ओमप्रकरकाश कशकश्यप

हमरकाररका नरकाकश्यक फिसड्डी ककश्य्
उत्तिषष्ठति जरकाग्रति प्ररकाप्य वकश्य वररकात्नबोधत । वरान्निबोधति । क्षुरस्बोधत । क्षुरस्य धारा कश्य धरकाररका निशिता दुरनशिता दुरत्शतिरका दरबोधत । क्षु ्कश्यकश्यरका दर्गं पथस्तत
बोधत । क्षु द
पथस्य धारा ति्कवकश्यवरान्निबो वदत्ति ।।*- कष्ठवरान्निबोपनिशिता दुरनषद, अधकश्यरकाकश्य 1, वल्ली 3, मंत्र 14.

हरका्रकांफक केजरलीवरका् प्रकट म कभीडी कश्यह स्य धारा वडीकरकार नहलीं करर्गं पथस्तते फक वे अ्नरका के प्रनिशिता दुरतिदवंदवडी कश्यरका
उनके ववरुद्ध ह्. सडीधे-सडीधे अ्नरका भीडी शरकाकश्यद हली मरकानर्गं पथस्तते फक केजरलीवरका् के प्रनिशिता दुरति उनके दिलद्
म जवरान्निबो स्य धारा नेहरकानरबोधत । क्षु रकार्गं पथस्तत थरका, उसम कमडी आई हह. मर्गं पथस्ततर हरका् करका घटनरकाक्रम बोधत । तिरकातिरका हह फक दवरान्निबोन् के
ररकास्य धारा तिे अ्र्गं पथस्तत-अ्र्गं पथस्तत हवरान्निबो चक
बोधत । क्षु े ह्. एक सरका् पह्े तिक दवरान्निबोन् सरकाथ-सरकाथ थे. सच
ू नरका अधधकरकार
अधधनिशिता दुरनकश्यम से ्ेकर जन्वरान्निबोकपरका् के मद
बोधत । क्षु े तिक, दवरान्निबोन् ने कंधे से कंधरका शिता दुरत्म्रकाकर आंदवरान्निबो्न
कवरान्निबो आर्गं पथस्तते बोधत । ढ़रकाकश्यरका थरका. बोधत । रकाद म अरववंद केजरलीवरका् शिता दुरत्सस्य धारा टम के भीडीतिर घस
बोधत । क्षु कर भ्रषटरकाचरकार पर
प्रहरकार करने करका संकलप ्ेकर सफक्रकश्य ररकाजनडीनिशिता दुरति म च्े आए. जन्वरान्निबोकपरका् आंदवरान्निबो्न से
जड़
बोधत । क्षु े सरकाधथकश्य् के सरकाथ ‘आम आदमडी परकाटर’ बोधत । नरकाई. दिलदल्ली ववधरकानसभीरका चन
बोधत । क्षु रकाव् म उतिरकर
भीरकारतिडीकश्य जनतिरका परकाटर के ववजकश्य अशिता दुरत्भीकश्यरकान म रवरान्निबोड़रका बोधत । ने और 15 वष्षों से जमडी-जमरकाई करकांग्रेस
परकाटर क की सरकरकार कवरान्निबो उखरकाड़कर ्वरान्निबोर्गं पथस्तत् म नई ररकाजनडीनिशिता दुरति क की उम्ममडीद जर्गं पथस्ततरकाई . अरववंद
केजरलीवरका् कवरान्निबो शिता दुरत्म् रहली चहतिरिरका वरकाह-वरकाहली के बोधत । डीच अ्नरका ने ्वरान्निबोकपरका् ववधेकश्यक कवरान्निबो
अवव्ंबोधत । ्रकार्गं पथस्ततू करने के शिता दुरत््ए आमरण अनशन रखरका. अबोधत । उनक की ओर से बोधत । कश्यरकान आकश्यरका हह फक
वे ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् के सरकरकारली मसददे से संतिषबोधत । क्षु ट ह् , जबोधत । फक ‘आम आदमडी परकाटर’ के नेतिरका
जन्वरान्निबोकपरका् के परबोधत । क्षु रकाने प्ररकारूप पर अट् ह्. वे अ्नरका के र्गं पथस्तत्ति सहकश्यवरान्निबोधर्गं पथस्ततकश्य् दवरकाररका निशिता दुरघर जरकाने
पर क्षुरस्वरान्निबोभी जतिरका रहे ह्. दिलदल्ली ववधरकानसभीरका के चन
बोधत । क्षु रकाव् से बोधत । रकाक की देश करका कवरान्निबोई ्ेनरका-देनरका भी्े
न हवरान्निबो, मर्गं पथस्ततर उनक की र्गं पथस्ततंज
ू न केव् देश, बोधत । तलक पड़वरान्निबोसडी देश् तिक भीडी पहबोधत । क्षुंचडी हह . परकाफकस्य धारा तिरकान से
इमररकान खरकान करका केजरलीवरका् क की प्रशंसरका से भीररका बोधत । कश्यरकान आकश्यरका हह . केजरलीवरका् और ‘आम

आदमडी परकाटर’ क की बोधत । ढ़तिडी प्रनिशिता दुरतिषष्ठरका से करकांग्रेस और भीरकाजपरका बोधत । बोधत । क्षुरली तिरह घबोधत । ररकाई हबोधत । क्षुई ह्. इसशिता दुरत््ए
करकांग्रेस के जवरान्निबो नेतिरका ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् कवरान्निबो बोधत । रसरकातिडी मचमच्छर बोधत । तिरका रहे थे , आज उसे देश के शिता दुरत््ए
जरूरली मरकानकर उसक की तिरिदरकारली म जबोधत । क्षुटे ह्. ररकाहबोधत । क्षु् र्गं पथस्ततरकांधडी आम आदमडी परकाटर से सडीख ्ेने
क की घवरान्निबोषणरका कर चबोधत । क्षुके ह्. नरका-नक
बोधत । क्षु र क की ररकाजनडीनिशिता दुरति के सरकाथ भीरकाजपरका भीडी चरकाहतिडी हह फक ्वरान्निबोकपरका्

बिबोधत । ् परकास हवरान्निबो, तिरकाफक केजरलीवरका् तिथरका ‘आम आदमडी परकाटर’ कवरान्निबो जवरान्निबो देश-वकश्यरकापडी प्रशंसरका शिता दुरत्म्
रहली हह, उसपर ्र्गं पथस्ततरकाम ्र्गं पथस्तते तिथरका आर्गं पथस्ततरकामडी ्वरान्निबोकसभीरका चबोधत । क्षुनरकाव् म ‘आम आदमडी परकाटर’ ्वरान्निबोकपरका्
बिबोधत । ् के नरकाम पर फकसडी प्रकरकार करका ररकाजनडीनिशिता दुरतिक ्रकाभी न उष्ठरका सके . अनशन पर बोधत । हष्ठे अ्नरका
करका ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् के समथ्थन म आ जरकानरका, करकांग्रेस और भीरकाजपरका क की बोधत । ड़डी जडीति कहली जरका
रहली हह. अभीडी तिक फकसडी न फकसडी बोधत । हरकाने ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् कवरान्निबो टरका्तिडी आई, ररकाजनडीनिशिता दुरतिक
परकादिलट्थकश्यरकां कश्यदिलद ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् के मस्े पर अ्नरका हजरकारे कवरान्निबो अपने पक्षुरस् म कर ्ेने कवरान्निबो
कश्यदिलद अपनडी जडीति बोधत । तिरका रहली ह्, तिवरान्निबो दस
ू रे अथ्षों म कश्यह अ्नरका हजरकारे क की हरकार हह, ककश्य्फक
शिता दुरत्सवरकाकश्य ‘आम आदमडी परकाटर’ क की ओर से शिता दुरत्म्ली च बोधत । क्षुनदतिडी के इन परकादिलट्थकश्य् ने ऐसरका कबोधत । क्षुमच्छ नहलीं
फककश्यरका हह, तजससे देश म स्य धारा वचमच्छ ररकाजनडीनिशिता दुरति करने क की इनक की इचमच्छरकाशतकति जरकादिलहर हवरान्निबोतिडी हवरान्निबो .
और संसदलीकश्य सशिता दुरत्मनिशिता दुरति क की तजन शिता दुरत्सिरकाररश् के सरकाथ ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् के प्रनिशिता दुरति अ्नरका हजरकारे
सहमनिशिता दुरति दशरका्थ रहे ह्, वे सरका्-भीर पह्े हली आ चबोधत । क्षुक की ह् . बोधत । हरहरका्, देश क की स्तिरका क की बोधत । ड़डी
सरकाझेदरकार दवरान्निबोन् परकादिलट्थकश्यरकां ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् कवरान्निबो इसडी सत्र म परकास करवरका कर फकसडी भीडी तिरह
‘‘आम आदमडी परकाटर’’ के ‘र्गं पथस्ततबोधत । क्षुबबोधत । रकारे’ क की हवरका निशिता दुरनकरका् देनरका चरकाहतिडी ह्. उनक की दस
ू रली कवरान्निबोशिता दुरत्शश हह
फक केजरलीवरका् दबोधत । रकाव म आकर अपनडी परकाटर क की सरकरकार बोधत । नरका ् . तिरकाफक ररकाजनडीनिशिता दुरति के तिपे,
घरकाघ नेतिरका ‘आप’ के अपेक्षुरस्रकाकाति कश्यव
बोधत । क्षु रका और अनभी
बोधत । क्षु वहलीन नेतिरकाओं से बोधत । नडी परकाटर कवरान्निबो फकसडी न
फकसडी तिरह बोधत । दनरकाम कर, उनक की पहष्ठ कवरान्निबो दिलदल्ली तिक सडीशिता दुरत्मति कर सक . ववधरकानसभीरका चबोधत । क्षुनरकाव्
म भीरकाजपरका करका सबोधत । से बोधत । ड़डी परकाटर हवरान्निबोने के बोधत । रकावजूद सरकरकार बोधत । नरकाने से पडीमच्छे हटनरका, इसडी
कूटनडीनिशिता दुरति करका दिलहस्य धारा सरका हह. अशिता दुरत्भीजन ररकाजनडीनिशिता दुरति करका प्रतिडीक रहली करकांग्रेस और भीरकाजपरका इस म बोधत । क्षुदे
पर एक ह्.
निशिता दुरनस्य धारा संदेह अ्नरका केजरलीवरका् के मबोधत । क्षुकरकाबोधत । ्े अनभी
बोधत । क्षु व तिपे नेतिरका ह्. सेनरका क की नदकरली मच्छवरान्निबोड़ने के
बोधत । रकाद उ्ह्ने अपने र्गं पथस्ततरकांव कवरान्निबो प्रकश्यवरान्निबोर्गं पथस्ततशरका्रका बोधत । नरकाकश्यरका और वहरकां रहकर ग्ररकाम्मकश्य्राम्यः स बोधत । क्षुधरकार के करकाकश्य्थक्रम
च्रकाए. खद
बोधत । क्षु कवरान्निबो र्गं पथस्ततरकांधडी करका अनकश्य
बोधत । क्षु रकाकश्यडी और अंदिलहसरका म ववशवरकास करने वरका्रका बोधत । तिरकाकश्यरका, ्ेफकन

्वरान्निबोर्गं पथस्तत् कवरान्निबो सबोधत । क्षुधरकारने के शिता दुरत््ए पेड़ से बोधत । रकांधकर वपटरकाई करने करका ररकास्य धारा तिरका अपनरकाने से र्गं पथस्तत बोधत । क्षुरेज नहलीं
फककश्यरका. र्गं पथस्ततरकांधडी ‘सरकाधकश्य’ और ‘सरकाधन’ क की पववत्रतिरका पर जवरान्निबोर देने वरका्े आदश्थवरकादली नेतिरका थे .
अ्नरका करका र्गं पथस्ततरकांधडीवरकाद ‘अंति भी्रका सवरान्निबो सबोधत । भी्रका’ क की उपकश्यवरान्निबोधर्गं पथस्तततिरकावरकादली चरका् तिक शिता दुरत्समट जरकातिरका
हह. इसके बोधत । रकावजूद ग्ररकाम-स्य धारा तिर पर फकए र्गं पथस्ततए अ्नरका के प्रकश्यवरान्निबोर्गं पथस्तत् कवरान्निबो सव्थत्र सररकाहनरका शिता दुरत्म्ली,
तजससे अ्नरका क की खकश्यरकानिशिता दुरति ररका्ेर्गं पथस्ततण शिता दुरत्सवद्ध से बोधत । रकाहर निशिता दुरनक्कर देश -वकश्यरकापडी बोधत । नडी. उ्ह्ने
महरकाररकाषाष्ट्र सरकरकार के मंबित्रकश्य् के भ्रषटरकाचरकार के प्रनिशिता दुरति भीडी आंदवरान्निबो्न फकए. बोधत । रकावजूद इसके 2010
तिक, ववचरकार और कम्थ क की दृतषट से अ्नरका हजरकारे ररका्ेर्गं पथस्ततण शिता दुरत्सवद्ध तिक शिता दुरत्समटे सवमटे सर्वोदकश्यडी नेतिरका
हली थे. हरका्रकांफक उनक की खकश्यरकानिशिता दुरति देश-ववदेश तिक थडी. उ्ह महरकाररकाषाष्ट्र से बोधत । रकाहर भ्रषटरकाचरकार मबोधत । क्षुतकति,
सूचनरका अधधकरकार तिथरका जन्वरान्निबोकपरका् आंदवरान्निबो्न के बोधत । हरकाने, दस
ू रे नरकाकश्यक हली ्रकाए, तजनम अरुणरका
ररकाकश्य, अरववंद केजरलीवरका् आदिलद प्रमबोधत । क्षुख ह्. करका्रकांतिर म ररकाजनडीनिशिता दुरतिक क्षुरस्ेत्र म वकश्यरकाप्य वति र्गं पथस्ततंदर्गं पथस्ततडी कवरान्निबो
‘अंदर से सरकाि’ करने के संकलप के सरकाथ केजरलीवरका् सफक्रकश्य ररकाजनडीनिशिता दुरति म दिलहस्य धारा सरका ्ेने के
शिता दुरत््ए अ्नरका से अ्र्गं पथस्तत हबोधत । क्षुए तिवरान्निबो चचरकादओं करका बोधत । ड़रका दिलहस्य धारा सरका उनपर कदिल केंद्रिति हवरान्निबोतिरका च्रका र्गं पथस्ततकश्यरका. उस
समकश्य तिक अ्नरका तिवरान्निबो ककश्यरका स्य धारा वकश्यं अरववंद कवरान्निबो भीडी ववशवरकास नहलीं थरका फक ‘आम आदमडी परकाटर’

कवरान्निबो इतिनडी बोधत । ड़डी सि्तिरका शिता दुरत्म् सकतिडी हह . इसडीशिता दुरत््ए स्तिरका से दरू रहने क की र्गं पथस्ततरकांधडीजडी क की
परंपररका के निशिता दुरनवरका्थह तिथरका जनरकांदवरान्निबो्न् क की अपनडी कमरकाई कवरान्निबो सहेजे रखने के शिता दुरत््ए अ्नरका
केजरलीवरका् से अ्र्गं पथस्तत हली रहे. उसके बोधत । रकाद सरका्-भीर तिक जबोधत । केजरलीवरका् ‘आम आदमडी परकाटर’
के शिता दुरत््ए नई जमडीन ति्रकाश रहे थे, वे अपने र्गं पथस्ततरकांव ररका्ेर्गं पथस्ततण शिता दुरत्सवद्ध म जवरान्निबो उनक की प्रकश्यवरान्निबोर्गं पथस्ततशरका्रका
रहली हह, खश
बोधत । क्षु थे. परंतिबोधत । क्षु दिलदल्ली ववधरकानसभीरका के चबोधत । क्षुनरकाव् म ‘आप’ कवरान्निबो शिता दुरत्म्ली भीरकारली सि्तिरका के
बोधत । रकाद जनतिरका उसम करकांग्रेस और भीरकाजपरका करका सरकाि-सबोधत । क्षुथररका ववकलप देखने ्र्गं पथस्ततडी हह. इससे उन
्वरान्निबोर्गं पथस्तत् के करकान भीडी खड़े हवरान्निबो र्गं पथस्ततए, जवरान्निबो केजरलीवरका् कवरान्निबो अभीडी तिक हलके म ्े रहे थे. फि्हरका्
एक ओर तिवरान्निबो करकांग्रेस और भीरकाजपरका ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् कवरान्निबो आनन-िरकानन म परकास कररकाने पर ति्
बोधत । क्षु ली
ह्, दस
ू रली ओर अ्नरका और केजरलीवरका् के बोधत । डीच क की दरू ली कवरान्निबो बोधत । ढ़रकाकर ‘आम आदमडी परकाटर’ के
प्रभीरकाव कवरान्निबो हलकरका करने क की कवरान्निबोशिता दुरत्शश क की जरका रहली हह.
‘आम आदमडी परकाटर’ कवरान्निबो देश क की ररकाजनडीनिशिता दुरति म सहद्धरकांनिशिता दुरतिक प्रकश्यवरान्निबोर्गं पथस्तत कहरका जरकाएर्गं पथस्ततरका, जवरान्निबो अभीडी
कचचडी अवस्य धारा थरका म हह. इसके सहली-सहली पररणरकाम अभीडी सरकामने आने बोधत । रकाक की ह्, जवरान्निबो अरववंद
केजरलीवरका् तिथरका उनके सरकाधथकश्य् के स्सरकाहस और वववेक पर निशिता दुरनभी्थर करेर्गं पथस्ततरका . इसके बोधत । रकावजद

इसम कवरान्निबोई संदेह नहलीं हह फक ‘आम आदमडी परकाटर’ के मरकाधकश्यम से केजरलीवरका् ने ्वरान्निबोर्गं पथस्तत् के
दिलद्् म सरकाि-सबोधत । क्षुथरली ररकाजनडीनिशिता दुरति क की एक उम्ममडीद जर्गं पथस्ततरकाई हह. ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् करका शेकश्य चरकाहे
ररकाहबोधत । क्षु् ् कश्यरका अ्नरका, सचरकाई कश्यहली हह फक ‘आम आदमडी परकाटर’ करका ररकाजनडीनिशिता दुरति के क्षुरस्ेत्र म उभीरकार ,

सरकाष्ठ से ऊपर वष्षों से अद्-बोधत । द् कर सरकरकार बोधत । नरकातिे आए, कश्यथरकास्य धारा थनिशिता दुरति के पवरान्निबोषक-समथ्थक
द्् कवरान्निबो ररकास नहलीं आ रहरका हह. चूंफक जन्वरान्निबोकपरका् आंदवरान्निबो्न और भ्रषटरकाचरकार ‘आम आदमडी
परकाटर’ के उभीरकार करका प्रमबोधत । क्षुख बिबोधत । ंद ू रहरका हह, इसशिता दुरत््ए ्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् ्रकाकर वे उस करकारण कवरान्निबो हली
समरकाप्य वति कर देनरका चरकाहतिे ह्, तजससे ‘आम आदमडी परकाटर’ तिपकर निशिता दुरनक्ली हह . मर्गं पथस्ततर कश्यहलीं वे
भीू् भीडी कर रहे ह् . दरअस् केजरलीवरका् क की ररकाजनडीनिशिता दुरति केव् भ्रषटरकाचरकार ववरवरान्निबोध तिक सडीशिता दुरत्मति
नहलीं हह. कबोधत । क्षुमच्छ महलीन् के अंतिररका् म हली उ्ह्ने बोधत । ड़डी बोधत । बोधत । क्षुवद्धम्तिरका पूव्थक आम आदमडी कवरान्निबो
स्तिरका क की ररकाजनडीनिशिता दुरति से जवरान्निबोड़रका हह. उनके भीडीतिर स्तिरका करका आकष्थण पहदरका फककश्यरका हह. ि्स्य धारा वरूप
वह वर्गं पथस्तत्थ जवरान्निबो अभीडी तिक दस
ू र् के अधडीन ररकाजनडीनिशिता दुरति करतिरका आकश्यरका थरका और तजसे धम्थ , जरकानिशिता दुरति,
क्षुरस्ेत्रडीकश्यतिरका के नरकाम पर ्वरान्निबोर्गं पथस्तत एक-दस
ू रे से उ्झरका दिलदकश्यरका करतिे थे , पह्ली बोधत । रकार उसके मन म
ववशवरकास जरकार्गं पथस्ततरका हह फक वह खद
बोधत । क्षु भीडी स्तिरका म आ सकतिरका हह . ‘अशिता दुरत्भीजन’ के बोधत । रकस ‘जन’ कवरान्निबो
खड़रका करने करका जहसरका स्सरकाहस केजरलीवरका् ने दिलदखरकाकश्यरका हह, उसकरका उदरकाहरण भीरकारति के
स्य धारा वरकातिंत्रकश्यवरान्निबो्तिर इनिशिता दुरतिहरकास म द्
बोधत । क्षु ्थभी हह. उसम जरकानिशिता दुरति, धम्थ, सरकांप्रदरकानिशिता दुरकश्यकतिरका, तितबोधत । क्षु षटकरण जहसे
ववभीेदकरकारली ररकाजनडीनिशिता दुरति के पबोधत । क्षुररकाने औजरकार करकारर्गं पथस्ततर हवरान्निबो हली नहलीं सकतिे थे . इसशिता दुरत््ए कश्यदिलद वे धहकश्य्थ
और बोधत । बोधत । क्षुवद्धम्तिरकापूव्थक आर्गं पथस्तते बोधत । ढ़ तिवरान्निबो कश्यहरकां से भीरकारतिडीकश्य ररकाजनडीनिशिता दुरति क की नई ररकाह निशिता दुरनक् सकतिडी
ह्.
अ्नरका और केजरलीवरका् भी्े सरकाथ रहे ह्, और केजरलीवरका् ने स्य धारा वकश्यं कवरान्निबो अ्नरका करका ववनम
अनकश्य
बोधत । क्षु रकाकश्यडी हली मरकानरका हवरान्निबो, इसके बोधत । रकावजद
ू सचरकाई कश्यहली हह फक दिलदल्ली ववधरकान सभीरका के हरकाशिता दुरत््कश्यरका
चन
बोधत । क्षु रकाव् म ्वरान्निबोर्गं पथस्तत् ने अ्नरका के नरकाम पर नहलीं, केजरलीवरका् और उसके सरकाधथकश्य् क की मेहनति
और आशवरकासन से प्रभीरकाववति हवरान्निबोकर एक उम्ममडीद के सरकाथ ‘आम आदमडी परकाटर’ कवरान्निबो ववरान्निबोट दिलदकश्यरका
हह. इसशिता दुरत््ए इस समकश्य केजरलीवरका् उनक की आंख् के तिरकारे ह्, और उ्ह ्ेकर भीरकावडी ररकाजनडीनिशिता दुरति
करका आदश्थवरकादली मह
बोधत । क्षु रकावररका र्गं पथस्ततढ़ने म ्र्गं पथस्तते ह्. कह सकतिे ह् फक ‘आम आदमडी परकाटर’ ररकाजनडीनिशिता दुरति
के जंर्गं पथस्तत् म उपजरका उम्ममडीद करका खश
बोधत । क्षु नम
बोधत । क्षु रका पदधरका हह. उस बिबोधत । रवे कवरान्निबो असमकश्य हली कबोधत । क्षुच् देने क की
जमडी-जमरकाई परकादिलट्थकश्य् क की ओर से क की जरका रहली हह . कश्यहली करकारण हह फक दिलदल्ली ववधरकानसभीरका म

सबोधत । से बोधत । ड़रका द् हवरान्निबोने के बोधत । रकावजूद भीरकाजपरका सरकरकार बोधत । नरकाने से पडीमच्छे हट जरकातिडी हह और करकांग्रेस
‘आप’ कवरान्निबो बिबोधत । नरका मरकांर्गं पथस्तते समथ्थन देने करका ऐ्रकान कर देतिडी हह . तिरकाफक उस परकाटर के कंध् पर जवरान्निबो
अभीडी च्नरका सडीख हली रहली हह , अपेक्षुरस्रकाओं करका भीरकारली बोधत । वरान्निबोझ ्रकाद दिलदकश्यरका जरकाए . उ्ह भीरकारतिडीकश्य् करका
स्य धारा वभीरकाव क की बोधत । हबोधत । क्षुति अचमच्छ्छी समझ हह. जरकानतिे ह् फक ्वरान्निबोर्गं पथस्तत ्वरान्निबोर्गं पथस्तत कश्यहरकां दिलदमरकार्गं पथस्तत से जकश्यरकादरका दिलद् से

करकाम ्ेतिे ह्. नेतिरकाओं क की बोधत । रकाति् म आकर उ्ह बोधत । हबोधत । क्षुति जलदली कंध् पर बिबोधत । ष्ठरका ्ेतिे ह् . फिर
जररका-सडी बोधत । रकाति बिबोधत । र्गं पथस्ततड़ने पर तिन
बोधत । क्षु क-शिता दुरत्मजरकाजडी के सरकाथ उतिरकार भीडी देतिे ह् . इसशिता दुरत््ए वे उस करकारण
कवरान्निबो समरकाप्य वति कर देनरका चरकाहतिे ह्, जवरान्निबो नई उम्ममडीद और संभीरकावनरकाओं क की ररकाजनडीनिशिता दुरति करका
ज्मदरकातिरका हह.
‘आम आदमडी परकाटर’ कवरान्निबो शिता दुरत्म्ली अप्र्कश्यरकाशिता दुरत्शति सि्तिरका केव् भीरकाजपरका और करकांग्रेस करका शिता दुरत्सरदद्थ
नहलीं हह, वह केजरलीवरका् के उन सरकाधथकश्य् के भीडी र्गं पथस्तत्े नहलीं उतिर रहली हह , जवरान्निबो अ्नरका के
आंदवरान्निबो्न से उनके सरकाथ थे और खद
बोधत । क्षु कवरान्निबो पररवति्थन के बोधत । ड़े परबोधत । क्षु वरान्निबोधरकाओं म शम
बोधत । क्षु रकार करने ्र्गं पथस्तते
थे. ऐसे ्वरान्निबोर्गं पथस्तत अरववंद कवरान्निबो धवरान्निबोखेबोधत । रकाज, अनिशिता दुरतिमह््वरकाकरकांक्षुरस्डी, स्य धारा वरकाथर्थी आदिलद और न जरकाने ककश्यरका-ककश्यरका
कहे जरका रहे ह्. जहरकां तिक धवरान्निबोखरका देने क की बोधत । रकाति हह, अरववंद पर ऐसरका इलजरकाम नरकाइंसरकाि की हवरान्निबोर्गं पथस्ततडी .
‘आम आदमडी परकाटर’ के र्गं पथस्ततष्ठन के समकश्य उ्ह्ने अपने सभीडी सरकाधथकश्य् कवरान्निबो उसम सतम्ममशिता दुरत््ति
हवरान्निबोने करका निशिता दुरनकश्यंत्रण दिलदकश्यरका थरका. फकरन बोधत । ेदली कवरान्निबो तिवरान्निबो ‘आप’ क की ओर से मख
बोधत । क्षु कश्यमंत्रडी करका उम्ममडीदवरकार
बोधत । नने करका ्कश्यवरान्निबोतिरका थरका. कश्यदिलद वे केजरलीवरका् के सरकाथ नहलीं जरका सक कीं तिवरान्निबो कश्यह उनकरका अपनरका
निशिता दुरनण्थकश्य थरका. इसके पडीमच्छे पह्रका करकारण तिवरान्निबो कश्यहली थरका फक फकसडी कवरान्निबो उम्ममडीद नहलीं थडी फक
दिलदल्ली म ‘आम आदमडी परकाटर’ सरकरकार बोधत । नरकाने क की तस्य धारा थनिशिता दुरति म आ सकतिडी हह. दस
ू रे फकरन
बोधत । ेदली करका भीरकाजपरका से ्र्गं पथस्ततरकाव आरंभी से हली रहरका हह. इसशिता दुरत््ए जबोधत । उनके दिलद् के करलीबोधत । क की परकाटर
‘नमवरान्निबो-नमवरान्निबो’ भीज रहली हवरान्निबो, और देश-भीर करका मडीड्कश्यरका उसके सरबोधत । क्षु म सरबोधत । क्षु शिता दुरत्म्रका रहरका हवरान्निबो, तिवरान्निबो वे
उसके शिता दुरत््ए फकसडी प्रकरकार क की समस्य धारा कश्यरका खड़डी नहलीं करनरका चरकाहतिडी थडीं . कबोधत । क्षु् शिता दुरत्म्रकाकर अरववंद
केजरलीवरका् कवरान्निबो इसके शिता दुरत््ए दवरान्निबोषडी नहलीं ष्ठहररकाकश्यरका जरका सकतिरका.
अरववंद केजरलीवरका् के आ्वरान्निबोचक उ्ह अ्कश्यंति मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी बोधत । तिरकातिे ह् . ्ेफकन मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी
कश्यरका अनिशिता दुरतिमह््वरकाकरकांक्षुरस्डी हवरान्निबोनरका बोधत । बोधत । क्षुररका नहलीं हह. बोधत । तलक एक सदर्गं पथस्ततबोधत । क्षुण हह, तजसकवरान्निबो ववकरकास के शिता दुरत््ए
जरूरली मरकानरका जरकातिरका हह. मह््वरकाकरकांक्षुरस्रका के अंग्रेजडी पकश्यरका्थकश्य ‘एंबोधत । डीशन’ कवरान्निबो ्. रवरान्निबोमन ambition
शबद ambitio से निशिता दुरनक्रका हह, तजसके मू् म ‘चरकार् दिलदशरकाओं पर कबजरका जमरका ्ेने’ करका भीरकाव

हह. इस शबद करका अपनरका ऐसरका हली कबोधत । क्षुमच्छ अतिडीति भीडी हह. प्ररकाचडीन कश्यन
ू रकान म उस नेतिरका कवरान्निबो जवरान्निबो
चरकार् दिलदशरकाओं म अपनरका प्रभीरकाव जमरकाने क की सरकाध रखतिरका हवरान्निबो और उसके शिता दुरत््ए सभीडी तिरह से
निशिता दुरनरंतिर सतिति प्रकश्य्नशडी् हवरान्निबो, ambitio कहरका जरकातिरका थरका. चूंफक धम्थ क की निशिता दुरनर्गं पथस्ततरकाह म सरकांसरकाररक
उप्तबधकश्य् करका कवरान्निबोई मह््व न थरका, इसशिता दुरत््ए धमरका्थचरकाकश्य्षों क की निशिता दुरनर्गं पथस्ततरकाह म ‘एबिबोधत । शिता दुरत्शकश्यवरान्निबो’ हवरान्निबोनरका,
परकाप-शिता दुरत््प्य वति हवरान्निबोनरका थरका. ्ेफकन समकश्य के सरकाथ शबद् के अथ्थ भीडी बोधत । द्तिे रहतिे ह् . कभीडी-कभीडी
शबद के मरकाकश्यने और निशिता दुरनदिलहतिरकाथ्थ बिबोधत । ्कबोधत । क्षु् बोधत । द् जरकातिे ह्. एक समकश्य म ‘नरकातस्य धारा तिक’ हवरान्निबोनरका वेद्
म अववशवरकास रखने वरका्े वकश्यतकति कश्यरका ववचरकार से थरका. करका्रकांतिर म नरकातस्य धारा तिक कवरान्निबो ईशवर म
अववशवरकास रखने वरका्े वकश्यतकति तिक सडीशिता दुरत्मति कर दिलदकश्यरका. दस
ू ररका ऐसरका हली मह््वपूण्थ शबद
‘अररकाजकतिरका’ हह. अबोधत । अररकाजकतिरका कवरान्निबो अवकश्यवस्य धारा थरका, अशरकांनिशिता दुरति, उच्ंख्तिरका और ररकाजनडीनिशिता दुरतिक उथ्पबोधत । क्षुथ् करका पकश्यरका्थकश्य मरकानरका जरकातिरका हह. जबोधत । फक ‘अररकाजकतिरका’ करका मू् अथ्थ जनसमरकाज करका एकतिरका,
सरकामंजस्य धारा कश्य, वववेक और आ्मनिशिता दुरनभी्थरतिरका के स्य धारा तिर पर इतिनरका ऊपर उष्ठ जरकानरका हह फक वह इतिनरका
आ्मरकानश
बोधत । क्षु रकाशिता दुरत्सति और ्वरान्निबोकसमवप्थति हवरान्निबो जरकाए, तजससे बोधत । रकाहरली शरकासन कश्यरका सरकरकार क की
आवशकश्यकतिरका हली न पड़े. दस
ू रे शबद् म प्रबोधत । बोधत । क्षुद्ध और स्य धारा वतिंत्र-चेतिरका समरकाज के शिता दुरत््ए ‘अररकाजक’
हवरान्निबोनरका सम्ममरकानजनक तस्य धारा थनिशिता दुरति हह, जहरकां मनषबोधत । क्षु कश्य अपनडी संपूण्थ स्य धारा वतिंत्रतिरका के सरकाथ निशिता दुरनवव्थघ्न रन रह
सकतिरका हह. आज बोधत । द्े अथ्थ के सरकाथ ‘अररकाजकतिरका’ कवरान्निबो ्वरान्निबोकतिरकांबित्रक समरकाज् म भीडी हेकश्य दृतषट
से देखरका जरकातिरका हह.
इसडी तिरह मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी हवरान्निबोनरका भीडी आजक् उदरका्ति र्गं पथस्ततण
बोधत । क्षु हह. ववदवरकान् ने मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाओं
कवरान्निबो सकरकाररका्मक और नकरकाररका्मक शेणियोणकश्य् म बोधत । रकांटरका हह. सकरकाररका्मक मह््वरकाकरकांक्षुरस्रका एक
सदर्गं पथस्ततण
बोधत । क्षु हह, जवरान्निबो मनषबोधत । क्षु कश्य म ववकरकास क की प्रथम प्रेरणरकाएं जर्गं पथस्ततरकातिडी ह्, सरकाथ हली उसे कति्थवकश्य क की
दिलदशरका म उ्प्रेररति करतिडी रहतिडी ह्. मह््वरकाकरकांक्षुरस्रका क की सरकामरका्कश्यति्राम्यः दवरान्निबो कवरान्निबोदिलटकश्यरकां हवरान्निबोतिडी ह्—निशिता दुरनजडी
और सरकाव्थजनिशिता दुरनक. एक ववदकश्यरकाथर्थी कश्यदिलद पढ़-शिता दुरत््खकर आइएस, उचचरकाधधकरकारली बोधत । नने करका सपनरका
देखतिरका हह; कश्यरका करकारखरकानेदरकार बोधत । ड़रका उदकश्यवरान्निबोर्गं पथस्ततपनिशिता दुरति बोधत । ननरका चरकाहतिरका हह तिवरान्निबो कश्ये उनक की निशिता दुरनजडी
मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाएं ह्. इनम उनकरका स्य धारा वरकाथ्थ निशिता दुरमच्छपरका हह. जडीवन म वकश्यतकतिर्गं पथस्ततति उप्तबधकश्यरकां भीडी
मह््व रखतिडी ह्, उनसे कहलीं न कहलीं समरकाज करका दिलहति भीडी सधतिरका हह, ्ेफकन उनकरका प्रथम
धकश्येकश्य वकश्यतकति क की निशिता दुरनजडी इचमच्छरकाओं करका पवरान्निबोषण करनरका हवरान्निबोतिरका हह, इसशिता दुरत््ए ऐसडी मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाओं
कवरान्निबो ‘प्रेकश्य’ क की जनक कहरका जरका सकतिरका हह. दस
ू रली फकस्य धारा म क की मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाएं सरकाव्थजनिशिता दुरनक

मह््व क की हवरान्निबोतिडी ह्. कश्ये मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाएं ्वरान्निबोकवरान्निबोपकरकार क की ररकाह पर च्तिे हबोधत । क्षुए सरकाव्थजनिशिता दुरनक
जडीवन क की करकामकश्यरकाबोधत । डी कवरान्निबो ्ेकर बोधत । नतिडी ह् . उनम पररवति्थन क की आस निशिता दुरमच्छपडी हवरान्निबोतिडी हह . ऐसरका

वकश्यतकति वकश्यवस्य धारा थरका से असंतिषबोधत । क्षु ट हवरान्निबोतिरका हह. बोधत । द्रकाव क की करकामनरका उसकरका जबोधत । क्षुनन
ू हवरान्निबोतिरका हह. चूंफक
उसक की अपनडी सि्तिरका शेष समरकाज से शिता दुरत्म्े समथ्थन और सहकश्यवरान्निबोर्गं पथस्तत पर निशिता दुरनभी्थर हवरान्निबोतिडी हह ,
तजसपर कश्यथरकातस्य धारा थनिशिता दुरतिवरकादिलदकश्य् करका कबजरका हवरान्निबोतिरका हह , इसशिता दुरत््ए उसक की ररकाह कंटक-भीरली हवरान्निबोतिडी हह. हर
प् उसे सि्तिरका-असि्तिरका के झ्
ू े म झ्
ू नरका पड़तिरका हह. ऐसे म उनक की अपनडी उ्कंष्ठरका,
आ्मववशवरकास और बोधत । द्रकाव क की चरकाहति आर्गं पथस्तते बोधत । ढ़ने करका संबोधत । ् बोधत । नतिडी ह्. कई बोधत । रकार तिवरान्निबो सबोधत ।
कबोधत । क्षुमच्छ कबोधत । क्षुहरे और अनिशिता दुरनतशचतितिरका म शिता दुरत््पटरका हवरान्निबोतिरका हह. इसके बोधत । रकावजूद अपने जबोधत । क्षुनन
ू के बोधत । ् पर
वकश्यतकति आर्गं पथस्तते बोधत । ढ़तिरका जरकातिरका हह. ऐसे वकश्यतकति देर-सबोधत । ेर अप्र्कश्यरकाशिता दुरत्शति सि्तिरका करका वरण कर हली
्ेतिे ह्, नहलीं तिवरान्निबो समरकाज कवरान्निबो ऐसे पड़रकाव तिक ्े जरकातिे ह् , जहरकां एक बोधत । ड़रका करकारवरकां उनक की
संकलप-कश्यरकात्ररका कवरान्निबो आर्गं पथस्तते बोधत । ढ़रकाने के शिता दुरत््ए तिहकश्यरकार हवरान्निबोतिरका हह . पह्ली फकस्य धारा म के मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी ्वरान्निबोर्गं पथस्तत्
क की समरकाज म कवरान्निबोई कमडी नहलीं हवरान्निबोतिडी. जकश्यरकादरकातिर इसडी प्रकरकार के हवरान्निबोतिे ह् . वे प्रेकश्य के शिता दुरत््ए
मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाओं क की खेतिडी करतिे ह्. समरकाज म मरकान-प्रनिशिता दुरतिषष्ठरका और सबोधत । क्षुख-संपदरका बोधत । टवरान्निबोरतिे ह्.
आधथ्थक उदरकारलीकरण के ददर म ऐसडी हली मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाओं कवरान्निबो बोधत । ढ़रकावरका देने के शिता दुरत््ए अनेक
पबोधत । क्षुस्य धारा तिक रचडी र्गं पथस्ततई ह्. दस
ू रली फकस्य धारा म कश्यरकानडी पररवति्थनकरकामडी मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी हवरान्निबोनरका बोधत । हबोधत । क्षुति कम ्वरान्निबोर्गं पथस्तत्

के बोधत । स क की बोधत । रकाति हवरान्निबोतिडी हह. इसशिता दुरत््ए धम्थ, जरकानिशिता दुरति, संप्रदरकाकश्य, ररकाजनडीनिशिता दुरति के क्षुरस्ेत्र म जमे बोधत । हबोधत । क्षुति से

कश्यथरकातस्य धारा थनिशिता दुरतिवरकादली ऐसे ह् जवरान्निबो ऐसडी मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाओं कवरान्निबो सररकाहनरका करनरका तिवरान्निबो दरू , उ्ह अपररकाध
तिक मरकानने ्र्गं पथस्तततिे ह्.
अरववंद केजरलीवरका् कवरान्निबो म् दस
ू रली कवरान्निबोदिलट करका मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी मरकानतिरका हूं . जवरान्निबो ‘प्रेकश्य’ क की अपेक्षुरस्रका
‘शेकश्य’ कवरान्निबो मह््व देतिे ह्. कहने क की आवशकश्यकतिरका नहलीं फक ऐसे मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी समरकाज म

ववर्े हली हवरान्निबोतिे ह्. इस तिरह क की मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाओं क की खबोधत ।
ू डी हवरान्निबोतिडी हह फक उनकरका कवरान्निबोई एक
स्य धारा वरूप नहलीं हवरान्निबोतिरका. वकश्यतकति मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाओं के एक चरण कवरान्निबो परकार करतिरका हह , तिवरान्निबो उसक की
मह््वरकाकरकांक्षुरस्रकाएं मनषबोधत । क्षु कश्यतिरका के दिलहति म नकश्यरका उष्ठरकान ्े ्ेतिडी ह्. उनम वकश्यतकति क की प्रनिशिता दुरतिभीरका और
समप्थण के नए-नए रूप सरकामने आतिे ह् . उदरकाहरण के शिता दुरत््ए कश्यदिलद कवरान्निबोई ववदकश्यरकाथर्थी आईएएस
बोधत । ननरका चरकाहतिरका हह तिवरान्निबो उस ्क्कश्य कवरान्निबो परकातिे हली उसक की मह््वरकाकरकांक्षुरस्रका समरकाप्य वति हवरान्निबो सकतिडी हह . हवरान्निबो
सकतिरका हह उसके बोधत । रकाद वह घर-र्गं पथस्ततह
ा स्य धारा थडी म रमकर रह जरकाए. कश्यह भीडी हवरान्निबो सकतिरका हह फक उचच

पद पर पदरकासडीन हवरान्निबो, भ्रषटरकाचरकार के चरका्ू तिरलीक् कवरान्निबो अपनरकाकर अंधरकाधबोधत । क्षुंध करका्रकाधन जमरका करे,
ऐसे हली एक मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी करकारखरकानेदरकार बोधत । ड़रका उदकश्यमडी बोधत । नकर कई कंपनिशिता दुरनकश्य् करका स्य धारा वरकामडी बोधत । न
सकतिरका हह. ्ेफकन कबोधत । क्षु् शिता दुरत्म्रकाकर वे अपने ‘प्रेकश्य’ करका हली ववस्य धारा तिरकार करतिे ह् , तजसम वकश्यतकति्व
करका केव् क्षुरस्हनिशिता दुरतिज ववस्य धारा तिरकार संभीव हवरान्निबोतिरका हह . दस
ू रली फकस्य धारा म के मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी कश्यरकानडी शेकश्य कवरान्निबो
मह््व देने वरका्े देर-सवेर ्वरान्निबोर्गं पथस्तत् करका समथ्थन परकाकर ‘उधव्थ’ एवं ‘क्षुरस्हनिशिता दुरतिज’ दवरान्निबोन् तिरह से
ववस्य धारा तिरकार परकातिे ह्. हरका्रकांफक धरकाररका के ववपरलीति बोधत । हने के करकारण उ्ह अनेक परलीक्षुरस्रकाओं और
संघष्थ के कदिलष्ठन ददर से र्गं पथस्ततबोधत । क्षुजरनरका पड़तिरका हह. ऐसे मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी समरकाज म ववर्े हली हवरान्निबोतिे ह्.
अरववंद केजरलीवरका् ने महकेनिशिता दुरनक् इंजडीनिशिता दुरनकश्यररंर्गं पथस्तत से आईआईटली क की. देश के बोधत । ड़े औदकश्यवरान्निबोधर्गं पथस्ततक
घररकाने टरकाटरका स्य धारा टली् म करकाम फककश्यरका. ्ेफकन उनके भीडीतिर रहरका मह््वरकाकरकांक्षुरस्डी प्ररकाणडी उ्ह कबोधत । क्षुमच्छ
नकश्यरका करने क की निशिता दुरनरंतिर प्रेरणरका दे रहरका थरका. अर्गं पथस्ततर वे इंजडीनिशिता दुरनकश्यर हली रहतिे तिवरान्निबो सरकरकार और
सरकाव्थजनिशिता दुरनक जडीवन म पहष्ठे अनरकाचरकार के फकसडी एक रूप से हली पररधचति हवरान्निबो सकतिे थे . एक
इंजडीनिशिता दुरनकश्यर करका वरकास्य धारा तिरका मशडीन् से हवरान्निबोतिरका हह. सरकरकारली निशिता दुरनकरकाकश्य से जड़
बोधत । क्षु े तिवरान्निबो भीडी सडीशिता दुरत्मति अनभी
बोधत । क्षु व
प्ररकाप्य वति कर सकतिे थे. मर्गं पथस्ततर ररकाजस्य धारा व ववभीरकार्गं पथस्तत क की नदकरली ने उ्ह सरकाव्थजनिशिता दुरनक जडीवन म पहष्ठे
पति्थ-दर-पति्थ पहष्ठे भ्रषटरकाचरकार से रू-बोधत । -रू कररकाकश्यरका. सच
ू नरका अधधकरकार के आंदवरान्निबो्न के ददररकान बोधत । हबोधत । क्षुति

से समरकाजकशिता दुरत्म्थकश्य् क की भीरकांनिशिता दुरति उ्ह भीडी ्र्गं पथस्ततरका फक सच
ू नरका करका अधधकरकार शिता दुरत्म्तिे हली ्वरान्निबोर्गं पथस्तत
भ्रषटरकाचरकार के ववरुद्ध उष्ठ खड़े ह्र्गं पथस्तते . सरकरकारली कम्थचरकारली कवरान्निबो पतिरका हवरान्निबो फक ्वरान्निबोर्गं पथस्तत अपनडी िरकाइ्
और उसम क की र्गं पथस्ततई करकार्थवरकाहली कवरान्निबो जरकानने करका अधधकरकार रखतिे ह् तिवरान्निबो उनक की ररशवति मरकांर्गं पथस्ततने
क की दिलहम्ममति हली नहलीं पड़ेर्गं पथस्ततडी. इस तिरह सच
ू नरका करका अधधकरकार करका हधथकश्यरकार बोधत । नकर एक दिलदन
भ्रषटरकाचरकार कवरान्निबो धररकाशरकाकश्यडी कर देर्गं पथस्ततरका. मर्गं पथस्ततर उस ददर के आतिे-आतिे पंज
ू डीवरकाद बोधत । े्र्गं पथस्ततरकाम हवरान्निबोकर
ददड़ने ्र्गं पथस्ततरका थरका. संचरकारक्ररकांनिशिता दुरति के ्भी
बोधत । क्षु रकावने नरकारे के सरकाथ बोधत । हबोधत । क्षुति शरकानिशिता दुरतिररकानरका ढंर्गं पथस्तत से उसने ्वरान्निबोर्गं पथस्तत्

के दिलद्वरान्निबो-दिलदमरकार्गं पथस्तत कवरान्निबो कबजरकानरका आरंभी कर दिलदकश्यरका. धम्थ नरकाम क की अि कीम तिथरका ववकरकास के नरकाम
पर उ्मक
बोधत । क्षु ति वकश्यरकापतिडी उपभीवरान्निबोकतिरका क्ररकांनिशिता दुरति ने ्वरान्निबोर्गं पथस्तत् के दिलद्वरान्निबोदिलदमरकार्गं पथस्तत पर अपनरका कबजरका जमरका
शिता दुरत््कश्यरका. धम्थ ने ्वरान्निबोर्गं पथस्तत् कवरान्निबो ‘स्य धारा वर्गं पथस्तत्थ’ और ‘मतबोधत । क्षु कति’ के नरकाम पर स्य धारा वरकाथर्थी बोधत । नरकाकश्यरका तिवरान्निबो पंज
ू डीवरकाद प्रेररति
उपभीवरान्निबोकतिरकावरकाद ने स्य धारा वरकाथ्थ कवरान्निबो ववस्य धारा तिरकार देतिे हबोधत । क्षुए ्वरान्निबोर्गं पथस्तत् से शिता दुरत््खने-पढ़ने करका संस्य धारा करकार हली मच्छ्छीन

शिता दुरत््कश्यरका. अबोधत । कवरान्निबोई हधथकश्यरकार चरकाहे तजतिनरका करकारर्गं पथस्ततर हवरान्निबो, कश्यदिलद वकश्यतकति कवरान्निबो उसे च्रकाने करका हबोधत । क्षुनर
नहलीं आतिरका तिवरान्निबो उसकरका हवरान्निबोनरका वकश्यथ्थ हह . कबोधत । क्षुमच्छ ऐसरका हली सच
ू नरका अधधकरकार अधधनिशिता दुरनकश्यम के सरकाथ

हबोधत । क्षुआ. बोधत । ड़े जवरान्निबोश के सरकाथ, संसद के अधधकरकार से ्रकार्गं पथस्ततू सूचनरका अधधकरकार अधधनिशिता दुरनकश्यम क की धरकार

भीडी धडीरे-धडीरे भीौंथरली पड़ने ्र्गं पथस्ततडी थडी. वहसे भीडी सूचनरका अधधकरकार अधधकरकार िरकाइ् म शिता दुरत््खडी
इबोधत । रकारति कवरान्निबो पढ़ने क की इजरकाजति तिवरान्निबो देतिरका थरका, ्ेफकन उसे शिता दुरत््खतिे समकश्य कश्यदिलद फकसडी कम्थचरकारली
ने र्गं पथस्तत्ति मंशरका से करकाम शिता दुरत््कश्यरका हह , तिवरान्निबो उसपर करकार्थवरकाहली करने क की इजरकाजति करकानन
ू के अंदर
नहलीं थडी. जन्वरान्निबोकपरका् के समथ्थक मरकान रहे थे फक भ्रषटरकाचरकारली कवरान्निबो दंड्ति करने करका करकाकश्य्थ
ऐसडी संस्य धारा थरका दवरकाररका शिता दुरत््कश्यरका जरका सकतिरका थरका जवरान्निबो अधधकरकारसंप्न हवरान्निबोने के सरकाथ -सरकाथ स्य धारा वरकाकश्य्ति
भीडी हवरान्निबो. इससे जन्वरान्निबोकपरका् आंदवरान्निबो्न करका ज्म हबोधत । क्षुआ.
सच
ू नरका अधधकरकार कवरान्निबो हवरका देने के शिता दुरत््ए अरववंद ने पररवति्थन नरकाम क की संस्य धारा थरका खवरान्निबो्ली थडी.
मर्गं पथस्ततर सच
ू नरका अधधकरकार के शिता दुरत्शधथ् पड़तिे दिलदन् म हली जन्वरान्निबोकपरका् आंदवरान्निबो्न च्रका तिवरान्निबो
अरववंद उसम कूद पड़े. अ्नरका उस आंदवरान्निबो्न के मणियोबोधत । क्षु खकश्यरका बोधत । ने, ्ेफकन जन्वरान्निबोकपरका् बिबोधत । ् के
नरकाम पर ररकाजकश्य सभीरका म जवरान्निबो ररकाजनडीनिशिता दुरतिक नरकाटक हबोधत । क्षुआ, उससे परू रका देश कश्यह जरकान र्गं पथस्ततकश्यरका फक
देश के घरकाघ नेतिरका ऐसरका कवरान्निबोई करकाम नहलीं करनरका चरकाहतिे , तजससे उनक की स्तिरका पर खतिररका नजर
आए. मर्गं पथस्ततर अ्नरका और केजरलीवरका् के आंदवरान्निबो्न करका इतिनरका असर तिवरान्निबो हबोधत । क्षुआ थरका फक जनतिरका

ररकाजनेतिरकाओं के नक्ली मख
बोधत । क्षु दट् कवरान्निबो पहचरकानने ्र्गं पथस्ततडी थडी. ववशेषकर कश्यव
बोधत । क्षु रकावर्गं पथस्तत्थ जवरान्निबो आधथ्थक
उदरकारलीकरण के बोधत । रकावजद
ू देश के दिलदवरकाशिता दुरत््कश्येपन जहसडी तस्य धारा थनिशिता दुरति देख , स्य धारा वकश्यं कवरान्निबो मच्छ्रका हबोधत । क्षुआ महसस

कर रहरका थरका. ववशेषकर 2007 म पंज
ू डीवरकाद करका र्गं पथस्ततबबोधत । क्षु बोधत । रकाररका िूटने के बोधत । रकाद आई मंदली के बोधत । रकाद से .
मवरान्निबोहभींर्गं पथस्तत करका शिता दुरत्शकरकार वहली कश्यव
बोधत । क्षु रकावर्गं पथस्तत्थ अरववंद केजरलीवरका् से जड़
बोधत । क्षु तिरका च्रका र्गं पथस्ततकश्यरका. ‘आम आदमडी
परकाटर’ क की सि्तिरका म उसकरका बोधत । ड़रका कश्यवरान्निबोर्गं पथस्ततदरकान हह.
सवरका् हह फक ररकास्य धारा तिरका फकसकरका अचमच्छरका हह. अ्नरका करका फक अरववंद करका? जहसरका अ्नरका हजरकारे और
फकरन बोधत । ेदली मरकाननरका हह, स्तिरका से दरू रहकर एक दबोधत । रकाव र्गं पथस्ततबोधत । क्षु ुरप क की भीरकांनिशिता दुरति करकाम करनरका अचमच्छरका
रहेर्गं पथस्ततरका; कश्यरका फिर द्द् म घस
बोधत । क्षु कर उसक की सिरकाई करने करका—जहसरकाफक अरववंद केजरलीवरका्
करनरका चरकाहतिे ह्. इसकरका जवरकाबोधत । ढूंढने के शिता दुरत््ए हम बोधत । हबोधत । क्षुति दरू जरकाने क की जरूरति नहलीं हह .

र्गं पथस्ततडीतिरका(5/2) म बोधत । हबोधत । क्षुति पह्े कह दिलदकश्यरका र्गं पथस्ततकश्यरका हह—सं्कश्यरकास्राम्यः कम्थकश्यवरान्निबोर्गं पथस्ततशच निशिता दुरन्राम्यःशेकश्यसकररकाव बोधत । क्षुभीद/तिकश्यवरान्निबोस्य धारा तिबोधत । क्षु
कम्थसं्कश्यरकासरका्कम्थकश्यवरान्निबोर्गं पथस्ततवरान्निबो ववशिता दुरत्शषकश्यतिे.

हवरान्निबो सकतिरका हह द्द् म परकांव रखने से कबोधत । क्षुमच्छ मच्छ्छींटे दरकामन पर आएं . ्ेफकन जवरान्निबो अपने शिता दुरत््ए
नकश्यरका ररकास्य धारा तिरका चन
बोधत । क्षु तिे ह्, उनके शिता दुरत््ए कश्यह स्य धारा वरकाभीरकाववक हली हह. अबोधत । कश्यह अरववंद पर हह फक वे मच्छ्छींट्

क की परवरकाह फकए बिबोधत । नरका आर्गं पथस्तते बोधत । ढ़तिे ह् कश्यरका फकनरकारे-फकनरकारे रहकर केव् ररकाजनडीनिशिता दुरति करनरका
चरकाहतिे ह्. वहसे अबोधत । तिक उ्ह्ने जवरान्निबो फककश्यरका हह उससे ्र्गं पथस्तततिरका हह फक वे च बोधत । क्षुनदनिशिता दुरतिकश्य् से बोधत । चकर
च्नेवरका्े नेतिरका नहलीं ह्. कश्यहली बोधत । रकाति उ्ह दस
ू र् से अ्र्गं पथस्तत बोधत । नरकातिडी हह. कश्यहली उनक की दिलदन्दिलदन
बोधत । ढ़तिडी खकश्यरकानिशिता दुरति करका प्रतिडीक हह. वे भीरकारतिडीकश्य ररकाजनडीनिशिता दुरति के नए शिता दुरत्मथक ह् , तजसम आदश्थ भीडी हह
और भीरपूर ्वरान्निबोकवप्रकश्यतिरका भीडी. दवरान्निबोन् कवरान्निबो सरकाधनरका बोधत । ड़डी तिपस्य धारा कश्यरका करका करकाम हह. पर जवरान्निबो सरकाध ्े
जरकातिे ह्, वे इनिशिता दुरतिहरकास नकश्यरका र्गं पथस्ततढ़ हली ्ेतिे ह् . ववधरकानसभीरका चबोधत । क्षुनरकाव् के प्रचरकार के ददररकान अरववंद
केजरलीवरका् के सरकाथडी अपने हरकाथ् म फिलम ‘नरकाकश्यक’ करका पवरान्निबोस्य धारा टर ्ेकर च्तिे थे . उस फिलम
म दिलदखरकाकश्यरका र्गं पथस्ततकश्यरका थरका फक कश्यदिलद सचमबोधत । क्षुच कबोधत । क्षुमच्छ करने करका संकलप हवरान्निबो तिवरान्निबो 24 घंटे करका समकश्य भीडी
पकश्यरका्थप्य वति हवरान्निबोतिरका हह. ्वरान्निबोर्गं पथस्तत नहलीं चरकाहतिे फक आम आदमडी करका नरकाकश्यक फिलमडी नरकाकश्यक से ‘फिसड्डी’
सरकाबिबोधत । ति हवरान्निबो. सचचे कम्थकश्यवरान्निबोर्गं पथस्ततडी प्-निशिता दुरमच्छन नहलीं धर्गं पथस्ततनतिे, केव् अवसर देखतिे ह्, तिभीडी तिवरान्निबो वे मच्छवरान्निबोटेसे सिर कवरान्निबो भीडी कश्यरकादर्गं पथस्ततरकार बोधत । नरका जरकातिे ह्. और अंति म दिलदनकर क की प्रेरणरकादरकाकश्यडी कववतिरका क की
पंतकतिकश्यरकां जवरान्निबो उ्ह्ने जकश्यप्रकरकाश नरकाररकाकश्यण के शिता दुरत््ए शिता दुरत््खडी थडी—
सेनरकानडी करवरान्निबो प्रकश्यरकाण अभीकश्य, भीरकावडी इनिशिता दुरतिहरकास तिम्म
बोधत । क्षु हरकाररका हह
कश्ये नखति अमरका के बोधत । झ
बोधत । क्षु तिे ह्, सरकाररका आकरकाश तिम्म
बोधत । क्षु हरकाररका हह.

© ओमप्रकरकाश कशकश्यप
* उष्ठवरान्निबो, जरकार्गं पथस्ततवरान्निबो, और जरकानकरकार शेषष्ठ पबोधत । क्षुरुष् के सरकात्नधकश्य म ज्ञान परकान प्ररकाप्य वति करवरान्निबो । ववदवरकान ु
मनडीषडी जन् करका कहनरका हह फक ्क्कश्य प्ररकातप्य वति करका मरकार्गं पथस्तत्थ उसडी प्रकरकार द र्गं पथस्तत
बोधत । क्षु ्थम हह तजस
प्रकरकार मच्छबोधत । क्षुरे के पहनरका फककश्ये र्गं पथस्ततकश्ये धरकार पर च्नरका.