भेया नमा फचऩन

फाय-फाय आती है भुझको भधयु माद फचऩन तेयी।

गमा रे गमा तू जीवन की सफसे भस्त खश
ु ी भेयी॥
चचॊता-यहहत खेरना-खाना वह फपयना ननबभम स्वच्छॊ द।
कैसे बूरा जा सकता है फचऩन का अतुलरत आनॊद?
ऊॉच-नीच का ऻान नहीॊ था छुआछूत फकसने जानी?
फनी हुई थी वहाॉ झोंऩड़ी औय चीथड़ों भें यानी॥

फकमे दध
ू के कुल्रे भैंने चस
ू अॉगूठा सुधा पऩमा।

फकरकायी फकल्रोर भचाकय सूना घय आफाद फकमा॥
योना औय भचर जाना बी क्मा आनॊद हदखाते थे।
फड़े-फड़े भोती-से आॉसू जमभारा ऩहनाते थे॥

भैं योई, भाॉ काभ छोड़कय आईं, भुझको उठा लरमा।

झाड़-ऩोंछ कय चभ
ू -चभ
ू कय गीरे गारों को सुखा हदमा॥
दादा ने चॊदा हदखरामा नेत्र नीय-मत
ु दभक उठे ।

धर
ु ी हुई भुस्कान दे ख कय सफके चेहये चभक उठे ॥
वह सख
ु का साम्राज्म छोड़कय भैं भतवारी फड़ी हुई।
रुटी हुई, कुछ ठगी हुई-सी दौड़ द्वाय ऩय खड़ी हुई॥
राजबयी आॉखें थीॊ भेयी भन भें उभॉग यॉगीरी थी।

तान यसीरी थी कानों भें चॊचर छै र छफीरी थी॥
हदर भें एक चब
ु न-सी बी थी मह दनु नमा अरफेरी थी।
भन भें एक ऩहे री थी भैं सफ के फीच अकेरी थी॥

लभरा, खोजती थी जजसको हे फचऩन! ठगा हदमा तूने।
अये ! जवानी के पॊदे भें भुझको पॉसा हदमा तूने॥

सफ गलरमाॉ उसकी बी दे खीॊ उसकी खुलशमाॉ न्मायी हैं।

प्मायी, प्रीतभ की यॉग-यलरमों की स्भनृ तमाॉ बी प्मायी हैं॥
भाना भैंने मव
ु ा-कार का जीवन खूफ ननयारा है।

आकाॊऺा, ऩरु
ु षाथभ, ऻान का उदम भोहनेवारा है॥
फकॊ तु महाॉ झॊझट है बायी मद्ध
ु -ऺेत्र सॊसाय फना।

चचॊता के चक्कय भें ऩड़कय जीवन बी है बाय फना॥
आ जा फचऩन! एक फाय फपय दे दे अऩनी ननभभर शाॊनत।

व्माकुर व्मथा लभटानेवारी वह अऩनी प्राकृत पवश्ाॊनत॥
वह बोरी-सी भधयु सयरता वह प्माया जीवन ननष्ऩाऩ।
क्मा आकय फपय लभटा सकेगा तू भेये भन का सॊताऩ?
भैं फचऩन को फर
ु ा यही थी फोर उठी बफहटमा भेयी।

नॊदन वन-सी पूर उठी मह छोटी-सी कुहटमा भेयी॥
'भाॉ ओ' कहकय फर
ु ा यही थी लभट्टी खाकय आमी थी।

कुछ भॉह
ु भें कुछ लरमे हाथ भें भझ
ु े खखराने रामी थी॥
ऩर
ु क यहे थे अॊग, दृगों भें कौतह
ु र था छरक यहा।

दयू फपयॊ गी को कयने की सफने भन भें ठानी थी। चभक उठी सन सत्तावन भें . फढ ू े बायत भें आई फपय से नमी जवानी थी.र स र ऱ सअ ह य यह ह उस अ सर ह ऱ .'तुमहीॊ खाओ'॥ ऩामा भैंने फचऩन फपय से फचऩन फेटी फन आमा। उसकी भॊजर ु भूनतभ दे खकय भझ ु भें नवजीवन आमा॥ भैं बी उसके साथ खेरती खाती हूॉ.र र Poem 3 झाॉसी की यानी लसॊहासन हहर उठे याजवॊशों ने बक ृ ु टी तानी थी. फद ॊु े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सन ु ी कहानी थी.भॉह ु ऩय थी आह्राद-रालरभा पवजम-गवभ था झरक यहा॥ भैंने ऩछ ू ा 'मह क्मा रामी?' फोर उठी वह 'भाॉ. ऱ ऱ हर ऱ रस ह य और अ स यह र य र रह सर र हर ऱ ह ऱ ह उ र ह र ऱह र. काओ'। हुआ प्रपुजल्रत हृदम खुशी से भैंने कहा . तत ु राती हूॉ। लभरकय उसके साथ स्वमॊ भैं बी फच्ची फन जाती हूॉ॥ जजसे खोजती थी फयसों से अफ जाकय उसको ऩामा। बाग गमा था भझ ु े छोड़कय वह फचऩन फपय से आमा॥ Poem 2 यह ऱ अगर उस र हय य स रह ह ह ह र ह ऱ र . गुभी हुई आज़ादी की कीभत सफने ऩहचानी थी.र ऱ अगर ऱ ह र र ऱ - रअ ऱग र र स ह -अ र. . वह तरवाय ऩयु ानी थी. र ग र ह ह य ह ह र.

नाना के सॉग खेरी थी. भॉह ु फोरी फहन छफीरी थी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. तॊजौय. ऩॊजाफ िह्भ ऩय अबी हुआ था वज्र-ननऩात। . नकरी मद्ध ु -व्मह ू की यचना औय खेरना खफ ू लशकाय. चचत्रा ने अजन ुभ को ऩामा. कटायी उसकी मही सहे री थी। वीय लशवाजी की गाथामें उसकी माद ज़फानी थी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. यानी पवधवा हुई. उदै ऩयु . भुहदत भहरों भें उजजमारी छाई. दग ु भ तोड़ना मे थे उसके पप्रम खखरवाय। भहायाष्टय-कुर-दे वी उसकी बी आयाध्म बवानी थी. याजाओॊ नव्वाफों को बी उसने ऩैयों ठुकयामा। यानी दासी फनी. तीय चराने वारे कय भें उसे चड़ू ड़माॉ कफ बाई. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। नछनी याजधानी हदल्री की. रक्ष्भीफाई नाभ. सैन्म घेयना. दे ख भयाठे ऩर ु फकत होते उसकी तरवायों के वाय. कैद ऩेशवा था बफठुय भें . पऩता की वह सॊतान अकेरी थी. हुआ नागऩयु का बी घात. फकॊ तु कारगनत चऩ ु के-चऩ ु के कारी घटा घेय राई. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. खफ ू रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। हुई वीयता की वैबव के साथ सगाई झाॉसी भें . रखनऊ छीना फातों-फात. फद ॊु े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सन ु ी कहानी थी. फनी मह दासी अफ भहयानी थी. फ़ौयन पौजें बेज दग ु भ ऩय अऩना झॊडा पहयामा. याज्म हड़ऩ कयने का उसने मह अच्छा अवसय ऩामा. ब्माह हुआ यानी फन आई रक्ष्भीफाई झाॉसी भें . कयनाटक की कौन बफसात? जफफक लसॊध. नाना के सॉग ऩढती थी वह. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। फझ ु ा दीऩ झाॉसी का तफ डरहौज़ी भन भें हयषामा. सुबट फद ुॊ े रों की पवरुदावलर सी वह आमी झाॊसी भें . खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। अनन ु म पवनम नहीॊ सुनती है. फयछी ढार. हाम! पवचध को बी नहीॊ दमा आई। ननसॊतान भये याजाजी यानी शोक-सभानी थी. रावारयस का वारयस फनकय बिहटश याज्म झाॉसी आमा। अश्ऩ ु ण ू ाभ यानी ने दे खा झाॉसी हुई बफयानी थी. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। रक्ष्भी थी मा दग ु ाभ थी वह स्वमॊ वीयता की अवताय. अफ तो ऩरट गई कामा. पवकट शासकों की भामा. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. डरहौज़ी ने ऩैय ऩसाये . सताया. याजभहर भें फजी फधाई खुलशमाॉ छाई झाॉसी भें . लशव से लभरी बवानी थी. व्माऩायी फन दमा चाहता था जफ मह बायत आमा. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। उहदत हुआ सौबाग्म. कृऩाण.खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। कानऩयू के नाना की.

खफ ू रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। कुहटमों भें बी पवषभ वेदना. यानी ने तरवाय खीॊच री. चतुय अज़ीभुल्रा सयनाभ. वीय सैननकों के भन भें था अऩने ऩयु खों का अलबभान. ऩय अॊग्रेज़ों की फपय सेना नघय आई थी. सये आभ नीराभ छाऩते थे अॊग्रेज़ों के अखफाय. ताॉनतमा. मभुना तट ऩय अॊग्रेज़ों ने फपय खाई यानी से हाय. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. भहरों भें आहत अऩभान. नाना धध ॊ ऩेशवा जट ुॊ ऩ ू त ु ा यहा था सफ साभान. झोंऩड़ी ने ज्वारा सर ु गाई थी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. जफरऩयू . चरे हभ झाॉसी के भैदानों भें . जहाॉ खड़ी है रक्ष्भीफाई भदभ फनी भदाभनों भें . रेजटटनेंट वाकय आ ऩहुॉचा. फद ॊु े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सन ु ी कहानी थी. ठाकुय कॉु वयलसॊह सैननक अलबयाभ. ुॊ ऩ ू त अहभदशाह भौरवी. उसने भुहॉ की खाई थी. हुमा द्वन्द्ध असभानों भें । ज़ख्भी होकय वाकय बागा. हदल्री चेती. नाना धध ॊ . कोल्हाऩयू भें बी कुछ हरचर उकसानी थी. भद्रास आहद की बी तो वही कहानी थी. पवजमी यानी आगे चर दी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉुह हभने सुनी कहानी थी.फॊगारे. बायत के इनतहास गगन भें अभय यहें गे जजनके नाभ। रेफकन आज जभ ु भ कहराती उनकी जो कुयफानी थी. कय सौ भीर ननयॊ तय ऩाय. कानऩयू . भेयठ. फेगभ ग़भ से थीॊ फेज़ाय. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। भहरों ने दी आग. . घोड़ा थक कय चगया बूलभ ऩय गमा स्वगभ तत्कार लसधाय. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. खफ ू रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। पवजम लभरी. झाॉसी चेती. फकमा ग्वालरमय ऩय अचधकाय। अॊग्रेज़ों के लभत्र लसॊचधमा ने छोड़ी यजधानी थी. फहहन छफीरी ने यण-चण्डी का कय हदमा प्रकट आहवान। हुआ मऻ प्रायमब उन्हें तो सोई ज्मोनत जगानी थी. अफके जनयर जस्भथ समभुख था. मह स्वतॊत्रता की चचनगायी अॊतयतभ से आई थी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। इस स्वतॊत्रता भहामऻ भें कई वीयवय आए काभ. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. उसे अजफ हैयानी थी. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। यानी योमीॊ रयनवासों भें . खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। इनकी गाथा छोड़. ऩटना ने बायी धभ ू भचाई थी. उनके गहने कऩड़े बफकते थे करकत्ते के फाज़ाय. 'नागऩयू के ज़ेवय रे रो रखनऊ के रो नौरख हाय'। मों ऩयदे की इज़्ज़त ऩयदे शी के हाथ बफकानी थी. रखनऊ रऩटें छाई थी. आगे फड़ा जवानों भें . खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। यानी फढी कारऩी आई.

खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। यानी गई लसधाय चचता अफ उसकी हदव्म सवायी थी. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी। Poem 4 र स ह स रह ह ऱय स र हउ ग र र. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। तो बी यानी भाय काट कय चरती फनी सैन्म के ऩाय. होने रगे वाय-ऩय-वाय। घामर होकय चगयी लसॊहनी उसे वीय गनत ऩानी थी. इतने भें आ गमे अवाय. तू खुद अलभट ननशानी थी. अबी उम्र कुर तेइस की थी. लसखा गई हभको जो सीख लसखानी थी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. शत्रु फहुतेये. मद्ध ु श्ेत्र भें उन दोनों ने बायी भाय भचाई थी। ऩय ऩीछे ह्मयू ोज़ आ गमा. होवे चऩ ु इनतहास. हाम! नघयी अफ यानी थी. रगे सच्चाई को चाहे पाॉसी.र स रह ह ग. घोड़ा अड़ा. यानी एक. नमा घोड़ा था. लभरा तेज से तेज. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी.काना औय भॊदया सखखमाॉ यानी के सॊग आई थी. हदखा गई ऩथ. हो भदभाती पवजम.ग - र स ह ऱ सरस ऱ र ह र अ र र स र रह स य रग ऱ ह अ ग अग-अग - स ह स ऱ र रउ रग ह रग और रण ऱ र एह स ह स अ - . मह तेया फलरदान जगावेगा स्वतॊत्रता अपवनासी. फकन्तु साभने नारा आमा. हभको जीपवत कयने आमी फन स्वतॊत्रता-नायी थी. भनज ु नहीॊ अवतायी थी. था वह सॊकट पवषभ अऩाय. फद ॊु े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सन ु ी कहानी थी. लभटा दे गोरों से चाहे झाॉसी। तेया स्भायक तू ही होगी. फद ुॊ े रे हयफोरों के भॉह ु हभने सुनी कहानी थी. खूफ रड़ी भदाभनी वह तो झाॉसी वारी यानी थी।। जाओ यानी माद यखेंगे मे कृतऻ बायतवासी. तेज की वह सच्ची अचधकायी थी.

रस यह र ऱस सस ! ह सग उ ऱग . ओ. अ ऱ. अ स ऱ. स ग . ओस स उ हर . .ऱ स. . र र र हअ .गऱ ह ह य ह ऱ ण ह य ह रस ऱ स य अ यह स र ऱ ऐ ऱ य ह र - स ह ह अ ऺ अ र ग- अ स ह स ऱ रण र ऐ ग सहग ग ह ऱ ऱ र रह अ - ऱ - स ह ह ह ह ए र ग ग य स ह णअ यग य ऱग ह र ण स अ ऱ अ ण ?ह - स ह स Poem 5 Jalliyanwalla Bagh Mein Vasant यह ऱ ऱ ऱय ऱ ह. ऱ रगर . र ऱ-ह रग ह ! यह य र यह ह य र ऱ रग सग सग ऱ ह ह. उ गस ग य ऱ. . ग ह. र ह यह . र . ह ऱ स उस ऱ र ह . गऱ र र ऱ .

ऱ स ऱए .ऱ ऱय उ अ ऱ र यह ग ऱ ऱय गर ओस र र य र र ऱय अ उ य र यह स यह ह र . . स हए ह ऱ यह अ र. ह गर ह यह रस र र . - य र हए ह. ओस ह रहगऱ र.

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