पर हो तो उनके िीच िर्ने िािा िि की प्रिृबत िताता है जिबक परािैद्युत बकसी माध्यम की बिद्युत
𝐹 ∝ 𝑞1 𝑞2 क्षेत्र को प्रभाबित करने की क्षमता को।
1 बिद्युत पारर्म्यता (Permittivity)
𝐹∝ 2
𝑟 बकसी माध्यम का िह र्ुण जो यह िताता है बक िह माध्यम
1 Page ।
∴ 𝐹 ∝ 𝑞1 𝑞2 . 2 बिद्युत क्षेत्र या बिद्युत िि का बकतना समर्थन या बिरोध करता
𝑟 10
𝑞1 𝑞2 है, उसे बिद्युत पारर्म्यता कहते हैं।"
𝐹∝ 2
𝑟 इसे 𝜀 (एस्थििॉन) से सूलचत बकया जाता है।
जहााँ 𝒌 एक समानुपाती बनयतांक है, लजसे 'स्थिर िैद्युत िि
यबद बकसी माध्यम की पारर्म्यता अलधक होती है, तो िह
बनयतांक' (Electrostatic Constant) भी कहते हैं।
बिद्युत क्षेत्र को अलधक कमजोर करता है।
𝑘 का मान उस माध्यम की प्रकृ बत (जैसे – हिा, जि, कााँ च
यबद बकसी माध्यम की पारर्म्यता कम होती है (जैसे
आबद) और मापन की पद्बत (जैसे – 𝑆. 𝐼 या 𝐶. 𝐺. 𝑆) पर
बनिाथत की), तो बिद्युत क्षेत्र अलधक प्रभािी रहता है।
बनभथर करता है।
वनवााि की ववद्युि पारगम्यिा मुक्त आकाश या बनिाथत की
(i) जि मापन की पद्बत 𝑺. 𝑰. हो और दोनों आिेश बनिाथत
परािैद्युतता (Permittivity of freeSpace)
(vacuum) या हिा में स्थित हों, ति:
1 बनिाथत की बिद्युत पारर्म्यता (लजसे मुक्त आकाश या खािी
𝑘= िान की परािैद्युतता भी कहते हैं) एक ऐसा भौबतक र्ुण है
4𝜋𝜀0
जहााँ , जो यह िताता है बक खािी िान (space) में दो बिं दु
आिेशों के िीच िर्ने िािा बिद्युत िि बकतना प्रभािी
𝜀0 = (एकसाइिन जीरो) को वनवााि की ववद्युि पारगम्यिा
(मजिूत या कमजोर) होर्ा।
मुक्त आकाश या बनिाथत की परािैद्युतता (Permittivity)
 बनिाथत की परािैद्युतता को 𝜀० से सूलचत बकया जाता है।
कहते है।
❖ 𝜀० का मात्रक
• (Permittivity of free space)
1 𝑞1 𝑞2 𝐶2
• 𝜀0 = 8.854 × 10−12 𝐶 2 /𝑁 ⋅ 𝑚2 𝜀० = = = 𝐶 2 𝑁 −1 𝑚−2
1
4𝜋 𝐹𝑟 2 𝑁𝑚2
अिः , 𝑘 = −12
 𝜀० का मात्रक 𝐶 2 𝑁 −1 𝑚2 या 𝐹𝑚−1 होता है
4𝜋×8.854×10
𝐶 2 𝑁 −1 𝑚−2 = 𝐶 2 𝑁 −1 𝑚−1 𝑚−1
= 8.987551787 × 109 𝑁𝑚2 𝐶−2 = 𝐹 𝑚−1
≈ 9 × 109 𝑁 ⋅ 𝑚2 /𝐶 2 चूाँ बक र्ोिीय चािक की धाररता, 𝐶 = 4𝜋𝜀० 𝑅
𝐶
1 𝑞1 𝑞2 = 𝜀०
∴ 𝐹 = 4𝜋𝜀 𝑝𝑟𝑜𝑣𝑒𝑑 4𝜋𝑅
० 𝑟2 𝐹
𝑘 का 𝑆. 𝐼. मात्रक 𝜀० = = 𝐹𝑚−1
𝑚
𝐹𝑟 2 𝑁 ⋅ 𝑚2
∵𝑘= = ❖ 𝜀० का बिमीय सूत्र
𝑞1 𝑞2 𝐶⋅𝐶
[𝐴𝑇] [𝐴𝑇]
= 𝑁𝑚2 𝐶 −2 𝜀० =
जहााँ 𝜀० (एकसाइिन जीरो) को मुक्त आकाश या बनिाथत की 𝑀𝐿𝑇 −2 𝐿2
−1 −3 2 4
=𝑀 𝐿 𝐴 𝑇
परािैद्युतता (Permittivity) कहते है। [𝑀−1 𝐿−3 𝑇 4 𝐴2 ]
Note:- बकसी – बकसी बकताि में परािैद्युतता को बनिाथत की ❖ 𝜀० का आं बकक मान
बिद्युतशीिता कहते है जो उलचत नही है।
1
∵ 4𝜋𝜀 = 9 × 109

NCERT में "बिद्युतशीिता" शब्द का प्रयोर् ε₀ के 1
= 𝜀०
लिए एक अनुिाद-त्रुबट है। 4𝜋 × 9 × 109
1 1
िैज्ञाबनक दृबष्टकोण से, ε₀ का सही नाम "बिद्युत 𝜀० = =
4 × 3 ⋅ 14 × 9 × 109 113 ⋅ 04 × 109
पारर्म्यता" होना चाबहए। 𝜀० = 0 ⋅ 008846 × 10−9
𝜀० = 8 ⋅ 854 × 10−12 𝐶 2 𝑁 −1 𝑚−2

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अतः 𝜀० मुक्त आकाश का परािैद्युतता का मान 8 ⋅ 854 × → इसका मान हमेशा धनात्मक होता है।
10 −12 2
𝐶 𝑁 −1
𝑚 −2
या 𝐹 𝑚 −2
होता है। → र्ैसों के लिए 𝐾 = 1 होता है।
कू िॉम के बनयम में माध्यम की िैद्युतशीिता यह माध्यम की भौबतक अििा और तापमान पर बनभथर
(Permittivity in a Medium) करता है
जि दो बिं दु आिेश बनिाथत में न होकर बकसी अन्य माध्यम परािैद्युतांक (Dielectric Constant) के र्ुण:
Page ।
(जैसे जि, कााँ च, या बकसी कु चािक) में स्थित हों, तो कू िॉम (1) परािैद्युतांक एक अबदश रालश (Scalar
11
के बनयम में बनिाथत की िैद्युतशीिता 𝜀० के िान पर उस Quantity) है।
माध्यम की िैद्युतशीिता 𝜀 का प्रयोर् बकया जाता है।" (2) इसका मान हमेशा धनात्मक (Positive) होता है।
अर्ाथत् (3) र्ैसों के लिए 𝐾 ≈ 1 होता है, बिशेषतः बनम्न दाि
1 𝑞1 𝑞2
𝐹माध्यम = − − − − − −(𝑖) और सामान्य तापमान पर।
4𝜋𝜀 𝑟 2 (4) परािैद्युतांक का मान माध्यम की भौबतक अििा
िेबकन 𝜀 = 𝐾 𝜀० या 𝜀𝑟 𝜀०
(जैसे – ठोस, द्रि, र्ैस) और तापमान पर बनभथर करता है।
जहााँ 𝜀 → बकसी माध्यम का परािैद्युतता
माध्य्यम तर्ा इसका परािैद्युतांक
𝜀० → बनिाथत की परािैद्युतता
माध्यम परािैधुतांक
𝜀𝑟 /𝐾 → सापेक्ष िैद्युतशीिता
बकसी माध्यम के परािैद्युतांक को 'सापेक्ष परािैद्युतता' शुद् जि 80
(Relative Permittivity), 'बिलशष्ट परािैद्युतता' धातु या सुचािक अनं त
(Specific Inductive Capacity), या 'सापेक्ष िैद्युत हिा िर्भर् 1
पारर्म्यता' भी कहा जाता है। पैराफीन मोम 2 – 2.5
माध्यम का परािैद्युततांक या सापेक्ष िैद्युतशीिता रिर 7
बकसी माध्यम बक िैद्युतशीिता या परािैद्युतता (𝜀) तर्ा
अभ्रक 3–6
बनिाथत की िैद्युतशीिता या परािैद्युतता (𝜀० ) के अनुपात को
स्थिसरीन 42.5
माध्यम का परािैद्युततांक कहते है
𝜀 𝜀 ∵ यबद आिेश बनिाथत में है, और मात्रक का पद्बत 𝑆. 𝐼 है तो
∴ 𝐾 = 𝜀 या 𝜀𝑟 = 𝜀 𝜀 = 𝐾 𝜀० या 𝜀𝑟 𝜀० 1 𝑞1 𝑞2
० ० 𝐹बनिाथत = 4𝜋𝜀 − − − −(𝑎)
ति समी (i) को इस प्रकार लिखा जा सकता है ० 𝑟2

1 𝑞1 𝑞2 तर्ा
𝐹माध्यम = यबद आिेश बकसी माध्यम में है और मात्रक का पद्बत 𝑆. 𝐼 है
4𝜋𝜀० 𝑘 𝑟 2
यानी बनिाथत के अिािा बकसी माध्यम में कू िॉम का बनयम
1 𝑞1 𝑞2
तो 𝐹माध्यम = 4𝜋𝜀 − − − − − (𝑏)
०𝐾 𝑟2
1 𝑞1 𝑞2
𝐹माध्यम = समी (𝑎) तर्ा (𝑏) से
4𝜋𝜀० 𝐾 𝑟 2 1 1 𝑞1 𝑞2 1 1 𝑞1 𝑞2
बकसी माध्यम का परािैद्युततांक के लिए महत्वपूणथ बिं दु 𝐹माध्यम = ⋅ ⋅ 2 =
4𝜋𝜀० 𝐾 𝑟 𝐾 4𝜋𝜀० 𝑟 2
1. परािैद्युततांक बनयतांक (𝐾 या 𝜀𝑟 ) बिमाहीन तर्ा 1 𝐹 त
∴ 𝐹माध्यम = 𝐾 𝐹बनिाथत ⇒ 𝐹माध्यम = बनिाथ
𝐾
मात्रकहीन रालश है। 𝐹 𝐹
या 𝐾 = 𝐹बनिाथत या 𝜀𝑟 = 𝐹बनिाथत
2. 𝐾 या 𝜀𝑟 का मान माध्यम की प्रकृ बत पर बनभथर करता है माध्यम माध्यम
अर्ाथत् बकसी माध्यम का परािैद्युततांक (𝑲) िायु या बनिाथत में
जैसे :- (a) बनिाथत के लिए 𝐾 या 𝜀𝑟 = 1
दो बिं दु आिेशों के िीच िर्ने िािा िि तर्ा समान दुरी पर
(b) परािैद्युत या बिद्युतरोधी माध्यम के लिए
बकसी माध्यम में िर्ने िािा कू िॉम िि के अनुपात के िरािर
𝐾 या 𝜀𝑟 = 1 < 𝐾 या 𝜀𝑟 < ∞
कु चािक का परािैद्युततांक हमेशा 1 से अलधक होता है होता है।
(c) धातु के लिए 𝐾 या 𝜀𝑟 = ∞ पुनः समी (𝑎) तर्ा (𝑏) से
1 𝑞1 𝑞2
(d) िायु के लिए 𝐾 या 𝜀𝑟 = 1.00059 𝐹बनिाथत 4𝜋𝜀0 𝑟2
(e) बनिाथत के लिए 𝐾 या 𝜀𝑟 = 1 𝐾= =
𝐹माध्यम 1 𝑞1 𝑞2
𝐾 या 𝜀𝑟 िायु ≈ 𝐾बनिाथत 4𝜋𝜀 𝑟2
→ परािैद्युततांक 𝐾 एक अबदश रालश है।

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1 इिेक्ट्रॉन प्रिाह कर जाता है।
𝜀 कू िॉम बनयम का सबदश स्वरूप (Vector form of
𝐾= 0
1 Coulamb law)
𝜀
𝜀
इस Topic के लिए Basic जानकारी
या ε𝑟 = ε = ε = ε0 ε𝑟
ε
𝐾= सबदश = पररमाण × बदशा
𝜀0 0 Page ।
𝐴⃗ = |𝐴⃗| 𝐴̂
अर्ाथत् या, 𝐴̂ = 𝐴 𝐴̂
12

बकसी माध्यम का परािैद्युतता जहााँ 𝐴̂ एकांक सबदश है।


परािैधुतांक =  एकांक सबदश (Unit Vector):- िह सबदश लजसका
बनिाथत की परािैद्युतता
कू िॉम के बनयम का सबदश रूप पररमाण (मॉड्यूिस) 1 होता है, उसे एकांक सबदश कहते
1 𝑞 𝑞
∵ 𝐹⃗ = 4𝜋𝜀 1𝑟 2 2 𝑟̂ हैं।

𝑟⃗ 1 𝑞1 𝑞2 इसे बकसी भी मूि सबदश की बदशा में िनाया जाता है।
∵ 𝑟̂ = |𝑟⃗| या 𝐹⃗ = 𝑟⃗
4𝜋𝜀० |𝑟⃗|3
यबद 𝐴⃗ को सबदश हो तो उसका एकांक सबदश 𝐴̂ इस प्रकार
एकांक आिेश (Unit Charge) या कू िॉम का पररभाषा
से लिखा जा सकता है
(Definition of Coulomb)
𝐴⃗ सबदश
प्रर्म पररभाषा, 𝐴̂ = अर्ाथत एकांक =
𝑞1 𝑞2 |𝐴⃗| सबदश का पररमाण
𝐹 = 9 × 109 → एकांक सबदश का पररमाण हमेशा 1 होता है
𝑟2
यबद 𝑞1 = 𝑞1 = 1𝐶 और 𝑟 = 1𝑚 |𝐴̂| = 1
1×1 → इसकी बदशा मूि सबदश की और रहता है
𝐹 = 9 × 109 ×
(1) 2 → इसकी उपयोर् बदशा िताने के लिए बकया जाता है।
𝐹 = 9 × 109 𝑁
1 कू िॉम आिेश या एकांक आिेश :- जि बनिाथत में स्थित दो कू िॉम के बनयम का सबदश स्वरूप

बिं दु आिेशों के िीच की दुरी 1 𝑚 हो लजसके कारण (Vector form of Coulomb’s Law)

9 × 109 𝑁 का िि उत्पन्न होता है तो प्रत्येक आिेश को 1 माना समान प्रकृ बत के दो आिेश 𝑞1 तर्ा 𝑞2 एक दुसरे से 𝑟

कू िॉम आिेश कहते है। दुरी पर है, जो एक दुसरे

बद्वतीय पररभाषा पर प्रबतकबषथत िि

िैद्युत धारा :- बकसी चािक में िैद्युत आिेश की प्रिाह की दर आरोबपत करता है।

को बिद्युत धारा कहते है। 𝑞1 द्वारा 𝑞2 तर्ा 𝑞2 द्वारा 𝑞1 पर िर्ने िािा ििों का
िैद्युत आिेश (𝑞) पररमाण
• िैद्युत धारा (𝐼) = समय (𝑡) 1 𝑞1 𝑞2
𝑄 = 𝐼𝑡 |𝐹⃗21 | = |𝐹⃗12 | = 𝐹 =
4𝜋𝜀० 𝑟 2
𝑆. 𝐼 प्रणािी में, या, 𝐹 × 𝐹̂ = 4𝜋𝜀
1 𝑞1 𝑞2
𝑟̂
० 𝑟2
आिेश का मात्रक → कू िॉम 1 𝑞1 𝑞2
धारा का मात्रक → ऐस्थम्पयर 𝐹⃗ = 𝑟̂
4𝜋𝜀० 𝑟 2
समय का मात्रक → सेकेण्ड या 𝐹⃗ =
1 𝑞1 𝑞2
𝑟̂
∴ 1 कू िॉम = 1 ऐस्थम्पयर × 1 सेकेण्ड 4𝜋𝜀० |𝑟⃗|2
1 𝑞 𝑞 𝑟⃗
अर्ाथत् यबद बकसी चािक से होकर 1 सेकेण्ड में 1 ऐस्थम्पयर या, 𝐹⃗ = 4𝜋𝜀 1𝑟 2 2 𝑟

1 𝑞1 𝑞2
धारा प्रिाबहत होती है तो, प्रिाबहत आिेश 1 कू िॉम आिेश 𝐹⃗ = 𝑟⃗
4𝜋𝜀० 𝑟 3
कहिाता है। 1 𝑞1 𝑞2
1 𝑐 6 ⋅ 25 × 1018 या , 𝐹⃗ = 𝑟⃗
∴ 1𝐴 = = 4𝜋𝜀० |𝑟⃗|3
1𝑠 1𝑠 अि 𝑞1 पर 𝑞2 के कारण िर्ने िािा िि यबद 𝐹⃗12
अतः बकसी चािक से 1 𝐴 धारा प्रिाबहत होने पर चािक
लजसका एकांक सबदश 𝑟̂21 बदशा में,
के अनुप्रि काट से 1 सेकेण्ड में 6 ⋅ 25 × 1018

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𝐹⃗12 =
1 𝑞1 𝑞2
𝑟̂ − − − −(𝑖) 2. यह के िि बिं दु आिेशों के लिए मान्य है :
4𝜋𝜀० 𝑟 2 21
अर्ाथत,कू िॉम का बनयम के िि बिं दु आकार के आिेशों के
इसी प्रकार 𝑞2 पर 𝑞1 के कारण िर्ने िािा िि
यबद 𝐹⃗21 लजसका एकांक सबदश 𝑟̂12 बदशा में, िीच के िि की र्णना के लिए उपयुक्त है। बिस्तृत या
1 𝑞1 𝑞2 अबनयबमत आकार िािे आिेशों के लिए यह बनयम सटीक
𝐹⃗21 = ⋅ 𝑟̂12 − − − − − (2)
4𝜋𝜀० 𝑟 2 पररणाम नहीं देता। Page ।
िेबकन 𝑟̂21 = −𝑟̂12 13
3.यह व्युत्क्रम िर्थ बनयम (Inverse Square Law) पर
ति समी० (i) में
1 𝑞1 𝑞2 आधाररत है:
𝐹⃗12 = (−𝑟̂12 )
4𝜋𝜀० 𝑟 2 अर्ाथत,यह बनयम के िि उन पररस्थिबतयों में िार्ू होता है जहााँ
1 𝑞1 𝑞2
𝐹⃗12 = − 𝑟̂12 िि की तीव्रता दूरी के िर्थ के व्युत्क्रम के समानुपाती होती है।
4𝜋𝜀० 𝑟 2
𝐹⃗12 = −𝐹⃗21 यबद यह सं िं ध नहीं है, तो कू िॉम का बनयम िार्ू नहीं होता।
 इससे स्पष्ट है बक दो बिं दु आिेशों द्वारा एक दुसरे पर 4.िहुत कम या िहुत अलधक दूरी पर अमान्य है :
िर्ाए र्ए िि का पररमाण समान एिं बदशा बिपरीत है।
अर्ाथत,िहुत कम दूरी (≈ 𝟏𝟎⁻¹⁵ मीटर से कम) पर यह
जो न्यूटन के तृतीय र्बत बनयम के अनुरूप है। अतः
बनयम िार्ू नहीं होता क्ोंबक िहााँ नालभकीय िि (nuclear
कू िॉम का सबदश बनयम न्यूटन के तृतीय र्बत बनयम का
पािन करता है। forces) प्रभािी हो जाते हैं।
 सबदश स्वरूप से यह भी स्पष्ट होता है बक दो आिेशों के िहुत अलधक दूरी पर भी यह बनयम सटीक नहीं होता क्ोंबक
िीच िर्ने िाि स्थिर िैद्युत िि दोनों आिेश के कें द्र को िहााँ र्ुरुत्वीय िि (gravitational forces) और अन्य ििों
बमिाने िािी रेखा के अनुबदश कायथ करता है। इस प्रकार का प्रभाि िढ़ जाता है।
कू िॉम का बनयम के न्द्रीय िि है। 5.यह बनयम माध्यम (Medium) पर बनभथर करता है :
 यबद दोनों आिेश एक ही प्रकृ बत के है अर्ाथत् दोनों
यह बनयम उस माध्यम पर बनभथर करता है लजसमें आिेश स्थित
धनात्मक या दोनों ऋणात्मक तो 𝑞1 𝑞2 = धनात्मक
हैं। बनिाथत (vacuum) में िि का मान अलधक होता है।
अर्ाथत् 𝑞1 𝑞2 > 0 तो इनके िीच िर्ने िािा िैद्युत
िि प्रबतकषथण बकसी अन्य माध्यम (जैसे जि, कांच आबद) में िि का मान
होर्ा। कम हो जाता है क्ोंबक माध्यम की परािैधुतांक स्थिरांक
(dielectric constant) िि को प्रभाबित करती है।
➢ यबद दोनों आिेश बिपरीत प्रकृ बत के है अर्ाथत् एक र्ुरुत्वाकषथण िि और स्थिरिैद्यत
ु िि के िीच अंतर
धनात्मक और ऋणात्मक अर्ाथत् 𝑞1 𝑞2 = ऋणात्मक (Difference between Grauitational Force and Electrostatics Froce)
अर्ाथत्
𝑞1 𝑞2 < 0 स्थिर-िैद्युत िि र्ुरुत्वाकषथण िि
तो इनके िीच
1. यह आिेश के कारण 1. यह द्रव्यमान के कारण
िर्ने िािा
उत्पन्न होता है। उत्पन्न होता है।
िि आकषथक होर्ा।
2. इसका समानुपाती 2. इसका समानुपाती
कू िॉम के बनयम के सीमाएाँ
बनयतांक 𝒌 होता है। बनयतांक 𝐺 होता है।
(Limitations of Coulomb’s Law) 𝟗 𝟐 −𝟐 G = 6.67 × 10−11 Nm2 kg −2
𝒌 = 𝟗 × 𝟏𝟎 𝐍𝐦 𝐜
1.यह बनयम सािथबत्रक नहीं है : 3.यह सािथबत्रक िि नही 3. यह सािथबत्रक िि है।
अर्ाथत,यह बनयम के िि स्थिर (static) बिं दु आिेशों के लिए है।
िार्ू होता है। यह र्बतमान आिेशों (moving charges) 4. यह आकषथक तर्ा 4. यह लसफथ आकषथक है।
के लिए मान्य नहीं है क्ोंबक िहााँ चुं िकीय प्रभाि भी शाबमि प्रबतकषथक दोनों है।
5. यह आिेश के माध्यम 5. यह द्रव्यमान के माध्यम
हो जाते हैं।
पर बनभथर करता है। पर बनभथर करता है

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र्ुरुत्वाकषथण िि और स्थिरिैद्युत िि के िीच समानता …………………………………………………
(Similarities between Gravitational Force and Electrostatic Force.) ………………………………………………….
𝑞𝑛 आिेश के कारण 𝑞1 पर िर्ने िािा िि ,
स्थिर-बिद्युत िि र्ुरुत्वाकषथण-िि ⃗⃗1n =
F
1 q1 q n
r̂1n … … . (𝑖𝑖𝑖)
4πϵ० r1n 2
1.यह िर्थ व्युत्क्रमानुपाती 1. यह भी िर्थ
अध्यारोपण के लसद्ांत से Page ।
होता है। व्युत्क्रमानुपाती है। 14
⃗F⃗1 = ⃗F⃗12 + ⃗F⃗13 +………+F ⃗⃗1n
2.यह के न्द्रीय िि है 2. यह भी के न्द्रीय िि है
समीकरण (i),(ii) एिं (iii) से रखने पर,
3. यह एक सं रक्षी िि है 3. यह भी एक सं रक्षी िि
𝑟̂13 +……+
1 𝑞1 𝑞2 1 𝑞1 𝑞2 1 𝑞1 𝑞𝑛
𝐹⃗1 = 𝑟̂12 + 𝑟̂1𝑛
है
2
4𝜋𝜀० 𝑟12 2
4𝜋𝜀० 𝑟13 2
4𝜋𝜀० 𝑟1𝑛
𝑞1 𝑞2 𝑞3 𝑞𝑛
4.यह न्यूटन के तृतीय 4. यह भी न्यूटन के तृतीय 𝐹⃗1 = [ 2 𝑟̂12 + 2 𝑟̂13 + ⋯ + 2 ]
4𝜋𝜀० 𝑟12 𝑟13 𝑟1𝑛
र्बत बनयम का पािन र्बत बनयम का पािन करता 𝑛
𝑞1 𝑞𝑖
करता है। है 𝐹⃗1 = ∑ 2 𝑟̂1𝑖
4𝜋𝜀० 𝑟1𝑖
5. यह बनिाथत 5.यह भी बनिाथत में
𝑖=2

(vacuum)में भी कायथ बक्रयाशीि िि है।


बिद्युत क्षेत्र (Electric Field)
करता है–माध्यम की
"बकसी आिेश या आिेशों के समूह के चारों ओर का िह क्षेत्र
आिश्यकता नहीं होती
लजसमें कोई अन्य आिेश आकषथण या प्रबतकषथण िि का
है।
अनुभि करता है, उसे बिद्युत क्षेत्र कहते हैं।"
यह क्षेत्र उस िान को दशाथता है जहााँ कोई परीक्षण
िहुि आिेशों के िीच िि:अध्यारोपण का लसद्ांत आिेश (test charge) रखने पर उस पर िि िर्ेर्ा।
(Forte between multiple Charge: Principle of Superposition)
इबतहास:
कर्न:- यबद बकसी िान पर एक बिं दु आिेश पर कई अन्य • बिद्युत क्षेत्र की अलभधारणा (concept) सिसे पहिे
बिं दु आिेश िि िर्ा रहे हों, तो उस बिं दु आिेश पर िर्ाया माइकि फैराडे (Michael Faraday) ने दी र्ी।
र्या कु ि िि, सभी अिर्-अिर् आिेशों द्वारा िर्ाए र्ए • इसके िाद जेम्स क्लाकथ मैक्सिेि (James Clerk
ििों का सबदश योर् (vector sum) होता है। Maxwell) ने इसे र्लणतीय रूप में बिकलसत
बकया।
यबद बकसी 𝑞1 आिेश पर 𝑞2 , 𝑞3 , 𝑞4 … … . 𝑞𝑛 द्वारा िर्ाया आिेश
िि 𝐹⃗12 , 𝐹⃗13 , 𝐹⃗14 … … 𝐹̂1𝑛 है तो,
𝑞1 पर कायथरत पररणामी िैद्युत िि (अध्यारोपण के लसद्ांत
स्रौत आिेश परीक्षण आिेश
से)
(Source Charge) (Test Charge)
𝐹⃗1 = 𝐹⃗12 + 𝐹⃗13 + 𝐹⃗14 … … … 𝐹⃗1𝑛 होर्ा।
 स्त्रोत आिेश (Source Charge):- "िह बिं दु आिेश
माना 𝑋𝑌 ति में 𝑞1 , 𝑞2 , 𝑞3 … … … . 𝑞𝑛 बिं दु आिेश है
जो बिद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है, उसे स्त्रोत आिेश
लजसका स्थिबत सबदश
(Source Charge) कहते हैं।"
क्रमशः 𝑟⃗1 , 𝑟⃗2 , 𝑟⃗3 … . . 𝑟⃗𝑛 है।
यह आिेश िह मूि कारण होता है लजसकी िजह से
𝑞2 आिेश के कारण 𝑞1 पर िर्ने
िािा िि, आसपास के क्षेत्र में बकसी परीक्षण आिेश (Test Charge)

1 q1 q 2 पर िि िर्ता है।
⃗⃗12 =
F r̂12 … . . (𝑖)
4πϵ० r12 2
स्त्रोत आिेश धनात्मक और ऋणात्मक दोनों हो सकता है।
जहााँ r̂12 , 𝑞2 से 𝑞1 बदशा में एकांक सबदश है। धनात्मक स्त्रोत आिेश के कारण बिद्युत
𝑞3 आिेश के कारण 𝑞1 पर िर्ने िािा क्षेत्र रेखाएाँ िाहर की ओर होती है।
1 q1 q 3
⃗F⃗13 = r̂13 … … . . (𝑖𝑖)
4πϵ० r13 2

जहााँ 𝑟̂13 , 𝑞3 से 𝑞1 बदशा में एकांक सबदश है।

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ऋणात्मक स्त्रोत आिेश के कारण बिद्युत चूाँ बक परीक्षण आिेश का आं बकक में स्त्रोत आिेश की तुिना
क्षेत्र रेखाएाँ अन्दर की ओर होता है। में िहुत छोटा होता है।
➢ स्त्रोत आिेश स्थिर, समान र्बत से 𝑙𝑖𝑚 𝐹⃗
∴ 𝐸⃗⃗ =
र्बतशीि, अर्िा पररिती र्बत से 𝑞0 → 0 𝑞0
र्बतशीि — तीनों प्रकार का हो सकता है।" िैद्युत क्षेत्र का महत्वपूणथ बिं दु
Page ।
• यबद आिेश स्थिर (Static) है, तो यह स्थिर बिद्युत क्षेत्र 1. िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता 𝐸⃗⃗ को समान्य भाषा में िैद्युत
15
उत्पन्न करता है। क्षेत्र भी कहते है।
𝐹
• यबद आिेश समान र्बत से र्बतशीि (Uniform 2. िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का S.I मात्रक 𝐸 = 𝑞 =
0
motion) है, तो यह चुं िकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करता है। 𝑁
= न्यूटन / कू िॉम
𝑐
• यबद आिेश पररिती र्बत (Accelerated motion) 𝑁𝑐 −1 = 𝑉𝑚−1
में है, तो यह बिद्युत चुम्बकीय तरंर्ें (Electromagnetic 𝐶. 𝐺. 𝑆 पद्बत में,
Waves) भी उत्पन्न करता है।
𝐹 𝐷𝑦𝑛𝑒 𝑆𝑡𝑎𝑡𝑒 𝑉𝑜𝑙𝑡
𝐸= = =
𝑞० 𝑆𝑡𝑎𝑡𝑒 𝑐𝑚
पररक्षण आिेश (Test Charge) 𝐹 [𝑀𝐿𝑇 −2 ]
3. बिमीय सूत्र 𝐸 = 𝑞 = = [𝑀𝐿𝑇 −3 𝐴−1 ]
पररक्षण आिेश एक छोटा धनात्मक आिेश होता है , लजसका ० [𝐴𝑇]

उपयोर् बकसी बिं दु पर बिद्युत क्षेत्र को मापने या उसका 4. बिद्युत क्षेत्र के बकसी बिं दु पर तीव्रता 𝐸⃗⃗ हो तो उस बिं दु
अध्ययन करने के लिए बकया जाता है।" पर स्थित आिेश 𝑞 पर बिद्युत िि,
इसे इतना छोटा माना जाता है बक यह स्त्रोत आिेश के 𝐹⃗
∵ 𝐸⃗⃗ =
बिद्युत क्षेत्र को प्रभाबित नहीं करता। 𝑞
∴ 𝐹⃗ = 𝑞𝐸⃗⃗
यह सदै ि धनात्मक (+𝒗𝒆) लिया जाता है ताबक िि की
➢ यबद आिेश धनािेश हो तो िि की बदशा 𝐸⃗⃗ के समान
बदशा को बिद्युत क्षेत्र की बदशा के रूप में पररभाबषत बकया जा
तर्ा यबद आिेश ऋणािेश है तो िि 𝐹⃗ की बदशा 𝐸⃗⃗ की
सके ।
बदशा के बिपरीत होर्ी।
➢ इसे साधारणतः 𝑞0 से सूलचत बकया जाता है।
एकसमान िैद्युत क्षेत्र (Uniform Electric Field):-
➢ परीक्षण आिेश का अपना कोई बिद्युत क्षेत्र नहीं माना
यबद बकसी बिद्युत क्षेत्र के सभी बिं दओ
ु ं पर िैद्युत क्षेत्र की
जाता है।
तीव्रता का पररमाण तर्ा बदशा
➢ परीक्षण आिेश एक काल्पबनक (ideal/imaginary)
समान हो, तो उस क्षेत्र को
आिेश होता है, िास्तबिक नहीं।
एकसमान िैद्युत क्षेत्र कहते हैं।
➢ परीक्षण आिेश के कारण अन्य आिेश कोई िि महसूस
असमान िैद्युत क्षेत्र (Non-uniform Electric
नहीं करते, िेबकन यह स्वयं अन्य आिेशों द्वारा उत्पन्न
Field):-यबद बकसी बिद्युत क्षेत्र
बिद्युत क्षेत्र का अनुभि करता है।
के बिलभन्न बिं दओ
ु ं पर िैद्युत क्षेत्र
➢ एकांक परीक्षण धनािेश +1𝐶 का होता है।
की तीव्रता का पररमाण तर्ा बदशा
िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Intensity of Electric Field)
लभन्न-लभन्न हो, तो ऐसे क्षेत्र को
िैद्युत क्षेत्र के बकसी बिं दु पर परीक्षण आिेश पर िर्ने िािा
असमान िैद्युत क्षेत्र कहते हैं।
िि तर्ा परीक्षण आिेश के अनुपात को िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
बिं दु आिेश के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
कहते है
(Electric Filed Intensity due to Point)
 िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता एक सबदश रालश है लजसे 𝐸⃗⃗ से
माना बक बनिाथत में बिं दु 𝑂 पर 𝑄 आिेश है, लजससे 𝑟 दूरी पर
सूलचत बकया जाता है।
बिं दु 𝑃 है लजसपर पररक्षण आिेश 𝑞० है, उस बिं दु पर िैद्युत
यबद िैद्युत क्षेत्र के बकसी बिं दु पर रखे परीक्षण धनािेश 𝑞0
क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करना है।
पर कायथरत िि 𝐹⃗ हो तो उस बिं दु पर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
𝐹⃗
𝐸⃗⃗ =
𝑞0
𝑄 के कारण 𝑞० पर िर्ने िािा िि कू िॉम के बनयम से,

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𝐹=
1 𝑄𝑞० सबदश 𝑟⃗1 , 𝑟⃗2 , 𝑟⃗3 ……… 𝑟⃗𝑛 है माना कोई अन्य 𝑃 है
4𝜋𝜖० 𝑟 2 लजसका स्थिबत सबदश 𝑟⃗ है, उस पर िैद्युत क्षेत्र की
सबदश रूप में,
तीव्रता ज्ञात करनी है।
1 𝑄𝑞०
𝐹⃗ = 𝑟̂ 𝑞1 आिेश के
4𝜋𝜖० 𝑟 2
जहााँ , 𝑟̂ एकांक सबदश है, लजसकी बदशा 𝑄 से 𝑞० की ओर है। कारण बिं दु 𝑃 पर िैद्युत क्षेत्र
Page ।
बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता, की तीव्रता,
16
1 𝑞1
1 𝑄𝑞० 𝐸⃗⃗1 = 2 𝑟̂1𝑃 … (𝑖)
4𝜋𝜀० 𝑟1𝑃
𝐹 4𝜋𝜖० 𝑟 2
𝐸= = [समी (𝑖) से] जहााँ 𝑟⃗1𝑃 आिेश 𝑞1 से
𝑞० 𝑞०
1 𝑄 𝑃 की बदशा में एकांक सबदश है
𝐸=
4𝜋𝜖० 𝑟 2 तर्ा 𝑟̂1𝑃 , 𝑞1 आिेश तर्ा 𝑃 के िीच की दूरी है।
𝐾𝑄
या, 𝐸 = 𝑟2 𝑞2 आिेश के कारण बिं दु 𝑃 पर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता,
यबद आिेश बकसी माध्यम हो लजसका परािैद्युतांक 𝐾 हो तो, 𝐸⃗⃗2 =
1 𝑞2
𝑟̂2𝑃 … … … … (𝑖𝑖)
2
4𝜋𝜀० 𝑟2𝑃
1 𝑄
𝐸= − (𝑖𝑖) जहााँ 𝑟̂2𝑃 आिेश 𝑞2 से 𝑃 की बदशा में एकांक सबदश है ,
4𝜋𝜖० 𝐾 𝑟 2
सबदश रूप में, तर्ा 𝑟̂2𝑃 आिेश 𝑞2 और 𝑃 के िीच की दुरी है।
1 𝑄 𝑞3 आिेश के कारण बिं दु P पर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
𝐸⃗⃗ = 𝑟̂ 1 𝑞
4𝜋𝜖० 𝑟 2 𝐸⃗⃗3 = 4𝜋𝜀 𝑟 23 𝑟̂3𝑃 … … … (𝑖𝑖𝑖)
० 3𝑃
समीकरण (ii) से,
जहााँ 𝑟̂3𝑃 आिेश 𝑞3 से 𝑃 की बदशा में एकांक सबदश है
1
𝐸∝ 2 ,तर्ा 𝑟3𝑃 आिेश 𝑞3 तर्ा 𝑃 के िीच दुरी है।
𝑟
𝐸 तर्ा 𝑟 के िीच ग्राफ, ………………………………………………………
ग्राफ से स्पष्ट है बक जैसे-जैसे 𝑟 का ……………………………………………………..
मान िढ़ता है 𝐸 का मान घटता है। जो ↑ 𝑞𝑛 आिेश के कारण बिं दु 𝑃 पर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
𝐄 1 𝑞
असमान िैद्युत क्षेत्र को दशाथता है। 𝐸⃗⃗𝑛 = 4𝜋𝜀 𝑟 2𝑛 𝑟̂𝑛𝑃 … … . . (𝑖𝑣)
० 𝑛𝑃
अतः बिन्दु आिेश के कारण िैद्युत क्षेत्र 𝐫→ जहााँ 𝑟̂𝑛𝑃 आिेश 𝑞𝑛 से 𝑃 की बदशा में एकांक सबदश है,
असमान होता है। तर्ा 𝑟𝑛𝑃 आिेश 𝑞𝑛 और P के िीच की दुरी है।
आिेशों के बनकाय के कारण बिद्युत क्षेत्र बिद्युत क्षेत्र का बिं दु 𝑃 पर पररणामी िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता अध्यारोपण के
अध्यारोपण का लसद्ांत लसद्ांत से
(Electric Field due to system of charge: 𝐸⃗⃗ = 𝐸⃗⃗1 + 𝐸⃗⃗2 + 𝐸⃗⃗3 +………..+𝐸⃗⃗𝑛
Principle of Super Position of Electric Field) समी (𝑖), (𝑖𝑖), (𝑖𝑖𝑖0 एिं (𝑖𝑣) से,
1 𝑞1 1 𝑞1 1 𝑞3
𝐸⃗⃗ = 𝑟̂1𝑃 + 𝑟̂2𝑃 + 2 +
बकसी बिं दु पर यबद एक से अलधक आिेशों द्वारा बिद्युत 4𝜋𝜀० 𝑟1𝑃 2 2
4𝜋𝜀० 𝑟2𝑃 4𝜋𝜀० 𝑟3𝑃
1 𝑞𝑛
क्षेत्र उत्पन्न हो रहा हो, तो उस बिं दु पर कु ि बिद्युत क्षेत्र …………+ 2 𝑟̂𝑛𝑃
4𝜋𝜀० 𝑟𝑛𝑃
प्रत्येक आिेश द्वारा उत्पन्न बिद्युत क्षेत्र का सबदश योर् 1 𝑞1 𝑞1 𝑞3
𝐸⃗⃗ = [ 2 𝑟̂1𝑃 + 2 𝑟̂2𝑃 + 2 𝑟̂3𝑃 + … …
(vector sum) होता है। 4𝜋𝜀० 𝑟1𝑃 𝑟2𝑃 𝑟3𝑃
यबद 𝑞1 , 𝑞2 , 𝑞3 , … . . 𝑞𝑛 आिेश द्वारा उत्पन्न िैद्युत क्षेत्र 𝑞𝑛
+ 2 𝑟̂𝑛𝑃 ]
𝑟𝑛𝑃
की तीव्रता 𝐸⃗⃗1 , 𝐸⃗⃗2 , 𝐸⃗⃗3 … … 𝐸⃗⃗𝑛 है, तो उस बिं दु पर 𝑛
1 𝑞𝑖
कु ि िैद्युत क्षेत्र 𝐸⃗⃗ = ∑ 2 𝑟̂𝑖𝑝
4𝜋𝜀० 𝑟𝑖𝑃̇
𝐸⃗⃗ = 𝐸⃗⃗1 + 𝐸⃗⃗ + 𝐸⃗⃗3 +………+𝐸⃗⃗𝑛 𝑖̇=1

❖ र्णना
माना बक मूि बिं दु 𝑂 के सापेक्ष 𝑞1 , 𝑞2 , 𝑞3 ……..𝑞𝑛
बिं दु आिेश है लजसका स्थिबत

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िैद्युत क्षेत्र रेखा या िैद्युत िि रेखा ❖ उदासीन बिं दु (Neutral Point):- बिद्युत क्षेत्र का िह
(Electric Field lines or force line) बिं दु जहााँ बिलभन्न आिेशों के कारण उत्पन्न सभी बिद्युत
बिद्युत क्षेत्र में रखे र्ए एकांक धनािेश (unit positive क्षेत्रों का पररणामी प्रभाि शून्य हो जाता है, उसे उदासीन
charge) लजस पर् पर चिता है, उस पर् को िैद्युत क्षेत्र बिंदु कहते हैं।
रेखा कहते हैं। उदाहरण:-दो समान पररमाण के बिपरीत आिेशों (+𝑞
Page ।
या और −𝑞) के िीच में कहीं एक बिं दु ऐसा हो सकता है जहााँ 17
बिद्युत क्षेत्र में लखं चा र्या िह काल्पबनक सरि या बनष्कोण दोनों के Electric Field एक-
िक्र रेखा, लजसपर पृर्कृ त एकांक धनािेश र्बत करता है, उसे
दूसरे को काटते हैं ,िही उदासीन
बिद्युत क्षेत्र कहते है।
बिं दु कहिाता है।
बिद्युत क्षेत्र के लचत्रीय बनरूपण बिद्युत क्षेत्र रेखा या िि
रेखा है। यबद 𝑞1 = 𝑞2 और दोनों समान प्रकृ बत के हों, तो उनके िीच
िैद्युत क्षेत्र रेखाओं के र्ुण की रेखा पर, ठीक मध्य बिं दु पर, पररणामी बिद्युत क्षेत्र शून्य
(Properties of Electric Field Lines) होता है, लजसे उदासीन बिं दु कहते हैं।
1. एकि धनािेश से बनकिने िािी िैद्युत क्षेत्र रेखाएं अनं त  दो समान बिं दु आिेशों के बनकाय के कारण बिद्युत क्षेत्र
की ओर जाती हैं और िहीं समाप्त होती की िि रेखाएाँ
हैं, जिबक एकि ऋणािेश की (i) यबद दोनों बिं दु आिेश धनात्मक हो
ओर िैद्युत क्षेत्र रेखाएं अनं त से
आती हैं और ऋणािेश पर समाप्त
होती हैं।
2. बिद्युत िि रेखा धनािेश से प्रारंभ होकर ऋणािेश पर (ii) यबद दोनों बिं दु आिेश ऋणात्मक हो-
समाप्त हो जाती है।

3. बिद्युत िि रेखा के बकसी भी बिं दु पर लखची र्ई स्पशथ रेखा ❖ िैद्युत बद्वध्रुि (Electric di pole):- िह बनकाय है,
उस बिं दु पर बिद्युत क्षेत्र की बदशा िताती है। लजसमें समान पररमाण तर्ा बिपरीत प्रकृ बत के दो बिं दु
आिेश िहुत कम दूरी −q +q
(2𝑙) पर स्थित होते हैं।
− − − − 2𝑙 − − − −
उदाहरण:-
𝑁𝑎𝑐𝑙, 𝑁𝐻3 , 𝐻2 𝑂तर्ा 𝐻𝐶𝑙 आबद।
4.दो बिद्युत िि रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं, ❖ महत्वपूणथ बिन्दु
क्ोंबक यबद िे काटें र्ी तो उस बिं दु पर बिद्युत क्षेत्र की दो 1. दोनों आिेशों को बमिाने िािी रेखा को बद्वध्रुि की अक्ष
बदशाएं होंर्ी, जो बक असं भि है। (dipole axis) कहते है।
2. िैद्युत बद्वध्रुि के मध्य बिं दु से िं िित र्ुजरने िािी रेखा को
बनरक्ष रेखा कहते है।
3. दोनों आिेशों के िीच की दुरी 2𝑙 को बद्वध्रुि की िम्बाई
कहिाती है।
5. बिद्युत िि रेखाएाँ िं द िक्र का बनमाथण नही करती है क्ोबक 4. िैद्युत बद्वध्रुि का कु ि आिेश शून्य होता है, िेबकन इसका
यबद कोई रेखा िं द िक्र िनाती है, तो इसका मतिि होर्ा बक िैद्युत क्षेत्र शून्य नही होता है।
िह खुद पर िापस िौट रही है , यानी िह बफर से बकसी उसी 5. प्रत्येक िैद्युत बद्वध्रुि में बद्वध्रुि आघूणथ होता है।
बिं दु से शुरू और समाप्त हो रही है। ऐसा Electric Field में
सं भि नहीं है

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1. अक्षीय या अनुदैध्र्य स्थिबत में िैद्युत बद्वध्रुि के कारण िैद्युत
िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ (Electric dipole moment) क्षेत्र की तीव्रता (Electric field Intensity due to
िैद्युत बद्वध्रुि के बकसी एक आिेश का पररमाण तर्ा दोनों Electric dipole in Axial or End – on

आिेशों के िीच की दुरी के र्ुणनफि को िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ Position)


माना बक बनिाथत में 𝐴𝐵 कोई िैद्युत बद्वध्रुि है, लजसके कें द्र 𝑂
कहते है। Page ।
से 𝑟 दुरी पर
➢ इसे p (स्मॉि) से सूलचत बकया जाता है। 18
कोई बिं दु 𝑃
𝑝 = 𝑞 × 2𝑙 या 𝑝 = 𝑞2𝑎
है लजसपर
➢ िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ एक सबदश रालश है,लजसकी बदशा
िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करना है।
अक्ष के अनुबदश ऋण आिेश से धन आिेश की ओर होती
बद्वध्रुि के −𝑞 आिेश तर्ा +𝑞 आिेश के िीच की दुरी 2𝑙
है।
है।
➢ िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ (Electric Dipole Moment)
माना बद्वध्रुि के आिेश +𝑞 तर्ा −𝑞 के कारण बिं दु P पर
का S.I. मात्रक कु िम्ब-मीटर (Coulomb-meter) िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता क्रमशः 𝐸⃗⃗1 तर्ा 𝐸⃗⃗2 है।
➢ होता है,लजसे सं के त में 𝐶 · 𝑚 लिखा जाता है । +𝑞 आिेश के कारण बिं दु P पर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
1 𝑞
➢ िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ (Electric Dipole Moment) 𝐸1 = 4𝜋𝜀 2 (B से P की ओर)
० (𝑟−𝑙)
का 𝑪. 𝑮. 𝑺. मात्रक:- 𝑠𝑡𝑎𝑡𝑐𝑜𝑢𝑙𝑜𝑚𝑏 × 𝑐𝑚 लजसे हम −𝑞 आिेश के कारण बिं दु 𝑃 पर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
1 𝑞
आमतौर पर 𝑒𝑠𝑢. 𝑐𝑚 लिखते हैं 𝐸2 = 4𝜋𝜀 (𝑟+𝑙) 2
(P से A की ओर)

➢ िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ का बिमीय सूत्र [𝐿 𝑇 𝐴] या बिं दु P पर पररणामी तीव्रता 𝐸⃗⃗1 तर्ा 𝐸⃗⃗2 के सबदश योर् के
[𝑀० 𝐿𝑇𝐴] होता है। िरािर होर्ी।
➢ िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ का एक अन्य मात्रक बडिाई ∵ 𝐸 2 = 𝐸12 + 𝐸2 + 2𝐸1 𝐸2 cos 𝜃 180०
𝐸 2 = 𝐸12 + 𝐸22 − 2𝐸1 𝐸2
(Debye) है, लजसका उपयोर् बिशेष रूप से रसायन
𝐸 2 = (𝐸1 − 𝐸2 )2
बिज्ञान (Chemistry) में अणुओ ं के बद्वध्रुि आघूणथ को 𝐸 = 𝐸1 − 𝐸2
मापने के लिए बकया जाता है। चूाँ बक 𝐸⃗⃗1 तर्ा 𝐸⃗⃗2 परस्पर बिपरीत बदशा में है, अतः
SI और बडिाई के िीच का सं िं ध पररणामी तीव्रता का मान 𝐸1 तर्ा 𝐸2 के अन्तर के िरािर
1 बडिाई (D)≈3.3 × 10 −30
𝐶. 𝑚 होर्ा- चूाँ बक 𝐸1 > 𝐸2
या अतः 𝐸 = 𝐸1 − 𝐸2
1 1 𝑞 1 𝑞
1 बडिाई = 3 × 10−29 𝐶. 𝑚 𝐸= −
4𝜋𝜀० (𝑟 − 𝑙) 2 4𝜋𝜀० (𝑟 + 𝑙)2
1 कू िॉम मीटर ≈3 × 1029 बडिाई 1 1 1
Note :- रसायन बिज्ञानं में बद्वध्रुि आघूणथ की बदशा 𝐸=
4𝜋𝜀०
𝑞(
(𝑟 − 𝑙) 2

(𝑟 + 𝑙)2
)
धनािेश से ऋणािेश की ओर िी जाती है। 1 (𝑟 + 𝑙)2 − (𝑟 − 𝑙)2
𝐸= 𝑞( )
िैद्युत बद्वध्रुि के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता 4𝜋𝜀० (𝑟 − 𝑙)2 (𝑟 + 𝑙)2
1 𝑟 2 + 𝑙 2 + 2𝑟𝑙 − (𝑟 2 + 𝑙 2 − 2𝑟𝑙)
(Electric Field Intensity Due To Electric Dipole) 𝐸= 𝑞 ( )
4𝜋𝜀० (𝑟 − 𝑙)2 (𝑟 + 𝑙)2
िैद्युत बद्वध्रुि के कारण दो स्थिबतयों में िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
1 𝑟 2 + 𝑙 2 + 2𝑟𝑙 − 𝑟 2 − 𝑙 2 + 2𝑟𝑙
ज्ञात बकया जा सकता है। 𝐸=
4𝜋𝜀०
𝑞(
(𝑟 − 𝑙)2 (𝑟 + 𝑙)2
)
1. अक्षीय या अनुदैध्यथ स्थिबत (Axial / End-on / tan 1 4𝑟𝑙
𝐸= 𝑞 ( 2 )
A स्थिबत) 4𝜋𝜀० (𝑟 − 𝑙 2 )2
1 𝑞 ⋅ 2𝑙 ⋅ 2𝑟
2. 2. बनरक्षीय या अनुप्रि स्थिबत (Equatorial / Broad 𝐸=
4𝜋𝜀० (𝑟 2 )2 − (𝑙 2 )2
side-on / tan β स्थिबत) 1 𝑃2𝑟
𝐸=
4𝜋𝜀० 𝑟 − 𝑙 4
4

िेबकन बद्वध्रुि अत्यं त छोटा हो तो 𝑟 ≫ 𝑙 ∴𝑙≈𝑜

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𝐸=
1 2𝑃𝑟 लजसपर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करना है। बिं दु 𝑃 की
4𝜋𝜀० 𝑟 4 आिेश +𝑞 तर्ा − 𝑞 से दुरी क्रमशः BP तर्ा AP है
1 2𝑃
𝐸अक्षीय = ∴ 𝐴𝑃 = 𝐵𝑃 = √𝑟 2 + 𝑙 2
4𝜋𝜀० 𝑟 3
𝑘 2𝑃 माना बद्वध्रुि के आिेश +𝑞 तर्ा −𝑞 के कारण बिं दु P पर
या 𝐸 = 3
𝑟 िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता क्रमशः 𝐸⃗⃗1 तर्ा 𝐸⃗⃗2 है।
यबद बद्वध्रुि कोई परािैद्युतांक 𝐾 माध्यम में हो तो Page ।
बिं दु 𝑃 पर +𝑞 आिेश के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का
1 2𝑃 19
1 𝑞
𝐸अक्षीय = पररमाण , 𝐸1 = 4𝜋𝜀 2
4𝜋𝜀० 𝐾 𝑟 3 ० (√𝑟 2 +𝑙2 )
सबदश रूप में 1 𝑞
𝐸1 = (𝐵 से 𝑃 की ओर)
1 2 𝑃⃗⃗ 4𝜋𝜀० 𝑟 + 𝑙 2
2
𝐸⃗⃗ = इसी प्रकार
4𝜋𝜀० 𝑟 3
𝐸 की बदशा 𝐸⃗⃗1 के समान तर्ा ऋणािेश से धनािेश की ओर बिं दु 𝑃 पर −𝑞 आिेश के कारण िैद्युत क्षेत्र कजी तीव्रता का
1 𝑞
होर्ी। पररमाण, 𝐸2 = 4𝜋𝜀 2
० (√𝑟 2 +𝑙 2 )
अतः छोटे बद्वध्रुि के कारण अक्षीय स्थिबत में बकसी बिं दु 1 𝑞
𝐸2 = (𝑃 से 𝐴 की ओर)
पर िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता बद्वध्रुि आघूणथ 𝑃⃗⃗ की बदशा में होती 4𝜋𝜀० 𝑟 + 𝑙 2
2
1 𝑞
है। यहााँ 𝐸1 = 𝐸2 = 4𝜋𝜀 𝑟 2+𝑙2

बनष्कषथ: बिं दु P पर पररणामी तीव्रता
अतः , छोटे बद्वध्रुि के कारण उत्पन्न िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का अध्यारोपण के लसद्ांत से, 𝐸⃗⃗1 तर्ा 𝐸⃗⃗2 के सबदश योर् के
पररमाण, बद्वध्रुि से बिं दु की दूरी के घन (cube) के िरािर होर्ी।
व्युत्क्रमानुपाती होता है। 𝐸⃗⃗1 तर्ा 𝐸⃗⃗2 के िम्बित घटक 𝐸1 sin 𝜃 तर्ा 𝐸2 sin 𝜃
1 पररमाण में िरािर तर्ा बदशा में बिपरीत है जो एक दुसरे को
𝐸∝
𝑟3 बनरस्त कर देर्ा।
Note:- यबद बिं दु P, बद्वध्रुि की अक्ष (Axial line) पर
बद्वध्रुि 𝐴𝐵 के समांतर घटक 𝐸1 cos 𝜃 तर्ा 𝐸2 cos 𝜃
िेबकन िायीं ओर स्थित है (याबन –q के पास की ओर), ति
एक ही बदशा में होने के कारण आपस में जुड़ जाते है। अतः
भी: िैद्युत क्षेत्र 𝑬
⃗⃗⃗ और बद्वध्रुि आघूणथ 𝑷
⃗⃗⃗ की बदशा समान
बिं दु 𝑃 पर पररणामी तीव्रता का पररमाण,
होर्ी।
𝐸 = 𝐸1 cos 𝜃 + 𝐸2 cos 𝜃
ऐसा क्ों?
𝐸 = 𝐸1 cos 𝜃 + 𝐸1 cos 𝜃 ( ∵ 𝐸1 = 𝐸2 )
बद्वध्रुि आघूणथ 𝑃⃗⃗ की बदशा – 𝒒 से +𝒒 की ओर होती है — 𝐸 = 2𝐸1 cos 𝜃
यानी िाईं से दाईं ओर 1 𝑞
𝐸=2 ⋅ cos 𝜃
यबद बनरीक्षण बिं दु P, इस रेखा पर िाईं ओर िहुत दूर है, तो 4𝜋𝜀० (𝑟 2 + 𝑙 2 )
1 𝑞 𝑙
िहााँ भी बद्वध्रुि के दोनों आिेशों के कारण उत्पन्न कु ि िैद्युत 𝐸 = 2⋅ 2 2
4𝜋𝜀० (𝑟 + 𝑙 ) √𝑟 2 + 𝑙 2
क्षेत्र 𝐸⃗⃗ की बदशा दाईं ओर ही होर्ी। 𝑂𝐵 𝑙
cos 𝜃 = =
क्ोंबक बद्वध्रुि एक छोटा स्रोत है, और जि हम िहुत दूर 𝑃𝐵 √𝑟 2 + 𝑙 2
बिं दु पर िैद्युत क्षेत्र देखते हैं, तो िह पूरी तरह से 𝑃⃗⃗ की बदशा 1 𝑞 𝑙
𝐸 = 2⋅ 2 2
⋅ 1
4𝜋𝜀० (𝑟 + 𝑙 ) (𝑟 2
में ही सं रेलखत होता है। + 𝑙 2 )2
1 𝑞 ⋅ 2𝑙
2. बनरक्षीय अर्िा अनुप्रि अर्िा 𝐭𝐚𝐧 𝜷 में स्थिबत में िैद्युत 𝐸=
4𝜋𝜀० 2 3
बद्वध्रुि के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता (𝑟 + 𝑙 2 )2
1 𝑃
माना बक 𝐴𝐵 को िैद्युत बद्वध्रुि है जो बनिाथत में स्थित है बद्वध्रुि 𝐸= 3 … … … . . (𝑖)
4𝜋𝜀० 2
के 𝑞 तर्ा −𝑞 के िीच की (𝑟 + 𝑙 2 )2
दुरी 2𝑙 है। यबद बद्वध्रुि अत्यन्त छोटा है तो,
𝑟 ≫> 𝑙
बद्वध्रुि की बनरक्षीय या िम्ब
अतः 𝑟 2 की तुिना में 𝑙 2 नर्ण्य होर्ा।
अधथक स्थिबत पर एक बिं दु 𝑃 है
∴ 𝑙≈0

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समी० (𝑖) को माना एक िैद्युत बद्वध्रुि 𝐴𝐵 एकसमान िैद्युत क्षेत्र में इस प्रकार

𝐸=
1 𝑃 रखा है बक इसका
4𝜋𝜀० (𝑟 )3/2
2
बद्वध्रुि आघूणथ 𝑃⃗⃗
1 𝑃
𝐸=
4𝜋𝜀० 𝑟 3 िैद्युत क्षेत्र 𝐸⃗⃗ की
1 𝑃 बदशा से 𝜃
𝐸बनरक्षीय = Page ।
4𝜋𝜀० 𝑟 3 कोण िनाता 20
यबद बद्वध्रुि परािैद्युतांक 𝐾 िािे माध्यम में तो, है।
1 𝑃
𝐸बनरक्षीय = िैद्युत क्षेत्र के कारण +𝑞 आिेश पर िर्ने िािा िि,
4𝜋𝜀० 𝐾 𝑟 3
बिषुितीय (Equatorial) या बनरक्षीय स्थिबत में, िैद्युत क्षेत्र 𝐹⃗1 = 𝑞𝐸⃗⃗ (िैद्युत क्षेत्र की बदशा में)
⃗⃗⃗ के प्रबत समान्तर बदशा
की तीव्रता, िैद्युत बद्वध्रुि आघूणथ 𝑷 तर्ा िैद्युत क्षेत्र के कारण −𝑞 आिेश पर िर्ने िािा िि,

(anti-parallel) में होती है। 𝐹⃗2 = −𝑞𝐸⃗⃗ (िैद्युत क्षेत्र के बिपरीत बदशा में)

सबदश रूप में िैद्युत क्षेत्र (Equatorial Position में) इन दोनों िािों का पररमाण
𝐹1 = 𝐹2 = 𝑞𝐸
1 −𝑃⃗⃗
𝐸⃗⃗ = बद्वध्रुि पर कायथरत नेट िि
4𝜋𝜀० 𝑟 3
चूाँ बक, 𝐹⃗ = 𝐹⃗1 + 𝐹⃗2
1 𝐹⃗ = 𝑞𝐸⃗⃗ − 𝑞𝐸⃗⃗ = 0
𝐸∝ 3 बनष्कषथ:- एकसमान िैद्युत क्षेत्र में रखे िैद्युत बद्वध्रुि पर
𝑟
बनष्कषथ: कायथरत कु ि िि (Net Force) सदै ि शून्य होता है। अतः
अतः , छोटे बद्वध्रुि के कारण उत्पन्न िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का बद्वध्रुि सदैि िानांतरीय सं तुिन में होता है , िेबकन उस पर
पररमाण, बद्वध्रुि से बिं दु की दूरी के घन (cube) के आघूणथ (Torque) कायथ करता है जो उसे घुमाने का प्रयास
व्युत्क्रमानुपाती होता है।" करता है।
Special Point: िैद्युत बद्वध्रुि के कारण उत्पन्न िैद्युत Note:- जि िैद्युत बद्वध्रुि को एक असमान िैद्युत क्षेत्र में रखा
क्षेत्र की तुिना (Axial vs Equatorial) जाता है, तो उस पर कायथरत कु ि िि शून्य भी हो सकता है
िैद्युत बद्वध्रुि के कारण अक्ष पर स्थित बिं दु के लिए िैद्युत क्षेत्र या अशून्य भी — यह क्षेत्र में बिलभन्न बिं दओ
ु ं पर िैद्युत क्षेत्र
की तीव्रता, 𝐸अक्षीय = 4𝜋𝜀
1 2𝑃
(𝑖) की तीव्रता पर बनभथर करता है।
० 𝑟3
िैद्युत बद्वध्रुि के कारण बनरक्ष पर स्थित बिं दु के लिए िैद्युत क्षेत्र एकसमान िाह्य िैद्युत क्षेत्र में िैद्युत बद्वध्रुि पर आघूणथ
की तीव्रता, 𝐸बनरक्ष = 4𝜋𝜀
1 𝑃
… … . . (𝑖𝑖) (Torque on Dipole in Uniform Electric Field)
० 𝑟3
हम जानते हैं बक एकसमान िैद्युत क्षेत्र में रखे बद्वध्रुि पर
समी० (𝑖) तर्ा (𝑖𝑖) से स्पष्ट है बक,
𝐸अक्षीय = 2 𝐸बनरक्षीय कायथरत िि 𝐹⃗1 तर्ा 𝐹⃗2
𝐸अक्षीय पररमाण में िरािर बदशा में
या, =2
𝐸बनरक्षीय
बिपरीत है। चूं बक इनकी
𝐸बनरक्षीय 2
या, = =2∶1 बक्रया रेखा लभन्न है,
𝐸अक्षीय 1

Note: बिं दु आिेश के कारन िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता 𝑬 ∝ 𝒓𝟐


𝟏 अतः ये दोनों िि
बमिकर िियुग्म
होता है, जिबक िैद्युत बद्वध्रुि के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
𝟏 िनाते हैं जो बद्वध्रुि िैद्युत 𝐸⃗⃗ की बदशा में घुमाने का प्रयास
𝑬 ∝ 𝒓𝟑 होता है।
करता है इसे प्रत्यानयन िि युग्म आघूणथ कहते हैं।
लजसे 𝜏 से सूलचत बकया जाता है।
एकसमान िाह्य िैद्युत क्षेत्र में िैद्युत बद्वध्रुि पर िि
िि आघूणथ (𝜏) = एक िि का पररमाण × दोनों ििों की
(Force on electric dipole in a uniform
बक्रया रेखा के िीच िम्बित दूरी
external electric field)
इसलिए, 𝜏 = 𝑞𝐸 × दूरी (𝐵𝑁)
𝜏 = 𝑞𝐸 × 2𝑙 sin 𝜃
𝜏 = 𝑞 × 2𝑙 𝐸 sin 𝜃

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𝜏 = 𝑃𝐸 sin 𝜃 इसमें आिेश बिबिक्त (discrete) नहीं होते, िस्थल्क
सबदश रूप में, 𝜏⃗ = 𝑃⃗⃗ × 𝐸⃗⃗ बनरंतर रूप से फैिे होते हैं। अर्ाथत्, आिेश बकसी एक बिं दु पर
Special Cases for Torque on Dipole नहीं िस्थल्क पूरे क्षेत्र में फैिा होता है।
(i) यबद 𝜃 = 90° उदाहरण:
अर्ाथत् जि बद्वध्रुि िैद्युत क्षेत्र के िम्बित हो। • बकसी धातु की पतिी तार पर आिेश एकसमान रूप से
𝜏 = 𝑃𝐸 sin 𝜃 Page ।
फै िा हो ⇒ रेखीय आिेश बितरण
𝜏 = 𝑃𝐸 (अलधकतम) 21
• बकसी र्ोि प्लेट पर आिेश फैिा हो ⇒ पृष्ठीय आिेश
अतः जि िैद्युत बद्वध्रुि िैद्युत क्षेत्र के िम्बित हो तो िि
बितरण
आघूणथ अलधकतम होर्ा।
• बकसी ठोस र्ोिे में आिेश फै िा हो ⇒ आयतन आिेश
उपयुक्तथ समीकरण से,
𝜏𝑚𝑎𝑥 बितरण
𝑃=
𝐸 सं तत आिेश बितरण में िैद्युत क्षेत्र:-सं तत आिेश बितरण के
यबद 𝐸 = 1 𝑁𝐶 −1 हो तो कारण उत्पन्न िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए
𝑃 = 𝜏𝑚𝑎𝑥
आिेश घनत्व (Charge Density) का प्रयोर् बकया जाता
बनष्कषथ:- अतः अर्र बकसी बद्वध्रुि को 1 𝑁𝐶 −1 के िैद्युत
है।
क्षेत्र में िं िित रखा जाए, तो उस पर जो अलधकतम आघूणथ
 आिेश घनत्व तीन प्रकार का हो सकता है:
िर्ता है, िही उसके बद्वध्रुि आघूणथ के िरािर होता है।
1. रेखीय आिेश बितरण (एकबिमीय)
(ii) यबद 𝜃 = 0°
(Linear Charge Distribution) (One
अर्ाथत् जि बद्वध्रुि िैद्युत क्षेत्र के समान्तर हो।
Dimensional)
𝜏 = 𝑃𝐸 sin 𝜃 से
𝜏 = 𝑃𝐸 sin 0° 2. पृष्ठीय आिेश बितरण (बद्वबिमीय) (Surface Charge
𝜏=0 distribution) (Two-Dimensional)
इस स्थिबत में आघूणथ शून्य होता है। 3. आयतन आिेश बितरण (बत्रबिमीय)(Volume Charge
यह बद्वध्रुि की िायी साम्याििा (Stable distribution) (Three-Dimensional)
Equilibrium) होती है, क्ोंबक यबद इसे र्ोड़ा भी घुमाया 1. रेखीय आिेश बितरण (एकबिमीय):-जि आिेश बकसी रेखा
जाए, तो उस पर िर्ने िािा आघूणथ उसे बफर से इसी स्थिबत (सरि या िक्र रेखा) पर एकसमान रूप से फैिा होता है, तो
में िापस िाने की कोलशश करेर्ा। इसे रेखीय आिेश बितरण कहते हैं।
(iii) 𝜃 = 180° उदाहरण:- जि आप प्लालिक की कं घी को िािों में रर्ड़ते
अर्ाथत् जि बद्वध्रुि िैद्युत क्षेत्र के प्रबतसमानांतर (बिपरीत बदशा) हैं, तो उसमें आिेश आ जाता है। यह आिेश कं घी की िं िाई
में होता है। में फैिा होता है – यह रे खीय आिेश बितरण का उदाहरण है।
𝜏 = 𝑃𝐸 sin 𝜃 ❖ रेखीय आिेश घनत्व (Linear Charge Density)
𝜏 = 𝑃𝐸 sin 180°
𝜏=0 जि कोई आिेश (𝑞) बकसी िम्बाई (𝑙) पर एकसमान
इस स्थिबत में भी आघूणथ शून्य होता है। रूप से बितररत होता है, तो प्रबतएकांक िम्बाई पर
िेबकन यह एक अिायी साम्याििा (Unstable उपस्थित आिेश को रैलखक आिेश घनत्व कहते हैं।
Equilibrium) होती है, क्ोंबक यबद इसे र्ोड़ा भी घुमाया ➢ रैलखक या रेखीय आिेश घनत्व को ग्रीक अक्षर
जाए, तो बद्वध्रुि पिटकर 𝜃 = 0∘ यानी िायी साम्याििा िैम्डा (𝜆) से सूलचत बकया जाता है।
में चिा जाएर्ा। आिेश
रैलखक आिेश घनत्व =
िम्बाई
सं तत आिेश बितरण 𝑞 ∆𝑄
𝜆= या 𝜆 =
(Continuous Charge Distribution) 𝑙
रे खीय आिेश घनत्व (𝝀)का 𝑺𝑰 मात्रक
∆𝑙

जि बकसी आिेलशत बपंड में आिेश के िि कु छ बिं दओ


ु ं पर :-कू िॉम/मीटर (𝐶. 𝑚)
के लन्द्रत न होकर, िस्थल्क उसकी सतह या आयतन में समान रैलखक आिेश घनत्व (𝜆)का बिमीय सूत्र
रूप से फैिा हुआ होता है, तो ऐसे बितरण को सं तत आिेश :- [𝑀० 𝐿−1 𝐴𝑇]
बितरण कहा जाता है।

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उदहारण: यबद बकसी िृताकार तार पर, लजसकी बत्रज्या 𝑅 है, एक आिेलशत ठोस र्ोिे (solid sphere) में आिेश पूरे
𝑞 आिेश एकसमान रूप से बिपरीत है तो इस पर रेखीय आयतन में फैिा हो,प्लालिक या रिर की चाजथ की र्ई ठोस
आिेश घनत्व र्ेंद एिं िादि (Cloud) में आयतन के रूप में फैिा बिद्युत
𝑞 𝑞 𝑞 आिेश…..इत्याबद।
𝜆= = =
𝑙 िृताकार तार की पररलध 2𝜋𝑅
𝑞 ❖ आयतन आिेश घनत्व(Volume charge density)
Page ।
𝜆= जि कोई कु ि आिेश 𝑞 बकसी िस्तु के पूरे आयतन
2𝜋𝑅 22
2. पृष्ठीय आिेश बितरण:- जि कोई आिेश बकसी समति या (Volume) में समान रूप से बितररत
िक्र पृष्ठ (Surface) पर समान रूप से फैिा होता है, तो उसे होता है, तो प्रत्येक इकाई आयतन
पृष्ठीय आिेश बितरण कहा जाता है। में उपस्थित आिेश को आयतन
उदाहरण:-चाजथ की र्ई कार्ज की चादर या धातु की प्लेट, आिेश घनत्व कहते हैं।
र्ुब्बारे की सतह पर फैिा आिेश एिं बकसी र्ोि या समति आयतन आिेश घनत्व 𝜌 (रो) से
धातु की सतह पर फैिा हुआ आिेश.....इत्यादी। सूलचत बकया जाता है।
❖ पृष्ठीय आिेश घनत्व (Surface Charge density) आिेश
आयतन आिेश घनत्व =
जि कोई आिेश 𝑞 बकसी पृष्ठ आयतन
𝑞 ∆𝑄
(surface) के क्षेत्रफि पर 𝜌 = 𝑉 या 𝜎 = ∆𝑉
एकसमान रूप से बितररत होता आयतन आिेश घनत्व (𝜌) का 𝑆. 𝐼 मात्रक
है, तो प्रबत इकाई क्षेत्रफि पर : – कू िॉम/मीटर3 ( 𝐶𝑚−3 )
उपस्थित आिेश को पृष्ठीय आिेश पृष्ठीय आिेश घनत्व (𝜌) का बिमीय सूत्र
घनत्व कहा जाता है। :- [𝑀० 𝐿−3 𝐴𝑇]
➢ पृष्ठीय आिेश घनत्व को लसग्मा (𝜎) से सूलचत बकया जाता
है। सं तत आिेश बितरण के कारण बकसी बिं दु पर आिेश पर स्थिर
आिेश िैद्युत िि तर्ा िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
पृष्ठीय आिेश घनत्व =
पृष्ठ का क्षेत्रफि (Electric Field Intensity due to Electro Static Force
𝑞
𝜎= on a point Charge Continuous distribution )
𝑆
𝑑𝑞 ∆𝑄 1. रे खीय आिेश बितरण के कारण बकसी बिं दु पर स्थिर िैद्युत
या, 𝜎 = 𝑑𝐴 या 𝑑𝑆 या 𝜎 = ∆𝐴 या ∆𝑆
िि तर्ा बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता
पृष्ठीय आिेश घनत्व (𝜎) का 𝑆. 𝐼 मात्रक
माना 𝑙 िं िाई का AB कोई सीधे तार, लजसपर 𝑞 पर आिेश
: – कू िॉम/मीटर2 ( 𝐶𝑚−2 )
𝑑𝑞 = 𝜆𝑑𝑙---------(i)
पृष्ठीय आिेश घनत्व (𝜎) का बिमीय सूत्र
अल्पांश से 𝑟 दुरी पर स्थित बिं दु P
:- [𝑀० 𝐿−2 𝐴𝑇]
पर रखे 𝑞० आिेश पर
उदाहरण:- यबद 𝑞 आिेश बकसी र्ोिीय कोश के पृष्ठ पर
स्थित बिद्युत िि,
समान रूप से बिपरीत हो तर्ा कोश की बत्रज्या 𝑅 हो तो र्ोिे
1 𝑑𝑞 × 𝑞०
पर आिेश का पृष्ठ घनत्व 𝑑 𝐹⃗ = 𝑟̂
𝑞 𝑞 𝑞 4𝜋𝜀० 𝑟 2
𝜎= = = ∴ सम्पूणथ तार के आिेश के कारण 𝑞० पर कु ि िि,
𝐴 र्ोिीय कोश का पृष्ठीय क्षेत्रफि 4𝜋𝑅 2
𝑞 1 𝑑𝑞 × 𝑞𝑜
𝜎= 𝐹⃗ = ∫ 𝑑 𝐹⃗ = ∫ 𝑟̂
4𝜋𝑟 2 4𝜋𝜀० 𝑟 2
3. आयतन आिेश बितरण:- जि कोई आिेश 𝑞 बकसी समी (𝑖) से
बत्रबिमीय िस्तु (Three-dimensional object) के 1 𝜆𝑑𝑙 × 𝑞०
𝐹⃗ = ∫ 𝑟̂
आयतन (Volume) में समान रूप से बितररत होता है, तो 𝑙 4𝜋𝜀० 𝑟2
𝑞𝑜 𝜆
उसे आयतन आिेश बितरण कहते हैं। 𝐹⃗ = ∫ 2 𝑑𝑙 𝑟̂
4𝜋𝜀० 𝑟
उदाहरण: यह रेखीय आिेश आिेश बितरण के कारण स्थिर िैद्युत िि
का व्यं जक है।

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बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता सम्पूणथ आयतन के आिेश के कारण 𝑞𝑜 आिेश पर कायथरत
𝑞𝑜 𝜆𝑑𝑙 िि 𝐹⃗ = ∫ 𝑑 𝐹⃗ = ∫
1 𝜌𝑑𝑉 𝑞𝑜
𝑟̂
𝐹⃗ 4𝜋𝜀 ∫𝑙 2 𝑟̂ 𝑉 2 𝑉 4𝜋𝜀० 𝑟
० 𝑟
𝐸⃗⃗ = = 𝑞𝑜 𝜌
𝑞𝑜 𝑞𝑜 𝐹⃗ = ∫ 2 𝑑𝑉 𝑟̂
1 𝜆𝑑𝑙 4𝜋𝜀० 𝑉 𝑟
𝐸⃗⃗ = ∫ 2 𝑟̂ यह आयतन आिेश बितरण के कारण स्थिर िैद्युत िि है
4𝜋𝜀० 𝑙 𝑟
Page ।
यह रेखीय आिेश बितरण के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का आयतन आिेश बितरण के कारण बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता,
𝑞𝑜 𝜌𝑑𝑉 23
व्यं जक है ∫𝑉 2 𝑟̂
𝐹⃗ 4𝜋𝜀 ० 𝑟
2. पृष्ठीय आिेश बितरण (बद्व-बिमीय) के कारण बकसी बिं दु 𝐸⃗⃗ = =
𝑞𝑜 𝑞𝑜
पर स्थिर िैद्युत िि तर्ा िैद्युत क्षेत्र तीव्रता। 1 𝜌 𝑑𝑉
𝐸⃗⃗ = ∫ 2 𝑟̂
माना 𝑆 एक पृष्ठीय क्षेत्र का कोई पृष्ठ है लजसपर 𝑞 आिेश एक 4𝜋𝜀० 𝑟
समान रूप से बिररत है लजसका यह आयतन आिेश बितरण के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
आिेश घनत्व 𝜎 है। है।
क्षेत्रफि के छोटे अियि 𝑑𝑆 अपर ❖ क्षेत्रफि सबदश (Area Vector)
आिेश 𝑑𝑞 = 𝜎𝑑𝑆 ----(i) (i) पररमाण (Magnitude) → सतह का क्षेत्रफि
अियि से 𝑟 दुरी पर स्थित बिं दु 𝑃 (ii) बदशा (Direction) → सतह के िं िित
पर रखे 𝑞𝑜 पर िर्ने िािा स्थिर िैद्युत िि अर्ाथत् क्षेत्रफि सबदश :- क्षेत्रफि सबदश एक ऐसा सबदश
1 𝑑𝑞×𝑞𝑜 है, लजसका पररमाण सतह के क्षेत्रफि के िरािर तर्ा
𝑑 𝐹⃗ = 2
𝑟̂
4𝜋𝜀० 𝑟
बदशा सतह पर डािा र्या िं ि की बदशा में होता है।
समी (i) से,
1 𝜎𝑑𝑆 𝑞𝑜 यबद बकसी पृष्ठ का क्षेत्रफि अल्पांश 𝑑𝑆 तर्ा पृष्ठ का
𝑑 𝐹⃗ = 𝑟̂ िं िित सबदश 𝑛̂ हो तो
4𝜋𝜀० 𝑟 2
सम्पूणथ पृष्ठ पर आिेश के कारण 𝑞𝑜 पर िर्ने िािा कु ि
1 𝜎𝑑𝑆 𝑞𝑜
िि 𝐹⃗ = ∫ 𝑑 𝐹⃗ = ∫
𝑆 𝑆 4𝜋𝜀०2
𝑟̂
𝑟
𝑞𝑜 𝜎
𝐹⃗ = ∫ 2 𝑑𝑆 𝑟̂
4𝜋𝜀० 𝑟 𝑑 𝑠⃗ = |𝑑 𝑠⃗| 𝑛̂ या 𝑑 𝑠⃗ = 𝑑𝑠 𝑛̂
यह पृष्ठीय आिेश बितरण के कारण स्थिर िैद्युत िि का सम्पूणथ पृष्ठ के लिए
व्यं जक है।
∫ 𝑑 𝑆⃗ = ∫(𝑑𝑆) 𝑛̂
बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता
𝑞𝑜 𝜎𝑑𝑆 𝑆⃗ = ∫(𝑑𝑆) 𝑛̂
𝐹⃗ ∫ 𝑟̂
⃗⃗ 4𝜋𝜀० 𝑆 𝑟2
𝐸= = िैद्युत फ्लक्स (Electric Flux)
𝑞𝑜 𝑞𝑜
⃗⃗ 1
𝐸 = 4𝜋𝜀 ∫𝑆 𝑟 2 𝑟̂
𝜎 𝑑𝑆
बिद्युत फ्लक्स बकसी सतह से र्ुजरने िािे बिद्युत क्षेत्र रेखाओं

यह पृष्ठीय आिेश बितरण के कारण बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता का की कु ि सं ख्या को मापता है।
व्यं जक है। बकसी िैद्युत क्षेत्र में रखे बकसी
3. आयतन आिेश बितरण (बत्रबिमीय) के कारण बकसी बिं दु पृष्ठ से िम्बित र्ुजरने िािी
पर स्थिर िैद्युत िि तर्ा िैद्युत क्षेत्र तीव्रता। िैद्युत क्षेत्र रेखाओं की सं ख्या को
माना 𝑉 आयतन के बकसी पृष्ठ है लजसपर 𝑞 िैद्युत फ्लक्स कहते है।
आिेश एकसमान रूप से बितररत है ➢ िैद्युत फ्लक्स को
लजसका आयतन आिेश घनत्व 𝜌 है 𝜙𝐸 (𝑃ℎ𝑖) से सूलचत बकया जाता है।
𝑑𝑉 आयतन के बकसी बिं दु पर आिेश या
𝑑𝑞 = 𝑃𝑑𝑉 -----------(i) ➢ बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता 𝐸⃗⃗ तर्ा क्षेत्रफि सबदश 𝑑 𝑆⃗ के
𝑑𝑉 अियि पर आिेश के कारण 𝑞𝑜 पर कायथरत िि है। अबदश र्ुणनफि को बिद्युत फ्लक्स कहते है।
1 𝑑𝑞 × 𝑞𝑜 1 𝜌𝑑𝑉 𝑞𝑜
𝑑 𝐹⃗ = 2
𝑟̂ = 2
𝑟̂
4𝜋𝜀० 𝑟 4𝜋𝜀० 𝑟

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➢ यबद बकसी सतह के माध्यम से 𝐸⃗⃗ बिद्युत क्षेत्र और सतह Special Case (बिशेष स्थिबत)
का िघु क्षेत्रफि 𝑑𝑆 हो, तर्ा उनके िीच कोण 𝜃 हो तो (a) यवि 𝐸⃗⃗ पृष्ठ के समाोंिर (Parallel) ह :
छोटे क्षेत्र के लिए बिद्युत फ्लक्स िब 𝜃 = 90∘ चाँ वक cos 90∘ = 0
𝑑 𝜙𝐸 = 𝐸⃗⃗ ⋅ 𝑑 𝑆⃗ = 𝐸𝑑𝑆 cos 𝜃 सत्र, 𝜙𝐸 = 𝐸⃗⃗ ⋅ 𝑆⃗ = 𝐸𝐴cos 𝜃 = 𝐸𝑆cos 90∘ = 0
सम्पूणथ सतह के लिए कु ि बिद्युत फ्लक्स
वनष्कषा:-जब वैद्युि क्षेत्र रेखा सिह के समानाोंिर ह , ि सिह Page ।
𝜙𝐸 = ∫ 𝐸⃗⃗ ⋅ 𝑑 𝑆⃗ या 𝜙 = 𝐸𝑆 cos 𝜃 24
से क ई भी फ्लक्स नहीों गुजरिा। अिः फ्लक्स = 𝟎
❖ महत्वपूणथ बिं दु
(b) यवि 𝐸⃗⃗ पृष्ठ के लों बवि (Perpendicular /
िैद्युत फ्लक्स का 𝑆. 𝐼 मात्रक 𝑁𝑚2 𝐶 −1 होता है
Normal) ह :
𝜙 = 𝐸 का 𝑆. 𝐼 मात्रक × 𝑆 का 𝑆. 𝐼 मात्रक
𝜙 = 𝑁𝑐 −1 × 𝑚2 = 𝑁𝑚2 𝐶 −1 िब 𝜃 = 0∘ चाँ वक cos 0∘ = 1
➢ िैद्युत फ्लक्स अक एक अन्य मात्रक:- 𝑉𝑚 (िोल्ट मीटर) सत्र, 𝜙𝐸 = 𝐸𝑆cos 0∘ = 𝐸𝑆 × 1 = 𝐸𝑆
➢ िैद्युत फ्लक्स का बिमीय सूत्र −[𝑀𝐿3 𝑇 −3 𝐴−1 ] वनष्कषा:-जब वैद्युि क्षेत्र रेखा सिह के लों बवि परी िरह बाहर
𝜙𝐸 = 𝑀𝐿𝑇 −3 𝐴−1 × 𝐿2 = [𝑀𝐿3 𝑇 −3 𝐴−1 ]
वनकलिी है,िब अशधकिम वैद्यि
ु फ्लक्स उत्पन्न ह िा है।
िैद्युत फ्लक्स के प्रकार (Types of Electric Flux)
(i) धनात्मक िैद्युत फ्लक्स (Positive Electric Flux) फ्लक्स = 𝑬𝑺
जि कोई िैद्युत क्षेत्र रेखा (Electric Field Line) बकसी ➢ िैद्युत फ्लक्स बनम्न िातों पर बनभथर करता है –
बकसी पृष्ठ (Surface) से िं िित िाहर बनकिती है , तो उस (𝒊) वैद्युि क्षेत्र की िीव्रिा (𝑬
⃗⃗) पर ∶ − पर𝜙𝐸 ∝ 𝐸

स्थिबत में उस रेखा के कारण उत्पन्न िैद्युत फ्लक्स (Electric यवि वैद्युि क्षेत्र की िीव्रिा अशधक ह गी, ि फ्लक्स भी अशधक
Flux) को धनात्मक (Positive) िैद्युत फ्लक्स कहते है ह गा।
जब वैद्युि क्षेत्र रेखा सिह से बाहर की ओर जािी है (यावन (𝒊𝒊) सिह के क्षेत्रफल (𝑺
⃗⃗) पर:- 𝜙𝐸 ∝ 𝑆
𝜃 < 90∘ , ववशेष रूप से 𝜃 = 0∘ ), यवि सिह का क्षेत्रफल बडा ह गा, ि फ्लक्स भी अशधक ह गा।
िब cos 𝜃 धनात्मक ह िा है, (𝒊𝒊) क ण 𝜽 पर:- (ज 𝐸⃗⃗ और सिह के लों बरूप 𝑆⃗ के बीच ह िा
इसशलए फ्लक्स धनात्मक है): 𝜙𝐸 ∝ cos 𝜃
(Positive) ह िा है।
जैसे-जैसे 𝜃 बढ़िा है, cos 𝜃 घटिा है अिः यवि 𝜃 बढ़े गा ि
धनात्मक िैद्युत फ्लक्स के लिए 𝐸⃗⃗
फ्लक्स घटे गा।
तर्ा 𝑑 𝑠⃗ एक ही बदशा में होता है।
घन कोण (Solid Angles):- जब क ई पृष्ठ (surface)
ति 𝜃 = 0०
𝜙 = 𝐸𝑑𝑠 cos 0० वकसी वबों िु पर एक वत्र-आयामी क ण (3𝐷 angle) बनािा
𝜙 = 𝐸𝑑𝑠 है, ि उस क ण क घन क ण (Solid Angle) कहिे हैं।
(ii) ऋणात्मक िैद्युत फ्लक्स(Negative Electric flux)
• इसे ग्रीक अक्षर 𝜔 (ओमेगा) से िशाािे हैं।
जि िैद्युत क्षेत्र रेखा बकसी पृष्ठ (surface) के अंदर की ओर
• इसका मात्रक है: स्टे रेवियन
िं िित प्रिेश करती है , तो उस स्थिबत में उस रेखा के कारण
(Steradian - 𝑠𝑟)
उत्पन्न िैद्युत फ्लक्स (Electric Flux) को ऋणात्मक
• घन क ण का सत्र:
(Negative) बिद्युत फ्लक्स कहते है।
पृष्ठ का क्षेत्रफल (Area) 𝑑𝑠
जि िैद्युत क्षेत्र रेखा सतह में अंदर की ओर प्रिेश करती है 𝜔= 2 = 2
वत्रज्या 𝑟
(याबन 𝜃 = 180∘ जहााँ :
ति 𝒄𝒐𝒔𝜽 = −𝟏 होता है, इसलिए
• 𝑑𝑠 = उस वक्र पृष्ठ (curved surface) का
फ्लक्स ऋणात्मक (Negative)
क्षेत्रफल ज ग ल वपों ि पर है
होता है।
• 𝑟 = उस वबों िु से उस पृष्ठ िक की वत्रज्या
𝐸⃗⃗ तर्ा 𝑑 𝑆⃗ बिपरीत में होता है 𝜃 =
क्षेत्रफि 𝑑𝑆 द्वारा इससे 𝑟 दुरी पर स्थित बिं दु पर िना घन
180०
𝜙𝐸 = 𝐸𝑑𝑆 cos 180० = 𝜙𝐸 = −𝐸𝑑𝑆 कोण

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𝑑𝑠 𝑞
𝑑𝜔 = 𝑑𝜙 = 𝑑𝜔
𝑟2 4𝜋𝜀०
यबद क्षेत्रफि सबदश 𝑑 𝑆⃗ तर्ा िं िित रेखा सम्पूणथ पृष्ठ से र्ुजरने िािा िैद्युत फ्लक्स
(𝑛̂) के िीच िना कोण 𝜃 हो तो 𝑞
∫ 𝑑𝜙𝐸 = ∫ 𝑑𝜔
𝑑𝑠 cos 𝜃 4𝜋𝜀०
𝑑𝜔 = 𝑞
𝑟2 𝜙𝐸 = ∫ 𝑑𝜔 Page ।
𝑅 बत्रज्या िािे र्ोिे के सम्पूणथ पृष्ठ के कारण िना घन कोण 4𝜋𝜀०
𝑞 25
𝑑𝑠 cos 𝜃 𝜙𝐸 = × 4𝜋
∫ 𝑑𝜔 = ∫ 4𝜋𝜀०
𝑟2 𝑞
𝜙𝐸 = 𝜀 (Proved)

यबद θ = 0 ०

1 र्ाउस के बनयम के महत्वपूणथ बिं दु (Important


∫ 𝑑𝜔 = 2 ∫ 𝑑𝑠 Points of Gauss’s Law):
𝑟
∮ 𝑑𝑠 = सम्पूणथ र्ोिे का पृष्ठीय क्षेत्रफि 1. फ्लक्स और कु ि आिेश के िीच सं िं ध:
4𝜋𝑟 2 र्ाउस का बनयम कहता है बक बकसी िं द सतह से र्ुजरने
∫ 𝑑𝜔 = 2
𝑟
िािा कु ि िैद्युत फ्लक्स, उस सतह के अंदर मौजूद कु ि
∫ 𝑑𝜔 = 4𝜋 रे ब डयन
आिेश पर बनभथर करता है।
𝑞𝑖𝑛
र्ाउस का बनयम (Gauss’s law) 𝜙𝐸 =
𝜀०
Carl Friedrich Gauss ने 1835 में बकसी िं द पृष्ठ 2. पृष्ठ की आकृ बत से स्वतं त्र:
(Closed Surface) के भीतर उपस्थित कु ि आिेश (Net र्ाउस का बनयम पृष्ठ की आकृ बत (shape) पर बनभथर
Charge) और िैद्युत फ्लक्स (Electric Flux) के िीच
नहीं करता।
एक लसद् सं िं ध िाबपत बकया।
यह बनयम बकसी भी िं द आकृ बत के लिए िार्ू होता है,
र्ाउस के बनयम का कर्न (Statement):-बनिाथत या िायु
जैसे:र्ोिाकार (Spherical),घन (Cubical),
में रखे बकसी िन्द पृष्ठ से र्ुजरने िािा िैद्युत फ्लक्स(𝝓𝑬 ) पृष्ठ
के भीतर उपस्थित नेट आिेश (𝒒) का
𝟏
र्ुणा होता है। िेिनाकार (Cylindrical) आबद।
𝜺०
अर्ाथत् 𝜙𝐸 = 𝜀
𝑞 3. के िि बिशेष सबदश क्षेत्रों के लिए मान्य:

या 𝜙𝐸 = ∮ 𝐸⃗⃗ ⋅ 𝑑 𝑆⃗ =
𝑞𝑖𝑛 र्ाउस का बनयम उन िैद्युत क्षेत्रों पर ही िार्ू होता है जो
𝜀०
र्ाउस के बनयम का सत्यापन/उपपबत (Proof of "िर्थ व्युत्क्रम बनयम" (Inverse Square Law) का
1
Gauss law) पािन करते हैं: 𝐸 ∝ 𝑟2
माना बक एक र्ाउसीय पृष्ठ 𝑆 में बिं दु 𝑂 पर +𝑞 आिेश जैसे बक बिं दु आिेश (Point Charge) द्वारा
स्थित है।𝑂 से 𝑟 दुरी पर कोई बिं दु 𝑃 है उत्पन्न िैद्युत क्षेत्र।
जहााँ बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता 4. समबमत आिेश बितरण के लिए उपयोर्ी:
पररमाण ज्ञात करना है। र्ाउस बनयम की सहायता से हम समबमत पररस्थिबतयों में
+𝑞 आिेश के कारण बिद्युत क्षेत्र
िैद्युत क्षेत्र की र्णना कर सकते हैं, जैसे:
की तीव्रता
1 𝑞 • अनं त िं िी आिेलशत छड़ (Infinite Line
𝐸 = 4𝜋𝜀 2
(𝑂 से 𝑃 की ओर)
०𝑟
Charge)
यबद 𝐸⃗⃗ तर्ा 𝑑𝑆⃗ के िीच कोण 𝜃 हो तो 𝑑𝑆 से र्ुजरने िािा
• र्ोिाकार आिेलशत र्ोिा (Charged Sphere)
िैद्युत फ्लक्स
𝑑 𝜙𝐸 = 𝐸⃗⃗ ⋅ 𝑑𝑆⃗ = 𝐸𝑑𝑠 cos 𝜃 • अनं त आिेलशत समति शीट (Plane Sheet)
𝐸 का मान रखने पर इत्याबद।
1 𝑞
𝑑 𝜙𝐸 = 𝑑𝑆 cos 𝜃 5. कु िम्ब के बनयम का व्युत्पन्न (Derive):
4𝜋𝜀० 𝑟 2
𝑞 𝑑𝑆 cos 𝜃
𝑑𝜙 = 4𝜋𝜀 𝑟 2

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र्ाउस के बनयम की मदद से हम कु िम्ब के बनयम जि बकसी सीधे, अनं त िं िाई िािे तार पर समान रूप से
(Coulomb's Law) को भी िड़ी आसानी से व्युत्पन्न आिेश (Charge) फै िा होता है, तो उस तार के चारों ओर
(derive) कर सकते हैं, एक बिद्युत क्षेत्र (Electric Field) उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र
र्ाउस के बनयम से कु िम्ब के बनयम का बनर्मन
की तीव्रता (intensity) उस बिं दु की तार से दूरी पर बनभथर
(Deduction of Coulomb’s law from Gauss’s law)
करती है। Page ।
माना बक बनिाथत में बिं दु 𝑂 पर 𝑞1 आिेश है
26
बिं दु 𝑂 को कें द्र मानते हुए 𝑟 बत्रज्या ➢ अनं त िं िाई के आिेलशत तार का बिद्युत क्षेत्र का उपयोर्
िािा एक र्ाउसीय पृष्ठ खीचते रेििे, फै स्थक्ट्रयों, बिजिी आपूबतथ, रेबडयो/मोिाइि सं चार,
है। और इंसुिेशन बडज़ाइन जैसे कई क्षेत्रों में होता है।
पृष्ठ से बनर्थत कु ि िैद्युत फ्लक्स 2. आिेश की अनं त समति चादर के कारण िैद्युत क्षेत्र
𝜙𝐸 = ∮ 𝐸⃗⃗ ⋅ 𝑑𝑠⃗ की तीव्रता (Electric field Intensity due to
चूाँ बक 𝐸⃗⃗ तर्ा 𝑑𝑠⃗ एक ही बदशा बदशा में infinite Plane sheet of charge)
ति 𝜃 = 0० जि बकसी अचािक सामग्री (जैसे प्लालिक) की समति
∴ 𝜙𝐸 = ∮ 𝐸 𝑑𝑠 cos 0० सतह पर समान रूप से आिेश बितररत बकया जाता है, तो
𝜙𝐸 = 𝐸 ∮ 𝑑𝑠 − − − −(𝑖) इसे समति आिेलशत चादर कहा जाता है।
िेबकन र्ाउस के नीयम से जैसे:-
𝑞1
𝜙𝐸 = 𝜀०
-------------(ii) • प्लालिक स्के ि से कार्ज को आकबषथत करना,
समीकरण (i) तर्ा (ii) से • फोटोकॉपी और िेज़र बप्रं टर में टोनर को आकबषथत
𝑞1 करना।
𝐸 ∮ 𝑑𝑠 =
𝜀०
2
𝑞1 3.एक समान आिेलशत पतिे र्ोिीय खोि के कारण
𝐸 × 4𝜋𝑟 =
𝜀० िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता(Electric field intensity
1 𝑞1
𝐸= … … … … … (𝑖𝑖𝑖) due to a uniformly charged thin
4𝜋𝜀० 𝑟 2
यह बिं दु आिेश कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का सूत्र है। spherical shell)
यबद बिं दु 𝑃 पर एक दूसरा बिं दु आिेश 𝑞2 हो तो बिद्युत यबद एक पतिे र्ोिीय खोि (Spherical Shell) पर
क्षेत्र 𝐸⃗⃗ के कारण 𝑞2 पर िर्ने िािा िि समान रूप से आिेश बितररत हो, तो उस खोि के कारण
𝐹 = 𝑞2 𝐸 उत्पन्न होने िािे बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता को ‘एक समान
1 𝑞1
समी (𝑖𝑖𝑖) से 𝐹 = 𝑞2 × 4𝜋𝜀
० 𝑟2 आिेलशत पतिे र्ोिे खोि के कारण िैद्युत क्षेत्र’ कहते
1 𝑞1 𝑞2
𝐹 = 4𝜋𝜀
० 𝑟2
𝑃𝑟𝑜𝑣𝑒𝑑 हैं।
र्ाउस के बनयम का अनुप्रयोर् ➢ फुिाए र्ए रिर के र्ुब्बारे को अर्र बकसी कपड़े से
(Application of Gauss’s law) रर्ड़ा जाए, तो उसकी सतह पर आिेश जमा हो
➢ र्ाउस के बनयम का अनुप्रयोर् (Applications of
जाता है और िह छोटा कार्ज लचपका िेता है। यह
Gauss's Law) बिद्युत क्षेत्र (Electric Field) की
पतिी र्ोिीय खोि सतह पर समान आिेश बितरण
र्णना के लिए बकया जाता है, बिशेष रूप से जि चाजथ
का उदाहरण है।
(आिेश) का बितरण कु छ बिशेष समरूपता
1.अनं त िं िाई के एकसमान आिेलशत सीधे तार के कारण
(Symmetry) में होता है। जैसे:
1.अनं त िं िाई के एकसमान आिेलशत सीधे तार के कारण बिद्युत क्षेत्र (Electric Field intensity due to a

बिद्युत क्षेत्र (Electric Field intensity due to a uniformly Charged Straight wire of infinite
uniformly Charged Straight wire of infinite length)
length)

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माना बक अनन्त िं िाई के एक पतिे सीधे तार है जो अनं त िम्बाई के एकसमान
एकसमान रूप से आिेलशत है, लजसका रेखीय आिेश घनत्व 𝜆 आिेलशत तार के कारण िैद्युत

है। क्षेत्र की तीव्रता दुरी


व्युत्क्रमानुपाती होती है।
तार से 𝑟 दुरी पर बिं दु 𝑃 है जहााँ
िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी Page ।
2. आिेश की अनं त समति चादर के कारण िैद्युत क्षेत्र
है। 27
आिेलशत तार के चारों ओर 𝑟 बत्रज्या की तीव्रता (Electric field Intensity due to
तर्ा 𝑙 िम्बाई के िेिनाकार infinite Plane sheet of charge)
र्ाउसीय पृष्ठ का बनमाथण करते है। माना की बनिाथत में
बिं दु 𝑃 पर क्षेत्रफि अल्पांश 𝑑𝑆 है। तो 𝑑𝑆 क्षेत्रफि अल्पांश अनं त बिस्तार िािी
से र्ुजरने िािा िैद्युत फ्लक्स र्ाउस के बनयम से आिेलशत समति चादर
𝑞
∮ 𝐸⃗⃗ ⋅ 𝑑𝑠⃗ = है लजसपर +𝑞 आिेश
𝜀०
𝑠
𝑞 एक समान रूप से फै िा
∮ 𝐸𝑑𝑠 cos 𝜃 =
𝜀० है लजसका आिेश घनत्व σ है |
चूाँ बक िेिनाकार र्ाउसीय पृष्ठ तीन भार्ों में बिभक्त है,ति चादर से 𝑟 दुरी पर एक और बिं दु 𝑃 तर्ा दूसरी और बिं दु
सभी भार्ों का कु ि िैद्युत फ्लक्स P′ है | तर्ा चादर के आर-पार िेिनाकार र्ाउसीय पृष्ठ
𝑞
∮ 𝐸𝑑𝑠 cos 𝜃 + ∮ 𝐸𝑑𝑠 cos 𝜃 + ∮ 𝐸𝑑𝑠 cos 𝜃 =
𝜀० है | ति र्ाउसीय पृष्ठ से र्ुजरने िािा िैद्युत फ्लक्स
𝐼 𝐼𝐼 𝐼𝐼𝐼
भार् 𝐼 तर्ा 𝐼𝐼 में 𝑑𝑆⃗, 𝐸⃗⃗ के िं िित है र्ॉस के बनयम से,
भार् 𝐼 तर्ा 𝐼𝐼 के लिए ∮ ⃗E⃗ . 𝑑 ⃗S⃗ =
q
ε0
𝜃 = 90० तर्ा भार् 𝐼𝐼𝐼 में क्षेत्रफि सबदश 𝑑𝑆⃗ तर्ा बिद्युत या ∮ EdScosθ =
q
ε
क्षेत्र की तीव्रता दोनों एक ही बदशा में इसलिए भार् 𝐼𝐼𝐼 के 0
िेबकन िेिनाकार र्उसीय पृष्ठ के तीन भार् है |
लिए 𝜃 = 0०
𝑞 ति सभी भार्ों से बर्जरनेिािा िैद्युत फ्लक्स
∮ 𝐸𝑑𝑠 cos 90० + ∮ 𝐸𝑑𝑠 cos 90० + ∮ 𝐸𝑑𝑠 cos 0० = q
𝐼 𝐼𝐼 𝐼𝐼𝐼 𝜀० ∮I EdScos0° + ∮II EdScos0° ∫III EdScos90° = ε
𝑞 q
0
0 + 0 + ∮ 𝐸𝑑𝑠 = E ∮ dS + E ∮ dS + 0 =
𝜀० ε0
𝑞 q
𝐸 ∮ 𝑑𝑠 = ES + ES =
𝜀० ε0
q
𝑞 2ES =
𝐸 × 2𝜋𝑟𝑙 = ε0
𝜀० q
𝑞 ES =
2ε0
𝐸=
2𝜋𝑟𝑙𝜀० िेबकन q = σS
चूाँ बक 𝑞 = 𝜆𝑙 σ
𝜆𝑙 E=… … … (𝑖)
∴ 𝐸= 2ε0
σ
2𝜋𝑟𝑙𝜀० सबदश रूप में E = 𝑟̂
𝜆 2ε0
𝐸= जहााँ 𝑟̂ ति के िम्बित एिं िाहर की बदशा में एकांक
2𝜋𝑙𝜀० 𝑟
1 𝜆 सबदश है।
𝐸= ( ) 𝑁𝑐 −1
2𝜋𝜀० 𝑟
𝜆 समी० (𝑖) से स्पष्ट है बक
सबदश रूप में ⃗⃗
𝐸 = 2𝜋𝜀 𝑟 𝑟̂
० 𝐸 का मान चादर से बिं दु की दुरी 𝑟 पर बनभथर नहीं करता
जहााँ 𝑟̂ तार के िम्बित ति में एकांक सबदश है।
1 है।अतः चादर के बनकट सभी बिन्दुओ ं पर बिद्युत् क्षेत्र की
∵ 𝐸∝𝑟
तीव्रता समान है।
ग्राफ से स्पष्ट है की

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यबद σ धनात्मक है तो 𝐸⃗⃗ की बदशा चादर से दूर होर्ी ति θ = 0°
q
यानी ति से िबहमुथखी तर्ा यबद σ ऋणात्मक है तो 𝐸⃗⃗ ∮ EdS = ε0
q
की बदशा चादर की ओर यानी अंतमुथखी होर्ी। अर्ाथत ∮ dS = ε
0
समति चादर की बिद्युत क्षेत्र की तीव्रता आिेश घनत्व पर ∮ dS = र्ोिे का पृष्ठीय क्षेत्रफि = 4πr 2
q
बनभथर करती है। E × 4πr 2 = Page ।
ε0
3.एक समान आिेलशत पतिे र्ोिीय खोि के कारण q 28
E=
िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता(Electric field intensity 4πr 2 ε0
due to a uniformly charged thin 1 𝑞
E= … . . (𝑖)
4πε0 𝑟 2
spherical shell)
यह पृष्ठ के िाहर स्थित बिं दु पर बिद्युत् क्षेत्र की तीव्रता का
बकसी चािक बदया र्या अबतररक्त आिेश हमेशा के पृष्ठ
व्यं जक है |
पर रहता है। पृष्ठ के भीतर नहीं।
∵ q = σS
अर्ाथत आिेलशत र्ोिीय चािक के पृष्ठ पर आिेश फैिा 1 4πR2 σ
समी० (𝑖) में E =
हुआ होता है, चाहे र्ोिा ठोस या खोखिा हो। 4πε0 r2
σ R2
➢ एकसमान आिेलशत र्ोलिया खोि अर्िा चािक E=
ε0 r 2
र्ोंिे के कारण िैद्युत क्षेत्र की तीव्रता के तीन स्थिबत यह पृष्ठ के िाहर स्थित बिं दु पर बिद्युत् क्षेत्र की तीव्रता का
सं भि है। व्यं जक है।
𝑖. खोि या कोश के िाहर यबद 𝑞 धनात्मक है तो 𝐸⃗⃗ की बदशा िबहमुथखी तर्ा यबद 𝑞
𝑖𝑖. खोि या कोश के पृष्ठ पर ऋणात्मक है तो ⃗E⃗ की बदशा अंतमुथखी होर्ी।
𝑖𝑖𝑖. खोि या कोश के भीतर (𝑖𝑖) आिेलशत र्ोिीय कोश के पृष्ठ पर बिद्युत क्षेत्र की
𝑖. आिेलशत र्ोिीय कोश के िाहर बिद्युत् क्षेत्र या िाह्य तीव्रता (Electric field Intensity on the
बिं दु पर बिद्युत् क्षेत्र की तीव्रता (r > R) (Electric surface of charged Spherical Shell) (𝑟 =
field In tensity at an Eternal Point of a 𝑅)
charged Spherical shell) यबद बिं दु 𝑃 पृष्ठ पर स्थित हो तो 𝑟 = 𝑅 ति समीo (𝑖)
आिेलशत र्ोिीय कोश के िाहर बिद्युत् क्षेत्र या िाह्य बिं दु से,
पर बिद्युत् क्षेत्र की तीव्रता (Electric field In 𝐸=
1 𝑞
4𝜋𝜀𝑜 𝑅2
tensity at an Eternal Point of a charged सबदश रूप में
Spherical shell) (𝐫 > 𝐑) 𝐸⃗⃗ =
1 𝑞
𝑟̂
2
4𝜋𝜀𝑜 𝑅
माना की 𝑅 बत्रज्या िािा एक र्ोिीय कोश है लजसपर 𝑞
या, (𝑖𝑖) से,
आिेश एकसमान रूप से बिपरीत है लजसके कें द्र 𝑂 से 𝑟 𝜎 𝑅2
𝐸=
दूरी पर बिं दु 𝑃 है जहााँ बिद्युत् क्षेत्र 𝜀𝑜 𝑅 2
𝜎
𝐸=
की तीव्रता ज्ञात करना है | 𝑂 को 𝜀𝑜
𝜎
कें द्र मानते हुए 𝑟 बत्रज्या िािा या, 𝐸⃗⃗ = 𝑟̂ जहााँ 𝑟̂ सबदश 𝑅⃗⃗ की बदशा में
𝜀𝑜
एक र्ाउसीय पृष्ठ खीचते है | एकांक सबदश है।
र्ाउसीय पृष्ठ से र्ुजरने िािा
िैद्युत फ्लक्स
र्ाउस के बनयम से
q
∮ EdScosθ = ε
0
∵ ⃗E⃗ तर्ा d ⃗S⃗ एक ही बदशा में है

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Class – 12th MANJIL BATCH - 2026 Physics
𝑞
(𝑖𝑖𝑖) आिेलशत र्ोिीय कोश के भीतर बिद्युत् क्षेत्र की 𝐸=
4𝜋𝜀𝑜 𝑟 2
=0
तीव्रता (Electric field Intensity inside the ∵𝐸=
0
4𝜋𝜀𝑜 𝑟 2
surface of charged spherical shell)(𝑟 < 𝑅) 𝐸=0
माना बिं दु 𝑃 कोश के भीतर है ति र्ाउसीय अतः एकसमान आिेलशत र्ोिीय कोश अर्िा र्ोिे
पृष्ठ से बनकिने िािा िैद्युत फ्लक्स चािक के भीतर सभी बिन्दुओ ं पर िैद्युत क्षेत्र शून्य होता Page ।
र्ाउस के बनयम से, है। 29
q
∮ EdScosθ = ε
0
2 q
𝐸 × 4𝜋𝑟 =
ε0
िेबकन र्ाउसीय पृष्ठ के भीतर 𝑞 =
𝑜

जो सफर की शुरुआत करते हैं,


िो ही मं लज़िें पाते हैं,
लसफथ इरादों से कु छ नहीं होता,
बहम्मत िािों के कदम ही इबतहास िनाते हैं।
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Krishnanandan sir
#LoveyouDOCian
# DreamRanker (❁´◡`❁)
( ┄┅══❁ ❁════┅ )
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Best Of Luck
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