12 Biology Chapter 1 Notes
12 Biology Chapter 1 Notes
BY – Brijesh Sir
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जीव ं में जनन [Reproduction in organisms] हार्ी 65
जीवन अवलि (lifespan):- मगरमच्छ 60
जीव के जन्म से िेकर उनके प्राकृ बिक मृत्यु तक के समय कछु आ 100 – 150
अवलि या काि क जीवन अवलि या जीवन काि कहते हैं| बिल्ली 35 – 40
जीव का जन्म – वृबि – बकश रावस्था – जनन – अन्तः मृत्यु क
प्राप्त जनन [Reproduction] / Re + production
Note :- प्रत्येक जीव का जीवन काि अिग – अिग ह ता है, वह प्रक्रम लजसमे क ई भी जीव अपने जैसे समान सं तबत क
कु छ जीव की जीवन अवलि कु छ ही बिन और कु छ जीव कई जन्म िेता है, जनन कहिाता है |
हजार वर्ष जीबवत रहते है | जैसे – बततिी का जीवन काि 1 – सं तबत के जन्म के िाि उसमे वृबि ह ती
2 सप्ताह जिबक लसक या वृक्ष का जीवन काि 3000 – है और पररपक्व ह ने के िाि वह नई
4000 वर्ो तक ह ती है | सं तबत क जन्म िेती है | यह क्रम एक
जीव ं के जीवन अवलि का उनके आकार से सं िं ि पीढ़ी से िूसरी पीढ़ी में चिता रहता है |
जीव ं के जीवन अवलि का उनके आकार से क ई सं िं ि नहीं ह ता इस चक्र में जन्म, वृबि तर्ा मृत्यु,
हैं अर्ाषत जीव ं के आकार समान ह ने पर उनकी जीवन अवलि सम्मिलित है |
समान नहीं ह ती है | जनन के प्रकार [Types of Reproduction]
जैसे – कौआ एवं त ता का आकार िगभग समान है परन्तु जीव ं में जनन ि प्रकार से ह ता है –
इनकी जीवन अवलि में िहुत अंतर ह ता है – कौआ का जीवन i. अिैंबगक जनन (Asexual Reproduction)
अवलि 15 वर्ष, वही त ता का जीवन – अवलि 140 वर्ष ह ता है ii. िैंबगक जनन (Sexual Reproduction)
| अिैंबगक जनन (Asexual Reproduction) –
जि सं तबत की उत्पबत एकि जनक से ह ती है त उसे अिैंबगक
जनन कहते है | िैक्टीररया, कवक प्र ट ज आ, शैवाि आबि में
अिैंबगक जनन ह ता है |
अिैंबगक जनन से प्राप्त / उत्पन्न सं तबत आनुवंलशक रूप से समान
जीव के जीवन अवलि का अंत क्या है ? ह ने के सार् – सार् आपस में भी समान ह ते हैं, इस प्रकार से प्राप्त
जीव के जीवन अवलि का अंत मृत्यु ही है | प्रत्येक जीव जि सं तबत क एकपुं जक या क्ल न कहा जाता है |
अपनी जीवन – अवलि पूर्ष कर िेता है, ति वह प्राकृ बतक मृत्यु अिैंबगक जनन के प्रकार (Types of Asexual Reproduction)
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एकक लशकीय जीव जैसे अमीिा में जनन क लशका बवभाजन िड़ी ह ने पर पैतृक जीव से अिग ह कर नये जीव का बनमाषर् करता
(बवखं डन) द्वारा ह ता है, लजसमें जनक जीव पूर्षरूप से सं तबत है, मुकुिन कहते है | इस प्रकार की जनन बनम्न श्रेर्ी के जीव ं जैसे
जीव में िट जाता है और शेर् क ई मृत भाग नहीं िचता है – हाइडर ा, यीस्ट (कवक) में ह ता है |
अतः एकक लशकीय जीव ं की प्राकृ बतक मृत्यु नहीं ह ती है बनम्न श्रेर्ी का जीव – ex – हाइडर ा, यीस्ट
इसलिए अमीिा जैसे एकक लशकीय जीव ं क अमर कहा जाता असमान बवभाजन
है | अबतवृबि / अिीका (bud) / मुकुि का बनमाषर्
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जैम्यूि क्या है ? Note :- काबयक प्रविषन में ि न ं जनक भाग नहीं िेते हैं
स्पं ज में पाई जाने वािी अिैंबगक जनन सं रचना अतः यह एक अिैंबगक जनन हैं
क जैम्यूि कहते हैं | काबयक प्रविषन के प्रकार -
जैम्यूि, अन्तजाषत मुकुिन का उिहारर् है | a. प्राकृ बतक काबयक प्रविषन :- प्रकृ बत में, प्राकृ बतक रूप से पािप के
ट रूिा अवस्था क्या है ? काबयक भाग द्वारा नये पािप के काबयक भाग द्वारा नये पािप का
बवशेर् पररम्मस्थबतय ं में मुकुिन के िौरान जीव के बनमाषर् करना
शरीर से अनेक कलिका / मुकुिन का बनमाषर् b. कृ बिम काबयक प्रविषन :- मानव द्वारा पािप ं के काबयक भाग का
ह ता है, ति इस अवस्था क ट रूिा अवस्था उपय ग कर नये पािप का बनमाषर् करना
कहते है | इसके प्रकार –
पुबटभवन (cyst formation):- किम िगाना िाि िगाना र पन
प्रबतकू ि पररम्मस्थबतय ं में अमीिा अपने कू टपाि क सं कु लचत कर
ग िाकार ह कर अपने चार और बिस्तरीय आवरर् िना िेता है प्राकृ बतक काबयक प्रविषन
इस सं रचना क पुटी या syst कहते है जड़ द्वारा (By Root) i. कं िीि मूि ii. काष्ठीय मूि
अनुकूि पररम्मस्थबतय ं आने पर पुटी में िहुबवखं डन ह ता है, तने द्वारा (By stem)
Ex- शकरकं ि शीशम
लजससे अमीवीय िीजार्ु या स्यूड प डीय स्प र का बनमाषर् ह ता पर्ष द्वारा (By leaf)
है तर्ा इसमे प्रकीर्षन एवं िीजार्ुओ के अंकुरर् से नये जीव का पिप्रकलिका द्वारा (By bulbils)
बनमाषर् ह ता है |
पुटी का बनमाषर् अपनी सुरक्षा, क्षबत से िचाव एवं शुष्कन क
र कने के लिए करता है | तने द्वारा काबयक प्रविषन
अपखं डन / पुनषजनन / पुनरुद्भवन (Regneration)– भूबमगत तना अिषवायवीय तना वायवीय तना
इस प्रकार के जनन में जीव का पर्ाषभकाय स्तं भ
शरीर बकसी कारर् वश ि या ि कं ि प्रकं ि घनकं ि श्ल्ल्कंि ex- नागफनी
(Tuber) (Rhizome) (Corn) (Bulb)
से अलिक भाग में िट जाता है
आलू अदरक अरबी प्याज / लहसुन
तर्ा प्रत्येक भाग अपने ख ए हुए
भाग क बवकलसत कर नये जीव अिषवायवीय तना
के रूप में बवकलसत ह जाते है | उपरी भुस्तरी (Runner) ex- िूिघास
अन्तः भुस्तरी (sucker) ex- पुिीना
काबयक प्रविषन (vegetative propagation):-पािप के का भुस्तरी (stolon) ex- स्टर िेरी
काबयक भाग जैसे जड़ तना (stem) पबत(leaf) इत्याबि द्वारा भुस्तररका (offset) ex- जिकु म्भी
नये पािप के बनमाषर् की प्रबक्रया क काबयक प्रविषन कहा जाता Note:- आिू के कं ि से नये पािप बवकलसत करने के लिए कम से
हैं कम एक या ि आख/कलिका वािा आिू का टु कड़ा जमीन में ि या
काबयक प्रविष/प्र पग्युि (propagule):- जाना चाबहए
काबयक प्रविषन में भाग िेने वािी पािप सरंचनाए जैसे जड़ तना पत्ती
काबयक प्रविष कहिाती हैं |
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अिैंबगक जनन से उत्पन्न सं तबत में क ई लभन्नता नही आती हैं,
अतः इन सं तबतय में मौसमी पररवतषन या बकसी बिमारी के प्रबत
प्रबतर िकता प्राप्त नही कर पाती |
अिैंबगक जनन में बवबवन्ताएँ उत्पन्न नही ह ती अतः बवकास में
इसका क ई य गिान नही ह ता |.
Q. िं गाि का आतं क बकसे कहा जाता हें ? अिैंबगक जनन का महत्व :-
Ans:- जिकु म्भी (वाटर हायलसंर्) (i) िीजरबहत पािप में काबमक प्रविषन द्वारा जनन करवाना
वानस्पबतक/वैज्ञाबनक नाम – आइक बनषया बक्रसेंप्स जैसे – गनना, आिू अन्नारस etc.
. (Eichornia cresseps) (ii) ऐसे पािप लजसमे िीज अंकुरर् की क्षमता नहीं ह ती है
Q. िं गाि का आतं क बकसे कहा जाता हैं और क्य ं ? उनमें आबयक प्रविषन द्वारा नयें पािप का बनमाषर् करना |
Ans:- वाटर हायलसंर् (जिकु म्भी) (iii) अिैंबगक जनन, जनन की सरि एवं तीव्र बवलि है |
क्य बं क- जिकु म्भी एक "जिीय पुष्पी पािप हैं, ज ठहरे हुए (iv) काबयक प्रविषन द्वारा फुि और फि िहुत कम समय में प्राप्त
पानी (जैसे- तिाि) में सवाषलर्क वृबि करता हैं और यह जि की O2 बकये जा सकते है |
क खीच िेता हैं, यही कारर् हैं की इसे जिाशय ं की महाबवपबत भी िैंबगक जनन (Sexual Reproduction):-
कहा जाता हैं |चुबक िं गाि का मुख्य भ जन मछिी है अतः मछलिय ं जनन की वैसी बवलि, लजसमे बवपरीत लिं ग वािे (नर और मािा)
के मरने से भ जन का अभाव ह ता हैं इसलिए इसे िं गाि के आतं क ि न ं जनक भाग िेते है तर्ा युग्मक के बनमाषर् एवं युग्मक सं ियन
के रूप में जाना जाता हैं | द्वारा, नये जीव ं का बनमाषर् ह ता है, िैंबगक जनन कहिाता है |
Q. जिाशय ं की महाबवपबत "बकसे कहा जाता हैं ? वायवीय तने द्वारा काबयक प्रविषन :-
Ans:- जिकु म्भी/वाटर हायलसंर्/आइक बनषया बक्रसेप्स पर्ाषभकाय स्तं भ जा टु कड़ा पािप से अिग ह कर
भारत में जिकु म्भी का आगमन इसके पुष्प की एवं पबत्तय ं की एक नये पािप के रूप में बवकलसत ह ता है |
सुन्दरता के कारर् हुआ | पिप्रकलिका के द्वारा काबयक प्रविषन :-
जिकु म्भी/वाटर हायलसंर् में काबयक प्रविषन पुष्प के स्थान पर िहुक लशकीय मांसि कलिका का
िहुत तीब्र गबत (द्रुत गबत) से ह ता हैं अतः बनमाषर् ह जाता है लजसे Bulbil या पिप्रकलिका
यह िहुत कम समय में पुरे जिाशय क घेर कहते है, यह पािप से जमीन पर बगर कर नयें पािप
िेता हैं | का बनमाषर् करता है |
Q. अपेक्षाकृ त सािारर् जीव जैसे – शैवाि, कवक में जनन की पबत्तय ं द्वारा काबयक प्रविषन :-
समान्य बवलि कौन सी हैं ? ब्राय बफिम की पबत्तय ं म टी (मांसि) तर्ा बकनार ं पर कटी -फटी
Ans:- अिैंबगक जनन (Asexual Reproduction) ह ती है, लजससे अपस्थाबनक पर्ष कलिकाएँ उत्पन्न ह ती है, ज नयें
Note:- पािप का बनमाषर् करती है |
बनम्न श्रेर्ी एवं उच्च श्रेर्ी के सभी पािप ” में जनन अिैंबगक व िैंबगक जनन की बवशेर्ताएँ :-
िैंबगक ि न ं बवलिय ं से ह ता हैं | (i) िैंबगक जनन बद्वजनकीय प्रबक्रया हैं, अर्ार्ष इसमें नर एवं मािा
उच्च श्रेर्ी िे जं तुओ ं में के वि िैंबगक जनन ही ह ता हैं ि न भाग िेती हैं |
अिैंबगक जनन की कमी (Disadvantage of Asexual (ii) इसमें युग्मक का बनमाषर् एवं युग्मक का सियन ि न ह ता हैं
Reproduction) :-
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(iii) िैंबगक जनन, अिैंबगक जनन की अपेक्षा िम्बी, जबटि एवं िीमी इसमें 50 से 100 वर्ो में के वि एक िार पुष्पन ह ता हैं |
प्रबक्रया हैं | ii) स्टर ांबविैम्मिस कु म्मन्तअना (िाँ क्स की तरह िूसरा पािप ):-
(iv) िैंबगक जनन से उत्पन्न सं तबत आपस में या जनक के समान नहीं इसे नीिा कु रैंजी भी ख जाता हैं
ह ती हैं अर्ार्ष इसमें बवलभन्ताएँ ह ती हैं | इसमें 12 वर्ो में एक िार पुष्पन ह ता हैं |
जीवन चक्र की अवस्थाएँ :-
प्रजनन के आिार पर जीव के जीवन चक्र क तीन अवस्थाओं में
िाँ टा गया है –
जीवन चक्र की अवस्था Note:- नीिा कु रैंजी, के रि, कनाषटक, तबमिनाडू की घाबटय ं में
पाया जाता हैं |
बपछिी िार 2018 तर्ा उससे पहिे 2006 में नीिा कु रैंजी में
बकश रावस्था प्रजनन अवस्था जीर्ाष अवस्था पुष्पन हुआ र्ा लजससे सभी घाबटयाँ नीिे, वैगनी रंग के पुष्प ं से
(Juvenile phase) (Reproduction phase) (Senescent phase)
ढक गई र्ी
बकश रावस्था (juvenile phase):- जन्म से प्रजनन तक की म न काबपषक पािप के उिाहरर् :-
अवस्था – एकवर्ीय म न काबपषक पािप – Ex:- गेहँ , िान
जीव के जीवन चक्र की प्रजनन पूवष अवस्था | बद्ववर्ीय म न काबपषक पािप -Ex – मुिी , गाजर
इसमें लजव तीव्रता से वृबि करता हैं | िहवर्ीय म न काबपषक पािप –Ex:- नीिा कु रैंजी
पािप में इसे काबयक अवस्था कहा जाता हैं | प लिकाबपषक पािप (polycarpic plant) :-
जीव में बकश रावस्था/काबयक अवस्था की अवलि अिग-अिग ऐसे पािप ज अपने पुरे जीवन काि में कई िार पुष्पन एवं फिन
ह ती हैं | करते हैं प लिकाबपषक पािप कहिाते हैं |
प्रजनन अवस्था (Reproduction phase):- जीवन चक्र की Note:- ज पािप एक बनलित मौसम या ऋतू में फि उत्पन्न करते
इस अवस्था में जीव में िैंबगक बवकास एवं पररपक्वता आती हैं | हैं , उन्हें मौसमी फि कहा जाता हैं |
यौवनारंभ (puberty):- प्रजनन काि की आरंलभक अवस्था क उिाहरर् :- आम, अंगूर, िीची, कटहि ----
यौवनारंभ कहते हैं | जन्तुओ ं क प्रजनन के आिार पर ि भाग में िाँ टा गया हैं
पुष्पी पािप (उच्च पािप ):- में पुष्पन की बक्रया प्रजनन 1. मौसमी प्रजनक) (seasonal breaders)
अवस्था के आरंभ एवं काबयक प्रविषन की समाबप्त क िशाषती हैं 2. सतत् प्रजनक (continuous breaders)
Q. िैंबगक दृबष्ट से पुष्पी पािप बकतने प्रकार के ह ते हैं ? मौसमी प्रजनक (seasonal breaders ):-
िैंबगक दृबष्ट से पुष्पी पािप ि प्रकार के ह ते हैं – ऐसे जन्तु या प्रार्ी ज बकसी बवलशष्ट मौसम या ऋतू में ही प्रजनन
(i) म न काबपषक पािप (monocarpic plant) Ex-िाँ क्स करते हैं , उन्हें मौसमी प्रजनक कहा जाता हैं |
की कु छ प्रजाबत | Ex:- मेढ़क , लछपबकिी , अलिकांश पक्षी
(ii) प लिकाबपषक पािप (polycarpic plant) Ex:- अंगूर सतत् प्रजनक (continuous breaders):-
म न काबपषक पािप (monocarpic plant):- ऐसे प्रार्ी या जं तु ज पुरे प्रजनन करने की क्षमता रखते हैं , उन्हें
ऐसे पािप ज अपने पुरे जीवन काि में के वि एक ही िार पुष्पन सतत् प्रजनक कहा जाता हैं |
एवं फिन करते हैं उन्हें म न काबपषक पािप कहा जाता हैं | Ex:- सभी प्राइमेट स्तनिारी जीव
उिाहरर् :- i) मेिाक ना िेम्बुसाईंडी (िाँ क्स की प्रजाबत) मानव एक सतत् प्रजनक हैं |
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मद्रचक्र (oestrus cycle):- युग्मक (gamete):- युग्मक िैंबगक जनन की इकाई हैं |
ननप्राइमेट स्तनिारी में पाए जाने वािे चक्र क मद्रचक्र कहा युग्मक सिैव अगुलर्त (n) ह ते हैं , चाहे जनक अगुलर्त ह या
जाता हैं | बद्वगुलर्त (युग्मक एक अगुलर्त क लशका हैं)
Ex:- गाय , भैस , कु त्ता , बिल्ली , बहरर् – युग्मक के प्रकार (type of gamete):- युग्मक की
ऋतु स्त्राव चक्र (Menstrual cycle):- आकाररकी (morphology) एवं काबयषकी (physiology)
सभी प्राइमेट्स स्तनिाररय में पाए जाने वािे चक्र क ऋतु स्त्राव चक्र के आिार पर युग्मक मुख्यतः तीन प्रकार के ह ते हैं –
या mc कहते हैं | Ex:- मनुष्य ,िन्दर , ग ररल्ला (i) समयुग्मकी (isogametic)
जीर्ष अवस्था (senescent phase) :- (ii) असमयुग्मकी (Anisogametic)
जीवन चक्र की वह अवस्था लजसमे जीव की प्रजनन क्षमता क्षीर्ष ह (iii) बवर्मयुग्मकी (Heterogametic)
जाती हैं तर्ा वृबि बवकास रुक जाती हैं जीर्ाषव्यवस्था कहिाता हैं| (i) समयुग्मकी / समयुग्मक (isogametic) :- ऐसे युग्मक ज
िैंबगक जनन की घटनाएँ (Events of sexual Reproduction):- आकाररकी (िाह्य रूप से ) एवं काबयषकी रूप से एक समान ह ते हैं ,
जीव द्वारा पररपक्वता प्राप्त करने के िाि उनमे िैंबगक जनन के लिए उन्हें समयुग्मकी कहा जाता हैं |
कु छ घटनाएँ एवं प्रबक्रयाएं ह ती है लजन्हें िैंबगक जनन की घटनाएँ ये युग्मक प्रायः शैवाि में पाये जातें हैं |
कहा जाता हैं | (ii) असमयुग्मकी (Anisogametic):- ऐसे युग्मक ज आकाररकी
बनर्ेचन के आिार पर जीव में िैंबगक जनन की घटनाएँ और रूप से समान ह ते हैं, परन्तु काबयषकी रूप से लभन्न ह ते हैं,
प्रबक्रयाओ क तीन भाग में िाँ टा गया हैं | असमयुग्मकी कहिाते हैं |
“िैंबगक जनन की घटनाएँ ” इस प्रकार के युग्मक भी शैवाि में पाए जाते हैं,
Ex :- स्पाइर गाइरा
(iii) बवर्मयुग्मकी / बवर्मयुग्मक (heterogametic):-
(B) बनर्ेचन
(A) बनर्ेचन पूवष घटनाएँ (C) बनर्ेचन पि घटनाएँ ऐसे युग्मक ज आकाररकी एवं काबयषकी ि न ं रूप से लभन्न ह ते हैं,
(fertilization) (post fertilization events)
(pre-fertilization events)
उन्हें, बवर्मयुग्मकी कहा जाता हैं |
युग्मको का युग्मन
इसमें नर युग्मक प्रायः छ टे या गबतशीि ह ते हैं, जिबक मािा
(i) युग्मक का बनमाषर् (युग्मक (ii) युग्मक स्थानांतरर् (i) युग्मक का बनमाषर् (i) भ्रूर्का बनमाषर् युग्मक िड़े और अगबतशीि ह ते हैं |
जनन)(Gametogenesis) (Gamete transfor) (gamete formation) (Embryogenesis)
जैसे :- फ्युकस (शैवाि) - मानव
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जीव में िैंबगकता
युग्मक जनन के िौरान जीव में तीन प्रकार से अिषसूिी बवभाजन
ह ता हैं
जनम्न श्रेणी के थैलाभ / पादप उच्च श्रणी के पादप व जन्तु
पादप अिष सूिी बवभाजन
(Meiosis)
समथैलसी जवषमथैलसी एकजलंगी उभयजलंगी
समर्ैिसी :- अर्ष - सम-समान (एक ही) म नेरा, , शैवाि , एनलजय स्पमष के जन्तुं
फंजाई , ब्राय फाईट
र्ैिस – अबवमेबित पािप शरीर
पररभार्ा :- एक ही पािप शरीर पर ि न ं जननांग (नर व मािा)
(i)युग्मनजीय अिष सूिी बवभाजन (zygotic meiosis):- जि
का ह ना समर्ैिसी कहिाता है | Ex:- कारा
जनक या मुख्य पािपकाय अगुलर्त (n) ह ता हैं , ति युग्मक का
बवर्मर्ैिसी :- नर एवं मािा जननांग का अिग – अिग पािप
बनमाषर् में समसूिी बवभाजन (mitosis) ह ता हैं तर्ा युग्मक के
शरीर पर ह ना बवर्मर्ैिसी कहिाता हैं |
सं ियन के िाि युग्मनज का बनमाषर् ह ता हैं , और युग्मनज में
Ex:- माकष लशया
अिष सूिी बवभाजन ह ता हैं लजसमे अगुलर्त जीव (पािप) का बनमाषर्
जन्तु
ह ता हैं
उिाहरर् :- म नेरा , फंजाई , शैवाि ,ब्राय फाइटा मे मुख्य
एकव िंगी (unisexual) पािपकाय अगुलर्त (n) ह ता हैं अतः इनमे युग्मनजीय अिषसूिी
विव िंगी (Bisexual)
बवभाजन ह ता हैं |
ऐसे प्राणी जजनमे जजनमें नर एवं मादा ऐसे प्राणी जजनमे नर एवं मादा जननांग
जनकीय जीव - नर जनक समसूिी नर युग्मक
जननागं अलग - अलग में पाए जाते हैं एक ही शरीर में पाए जाते हैं Ex:- युग्मनज अिषसूिी जीव या
के चआ या (n) बवभाजन (n)
Ex:- जतलचट्टा ु , जोक , स्पंज , टेपवमम (zygote) बवभाजन पािपकाय
उच्च श्रणी के कार्डेटा (जिताकृ मी ) मुख्य पािपकाय
बद्वगुलर्त (2n) अगुलर्त(n)
(अगुलर्त(n) मािा जनक समसूिी मािा युग्मक
बवभाजन (n)
युग्मक जनन
“ युग्मनजीय अिष सूिी बवभाजन ”
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Note:- पािप
उच्च श्रर्ी के जीव में युग्मनज में पररवतषन (Development) से
भ्रूर् और नये जीव का बनमाषर् ह ता हैं | आवृतिीजी पािप (Angiosprem)
Concept:
युग्मनज / जाइग ट हमेशा बद्वगुलर्त (Diploid-2n) ह ता हैं | बनर्ेचन के िाि
जाइग ट एक पीढ़ी से िुसरे पीढ़ी अर्ाषत् जनक से सं तबत के मध्य एक
महत्वपूर्ष कड़ी के रूप में भूबमका बनभाता हैं अतः यह प्रजाबत की (i) बनर्ेलचत अंडाशय से फि का बनमाषर् ह ता हैं |
बनरंतरता क िनाए रखता हैं | (ii अंडाशय की लभबत्त “ फिलभबत्त (pericarp) कहिाती हैं |
मानव के जीवन की शुरुआत एकि बद्वगुलर्त क लशका से ह ती हैं, (iii) िीजांड से िीज का बनमाषर् ह ता हैं |
लजसे युग्मनज या जाइग ट कहते हैं |
भ्रूर् द्भ
ं व (Embryogenesis):- युग्मनज में समसूिी बवभाजन एवं
क लशका बवमेिीकरर् द्वारा भ्रूर् के बवकास की प्रबक्रया क भ्रूर् द्भ
ं व
कहा जाता हैं |
क लशका बवभाजन :- क लशका बवभाजन से क लशकाओ की सं ख्या में
वृबि ह ती हैं अतः भ्रूर् का आकार िढता हैं
बकलशका बवमेिीकरर् :- क लशकाओ द्वारा एकबित ह कर बवलशष्ट
उत्तक, अंग एवं अंग तं ि ं का बनमाषर् करना –
प्रालर्य ं क प्रजनन के आिार पर ि भाग में िाँ टा गया हैं –
(i) अंडज/अंडप्रजक /oviparous
(ii) सजीवप्रजक/oviparous:-
अंडप्रजक/oviparous:- ऐसे प्रार्ी ज अंडे िे ते हैं, उन्हें अंड प्रजक
कहा जाता हैं |
उिहारर् :- सरीसृप , पं झी
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