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Hindi Project

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Hindi Project

1)छम-छम बूद
ँ े बरखा की

छम-छम बूँदे बरखा की


ले कर आई है सं गीत नया
हरियाली और प्रेम का
बना हो जै से गीत नया
मनभावन-सा लगे हैं सावन
हर चितवन हो गई है पावन
मे घों ने मानों झमू कर
धरती की प्यास बु झाई है
खे लकर खे तों में
फैलकर रे तों में
मतवाली बरखा आई है
सं ग अपने
त्यौहारों की भी
खु शहाली वो लाई है

स्मिता प्रसाद दारशे तकर

2)ये बारिश की बूँदें


ये बारिश की बूँदें
इतना शोर क्यों मचा रही हैं ?
या किसी के दिल का
हाल सु ना रहीं हैं ?

अहसास जो कह ना पाए कोई,


इतना ही पावन और शीतल है ,
जो मन में तूफ़ान मचा रहा है ,
इन्हीं बारिश की बूँदों की तरह,
वो भी बरसाना चाहता है
पर बरस ना पता है ,
गर बरसे गा तो
ऐसे ही ज़ोर से बरसे गा,
शोर मचाएगा, और अं त में
खु शी भी पाएगा!!
आस्था

3)आसमान पर छाए बादल

आसमान पर छाए बादल

बारिश ले कर आए बादल

गड़-गड़, गड़-गड़ की धु न में

ढोल-नगाड़े बजाए बादल

बिजली चमके चम-चम, चम-चम

छम-छम नाच दिखाए बादल

चले हवाएँ सन-सन, सन-सन

मधु र गीत सु नाए बादल

बूँदें टपके टप-टप, टप-टप

झमाझम जल बरसाए बाद ल

झरने बोले कल-कल, कल-कल

इनमें बहते जाए बादल

चे हरे लगे हँ सने -मु सकाने

इतनी खु शियाँ लाए बादल

4)बारिश का मौसम है आया

बारिश का मौसम है आया ।

हम बच्चों के मन को भाया ।।
‘छु’ हो गई गरमी सारी ।

मारें हम मिलकर किलकारी ।।

काग़ज़ की हम नाव चलाएँ ।

छप-छप नाचें और नचाएँ ।।

मज़ा आ गया तगड़ा भारी ।

आँ खों में आ गई खु मारी ।।

गरम पकौड़ी मिलकर खाएँ ।

चना चबीना खूब चबाएँ ।।

गरम चाय की चु स्की प्यारी ।

मिट गई मन की ख़ु श्की सारी ।।

बारिश का हम लु त्फ़ उठाएँ ।

सब मिलकर बच्चे बन जाएँ ।।

– दीनदयाल शर्मा

5)बूद
ँ ें भागी, बूद
ँ ें दौड़ी

बूँदें भागी, बूँदें दौड़ी

निकली है बनठन के दे खो

छाते और मु निया की जोड़ी

बादल भरकर आए कहाँ से


यहाँ पे आके चु प्पी तोड़ी

मौसम है यह ठं डा-ठं डा

आओ खाएँ गरम कचौड़ी

मु झे ऐसा लगा अभी कि

बूँदें भागी, बूँदें दौड़ी …

6)वर्षा आई बहार आयी

वर्षा आई बहार आयी,


प्रकृति ने अपनी कृपा बरसाई ।
पे ड़ पौधों में हरे भरे रं गों में रं ग कर अपनी खु शी दर्शाई ।।

वर्षा आई बहार आयी,


किसानों के लिए लहराती फसल का सं केत लाई ।
प्रेमियों के मन में प्रेम की ज्योत जलाई ।।

वर्षा आई बहार आयी,


मन आनं द से झमू उठा ।
वह प्रफुल्लित हो कर खु शियों से फू ल उठा ।।

वर्षा आई बहार आयी,


जीवन का सारा दुख दर्द ना जाने कहां गु म हो गया ।
वर्षा आई बहार आयी ।।

विष्णु

 7)रिमझिम रिमझिम बारिश आई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई,


काली घटा फिर है छाई ।।

सड़कों पर बह उठा पानी,


कागज़ की है नाव चलानी ।।
नु न्नू-मु न्नू-चु न्नू आए,
रं ग-बिरं गे छाते लाए ।।

कहीं छप-छप, कहीं टप-टप,


लगती कितनी अच्छी गपशप ।।

रिमझिम बारिश की फौहारें ,


मन को भातीं खूब बौछारें ।।

बारिश की यह मस्ती है ,
हो चाहे कल छुट्टी है ।।

अमृ ता गोस्वामी

All above Source: hindipoem.org

8.यूँ गरजे यूँ बरसे बादल–

यूँ गरजे यूँ बरसे बादल,


हवा भी ज़ोर से चलती है ।

मु झे बता दो ऐ चलते बादल,


बारिश कहाँ पे रहती है ।

क्यूँ पहले तु म बादल आते ,


फिर बारिश आती है ,

मे री बचपने को दे खकर,
माँ मु झे ये समझती है ।
ये बारिश बनती बादल से ही,
सो बादल पहले आते हैं ,

इन बारिश की बूंदों से ही,


सबका मन हर्षाते हैं ।

9. जब-जब पानी आता है –


जब-जब पानी आता है
पत्ते , फू ल खिलाता है
बरखा रानी आती है
रिमझिम पानी लाती है ।

पानी आता झर-झर


बादल गरजते गर-गर-गर
बिजली रानी चमकती है
लगता अच्‍छा नभ मं डल।

कभी आता ज्यादा पानी


कभी आता पानी कम
कभी कहीं पर बाढ़ बोलती
कभी बोलता सूखापन।

10.  देखो बसंत ऋतु है आयी–


दे खो बसं त ऋतु है आयी।
अपने साथ खे तों में हरियाली लायी।

किसानों के मन में हैं खु शियाँ छाई।


घर-घर में हैं हरियाली छाई।
हरियाली बसं त ऋतु में आती है ।
गर्मी में  हरियाली चली जाती है ।

हरे रं ग का उजाला हमें दे जाती है ।


यही चक् र चलता रहता है ।

नहीं किसी को नु कसान होता है ।


दे खो बसं त ऋतु है आयी।

11. काला-धोला, बादल–


काला-धोला, बादल आया,
सं ग ये अपने , बरखा लाया।

रिम-झिम का सं गीत सु नाता,


खु शियों का सं देशा लाया।

जं गल महका चिड़िया चहकी,


नाचा मोर पपीहा गाया।

काला-धोला बादल आया,


वर्षा की बौछारें लाया।

All above source; hindify.org

12. वर्षा के स्वागत में


वर्षा के स्वागत में तोते
उड़ते नभ में खु श होते
सारस ऊंची टे र लगाते
दरू -दरू तक उड़ते जाते

कुह-ू कुहू कर रहे पपीहे


नव साहस भर रहे पपीहे

रही न पीछे कहीं टिटहरी


सखी बनी वर्षा की गहरी

बता रहे बच्चे बकरी के


उछल-कू द के नए तरीके

फुदक रही चिड़िया की टोली


बादल है सबके हमजोली

ताक रही बच्चो की बारी


नाव चलाने की तै यारी

बादल बरसे लगा ठहाके


आसमान में बगु ले झांकें

– डॉ. जगदीशचंद ्र शर्मा

Source: hindiyatra.com
13.छम-छम बूद
ँ े!

छम-छम बूँदे बरखा की


ले कर आई है सं गीत नया
हरियाली और प्रेम का
बना हो जै से गीत नया
मनभावन-सा लगे हैं सावन
हर चितवन हो गई है पावन
मे घों ने मानों झम
ू कर
धरती की प्यास बु झाई है
खे लकर खे तों में
फैलकर रे तों में
मतवाली बरखा आई है
सं ग अपने
त्यौहारों की भी
खु शहाली वो लाई है

– स्मिता प्रसाद दारशे तकर

Source;cleanstudy.com

14. सावन में तन मन जलाए

सावन में तन मन जलाए


हाय रे बे दर्दी साजन!
ते रे बिन जिया न जाए
हाय रे बे दर्दी साजन!

धरती प्यासी आँ गन प्यासा


रीत गई हर अभिलाषा
दर्द बढ़ा कर क्या सु ख पाए
हाय रे बे दर्दी साजन!

बदरा बरसे कण-कण हरसे


हरी-हरी हरियाली सरसे
तू क्यों मे री जलन बढ़ाए
हाय रे बे दर्दी साजन!

सु न ले मे री कातर मनु हारें


कभी तो आ भूले-भटकारे
अब तो हाय अं ग लगा ले
हाय रे बे दर्दी साजन!

प्रीत की रीत वही पु रानी


तू क्या जाने ओ अभिमानी
राधा को क्या कपट दिखाए
हाय रे बे दर्दी साजन!

प्रिया सै नी

Hindipoem.org

15.

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