अगर बचचा अकेला रहना चाहे तो..

बचचो का ििलििलाना और मसती करना ही तो उनके बचपन को बयां करता है ।
वे िेलना चाहते है , अपने हमउमो के साथ भागना चाहते है , लेिकन कया आपने
ऐसे बचचो के बारे मे सुना है जो अकेले रहना चाहते है । वे गुमसुम रहते है और
बचचो मे घुलना-िमलना उनका शगल नहीं होता। इस तरह की समसया को ही
आििजम कहते है ।

सीधे शबदो मे कहे तो आििजम वह मानिसक िसथित है िजसमे वयिि को
सामािजक संपकक बनाने या अनय लोगो से िवचारो का आदान-पदान करने मे कििनाई महसूस होती है । हालांिक ऐसे
बचचे अदत
ु पितभा संपनन होते है । सापेकता के िसदांत की िोज करने वाले महान वैजािनक अलबिक आइं सिीन,
गुरतवाकषण
क के िसदांत के जनक आइजक नयूिन के अलावा फांस के पूवक राषपित चा‌लसक द गाल,

लेिक जाजक

ओरवेल, संगीतकार, बीथोवन, मोजािक , हे स िििियन व दाशिकनक इमैनुएल कांि भी आििजम से पीिित थे।
आििजम के लकण
डाकिरो की राय मे 700 मे से एक बचचा आििजम से पीिित होता है । बचचे के शुरआती 18 महीनो के वयवहार से
ही उसमे आििजम की पहचान हो जाती है । िनमन लकणो से आप बचचे मे आििजम पहचान सकते है ंै :

-बचचे से बात करते समय वह एकिक आपको दे िता रहता है , पलके नहीं झपकाता
-वह दस
ू रे बचचो से दरू रहता है या उनके पास जाने मे शरमाता है
-बचचे को आपके दारा कहे गए कुछ िास शबदो को समझने मे तकलीफ होती है
-उसे बदलाव रास नहीं आते।
-बचचा सुबह की बजाय रात मे ही सोकर उि जाता है
-बचचा कृ ििम वयवहार करता है ।
आििजम के कारण
आििजम का सही कारण अभी भी पता नहीं है । कुछ वैजािनको की राय मे बचचो मे आििजम का कारण अनुवांिशक
गिबिी हो सकती है । हमारे मिसतषक मे करीब 10

िरब तंििका कोिशकाएं होती है िजनहे नयूरान कहा जाता है ।

पतयेक नयूरान के सैकिो अनय तंतु जुिे होते है जो शरीर के िविभनन भागो से सूचना मिसतषक को पहुंचाते है । इसी
से हमे कुछ भी होने का एहसास होता है । कभी-कभी बचचो मे इसी सूचना तंि मे कुछ गिबिी आ जाती है िजससे
उनके आपसी संवाद, भावनाओं और बोध [सेस] पर दषुपभाव पिता है ।
कया है इलाज
सीधे तौर पर आििजम का कोई इलाज नहीं है । डाकिर,

थेरेिपसि और कुछ िास पिशकको की मदद से बचचो को

आििजम मे होने वाली काफी तकलीफो से उबारा जा सकता है । यिद कम उम मे ही िीक से इलाज शुर हो जाए तो
बचचे मे तेजी से सुधार आने लगता है ।

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