Fundamental of Computer
Fundamental of Computer
कंप्यूटर क्या हैं ? (What is Computer) - Computer एक ऐसा Electronic Device है जो User द्वारा Input ककये गए Data में प्रकिया
करके सू चनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं , अर्ाा त् Computer एक Electronic Machine है जो User द्वारा कदए गए कनदे शों का पालन
करती हैं |
History and Development of Computer (कंप्यूटर का इकतहास और किकास)
Abacus - Computer का इकतहास लगभग 3000 िर्ा पुराना है | जब चीन में एक calculation Machine Abacus का अकिष्कार हुआ र्ा यह एक
Mechanical Device है जो आज भी चीन, जापान सकहत एकशया के अनेक दे शो में अंको की गणना के कलए काम आती र्ी| Abacus तारों का एक
फ्रेम होता हैं इन तारो में बीड (पकी हुई कमट्टी के गोले) कपरोये रहते हैं प्रारं भ में Abacus को व्यापारी Calculation करने के काम में Use ककया
करते र्े यह Machine अंको को जोड़ने, घटाने, गु णा करने तर्ा भाग दे ने के काम आती हैं |
Blase Pascal - शताब्दियों के बाद अनेक अन्य यां किक मशीने अंकों की गणना के कलए किककसत की गई । 17 िी शतािी में फ्रां स के गकणतज्ञ
ब्लेज पास्कल (Baize Pascal) ने एक यां किक अंकीय गणना यं ि (Mechanical Digital Calculator) सन् 1645 में किककसत ककया गया । इस
मशीन को एं कडं ग मशीन (Adding Machine) कहते र्े, क्योकक यह केिल जोड़ या घटाि कर सकती र्ी । यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के
कसद्धान्त पर काया करती र्ी । उसमें कई दााँ तेयुक्त चकररयााँ (toothed wheels) लगी होती र्ी जो घूमती रहती र्ी चकियों के दााँ तो पर 0 से 9 तक
के अंक छपे रहते र्े प्रत्येक चिी का एक स्र्ानीय मान होता र्ा जैसे –इकाई, दहाई, सै कड़ा आकद इसमें एक चिी के घूमने के बाद दू सरी चिी
घूमती र्ी Blase Pascal की इस Adding Machine को Pascaline भी कहते हैं |
Jacquard’s Loom - सन् 1801 में फ्रां सीसी बुनकर (Weaver) जोसेफ जेकाडा (Joseph Jacquard) ने कपड़े बु नने के ऐसे लूम (Loom) का
अकबष्कार ककया जो कपड़ो में कडजाईन (Design) या पैटना (Pattern) को काडा बोडा के कछद्रयु क्त पंचकाडो से कनयं कित करता र्ा | इस loom की
किशेर्ता यह र्ी की यह कपडे के Pattern को Cardboard के कछद्र यु क्त पंचकाडा से कनयं कित करता र्ा पंचकाडा पर कचिों की उपब्दस्र्कत अर्िा
अनुपब्दस्र्कत द्वारा धागों को कनदे कशत ककया जाता र्ा|
Charles Babbage - कप्यूटर के इकतहास में 19 िी शतािी को प्रारब्दिक समय का स्वकणाम युग माना जाता है । अंग्रेज गकणतज्ञ Charles
Babbage ने एक यां किक गणना मशीन (Mechanical Calculation Machine) किककसत करने की आिश्यकता तब महसू स की जब गणना के कलए
बनी हुई सारकणयों में Error आती र्ी चूाँकक यह Tables हस्त कनकमात (Hand-set) र्ी इसकलए इसमें Error आ जाती र्ी |चार्ल्ा बै बेज ने सन् 1822 में
एक मशीन का कनमाा ण ककया कजसका व्यय किकटश सरकार ने िहन ककया । उस मशीन का नाम कडफरें स इं कजन (Difference Engine) रखा गया,
इस मशीन में कगयर और साफ्ट लगे र्े । यह भाप से चलती र्ी । सन् 1833 में Charles Babbage ने Different Engine का किककसत रूप
Analytical Engine तै यार ककया जो बहुत ही शब्दक्तशाली मशीन र्ी | बै िेज का कम्प्प्यूटर के किकास में बहुत बड़ा योगदान रहा हैं । बै िेज का
एनाकलकटकल इं कजन आधु कनक कम्प्प्यूटर का आधार बना और यही कारण है कक चार्ल्ा बै िेज को कमप्यूटर किज्ञान का जनक कहा जाता हैं |
Dr. Howard Aiken’s Mark-I - सन् 1940 में किद् युत यां किक कम्प्प्यूकटं ग (Electrometrical Computing) कशखर पर पहुाँ च चुकी र्ी
।IBM के चार शीर्ा इं जीकनयरों ि डॉ. हॉिडा आइकेन ने सन् 1944 में एक मशीन किककसत ककया यह किश्व का सबसे पहला “किधु त यां किक
कंप्यूटर” र्ा और इसका official Name– Automatic Sequence Controlled Calculator रखा गया। इसे हािा डा किश्वकिद्यालय को सन् 1944 के
फरिरी माह में भे जा गया जो किश्वकिद्यालय में 7 अगस्त 1944 को प्राप्त हुआ | इसी किश्वकिद्यालय में इसका नाम माका- I पड़ा| यह 6 से कंड में 1
गु णा ि 12 से कंड में 1 भाग कर सकता र्ा|
A.B.C. (Atanasoff – Berry Computer) - सन् 1945 में एटानासोफ़ (Atanasoff) तर्ा क्लोफोडा बेरी (Clifford berry) ने एक
इलेक्ट्रॉकनक मशीन का किकास ककया कजसका नाम ए.बी.सी.(ABC) रखा गया| ABC शि Atanasoff Berry Computer का सं किप्त रूप हैं |
ABC सबसे पहला इलेक्ट्रॉकनक कडकजटल कंप्यूटर (Electronic Digital Computer) र्ा |
कंप्यूटर के भाग
2. C.P.U. - C.P.U का पूरा नाम सेन्ट्रल प्रोसेकसंग यूकनट (Central Processing Unit) हैं | इसका कहं दी नाम केन्द्रीय संसाधन इकाई
होता हैं | यह Computer का सबसे महत्वपूणा भाग होता हैं | अर्ाा त इसके कबना Computer कसस्टम पूणा नहीं हो सकता है , इससे
सभी Device जुड़े हुए रहते है जैसे- Keyboard, Mouse, Monitor आकद | इसे Computer का मब्दषतस्क (Mind) भी कहते है | इसका
मुख्य काया प्रोग्राम (Programs) को कियाब्दित (Execute) करना है इसके आलािा C.P.U Computer के सभी भागो, जैसे-
Memory, Input, Output Devices के कायों को भी कनयं कित करता हैं | C.P.U (Central Processing Unit) के तीन भाग होते है –
(a) A.L.U (Arithmetic Logic Unit) - एररथ्मेकटक एिं लॉकजक यूकनट को संिेप में A.L.U कहते हैं | यह यूकनट डाटा पर अंकगकणतीय कियाएाँ
(जोड़, घटाना, गु णा, भाग) और ताककाक कियायें (Logical operation) करती हैं | A.L.U Control Unit से कनदे श लेता हैं | यह मेमोरी (memory) से
डाटा को प्राप्त करता है तर्ा Processing के पश्चात सू चना को मेमोरी में लौटा दे ता हैं | A.L.U के काया करने की गकत (Speed) अकत तीव्र होती हैं | यह
लगभग 1000000 गणनाये प्रकत से कंड (Per Second) की गकत से करता हैं | इसमें ऐसा इलेक्ट्रॉकनक पररपर् होता है जो बाइनरी अं कगकणत (Binary
Arithmetic) की गणनाएाँ करने में सिम होता हैं |
(b) Memory - यह Input Device के द्वारा प्राप्त कनदे शों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश भी
कहााँ जाता है | मानि में कुछ बातों को याद रखने के कलये मब्दषतस्क होता है , उसी प्रकार मेमोरी (Memory) हैं | यह मेमोरी C.P.U का अकभन्न अंग है ,
यह एक सं ग्राहक उपकरण (Storage Device) हैं | अतः इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आं तररक मेमोरी (Internal
Memory), या प्रार्कमक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं |“Computer का िह स्र्ान जहााँ सभी सू चनाओ, आकडों या कनदे शों
को Store करके रखा जाता है मे मोरी कहलाती हैं |”
(c) C.U. -C.U. का पूरा नाम कंटर ोल यूकनट (Control Unit) होता हैं | C.U. हाडा िेयर कक कियाओ को कनयंकित और संचाकलत करता हैं | यह Input,
Output कियाओ को कनयं कित (Control) करता है सार् ही Memory और A.L.U. के मध्य डाटा के आदान प्रदान को कनदे कशत करता है यह प्रोग्राम
(Program) को कियाब्दित करने के कलये कनदे शों को मेमोरी से प्राप्त करता हैं | कनदे शों को किधु त सं केतों (Electric Signals) में पररिकता त करके यह
उकचत डीिाइसे ज तक पहुचता हैं |
3. Output Device - Output Device िे Device होते है जो User द्वारा इनपुट ककये गए डाटा को Result के रूप में प्रदान करते हैं |
Output Device के द्वारा कंप्यूटर से प्राप्त पररणामो (Result) को प्राप्त ककया जाता है इन पररणामों को प्राय: कडस्ले डीिाइसे ज (स्क्रीन) या कप्रंटर
के द्वारा User को प्रस्तु त ककया जाता हैं | मुख्य रूप से Output के रूप में प्राप्त सू चनाएं या तो हम स्क्रीन पार दे ख सकते है या कप्रंटर से पेज पर कप्रंट
कर सकते है या सं गीत सु नने के कलये आउटपुट के रूप में स्पीकर का उपयोग कर सकते हैं , Output Device कई प्रकार के होते है जैसे-Monitor ,
Printer , Plotter , Projector, Sound Speaker
Generations of Computer - सन् 1946 में प्रर्म इलेक्टर ॉकनक कडिाइस, िैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) युक्त एकनएक कम्प््प्यूटर की
शुरूआत ने कम्प््प्यू टर के किकास को एक आधार प्रदान ककया कम्प््प्यू टर के किकास के इस िम में कई महत्िपूणा कडिाइसे ज की सहायता से कम्प््प्यू टर
ने आज तक की यािा तय की। इस किकास के िम को हम कम्प््प्यू टर में हुए मुख्य पररिता न के आधार पर कनम्प््नकलब्दखत पॉंच पीकि़यों में बॉंटते हैं :-
कम्प््प्यूटरों की प्रर्म पीढ़ी (First Generation Of Computer) :- 1946-1956 कंप्यूटर की प्रर्म पीढ़ी की शुरुआत सन्
1946 में एकटा और मुचली के एकनएक (ENIAC-Electronic Numerical Integrator And Computer) नामक कम्प््प्यू टर के कनमाा ण से हुआ र्ा इस
पीढ़ी के कम्प््प्यू टरों में िै क्यू म ट्यूब का प्रयोग ककया जाता र्ा कजसका आकिष्कार सन् 1904 John Ambrose Fleming ने ककया र्ा इस पीढ़ी में
एकनएक के अलािा और भी कई अन्य कम्प््प्यू टरों का कनमाा ण हुआ कजनके नाम एडसै क (EDSEC – Electronic Delay Storage Automatic
Calculator), एडिै क (EDVAC – Electronic Discrete Variable Automatic Computer ), यू कनिै क (UNIVAC – Universal Automatic
Computer), एिं यू नीिै क – 1 (UNIVAC – 1) हैं ।
प्रर्म पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े होते र्े इनकी Speed बहुत ही Slow होती र्ी और मेमोरी भी कम होती र्ी इसी कारण इन कंप्यूटर में
डाटा को स्टोर करके नही ं रखा जा सकता र्ा इन कंप्यूटर की कीमत बहुत अकधक होने के कारण ये कंप्यूटर आम जनता की पहुाँ च से दू र र्े|
प्रर्म पीढ़ी के कम्प््प्यू टरों के कनम्प््नकलब्दखत लिण र्े:-
िैक्यूम ट्यूब का प्रयोग
पंचकाडा पर आधाररत
संग्रहण के कलए मै गने् कटक डरम का प्रयोग
बहुत ही नाजु क और कम किश्िसनीय
बहुत सारे एयर – कंडीशनरों का प्रयोग
मशीनी तर्ा असेम्प््बली भार्ाओं में प्रोग्राकमं ग
कम्प््प्यूटरों की कद्वतीय पीढ़ी (Second Generation Of Computers) :- 1956-1964 कंप्यूटर की प्रर्म पीढ़ी के बाद सन् 1956
में कंप्यूटर की कद्वतीय पीढ़ी की शु रूआत हुई इन कम्प्प् ् यूटरों में Vacuum tube (िैक्यूम ट्यूब) के स्र्ान पर Transistor (टर ॉकजस््टर)
का उपयोग ककया जाने लगा| किकलयम शॉकले (William Shockley) ने टर ॉंकजस््टर का आकिष्कार सन् 1947 में ककया र्ा कजसका
उपयोग कद्वतीय पीढ़ी के कम्प््प्यूटरों में िैक्यूम ट्यूब के स््र्ान पर ककया जाने लगा। टर ॉंकजस््टर के उपयोग ने कम्प््प्यूटरों को िैक्यूम ट्यूबों के
अपेिाकृत अकधक गकत एिं किश्िसनीयता प्रदान की| Transistor (टर ॉकजस््टर) के आने के बाद कंप्यूटर के आकार में भी सुधार आया
कद्वतीय पीढ़ी के कंप्यूटर प्रर्म पीढ़ी के कंप्यूटर से आकार में छोटे हो गए|
ALTAIR 8800 सबसे पहला माइिो कम्प्प् ् यूटर र्ा कजसे कमट् स (MITS) नामक कम्प््पनी ने बनाया र्ा। इसी कम्प््प्यूटर पर कबल गेटस
(Bill gates), जो उस समय हािडा किश्िकिद्यालय के छाि र्े , ने बेकसक भार्ा को स््र्ाकपत ककया र्ा। इस सफल प्रयास के बाद गेट्स ने
माइिोसॉफ्ट कम्प््पनी की स््र्ापना की जो दु कनया में सॉफ्टिेयर की सबसे बड़ी कम्प््पनी हैं। इस कारण, कबल गेट्स को दु कनया-भर के
कम्प््प्यूटरों का स््िामी (Owner Of Computers) कहा जाता हैं । चतुर्ा पीढ़ी के आने से कंप्यूटर के युग में एक नई िाब्दन्त आई | इन
कंप्यूटर का आकार बहुत ही छोटा हो गया और मेमोरी बहुत अकधक बढ़ गई आकार छोटा होने से इन कंप्यूटर का रख रखाि बहुत
आसान हो गया इसी के सार् इनकी कीमत इतनी कम हो गई की आम जनता इन कंप्यूटर को आसानी से खरीद सकती र्ी |
इस पीढ़ी के कम्प््प्यूटरों के कनम्प््नकलब्दखत मुख्य लिण हैं - अकतकिशाल स््तरीय एकीकरं ण (Very Large Scale Integration)
तकनीक का उपयोग।
आकार में अद् भु त कमी।
साधारण आदमी की िय-िमता के अंदर।
अकधक प्रभािशाली, किश्िसनीय एिं अद् भु त गकतमान।
अकधक मे मोरी िमता।
कम्प््प्यूटरों के किकभन्न ने टिका का किकास।
कम्प््प्यू टरों की पंचम पीढ़ी (Fifth Generation of Computer) :- 1985 – अब तक कंप्यूटर की पां चिी पीढ़ी की शु रुआत 1985 से हुई |
1985 से अब तक के कंप्यूटर पां चिी पीढ़ी के अंतगात आते हैं कंपम्प्प्यूटरों की पॉंचिीं पीढ़ी में ितामान के शब्दक्तशाली एिं उच्च तकनीक
िाले कम्प्प् ् यूटर से ले कर भकिष्य में आने िाले कम्प्प् ् यूटरों तक को शाकमल ककया गया हैं। इस पीढ़ी के कम्प्् प्यूटरों में कम्प्प्
्यूटर िैज्ञाकनक
कृकिम बुब्दद्धमत्ता (Artificial Intelligence) को समाकहत करने के कलए प्रयासरत हैं । आज के कम्प्प् ् यूटर इतने उन्नत हैं कक िे हर
किकशष्ट िेि, मू ल रूप से अकाउब्दन्ट्ंग, इं कजकनयररं ग, भिन-कनमाा ण, अंतररि तर्ा दू सरे प्रकार के शोध-काया में उपयोग ककये जा रहे हैं ।
इस पीढ़ी के प्रारम्प्भ ् में, कम्प््प्यूटरों का परस््पर संयोकजत ककया गया ताकक डे टा तर्ा सूचना की आपस में साझेदारी तर्ा आदान-प्रदान हो
सकें। नये इं कटग्रेटेड सककाट (Ultra Large Scale Integrated Circuit), िेरी लाजा स््केल इं कटग्रेकटड सककाट (Very Large Scale
Integrated Circuit) को प्रकतस््र्ाकपत करना शु रू ककया। इस पीढ़ी में प्रकतकदन कम्प्प् ् यूटर के आकार को घटाने का प्रयास ककया जा रहा
हैं कजसके फलस््िरूप हम घड़ी के आकार में भी कम्प््प्यूटर को दे ख सकते हैं । पोटे बल (Portable) कम्प््प्यूटर तर्ा इण्टरने ट की सहायता
से हम दस््तािेज, सूचना तर्ा पैसे का आदान-प्रदान कर सकते हैं ।
Types of Computer (कंप्यूटर के प्रकार)- Computer को तीन आधारों पर िगीकृत ककया गया हैं|
1. काया प्रणाली के आधार पर (Based on Mechanism)
2. उद्दे श्य के आधार पर (Based on Purpose)
3. आकार के आधार पर (Based on Size)
Based on Mechanism - कायाप्रणाली के आधार पर इन्हें तीन भागो Analog, Digital, and Hybrid में िगीकृत ककया गया हैं |
Analog Computer - Analog Computer िे Computer होते है जो भौकतक मािाओ, जैसे- दाब (Pressure), तापमान (Tempressure),
लम्बाई (Length), ऊचाई (Height) आकद को मापकर उनके पररमाप अंको में व्यक्त करते है ये Computer ककसी राकश का पररमाप तु लना के
आधार पर करते है जैसे- र्माा मीटर |Analog Computer मु ख्य रूप से किज्ञान और इं जीकनयररं ग के िे ि में प्रयोग ककये जाते है क्योकक इन िे िो में
मािाओ का अकधक उपयोग होता हैं | उदाहरणार्ा , एक पटर ोल पम्प में लगा Analog Computer, पम्प से कनकले पटर ोल कक मािा को मापता है और
लीटर में कदखाता है तर्ा उसके मूल्य कक गणना करके Screen पर कदखाता हैं |
Digital Computer - Digit का अर्ा होता है अंक | अर्ाा त Digital Computer िह Computer होता है जो अंको कक गणना करता है Digital
Computer िे Computer है जो व्यापार को चलाते है , घर का िजट तै यार करते है औ प्रकार के Computer ककसी भी चीज कक गणना करके “How
Many” (मािा में ककतना) के आधार पर प्रश्न का उत्तर दे ता हैं |
Hybrid Computer - Hybrid Computer का अर्ा है अनेक गुण धमो िाला होना | अत: िे Computer कजनमे Analog Computer or Digital
Computer दोनों के गु ण हो Hybrid Computer कहलाते है जैसे- पेटरोल पम्प की मशीन भी एक Hybrid Computer हैं |
Based on Purpose - Computer को उद्दे श्य के आधार पर दो भागो में Special Purpose और General Purpose के आधार पर िगीकृत ककया
गया हैं |
Special Purpose - Special Purpose Computer ऐसे Computer है कजन्हें ककसी किशेर् काया के कलये तैयार ककया जाता है इनके C.P.U. की
िमता उस काया के अनु रूप होती है कजसके कलये इन्हें तै यार ककया जाता हैं | जैसे- अन्तररि किज्ञान, मौसम किज्ञान, उपग्रह सं चालन, अनुसंधान एिं
शोध, यातायात कनयं िण, कृकर् किज्ञान, कचककत्सा आकद |
General Purpose - General Purpose Computer ऐसे Computer है कजन्हें सामान्य उद्दे श्य के कलये तैयार ककया गया है इन Computer में
अनेक प्रकार के काया करने कक िमता होती है इनमे उपब्दस्र्त C.P.U. की िमता तर्ा कीमत कम होती हैं | इन Computers का प्रयोग सामान्य काया
हे तु जैसे- पि (Letter) तै यार करना, दस्तािे ज (Document) तै यार करना, Document को कप्रं ट करना आकद के कलए ककया जाता हैं |
आकार के आधार पर (Based on Size) - Computer को आकार के आधार पर हम कनम्न श्रेकणयों में बााँ ट सकते है –
Super Computer - ये सबसे अकधक गकत िाले Computer ि अकधक िमता िाले Computer हैं | इनमे एक से अकधक C.P.U. लगाये जा सकते है
ि एक से अकधक व्यब्दक्त एक सार् काया कर सकते हैं | ये Computer सबसे महाँ गे होते है ि आकार में बहुत बड़े होते हैं |
Mini Computer-Micro Computer से कुछ अकधक गकत ि मेमोरी िाले Computer Mini Computer कहलाते है इनमे एक से अकधक C.P.U. हो
सकते है ि ये Micro Computer से महाँ गे होते हैं |कमनी Computer का उपयोग यातायात में याकियों के कलये आरिण-प्रणाली का संचालन और बैं को
के बैं ककंग कायों के कलये होता हैं |
Main Frame Computer - Main Frame Computer, Mini Computer से कुछ अकधक गकत ि िमता िाले Computer Main Frame
Computer कहलाते हैं |ये Computer आकार में बहुत बड़े होते है इनमे अत्यकधक मािा के Data पर तीव्रता से Process करने कक िमता होती है
इसीकलए इनका उपयोग बड़ी कंपकनयों, बैं को, रे ल्वे आरिण, सरकारी किभाग द्वारा ककया जाता हैं |
Micro Computer - इस Computer को Micro Computer दो कारणों से कहा जाता है पहला इस Computer में Micro Processor का प्रयोग
ककया जाता है दू सरा यह Computer दू सरे Computer कक अपेिा आकार में छोटा होता है Micro Computer आकार में इतना छोटा होता है कक
इसको एक Study Table अर्िा एक Briefcase में रखा जाता सकता हैं | यह Computer सामान्यतःसभी प्रकार के काया कर सकता है इसकी काया
प्रणाली तो लगभग बड़े कंप्यूटसा के सामान ही होती है परन्तु इसका आकार उनकी तु लना में कम होता हैं | इस Computer पर सामान्यतः एक ही
व्यब्दक्त काया कर सकता हैं | Desktop Computer - Desktop Computer एक ऐसा Computer है कजसे Desk पर से ट ककया जाता है इसमें
एक C.P.U., मोकनटर (Monitor), कक-बोडा (keyboard), तर्ा माउस (Mouse) होते हैं | इन्हें हम अलग अलग दे ख सकते हैं | Desktop Computer
की कीमत कम होती है परन्तु इसे एक जगह से दू सरी जगह ले जाना मुब्दिल होता हैं |
Difference between Primary and secondary memory (प्राइमरी और सेकेंडरी मेमोरी में अंतर)
Primary Memory (प्राइमरी मेमोरी)
1. यह मेमोरी सू चनाओं को अस्र्ाई रूप से सं ग्रकहत करके रखती हैं अर्ाा त करं ट के बं द होते की सू चनाएं नष्ट हो जाती हैं |
2. यह मेमोरी से केंडरी मेमोरी की अपेिा महं गी होती है |
3. इसके काया करने की गकत तीव्र होती है |
4. यह कसस्टम में स्र्ाई रूप से लगी रहती है |
5. इसमें सं ग्रकहत सू चनाएं एक स्र्ान से दू सरे स्र्ान पर नही ं ले जा सकते हैं |
6. कंप्यूटर के एक्सेस टाइम को प्राइमरी मेमोरी प्रभाकित करती है|
7. यह मेमोरी IC इं टीग्रे टेड सककाट के रूप में होती है |
8. यह दो प्रकार की मेमोरी होती हैं रै म और रोम|
9. कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी होने के कारण ऐसे प्राइमरी मेमोरी कहां जाता है |
10. यह इनकबल्ट मेमोरी होती हैं अर्ाा त यह मेमोरी कंप्यूटर में पहले से ही लगी होती है |
Secondary Memory (से केंडरी मेमोरी)
1. यह मेमोरी सू चनाओं को स्र्ाई रूप से सं ग्रकहत करके रखती हैं अर्ाा त करं ट के बं द हो जाने के बाद भी इसमें सू चनाएं यर्ाित बनी रहती हैं |
2. यह मेमोरी प्राइमरी मेमोरी के अपेिा काफी सस्ती होती हैं |
3. इसके काया करने की किकध प्राइमरी मेमोरी से कम होती है |
4. यह मेमोरी कंप्यूटर में स्र्ाई रूप से नही ं लगी रहती हैं |
5. इसमें सं ग्रकहत सू चनाओं को एक कंप्यूटर से दू सरे कंप्यूटर पर आसानी से टर ां सफर ककया जा सकता है |
6. यह मेमोरी कंप्यूटर की एक्सेस टाइम को प्रभाकित नही ं करती हैं |
7. यह फ्लॉपी हाडा कडस्क, CD, dvd, पेन डराइि आकद के रूप में होती हैं |
8. यह कई प्रकार की होती हैं जै से फ्लॉपी कडस्क, हाडा कडस्क, ऑकिकल कडस्क, पेन डराइि, CD, DVD आकद|
9. इन्हें उपयोग करने के कलए कंप्यूटर में अलग से लगाया जाता है इसकलए से केंडरी मेमोरी कहां जाता है |
10. यह इनकबल्ड मेमोरी नही ं होती है इनका प्रयोग करने के कलए इन्हे कंप्यूटर में अलग से लगाया जाता है |
What is Memory (मेमोरी क्या हैं ?) - यह Device Input Device के द्वारा प्राप्त कनदे शों को Computer में संग्रहण (Store) करके
रखता है इसे Computer की याददाश्त भी कहााँ जाता है | मानि में कुछ बातों को याद रखने के कलये मब्दषतस्क होता है , उसी प्रकार Computer में
डाटा को याद रखने के कलए मेमोरी (Memory) होती हैं | यह मेमोरी C.P.U का अकभन्न अंग है ,इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory),
आं तररक मेमोरी (Internal Memory), या प्रार्कमक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं | ककसी भी कनदे श, सू चना, अर्िा पररणामों को
स्टोर करके रखना मेमोरी कहलाता हैं |” कंप्यूटरो में एक से अकधक मेमोरी होती है हम उनको सामान्यतः प्रार्कमक (Primary) ि कद्वतीयक
(Secondary) मेमोरी के रूप में िगीकृत कर सकते है प्रार्कमक मेमोरी अब्दस्र्र (Volatile) तर्ा ब्दस्र्र (Non-Volatile) दोनों प्रकार कक होती है |
अब्दस्र्र मेमोरी (Temprery Memory) डे टा को अस्र्ाई रूप से कंप्यूटर ऑन होने से लेकर कंप्यू टर बं द होने तक ही रखते है अर्ाा त कंप्यूटर
अचानक बं द होने या कबजली के जाने पर कंप्यूटर से डाटा नष्ट हो जाता है ब्दस्र्र मेमोरी (Permanent Memory) आपके कंप्यू टर को प्रारं भ करने में
सहायक होती हैं | इसमें कुछ अत्यंत उपयोगी फमािेयर होते है जो कंप्यूटर को बू ट करने में मदद करते है बू कटं ग कंप्यूटर को शुरू करने कक प्रकिया
को कहा जाता है इसे मुख्य मेमोरी कहा जाता हैं | कद्वतीयक सं ग्रहण िह है जो हमारे डाटा को लंबे समय तक रखता है कद्वतीयक सं ग्रहण कई रूपों में
आते हैं | फ्लोपी कडस्क, हाडा कडस्क, सी.डी. आकद |
कबट अर्िा बाइट -मेमोरी में स्टोर ककया गया डाटा 0 या 1 के रूप में पररिकतात हो जाता है 0 तर्ा 1 को संयुक्त रूप से बाइनरी कडकजट कहा
जाता हैं | सं िेप में इन्हें कबट भी कहा जाता हैं | यह कबट कंप्यूटर कक मेमोरी में घेरे गे स्र्ान को मापने की सबसे छोटी इकाई होती हैं |
8 Bits = 1 Bytes
1024 Bytes = 1 Kilobyte (1 KB)
1024 KB = 1 Megabyte (1MB)
1024 MB = 1 Gigabyte (1 GB)
1024 GB = 1 Terabyte (1 TB)
मेमोरी के प्रकार (Types of Memory)
प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) -Memory कंप्यूटर का सबसे महत्वपूणा भाग है जहााँ डाटा, सू चना, एिं प्रोग्राम प्रकिया के दौरान
उपब्दस्र्त रहते है और आिश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध रहते है यह मेमोरी अब्दस्र्र मेमोरी होती है क्योकक इसमें कलखा हुआ डाटा कंप्यूटर बं द
होने या कबजली के जाने पर कमट जाता है प्राइमरी मेमोरी कहलाती हैं | इसे प्रार्कमक मेमोरी या मुख्य मेमोरी भी कहते हैं |
1. RAM (Random Access Memory) - RAM या Random Access Memory कंप्यूटर की अस्र्ाई मेमोरी (Temprery Memory) होती
हैं | की-बोडा या अन्य ककसी इनपु ट कडिाइस से इनपुट ककया गया डाटा प्रकिया से पहले रै म में ही सं गृहीत ककया जाता है और सी.पी.यू . द्वारा
आिश्यकतानुसार िहााँ से प्राप्त ककया जाता है रै म में डाटा या प्रोग्राम अस्र्ाई रूप से सं गृहीत रहता है कंप्यूटर बं द हो जाने या किजली चले जाने पर
रै म में सं गृहीत (Store) डाटा कमट जाता हैं | इसकलए रै म को Volatile या अस्र्ाई मेमोरी कहते है रै म की िमता या आकार कई प्रकार के होते है जैसे
कक- 4 MB, 8 MB, 16 MB, 32 MB, 64 MB, 128 MB, 256 MB आकद | रै म तीन प्रकार कक होती हैं |
Dynamic RAM - Dynamic RAM को सं किप्त में डीरै म (DRAM) कहा जाता हैं | रै म (RAM) में सबसे अकधक साधारण डीरै म (DRAM) है तर्ा
इसे जल्दी जल्दी ररफ्रेश (Refresh) करने कक आिश्यकता पड़ती हैं | ररफ्रेश का अर्ा यहााँ पर कचप को किधु त अिशेर्ी करना होता है यह एक से कंड
में लगभग हजारों बार ररफ्रेश होता है तर्ा प्रत्येक बार ररफ्रेश होने के कारण यह पहले कक किर्य िस्तु को कमटा दे ती है इसके जल्दी जल्दी ररफ्रेश होने
के कारण इसकी गकत (Speed) कम होती हैं |
Synchronous RAM - Synchronous RAM डीरै म(DRAM) कक अपेिा ज्यादा ते ज हैं | इसकी ते ज गकत का कारण यह है कक यह सी.पी.यू . की
घडी कक गकत के अनुसार Refresh होती हैं | इसीकलए ये डीरै म कक अपेिा डाटा (Data) को ते जी से स्र्ानां तररत (Transfer) करता हैं |
Static RAM - Static RAM ऐसी रै म है जो कम ररफ्रेश होती हैं | कम ररफ्रेश (Refresh) होने के कारण यह डाटा को मेमोरी में अकधक समय तक
रखता हैं | डीरै म की अपेिा एस-रै म ते ज तर्ा महाँ गी होती हैं |
2. ROM (Read only memory) - रोम का पूरा नाम रीड ऑनली मेमोरी होता हैं | यह स्र्ाई मेमोरी (Permanent memory) होती है कजसमे
कंप्यूटर के कनमाा ण के समय प्रोग्राम Store कर कदये जाते हैं | इस मेमोरी में Store प्रोग्राम पररिकता त और नष्ट नही ं ककये जा सकते है , उन्हें केिल पढ़ा
जा सकता हैं | इसकलए यह मेमोरी रीड ऑनली मे मोरी कहलाती हैं | कंप्यूटर का ब्दस्वच ऑफ होने के बाद भी रोम में सं ग्रकहत डाटा नष्ट नही ं होता हैं |
अतः रोम नॉन-िोलेटाइल या स्र्ाई मेमोरी कहलाती हैं | रोम के किकभन्न प्रकार होते है जो कनम्नकलब्दखत है –
PROM - PROM का पूरा नाम Programmable Read Only Memory होता है यह एक ऐसी मेमोरी है इसमें एक बार डाटा संग्रहहत
(Store) होने के बाद इन्हें हमटाया नही ं जा सकता और न ही पररवततन (Change) हकया जा सकता हैं |
EPROM - EPROM का पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory होता है यह प्रोम (PROM) की तरह ही होता है लेककन इसमें
सं ग्रकहत प्रोग्राम (Store Program) को पराबै गनी ककरणों (Ultraviolet rays) के द्वारा ही कमटाया जा सकता है और नए प्रोग्राम सं ग्रकहत (Store)
ककये जा सकते हैं |
EEPROM -EEPROM का पूरा नाम Electrical Programmable Read Only Memory होता हैं | एक नई तकनीक इ-इप्रोम (EEPROM) भी है
कजसमे मेमोरी से प्रोग्राम को किधुतीय किकध से कमटाया जा सकता हैं |
सेकेंडरी मेमोरी क्या हैं ? (What is Secondary Memory) - Secondary Storage Device को Auxiliary Storage Device भी
कहा जाता है । यह कम्प्प्यूटर का भाग नही होती है । इसको कम्प्प्यूटर में अलग से जोडा जाता है । इसमें जो डाटा स्टोर ककया जाता है । िह स्र्ाई होता
है । अर्ाा त् कम्प्प्यूटर बं द होने पर इसमें स्टोर डाटा कडलीट नही होता है । आिश्यकता के अनुसार इसको भकिष्य में इसमें से ि फाईल या फोल्डरों को
खोल कर दे ख सकते है । या इसमें सु धार कर सकते है । एिं इसको यू जर के द्वारा कडकलट भी ककया जा सकता है । इसकी Storage िमता अकधक होती
है Secondary Storage Device में Primary memory की अपेिा कई गु ना अकधक डाटा स्टोर करके रख सकते हैं , जो की स्र्ानां तरणीय
(Transferable) होता हैं एिं डाटा को ऐक्सेस करने कक गकत Primary Memory से धीमी होती है । Secondary Memory में फ्लॉपी कडस्क,
हाडा कडस्क, कॉम्पेक्ट् कडस्क, ऑकिकल कडस्क, मेमोरी काडा , पेन डराइि आकद आते हैं |
Hard Disk -Hard Disk या HDD एक ही बात है, ये एक physical disk होती है कजसको हम अपने computer की सभी छोटी बड़ी files store
करने के कलये प्रयोग करते है । Hard disk और RAM मे ये फका होता है कक, Hard disk िो चीज है जो store करने के काम मे आती है , लेककन RAM
उस storage मे रखी चीजो को चलाने के काम में आती है । जब हम computer को बन्द करते है तो RAM मे पडी कोई भी चीज साफ हो जाती है ।
लेककन HDD मे computer बन्द होने पर भ्ाीी data erase नही होता। Hard disk के अन्दर एक disk घुमती है , कजतनी ते ज disk घु मती है उतनी
ज्यादा ते जी से ये Data को store या read कर सकती है । Hard disk के घुमने की speed को हम RPM (Revolutions Per Minute) मे नापते है ।
ज्यादातर Hard disk 5400 RPM या 7200 RPM की होती है , जाकहर सी बात है 7200 RPM की hard disk 5400 RPM िाली से ज्यादा ते ज होती है ।
फ्लॉपी हडस्क (Floppy Disk) -यह लाब्दस्टक की बनी होती है कजस पर फेराइट की परत पड़ी रहती है | यह बहुत लचीली लाब्दस्टक
की बनी होती है | इसकलए इसे फ्लॉपी कडस्क (Floppy Disk) कहते है | कजस पर लाब्दस्टक का कबर होता है | कजसे जैकेट कहते है | फ्लॉपी (Floppy)
के बीचों-बीच एक पॉइं ट (Point) बना होता है कजससे इस डराइि (Drive) की कडस्क (Disk) घूमती है | इसी फ्लॉपी कडस्क (Floppy Disk) में 80
डे टा टर े क (Data track) होते है और प्रत्येक टर े क (Track) में 64 शि स्टोर (Store) ककये जा सकते है | यह मेग्नेकटक टे प (Magnetic tape) के
सामन काया करती है | जो 360 RPM प्रकत कमकनट की दर से घूमती है | कजससे इसकी Recording head के ख़राब हो जाने की समस्या उत्पन्न होती है |
आकर की द्रकष्ट से फ्लॉपी (Floppy) दो प्रकार की होती है :-
5½ व्यास िाली फ्लॉपी कडस्क (Floppy Disk)
3½ व्यास िाली फ्लॉपी कडस्क (Floppy Disk)
5½ व्यास िाली फ्लॉपी कडस्क (Floppy Disk) – इसका अकिष्कार सन 1976 में ककया गया र्ा तर्ा यह भी लाब्दस्टक की जैकेट से सु रकित रहती है |
इसकी सं ग्रह िमता 360 KB से 2.44 MB तक की होती है |
3½ व्यास िाली फ्लॉपी कडस्क (Floppy Disk) – इसका प्रयोग (use) सिा प्रर्म एप्पल कंप्यूटर (Apple computer) में ककया गया र्ा| जो कपछली
फ्लॉपी की अपेिा छोटी होती है | इसकी सं ग्रह िमता 310 KB से 2.88 MB तक होती है |
Magnetic Tape - Magnetic tape भी एक Storage Device हैं कजसमे एक पतला फीता होता हैं कजस पर Magnetic Ink की Coading की
जाती हैं इसका प्रयोग Analog तर्ा Digital Data को Store करने के कलए ककया जाता हैं | यह पुराने समय के Audio कैकसट की तरह होता हैं
Magnetic Tape का प्रयोग बड़ी मािा में डाटा Store करने के कलए ककया जाता हैं | यह सस्ते होते हैं | आज भी इसका प्रयोग data का Backup तै यार
करने के कलए ककया जाता हैं |
Optical Disk - Optical Disk एक चपटा, िृत्ताकार पोकलककबानेट कडस्क होता है, कजस पर डाटा एक Flat सतह के अन्दर Pits के रूप में
Store ककया जाता हैं इसमें डाटा को Optical के द्वारा Store ककया जाता है | ऑकिकल कडस्क दो प्रकार की होती है ।
CD:- सबसे पहले बात करते है सीडी की, सीडी का हम काम्प््पैक्ट कडस््क के नाम से भी पुकारते हैं ये एक ऐसा ऑप्कटकल मीकडयम होता है जो हमारे
कडकजटल डे टा का से ि करता है । एक समय र्ा जब हम रील िाले कैसे ट प्रयोग करते र्ी, सीडी के अकिा ष्कार ने ही बाजार में कैसे टों को पूरी तरह से
खत्म कर कदया। एक स््टैं डडा सीडी में करीब 700 एमबी का डे टा से ि ककया जा सकता है । सीडी में डे टा डॉट के फामा में से ि होता है , दरअसल सीडी
डराइि में लगा हुआ लेजर सें सर सीडी के डॉट से ररफलेक्ट लाइट का पढ़ता है और हमारी कडिाइस में इमेज किएट करता है ।
DVD:- डीिीडी यानी कडकजटल िसा टाइल कडस््क, सीडी के बाद डीिीडी का आगाज हुआ िै से तो दे खने में दोनों सीडी और डीिीडी दोनों एक ही जैसे
लगते है मगर इनकी डे टा कैपसे टी में अंतर होता है सीडी के मुकाबले डीिीडी में ज्यादा डे टा से ि ककया जा सकता है । मतलब डीिीडी में यू जर करीब
4.7 जीबी से लेकर 17 जीबी तक डे टा से ि कर सकता है । डीिीडी के आने के बाद बाजार में सीडी की मां ग में भारी कमी दे खी गई।
Flash Drive - Pen Drive को ही Flash Drive के नाम से जाना जाता हैं आज कल सबसे ज्यादा Flash Drive का Use डाटा Store करने के
कलए ककया जाता है यह एक External Device है कजसको Computer में अलग से Use ककया जाता हैं | यह आकार में बहुत छोटे तर्ा हल्की भी होती
हैं , इसमें Store Data को पढ़ा भी जा सकता है और उसमे सु धार भी ककया जा सकता हैं |Flash Drive में एक छोटा Pried Circuit Board होता है जो
लाब्दस्टक या धातु के Cover से ि़का होता हैं इसकलए यह मजबू त होता है | यह Plug-and-Play उपकरण है | आज यह सामान्य रूप से 2 GB, 4 GB,
8 GB, 16 GB, 32 GB, 64 GB, 128 GB आकद िमता में उपलब्ध हैं |
Input Devices of Computer (कंप्यू टर के इनपु ट हडवाइस) - Input Device िे Device होते है कजनके द्वारा हम
अपने डाटा या कनदे शों को Computer में Input करा सकते हैं | इनपुट कडिाइस कंप्यूटर तर्ा मानि के मध्य सं पका की सु किधा प्रदान करते हैं |
Computer में कई Input Device होते है ये Devices Computer के मब्दस्तष्क को कनदे कशत करती है की िह क्या करे ? Input Device कई रूप में
उपलब्ध है तर्ा सभी के किकशष्ट उद्दे श्य है टाइकपंग के कलये हमारे पास Keyboard होते है , जो हमारे कनदे शों को Type करते हैं |“Input Device िे
Device है जो हमारे कनदे शों या आदे शों को Computer के मब्दषतष्क, सी.पी.यू . (C.P.U.) तक पहुचाते हैं |”
की-बोडा (Keyboard) - की-बोडा कंप्यूटर का एक पेररफेरल है जो आं कशक रूप से टाइपराइटर के की-बोडा की भां कत होता हैं | की-बोडा को
टे क्स्ट तर्ा कैरे क्ट्र इनपुट करने के कलये कडजाइन ककया गया हैं | भौकतक रूप से , कंप्यूटर का की-बोडा आयताकार होता हैं | इसमें लगभग 108 Keys
होती हैं | की-बोडा में कई प्रकार की कुंकजयााँ (Keys) होती है जैसे- अिर (Alphabet), नंबर (Number), कचन्ह (Symbol), फंक्शन की
(Function Key), एरो की (Arrow Key) ि कुछ किशेर् प्रकार की Keys भी होती हैं | हम की-बोडा की सं रचना के आधार पर इसकी कुंकजयो को
छ: भागो में बााँ ट सकते है -
1.एल्फानु मेररक कुंकजयााँ (Alphanumeric Keys) - Alphanumeric Keys की-बोडा के केन्द्र में ब्दस्र्त होती हैं | Alphanumeric Keys में
Alphabets (A-Z), Number (0-9), Symbol (@, #, $, %, ^, *, &, +, !, = ), होते हैं | इस खंड में अं को, कचन्हों, तर्ा िणा माला के अकतररक्त चार
कुंकजयााँ Tab, Caps, Backspace तर्ा Enter कुछ किकशष्ट कायों के कलये होती हैं |
2.न्यूमेररक की-पैड (Numeric Keypad) - न्यूमेररक की-पैड (Numeric Keypad) में लगभग 17 कुंकजयााँ होती हैं | कजनमे 0-9 तक के अंक,
गकणतीय ऑपरे टर (Mathematics operators) जैसे- +, -. *, / तर्ा Enter key होती हैं |
3.फंक्शन की (Function Keys) -की-बोडा के सबसे ऊपर सं भितः ये 12 फंक्शन कुंकजयााँ होती हैं | जो F1, F2……..F12 तक होती हैं | ये कुंकजयााँ
कनदे शों को शॉट-कट के रूप में प्रयोग करने में सहायक होती हैं | इन Keys के काया सॉफ्टिे यर के अनुरूप बदलते रहते हैं |
4.किकशष्ट उददे शीय कुंकजयााँ (Special Purpose Keys) -ये कुंकजयााँ कुछ किशेर् कायों को करने के कलये प्रयोग की जाती है | जैसे- Sleep, Power,
Volume, Start, Shortcut, Esc, Tab, Insert, Home, End, Delete, इत्याकद| ये कुंकजयााँ नये ऑपरे कटं ग कसस्टम के कुछ किशेर् कायों के अनु रूप होती
हैं |
5.मॉकडफायर कुंकजयााँ (Modifier Keys) - इसमें तीन कुंकजयााँ होती हैं , कजनके नाम SHIFT, ALT, CTRL हैं | इनको अकेला दबाने पर कोई खास
प्रयोग नही ं होता हैं , परन्तु जब अन्य ककसी कुंजी के सार् इनका प्रयोग होता हैं तो ये उन कुंकजयो के इनपुट को बदल दे ती हैं | इसकलए ये मॉकडफायर
कुंजी कहलाती हैं |
6.कसा र कुंकजयााँ (Cursor Keys)- ये चार प्रकार की Keys होती हैं UP, DOWN, LEFT तर्ा RIGHT | इनका प्रयोग कसा र को स्क्रीन पर मूि कराने
के कलए ककया जाता है |
की-बोडा के प्रकार
1.साधारण कीबोडा -साधारण कीबोडा िे कीबोडा होते हैं , जो सामान्य रूप से प्रयोग (Use) ककये जाते हैं , कजसे User अपने PC में प्रयोग करता हैं |
इसका आकार आयताकार होता है , इसमें लगभग 108 Keys होती हैं एिं इसे Computer से Connect करने के कलए एक Cable होती हैं कजसे CPU से
जोडा जाता हैं |
2.तार रकहत की-बोडा - तार रकहत की-बोडा (Wireless Keyboard) प्रयोक्ता (User) को की- बोडा में तार के प्रयोग से छु टकारा कदलाता है | कुछ
कंपकनयों ने तार रकहत की-बोडा का बाजार में प्रिे श कराया है | यह की-बोडा सीकमत दू री तक काया करता है | यह तार रकहत की-बोडा र्ोडा महाँ गा
होता है तर्ा इसमें र्ोड़ी तकनीकी जकटलता होती है | इसमें तकनीकी जकटलता होने के कारण इसका प्रचलन बहुत अकधक नही ं हो पाया है |
3.अरगानोकमक की-बोडा - बहुत सारी कंपकनयों ने एक खास प्रकार के की-बोडा का कनमाा ण ककया है , जो प्रयोक्ता (User) को टाइकपंग करने में दू सरे
की-बोडा की अपेिा आराम दे ता है | ऐसे की-बोडा अरगानोकमक की-बोडा (Ergonomic Keyboard) कहलाते है ऐसे की-बोडा किशेर् तौर पर
प्रयोक्ता (User) की काया िमता बि़ाने के सार् सार् लगातार टाइकपंग करने के कारण उत्पन्न होने िाले कलाई (Wrist) के ददा को कम करने में
सहायता दे ता है |
माउस (Mouse) - ितामान समय में माउस सिाा कधक प्रचकलत Pointer Device है, कजसका प्रयोग कचि या ग्राकफक्स (Graphics) बनाने के सार्
सार् ककसी बटन (Button) या मेन्यू (Menu) पर ब्दक्लक करने के कलये ककया जाता है | इसकी सहायता से हम की-बोडा का प्रयोग ककये कबना अपने
पी.सी. को कनयं कित कर सकता है |माउस में दो या तीन बटन होते है कजनकी सहायता से कंप्यूटर को कनदे श कदये जाते है | माउस को कहलाने पर
स्क्रीन पर Pointer Move करता है | माउस के नीचे की ओर रबर की गें द (Boll) होती है | समतल सतह पर माउस को कहलाने पर यह गें द घुमती है |
माउस के काया
ब्दक्लककंग (Clicking)
डबल ब्दक्लककंग (Double Clicking)
दायााँ ब्दक्लककंग (Right Clicking)
डरैकगं ग (Dragging)
स्क्रोकलंग (Scrolling)
टर ै कबाल (Trackball) - टर ै क बोंल एक Pointing input Device है| जो माउस (Mouse) की तरह ही काया करती है | इसमें एक उभरी हुई
गें द होती है तर्ा कुछ बटन होते है | सामान्यतः पकड़ते समय गें द पर आपका अंगूठा होता है तर्ा आपकी उं गकलयों उसके बटन पर होती है | स्क्रीन
पर पॉइं टर (Pointer) को घुमाने के कलये अंगूठा से उस गें द को घु माते है टर ै कबोंल (Trackball) को माउस की तरह घुमाने की आिश्यकता नही ं
होती इसकलये यह अपेिाकृत कम जगह घेरता है | इसका प्रयोग Laptop, Mobile तर्ा Remold में ककया जाता हैं |
लाइट पेन (Light Pen) - लाइट पेन (Light Pen) का प्रयोग कंप्यूटर स्क्रीन पर कोई कचि या ग्राकफक्स बनाने में ककया जाता है लाइट पेन में
एक प्रकाश सं िेदनशील कलम की तरह एक यु ब्दक्त होती है | अतः लाइट पे न का प्रयोग ऑब्जेक्ट् के चयन के कलये होता है | लाइट पेन की सहायता से
बनाया गया कोई भी ग्राकफक्स कंप्यूटर पर सं ग्रकहत ककया जा सकता है तर्ा आिश्यकतानुसार इसमें सु धार ककया जा सकता है |
टच स्क्रीन (Touch Screen) - टच स्क्रीन (Touch Screen) एक Input Device है | इसमें एक प्रकार की Display होती है| कजसकी
सहायता से User ककसी Pointing Device की िजह अपनी अंगुकलयों को ब्दस्र्त कर स्क्रीन पर मे न्यू या ककसी ऑब्जेक्ट् का चयन करता है | ककसी
User को कंप्यूटर की बहुत अकधक जानकारी न हो तो भी इसे सरलता से प्रयोग ककया जा सकता है | टच स्क्रीन (Touch Screen) का प्रयोग
आजकल रे लिे स्टेशन, एअरपोटा , अस्पताल, शोकपंग मॉल, ए.टी.ऍम. इत्याकद में होने लगा है |
बार-कोड रीडर (Bar code reader)- बार-कोड रीडर (Bar code reader) का प्रयोग Product के ऊपर छपे हुए बार कोड को पढ़ने
के कलये ककया जाता है ककसी Product के ऊपर जो Bar Code बार-कोड रीडर (Bar code reader) के द्वारा उत्पाद की कीमत तर्ा उससे सम्बं कधत
दू सरी सू चनाओ को प्राप्त ककया जा सकता हैं |
स्कैनर (Scanner) - स्केनर (Scanner) एक Input Device है ये कंप्यूटर में ककसी Page पर बनी आकृकत या कलब्दखत सूचना को सीधे
Computer में Input करता है इसका मुख्य लाभ यह है कक User को सू चना टाइप नही ं करनी पड़ती हैं |
ओ.एम.आर. (OMR) - ओ.एम.आर. (OMR) या ऑकिकल माका रीडर (Optical Mark Reader) एक ऐसा कडिाइस है जो ककसी
कागज पर पेब्दिल या पे न के कचन्ह की उपब्दस्र्कत और अनुपब्दस्र्कत को जां चता है इसमें कचब्दन्हत कागज पर प्रकाश डाला जाता है और परािकता त
प्रकाश को जां चा जाता है | जहााँ कचन्ह उपब्दस्र्त होगा कागज के उस भाग से परािकता त प्रकाश की तीव्रता कम होगी | ओ.एम.आर. (OMR) ककसी
परीिा की उत्तरपुब्दस्तका को जााँ चने के कलये प्रयोग की जाती है | इन परीिाओं के प्रश्नपि में िै कब्दिक प्रश्न होते हैं |
ओ.सी.आर. (OCR) - ऑकिकल कैरे क्ट्र रे कोकग्नशन (Optical Character Recognition) अर्िा ओ.सी.आर.(OCR) एक ऐसी
तकनीक है | कजसका प्रयोग ककसी किशेर् प्रकार के कचन्ह, अिर, या नंबर को पढ़ने के कलये ककया जाता है इन कैरे क्ट्र को प्रकाश स्त्रोत के द्वारा पढ़ा
जा सकता हैं | ओ.सी.आर (OCR) उपकरण टाइपराइटर से छपे हुए कैरे क्ट्सा , कैश रकजस्टर के कैरक्ट्र और िेकडट काडा के कैरे क्ट्र को पढ़ लेता
हैं | ओ.सी.आर (OCR) के फॉण्ट कंप्यूटर में सं ग्रकहत रहते है | कजन्हें ओ.सी.आर. (OCR) स्टैं डडा कहते हैं |
ए.टी.एम.(ATM)
स्वचाकलत मुद्रा यं ि या ए.टी.एम. (Automatic Teller Machine) ऐसा यं ि है जो हमे प्रायः बैं क में, शॉकपंग मौल में, रे लिे स्टे शन पर, हिाई अड्ों
पर, बस स्टैं ड पर, तर्ा अन्य महत्वपूणा बाजारों तर्ा सािा जकनक स्र्ानों पर कमल जाता हैं | ए.टी.एम. की सहायता से आप पैसे जमा भी कर सकते है ,
कनकाल भी सकते है , और बै लेंस भी चेक कर सकते है | ए.टी.एम. की सु कबधा 24 घंटे उपलब्ध रहती है |
एम.आई.सी.आर.(MICR) - मैग्नेकटक इं क कैरे क्ट्र ररकोकग्नशन (Magnetic Ink Character Recognition) व्यापक रूप से बैंककंग में
प्रयोग होता है , जहााँ लोगो को चेकों की बड़ी सं ख्या के सार् काम करना होता हैं | इसे सं िेप में एम.आई.सी.आर.(MICR) कहााँ जाता हैं |
एम.आई.सी.आर (MICR) का प्रयोग चुम्बकीय स्याही (Megnatic Ink) से छपे कैरे क्ट्र को पढ़ने के कलये ककया जाता हैं | यह मशीन ते ज ि
स्वचकलत होतीहैं सार् ही इसमें गलकतयां होने के अिसर कबल्कुल न के बराबर होते हैं |
मॉनीटर (Monitor)
Monitor एक आउटपुट कडिाइस है । इसको किजुअल कडस्ले यू कनट भी कहा जाता है । यह दे खने में टीिी की तरह होता है । माीॅ नीटर एक सबसे
महत्वपूणा आउटपुट कडिाइस है । इसके कबना कम्प्प्यूटर अधू रा होता है । यह आउटपु ट को अपनी स्क्रीन पर Soft Copy के रूप में प्रदकशात करता
है । माीॅ कनटर द्वारा प्रदकशात रं गों के आधार पर यह तीन प्रकार के होते है ।
मोनोिोम (Monochrome)
यह शि दो शिों मोनो (Mono) अर्ाा त एकल (Single) तर्ा िोम (Chrome) अर्ाा त रं ग (Color) से कमलकर बना है इसकलये इसे Single Color
Display कहते है तर्ा यह मॉनीटर आउटपु ट को Black & White रूप में प्रदकशात (Display) करता है |
ग्रे-स्केल (Gray-Scale)
यह मॉनीटर मोनोिोम जैसे ही होते हैं लेककन यह ककसी भी तरह के Display को ग्रे शेडस (Gray Shades) में प्रदकशात (Show) करता हैं इस प्रकार
के मॉनीटर अकधकतर हैं डी कंप्यू टर जैसे लैप टॉप (Laptop) में प्रयोग ककये जाते हैं
रं गीन मॉनीटर (Color Monitors)
ऐसा मॉनीटर RGB (Red-Green-Blue) किककरणों के समायोजन के रूप में आउटपु ट को प्रदकशात करता है कसद्धां त के कारण ऐसे मॉनीटर उच्च
रे जोल्यूशन (Resolution) में ग्राकफक्स (Graphics) को प्रदकशात करने में सिम होते हैं कंप्यू टर मे मोरी की िमतानुसार ऐसे मॉनीटर 16 से लेकर 16
लाख तक के रं गों में आउटपुट प्रदकशात करने की िमता रखते हैं |
Types of Monitor (मॉकनटर के प्रकार)
CRT Monitor
Flat Panel Monitor
LCD (Liquid Crystal Display)
LED ( Light Emitting Diode)
CRT Monitor
CRT Monitor सबसे ज्यादा Use होने िाला Output Device हैं कजसे VDU (Visual display Unit) भी कहते हैं इसका Main Part
cathode Ray tube होती हैं कजसे Generally Picture tube कहते हैं अकधकतर मॉनीटर में कपक्चर ट्यूब एलीमें ट होता है जो टी.िी.
सेट के समान होता है यह ट्यूब सी.आर.टी. कहलाती है सी.आर.टी. तकनीक सस्ती और उत्तम कलर में आउटपुट प्रदान करती
है CRT में Electron gun होता है जो की electrons की beam और cathode rays को उत्सकजा त करती है ये Electron beam,
Electronic grid से पास की जाती है ताकक electron की Speed को कम ककया जा सके CRT Monitor की Screen पर फास्फोरस की
Coding की जाती है इसकलए जै से ही electronic beam Screen से टकराती है तो Pixel चमकने लगते हैं और Screen पर Image या
Layout कदखाई दे ता हैं
LCD (Liquid Crystal Display) - CRT Monitor कबलकुल टे लीकिजन की तरह हुआ करते र्े Technology के किकास के सार्
Monitor ने भी अपने रूप बदले और आज CRT Monitor के बदले LCD Monitor प्रचलन में आ गए है यह Monitor बहुत ही
आककर्ा त होते हैं Liquid Crystal Display को LCD के नाम से भी जाना जाता हैं यह Digital Technology हैं जो एक Flat सतह पर
तरल किस्टल के माध्यम से आकृकत बनाता हैं यह कम जगह ले ता है यह कम ऊजाा ले ता है तर्ा पारं पररक Cathode ray tube
Monitor की अपेिाकृत कम गमी पैदा करता हैं यह Display सबसे पहले Laptop में Use होता र्ा परन्तु अब यह स्क्रीन Desktop
Computer के कलए भी प्रयोग हो रहा हैं
Flat panel Monitor -CRT तकनीक के स्र्ान पर यह तकनीक किककसत की गयी कजसमे कैमीकल ि गैसों को एक लेट में रखकर
उसका प्रयोग Display में ककया जाता है यह बहुत पतली स्क्रीन (Screen) होती है | flat Panel िजन में हल्की तर्ा कबजली की खपत
कम करने िाली होती है इसमें द्रिीय किस्टल कडस्ले (Liquid Crystal Display-LCD) तकनीक प्रयोग की जाती है LCD में CRT
तकनीक की अपेिा कम स्पष्टता होती है इनका Use Laptop आकद में ककया जाता हैं
मॉनीटर के लक्षण
ककसी भी प्रकार के मॉनीटर के अंदर कुछ खास लिण होते है कजनके आधार पर ही इनके गुणित्ता को परखा जाता है मॉनीटर के मु ख्य
लिण रे जोल्यू शन ररफ्रेश दर डोंट कपच इं टरले कसंग नॉन इं टरले कसंग कबट मे कपंग आकद है कजनके आधार पर इनकी गुणित्ता को परखा
जाता हैं
Resolution-मॉनीटर का महत्वपूणा गुण – रे जोल्यूशन (Resolution) यह स्क्रीन (Screen) के कचि (Picture) की स्पष्टता
(Sharpness) को बताता है अकधकतर कडस्ले (Display) कडिाइसेज में कचि (Image) स्क्रीन (Screen) के छोटे छोटे डॉट (Dots) के
चमकने से बनते है स्क्रीन के ये छोटे छोटे डॉट (Dots) कपक्सल (Pixels) कहलाते है यहााँ कपक्सल (Pixels) शि कपक्चर एलीमें ट
(Picture Element) का संकिप्त रूप है स्क्रीन पर कजतने अकधक कपक्सल होगें स्क्रीन का रे जोल्यू शन (Resolution) भी उतना ही
अकधक होगा अर्ाा त कचि (Image) उतना ही स्पष्ट होगा एक कडस्ले रे जोल्यूशन (Resolution) माना 640*480 है तो इसका अर्ा है कक
स्क्रीन 640 डॉट के स्ति (Column) और 480 डॉट की पंब्दक्तयों (Row) से बनी है |
Refresh Rate- माीॅनीटर लगातार काया करता रहता है । कम्प्प्यूटर स्क्रीन पर इमेज दायें से बायें एिं ऊपर से नीचे कमटती बनती रहती
है । जो इलेक्ट्रान गन से व्यिब्दस्र्त होता रहता है । इसका अनु भि हम तभी कर पाते है जब स्क्रीन ब्दक्लक करते है या जब ररफ्रेश दर कम
होती है । माीॅनीटर में ररफ्रेश रे ट को हटा ज में नापा जाता है ।
Dot Pitch:- डाीॅट कपच एक प्रकार की मापन तकनीकी है । जो यह प्रदकशा त करती है । की दो कपक्सल के मध्य horizontal अन्तर या
दू री ककतनी है । इसका मापन कमलीमीटर में ककया जाता है । यह माीॅनीटर की गुणित्ता को प्रदकर्ा त करता है । माीॅनीटर में डाीॅटकपच
कम होना चाकहये। इसको फाीॅस्फर कपच भी कहा जाता है । कलर माीॅनीटर की डाीॅट कपच 0.15 MM से .30 MM तक होती है ।
Interlacing or non Interlacing - यह एक ऐसी कडस्ले तकनीकी है। जो की माीॅनीटर में रे जोल्यूशन की गुणित्ता में और अकधक
िृकद्व करती है। इन्ट्रले कसंग माीॅनीटर में इले क्ट्रान गन केिल आधी लाईन खीचती र्ी क्योंकक इन्ट्रले कसंग माीॅनीटर एक समय में केिल
आधी लाइन को ही ररफ्रेर् करता है । यह माीॅनीटर प्रत्येक ररफ्रेर् साइककल में दो से अकधक लाइनों को प्रदकर्ा त कर सकता है । इसकी
केिल यह कमी र्ी कक इसका तमे चिदे म जपउम धीमा होता र्ा।दोनों प्रकार के माीॅनीटर की रे जोलूर्न िमता अच्छी होती है । परन्तु
नाीॅ न इन्ट्रले कसंग माीॅनीटर ज्यादा अच्छा होता है ।
Bit Mapping - पहले जो माीॅनीटरस का प्रयोग ककया जाता र्ा उनमें केिल टे क्स को हो कडस्ले ककया जा सकता र्ा और इनकी
कपक्सेल की संख्या सीकमत होती र्ी। कजससे टे क्स का कनमाणा ककया जाता र्ा। ग्राकफक्स किककसत करने के कलये जो तकनीकी प्रयोग की
गई कजसमें टे क्स और ग्राकफक्स दोनों को प्रदकर्ा त ककया जा सकता हैं िह कबट मै कपंग कहलाती है । इस तकनीकी में कबट मै प ग्राकफक्स का
प्रत्येक कपक्सेल आीॅपरे ट के द्वारा कनयब्दित होता है । इससे आीॅपरे टर ककसी भी आकृकत को स्क्रीन पर बनाया जा सकता है ।
िीकडयो मानक या कडस्ले पद्धकत (Video Standard or Display Modes)
िीकडयो मानक से तात्पया मॉनीटर में लगाये जाने िाले तकनीक से है | पसानल कंप्यूटर की िीकडयो तकनीक में कदन प्रकतकदन सुधार आता
जा रहा है | अब तक पररकचत हुए मानकों में िीकडयो स्टैं डडा के कुछ उदाहरण कनम्नकलब्दखत है
1. कलर ग्राकफक्स अडै िर (Color graphics Adapter)
2. इन्हैं नस्ड ग्राकफक्स अडै िर (Enhanced Graphics Adapter)
3. िीकडयो ग्राकफक्स ऐरे (Video graphics Array)
4. इक्स्टे ण्डेड ग्राकफक्स ऐरे (Extended Graphics Array)
5. सुपर िीकडयो ग्राकफक्स ऐरे (Super Video graphics Array)
िीकडयो मानक या कडस्ले पद्धकत (Video Standard or Display Modes)
िीकडयो मानक से तात्पया मॉनीटर में लगाये जाने िाले तकनीक से है | पसा नल कंप्यूटर की िीकडयो तकनीक में कदन प्रकतकदन सु धार आता जा रहा है |
अब तक पररकचत हुए मानकों में िीकडयो स्टैं डडा के कुछ उदाहरण कनम्नकलब्दखत है
1.कलर ग्राकफक्स अडै िर (Color graphics Adapter)
कलर ग्राकफक्स अडै िर (Color graphics Adapter) को सं किप्त में सी.जी.ए.(CGA) कहते है | इसका कनमाा ण 1981 में इं टरनेशनल कबजनेस
मशीन (International business Machine) नामक कंपनी ने ककया र्ा यह कडस्ले (Display) चार रं गों को प्रदकशात करने की िमता रखता र्ा तर्ा
प्रदशान िमता 320 कपक्से ल (Pixels) िे कतज (Horizontal) तर्ा 200 कपक्सेल (Pixels) उदग्र (Vertical) र्ी यह प्रणाली किं डोज के साधारण खेलो
के कलए प्रयोग में आती र्ी यह ग्राकफक्स (Graphics) या इमेज (Image) के कलए पयाा प्त नही ं र्ा
2.इन्हैं नस्ड ग्राकफक्स अडै िर (Enhanced Graphics Adapter)
इसका कनमाा ण भी इं टरनेशनल कबसनेस मशीन (International business Machine) ने सन् 1984 में ककया र्ा यह कडस्ले कसस्टम (Display
System) 16 अलग-अलग रं गों को प्रदकशात करता र्ा इसकी प्रदशान िमता सी.जी.ए. (CGA) की अपेिा अकधक बे हतर याकन कपक्सल (Pixels)
िै कतज (Horizontal) तर्ा कपक्सल उदग्र (Vertical) र्ी इस कसस्टम ने अपनी प्रदशा न िमता को सी.जी.ए. (CGA) से और अकधक बे हतर बनाया
यह कडस्ले कसस्टम टे क्स्ट (Text) की अपेिा अकधक आसानी से पढ़ सकता र्ा इसके बािजूद ई.जी.ए. (EGA) अकधक िमता िाली ग्राकफक्स
(Graphics) तर्ा डे स्कटॉप पब्दब्लकशंग (Desktop Publishing) के कलए उपयु क्त नही ं र्ा
3.िीकडयो ग्राकफक्स ऐरे (Video graphics Array)
इसका कनमाा ण भी इं टरनेशनल कबसनेस मशीन (International business Machine) कंपनी द्वारा 1987 में ककया गया र्ा इसकी स्पष्टता इसमें प्रयोग
ककये जाने िाले रं गों (Colors) पर कनभा र होती र्ी इसमें 16 रं ग (Color) 640*480 कपक्से ल (Pixels) पर ि 256 रं ग (Color) 320*200 कपक्से ल
(Pixels) पर प्रयोग (Use) ककये जा सकते हैं आजकल VGA मॉनीटर का प्रयोग बहुत अकधक मािा में ककया जाता है
लाइन कप्रंटर (Line Printer) - यह भी एक इम्पैक्ट् कप्रंटर (Impact Printer) हैं बड़े कंप्यूटरों के कलए उच्च गकत (High Speed) के कप्रंटरो की
आिश्यकता होती है उच्च गकत के कप्रंटर एक बार में एक कैरे क्ट्र छापने की बजाय एक लाइन पृ ष्ट को एक बार में छाप सकते है इनकी छापने की
गकत 300 से 3000 लाइन प्रकत कमकनट (Line Per Minute) होती हैं ये कप्रंटर Mini ि Mainframe कंप्यूटर में बड़े कायों हे तु प्रयोग ककये जाते है लाइन
कप्रंटर (Line Printer) तीन प्रकार के होते हैं |
डरम कप्रंटर (Drum Printer)
चैन कप्रंटर (Chain Printer)
बैं ड कप्रंटर (Band Printer)
डरम कप्रंटर (Drum Printer) - डरम कप्रंटर (Drum Printer) में तेज घूमने िाला एक डरम (Drum) होता है कजसकी सतह पर अिर
(Character) उभरे रहते हैं एक बैं ड (Band) पर सभी अिरों का एक समूह (Set) होता हैं , ऐसे अनेक बैं ड सम्पूणा डरम पर होते हैं कजससे कागज पर
लाइन की प्रत्येक ब्दस्र्कत में कैरे क्ट्र छापे जा सकते हैं डरम ते जी से घूमता हैं और एक घूणान (Rotation) में एक लाइन छापता है एक ते ज गकत का
है मर (Hammer) प्रत्येक बैं ड के उकचत कैरे क्ट्र पर कागज के किरुद्ध टकराता हैं और एक घूणान पूरा होने पर एक लाइन छप जाती हैं |
चेन कप्रंटर (Chain Printer) - इस कप्रंटर में तेज घूमने िाली एक चेन (Chain) होती है कजसे कप्रंट चेन (Print Chain) कहते हैं चेन में कैरे क्ट्र
छपे होते है प्रत्येक कड़ी (Link) में एक कैरे क्ट्र का फॉण्ट (Font) होता हैं प्रत्येक कप्रंट पोजीशन (Print Position) पर है मर (Hammer) लगे होते
हैं कजससे है मर (Hammer) कागज पर टकराकर एक बार में एक लाइन कप्रंट करता हैं |
बैंड कप्रंटर (Band Printer) - यह कप्रंटर चेन कप्रंटर (Chain Printer) के समान काया करता है इसमें चेन (Chain) के स्र्ान पर स्टील का एक
कप्रंट बैं ड (Print Band) होता है इस कप्रंटर में भी है मर (Hammer) एक बार में एक लाइन कप्रंट करता हैं |
फोटो कप्रंटर (Photo Printer) - फोटो कप्रंटर एक रं गीन कप्रंटर होता है जो फोटो लैब की क्वाकलटी फोटो पेपर पर छापते हैं इसका इस्तेमाल
डॉक्यु मेंट्स की कप्रंकटं ग के कलए ककया जा सकता है इन कप्रंटरो के पास काफी बड़ी सं ख्या में नॉजल होते है जो काफी अच्छी क्वाकलटी की इमेज के कलए
बहुत अच्छे स्याही के बूं द छापता है |
कुछ फोटो कप्रंटर में कमकडया काडा ररडर भी होते है ये 4×6 फोटो को सीधे कडकजटल कैमरे के कमकडया काडा से कबना ककसी कंप्यूटर के कप्रंट कर सकता
है ज्यादातर इं कजेट कप्रंटर और उच्च िमता िाले लेजर कप्रंटर उच्च क्वाकलटी की तस्वीरे कप्रंट करने में सिम होते हैं कभी कभी इन कप्रंटरो को फोटो
कप्रंटर के रूप में बाजार में लाया जाता है बड़ी सं ख्या में नॉजल तर्ा बहुत अच्छे बूं दों के अकतररक्त इन कप्रंटरो में अकतररक्त फोटो स्यान (cyan) हल्का
मैजेंटा (magenta) तर्ा हल्का काला (black) रं गों में रं गीन कटे ज होता है ये अकतररक्त रं गीन काटे ज को सहायता से अकधक रोचक तर्ा िास्तकिक
कदखने जैसा फोटो छापते है इसका पररणाम साधारण इं कजेट तर्ा लेजर कप्रंटर से बे हतर होता है |
इं क जेट कप्रंटर (Inkjet Printer) - यह Non Impact Printer है कजसमे एक Nozzle (नोजल) से कागज पर स्याही की बूंदो की बौछार
करके कैरे क्ट्र ि ग्राकफक्स कप्रंट ककये जाते है इस कप्रंटर का आउटपुट बहुत स्पष्ट होता है क्योंकक इसमें अिर का कनमाा ण कई डॉट् स से कमलकर होता
हैं रं गीन इं कजेट कप्रंटर में स्याही के चार नोजल होते है नीलम लाल पीला काला इसकलए इसको CMYK कप्रंटर भी कहा जाता हैं तर्ा ये चारो रं ग
कमलकर ककसी भी रं ग को उत्पन्न कर सकते है इसकलए इनका प्रयोग (use) सभी प्रकार के रं गीन कप्रंटर (Colored Printer) में ककया जाता है |
इस कप्रंटर में एक मु ख्य समस्या है कक इसके कप्रंट है ड में इं क क्लौकगं ग (Ink Clogging) हो जाती है यकद इससे कुछ समय तक कप्रंकटं ग ना कक जाये तो।
इसके नोजल के मुहाने पर स्याही जम जाती है । कजससे इसके कछद्र बं द हो जाते है । इस समस्या को इं क ब्दक्लोंकगग कहा जाता है । आजकल इस
समस्या को हल कर कलया गया है । इसके अलािा इस कप्रंटर की कप्रं कटं ग पर यकद नमी आ जाये तो इं क फैल जाती है । इसकी कप्रंकटं ग क्वाकलटी प्रायः 300
Dot Per Inch होती हैं |
पोटे बल कप्रंटर (Portable Printer) - पोटे बल कप्रंटर छोटे कम िजन िाले इं कजेट या र्माल कप्रंटर होते है जो लैपटॉप कंप्यूटर द्वारा यािा के
दौरान कप्रंट कनकलने की अनुमकत दे ते है यह ि़ोने में आसान इस्ते माल करने में सहज होते है मगर कापैक्ट् कडज़ाइन की िजह से सामान्य इं कजे ट
कप्रंटरो के मुकाबले महं गे होते है | इनकी कप्रंकटं ग की गकत भी सामान्य कप्रंटर से कम होती है कुछ कप्रं ट कडकजटल कैमरे से तत्काल फोटो कनकालने के कलए
इस्ते माल ककये जाते है इसकलए इन्हें पोटे बल फोटो कप्रंटर कहा जाता है |
मल्टीफंक्शनल/ऑल इन िन कप्रंटर (Multi functional / All in one Printer) - ऐसा कप्रंटर कजसके द्वारा हम ककसी Document को
Scan कर सकते हैं उसे कप्रंट कर सकते है तर्ा कप्रंट करने के बाद फैक्स भी कर सकते हैं उसे मल्टीफंक्शनल कप्रंटर कहा जाता हैं
मल्टीफंक्शनल/ऑल इन िन कप्रं टर को मल्टीफंक्शनल कडिाइस (Multi Function Device) भी कहा जाता है यह एक ऐसी मशीन है कजसके द्वारा
कई मशीनों के काया जैसे कप्रंटर स्कैनर कॉपीयर तर्ा फैक्स ककये जा सकते है मल्टीफंक्शन कप्रंटर घरे लु कायाा लयों (Home Offices) में बहुत
लोककप्रय होता हैं इसमें इं कजेट या लेजर कप्रंट किकध का प्रयोग हो सकता है कुछ मल्टीफंक्शन कप्रंटरो में कमकडया काडा ररडर का प्रयोग होता है जो
कडकजटल कैमरा से कंप्यूटर के प्रयोग के बगै र सीधे -सीधे इमेज छाप सकता है |
आउटपुट हडवाइस क्या हैं ? (What is Output Device)
आउटपुट कडिाइस (Output Device) हाडा िेयर (Hardware) का एक अियि अर्िा कंप्यू टर का मुख्य भौकतक भाग है कजसे छु आ जा सकता है ,
यह सू चना के ककसी भी भाग तर्ा सू चना के ककसी भी प्रकार जैसे र्ध्कन (Sound), डाटा (Data), मेमोरी (Memory), आकृकतयााँ (Layout) इत्याकद
को प्रदकशात कर सकता हैं आउटपुट कडिाइसो (Output Devices) में सामान्यतः मोकनटर (Monitor) कप्रंटर(Printer) इयरफोन(Earphone) तर्ा
प्रोजेक्ट्र(Projector) सब्दिकलत है
“िे उपकरण कजनके द्वारा कंप्यूटर से प्राप्त पररणामों को प्राप्त ककया जाता है आउटपुट कडिाइसे ज कहलाते हैं ”
आउटपुट कडिाइस के प्रकार (Types of Output Device)
आउटपुट कडिाइस कई प्रकार के होते है |
मॉनीटर (Monitor)
कप्रंटर (Printer)
लोटर (Plotter)
प्रोजेक्ट्र (Projector)
साउं ड काडा (Sound Card)
इअर फोन (Ear phone)
मॉनीटर (Monitor)
मॉनीटर(Monitor) एक ऐसा आउटपुट सं यंि (Output Device) है जो टी.िी. जैसे स्क्रीन पर आउटपुट को प्रदकशात करता है इसे किजुअल कडस्ले
यू कनट (Visual Display Unit) भी कहते है मॉनीटर (Monitor) को सामान्यतः उनके द्वारा प्रदकशात रं गों के आधार पर तीन भागों में िगीकृत ककया
जाता है -
मोनोिोम (Monochrome)
यह शि दो शिों मोनो (Mono) अर्ाा त एकल (Single) तर्ा िोम (Chrome) अर्ाा त रं ग (Color) से कमलकर बना है इसकलये इसे Single Color
Display कहते है तर्ा यह मॉनीटर आउटपुट को Black & White रूप में प्रदकशात (Display) करता है |
ग्रे -स्केल (Gray-Scale)
यह मॉनीटर मोनोिोम जैसे ही होते हैं लेककन यह ककसी भी तरह के Display को ग्रे शेडस (Gray Shades) में प्रदकशात (Show) करता हैं इस प्रकार
के मॉनीटर अकधकतर हैं डी कंप्यू टर जैसे लैप टॉप (Laptop) में प्रयोग ककये जाते हैं
रं गीन मॉनीटर (Color Monitors)
ऐसा मॉनीटर RGB (Red-Green-Blue) किककरणों के समायोजन के रूप में आउटपु ट को प्रदकशात करता है कसद्धां त के कारण ऐसे मॉनीटर उच्च
रे जोलुशन (Resolution) में ग्राकफक्स (Graphics) को प्रदकशात करने में सिम होते हैं कंप्यू टर मे मोरी की िमतानुसार ऐसे मॉनीटर 16 से लेकर 16
लाख तक के रं गों में आउटपुट प्रदकशात करने की िमता रखते हैं |
Monitor से सम्बंकधत अकधक जानकारी प्राप्त करने के कलए इस link पर click करे |
कप्रंटर (Printer)
कप्रंटर एक ऑनलाइन आउटपुट कडिाइस (Online Output Device) है जो कंप्यू टर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छापता है कागज पर आउटपु ट
(Output) की यह प्रकतकलकप हाडा कॉपी (Hard Copy) कहलाती है कंप्यूटर से जानकारी का आउटपुट (Output) बहुत ते जी से कमलता है और कप्रंटर
(Printer) इतनी ते जी से काया नही ं कर पाता इसकलये यह आिश्यकता महसू स की गयी कक जानकाररयों को कप्रंटर (Printer) में ही स्टोर (Store)
ककया जा सके इसकलये कप्रंटर (Printer) में भी एक मेमोरी (Memory) होती है जहााँ से यह पररणामों को धीरे -धीरे कप्रंट करता हैं
“कप्रंटर (Printer) एक ऐसा आउटपुट कडिाइस (Output Device) है जो सॉफ्ट कॉपी (Soft Copy) को हाडा कॉपी (Hard Copy) में पररिकता त
(Convert) करता हैं ”
लॉटर क्या हैं ? (What is Plotter)
Plotter एक आउटपुट कडिाइस हैं इससे कचि (Drawing), चाटा (Chart), ग्राफ (Graph) आकद को कप्रंट ककया जा सकता
हैं यह 3 D Printing भी कर सकते हैं इसके द्वारा बैनर पोस्टर आकद को कप्रंट ककया जा सकता हैं |
“Plotter एक ऐसा आउटपुट कडिाइस हैं जो चाटा (chart), ग्राफ (Graph), कचि (Drawing), रे खाकचि (Map) आकद को
हाडा कॉपी पर कप्रंट करता हैं ”
लॉटर के प्रकार (Types of Plotter)
Drum pen Plotter
Flat bed Plotter
1.Drum Pen Plotter - यह एक ऐसा Plotter हैं कजसमे आकृकत बनाने के कलए पेन का प्रयोग ककया जाता हैं पेन के द्वारा
कागज पर कचि या आकृकत का कनमाा ण ककया जाता है इस कडिाइस में कागज एक डरम के ऊपर चढ़ा रहता हैं जो धीरे धीरे
ब्दखसकता जाता है और पेन कप्रंट करता जाता हैं यह एक मैकेकनकल कलाकार की तरह काया करता हैं कई Drum Pen
Plotter में Fiber Tipped pen का प्रयोग होता है यकद उच्च क्वाकलटी की आिश्यकता हो तो Technical Drafting Pen का
प्रयोग ककया जाता हैं कई रं गीन लॉटर में चार या चार से अकधक पेन होते हैं लॉटर एक आकृकत को इं च प्रकत सेकंड में कप्रंट
करता हैं |
2.Flat bed Plotter - फ्लैट बेड लॉटर में कागज को ब्दस्र्र अिस्र्ा में एक बेड या टर े में रखा जाता हैं इसमें एक भुजा पर
पेन लगा रहता हैं जो मोटर से कागज पर ऊपर-नीचे (Y-अि) और दाये -बाये (X-अि) पर घूमकर कचि या आकृकत का
कनमाा ण करता हैं इसमें पेन कंप्यूटर से कनयंकित होता हैं |
माइिोसॉफ्ट के इस आपरे कटं ग कसस्टम को कडस्क आपरे कटं ग कसस्टम कहा गया क्योंकक यह अकधकतर कडस्क से सं बंकधत इनपुट आउटपुट काया करते
र्े। MS DOS एक आपरे कटं ग कसस्टम यू जर और हाडा िेयर के बीच मध्यस्र्ता का काया करता है । आपरे कटं ग कसस्टम कम्प्प्यूटर में हाडा िेयर एिं
सॉफ्टिे यर को कण्टर ोल ही नही ं करता है । उनके बीच परस्पर सं बंध स्र्ाकपत करता है ।कजससे यू जर को कंप्यूटर ऑपरे ट करने में कोई समस्या नही ं
होती है । MS DOS में कीिोडा की सहायता से कमां ड कदये जाते है । डॉस इन कमां ड्स को समझ कर उस काया को समपन्न करता है ,और आउटपुट
को प्रदकशात करता है ।
डॉस के काया (Functions of DOS)
यह कीबोडा से कमां ड लेता है और उनकी व्याख्या करता है ।
यह कसस्टम की सभी फाइलों को कदखाता है ।
यह प्रोग्राम के कलए नई फाइलें और अलॉट् स स्पेस बनाता है ।
यह पुराने नाम के स्र्ान पर एक फ़ाइल का नाम बदलता है ।
यह एक फ्लॉपी में जानकारी की प्रकतकलकप बनाता है ।
यह एक फ़ाइल का पता लगाने में मदद करता है ।
यह खोजकताा ओं को बताता है कक फ़ाइल कडस्क में कहााँ ब्दस्र्त है ।
यकद हम चाहते हैं कक फ़ाइल में जानकारी मुकद्रत हो, तो यह सू चना का कप्रंटआउट दे ता है ।
यह फ़ाइलों और कनदे कशकाओं को छु पाता है ताकक दू सरों द्वारा नही ं दे खा जा सके।
यह फ़ाइल को स्र्ायी रूप से हटा दे ता है ।
डॉस की किशेर्ताएं (Features of DOS)
यह फ़ाइल प्रबं धन को बे हतर बनाने में सहायक है । फाइलें बनाना, सं पाकदत करना, हटाना आकद।
यह उपयोगकताा ऑपरे कटं ग कसस्टम है । कोई भी उपयोगकताा इस ऑपरे कटं ग कसस्टम में एक समय पर काम कर सकता है ।
यह अचरटर ै क्ट्र बे स्डफ़ोटा फेस कसस्टम है । हम पि (या इस ऑपरे कटं ग कसस्टम में िणा ) टाइप कर सकते हैं ।
MS-DOS 16 कबट ऑपरे कटं ग कसस्टम है ।
डॉस सरल टे क्स्ट कमां ड ऑपरे कटं ग कसस्टम है , यह ग्राकफकल इं टरफ़ेस का समर्ान नही ं करता है
डॉस टे क्स्ट आधाररत इं टरफ़ेस का उपयोग करता है और इसे सं चाकलत करने के कलए टे क्स्ट और कोड की आिश्यकता होती है |
DOS में इनपुट बे कसक कसस्टम कमां ड्स के माध्यम से होता है , अर्ाा त इसे सं चाकलत करने के कलए माउस का उपयोग नही ं ककया जा सकता है |
डॉस इस बात का बहुकिकिी समर्ान नही ं करता है कक इसका रै म में एक बार में केिल एक ही प्रकिया हो सकती है |
उपलब्ध स्टोरे ज स्पेस की उच्चतम मािा 2 जीबी है |
किंडोज क्या है? (Introduction of Windows)
किंडोज की अिधारणा (Window Concept)
Window शि माइिोसॉफ्ट के GUI ऑपरे कटं ग कसस्टम Ms Windows के किकभन्न सं स्करणों के कलए उपयोग ककया जाता है कजसमे हमे एक ऐसा
िातािरण कमलता है कजसमे सभी सु किधाए कचिात्मक रूप में आइकॉन, मेन्यु, बटनों आकद के रूप में कमलती है | इस ऑपरे कटं ग कसस्टम का नाम किं डोज
इसकलए रखा गया क्योकक इसमें प्रत्येक सॉफ्टिे यर एक आयताकार ग्राकफ़क्स बॉक्स के रूप में खुलता है , जो ब्दखड़की की चौखट के सामान होता है
और कजसके माध्यम से हम आज कंप्यूटर को केिल की-बोडा से टाइप होने िाले अिरों से कनकलकर एक नए िातािरण के रूप में दे ख पाए | यह
कचिात्मक िातािरण कंप्यूटर की दु कनया को रोचक और सरल बनाने ि द्रकष्ट से बहुत उपयोगी कसद्ध हुआ है |
Windows सबसे पहले डॉस ऑपरे कटं ग कसस्टम के अंतगा त एक सॉफ्टिे यर के रूप में आया कजसका windows 3.1 सं स्करण बहुत लोककप्रय हुआ |
इसके बाद सन 1995 में यह windows 95 के नाम से एक सं पूणा ऑपरे कटं ग कसस्टम के रूप में जारी हुआ कजसके अब तक Windows 95,
Windows 98, Windows 2000, Windows Me, Windows XP, Windows NT, Windows Vista,Windows 7, Windows 8, Windows 8.1,
Windows 10 आकद अनेक सं स्करण जारी हुए|
Computer Language (कंप्यूटर भार्ा)
हर दे श तर्ा राज्य की अपनी अपनी भार्ा होती हैं और इसी भार्ा के कारण लोग एक दू सरे की बातो को समझ पाते है | ठीक उसी प्रकार कंप्यूटर की
भी अपनी भार्ा होती है कजसे कंप्यूटर समझता है गणनाये करता है और पररणाम दे ता है | प्रोग्राकमंग भार्ा कंप्यूटर की भार्ा है कजसे कंप्यूटर के किद्वानों
ने कंप्यूटर पर एब्दलकेशनों को किककसत करने के कलए Design ककया है | पारं पररक भार्ा कक तरह ही प्रोग्राकमंग भार्ाओाँ के अपने व्याकरण होते है
इसमें भी िणा , शि, िाक्य इत्याकद होते हैं |
प्रोग्राकमंग भार्ाओ के प्रकार (Types of Programming Language)
प्रोग्राकमंग भार्ा कई है | कुछ को हम समझते है तर्ा कुछ को केिल कम्प्प्यूटर ही समझता है | कजन भार्ाओ को केिल कम्प्प्यूटर समझता है िे
आमतौर पर कनम्नस्तरीय भार्ा (Low level Language) कहलाती है तर्ा कजन भार्ाओ को हम समझ सकते है उन्हें उच्चस्तरीय भार्ा (High level
language) कहते है |
कनम्न स्तरीय भार्ा (Low Level Language)
िह भार्ाएाँ (Languages) जो अपने सं केतो को मशीन सं केतो में बदलने के कलए ककसी भी अनुिादक (Translator) को सब्दिकलत नही करता, उसे
कनम्न स्तरीय भार्ा कहते है अर्ाा त कनम्न स्तरीय भार्ा के कोड को ककसी तरह से अनुिाद (Translate) करने की आिश्यकता नही होती है | मशीन
भार्ा (Machine Language) तर्ा असे म्बली भार्ा (Assembly Language) इस भार्ा के दो उदाहरण है | लेककन इनका उपयोग प्रोग्राम
(Program) में करना बहुत ही ककठन है | इसका उपयोग करने के कलए कम्प्प्यूटर के हाडा िेयर (Hardware) के किर्य में गहरी जानकारी होना
आिश्यक है | यह बहुत ही समय लेता है और िु कटयों (Error) की सिािना अत्यकधक होती है | इनका सं पादन (Execution) उच्च स्तरीय भार्ा
(High level language) से ते ज होता है | ये दो प्रकार की होती है –
1. मशीन भार्ा (Machine Language)
2. असे म्बली भार्ा (Assembly Language)
मशीन भार्ा (Machine Language)
कम्प्प्यूटर प्रणाली (Computer System) कसफा अंको के सं केतो को समझाता है , जोकक बाइनरी (Binary) 1 या 0 होता है | अत: कम्प्प्यूटर को कनदे श
कसफा बाइनरी कोड 1 या 0 में ही कदया जाता है और जो कनदे श बाइनरी कोड (Binary Code) में दे ते है उन्हें मशीन भार्ा (Machine Language)
कहते है | मशीनी भार्ा (Machine Level Language) मशीन के कलए सरल होती है और प्रोग्रामर के कलए ककठन होती है | मशीन भार्ा प्रोग्राम का
रख रखाि भी बहुत ककठन होता है | क्योकक इसमें िु टीयो (Error) की सं भािनाएाँ अकधक होती है | Machine Language प्रत्येक Computer System
पर अलग-अलग काया करती है , इसकलए एक कंप्यूटर के कोड दू सरे कंप्यूटर पर नही चल सकते |
असे म्बली भार्ा (Assembly Language)
असे म्बली भार्ा में कनदे श अंग्रेजी के शिों के रूप में कदए जाते है , जैसे की NOV, ADD, SUB आकद, इसे “mnemonic code” (कनमोकनक कोड) कहते
है | मशीन भार्ा की तु लना में असे म्बली भार्ा को समझना सरल होता है लेकीन जैसा की हम जानते है की कम्प्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉकनक कडिाइस
(Electronic Device) है और यह कसफा बाइनरी कोड (Binary Code) को समझता है , इसकलए जो प्रोग्राम असे म्बली भार्ा में कलखा होता है , उसे
मशीन स्तरीय भार्ा (Machine level language) में अनुिाद (Translate) करना होता है | ऐसा Translator जो असे म्बली भार्ा (Assembly
language) को मशीन भार्ा (Machine language) में Translate करता है , उसे असे म्बलर (Assembler) कहते है |
डाटा (Data) को कम्प्प्यूटर रकजस्टर में जमा ककया जाता है और प्रत्येक कम्प्प्यूटर का अपना अलग रकजस्टर से ट होता है , इसकलए असे म्बली भार्ा में
कलखे प्रोग्राम सु किधाजनक नही होता है | इसका मतलब यह है कक दु सरे कम्प्प्यूटर प्रणाली के कलए हमें इसे कफर से अनुिाद करना पड़ता है |
उच्च स्तरीय भार्ा (High Level Language)
उच्च स्तरीय भार्ा (High level language) सु किधाजनक होने के लिणों को ध्यान में रखकर बनाया गया है , इसका अर्ा यह कक ये भार्ा मशीन पर
कनभा र करती है | यह भार्ा अंग्रेजी भार्ा के कोड जैसी होती है , इसकलए इसे कोड करना या समझना सरल होता है | इसके कलए एक Translator की
आिश्यकता होती है , जो उच्च स्तरीय भार्ा के Program को मशीन कोड में translate करता है इसके उदाहरण है – फॉरटरै न (FORTRAN),
बे कसक (BASIC), कोबोल (COBOL), पास्कल (PASCAL), सी (C), सी++ (C++), जािा (JAVA), VISUAL BASIC, Visual Basic.net HTML,
Sun Studio आकद इसी श्रेणी (Category) की भार्ा है इसको दो generation में बााँ टा गया गई|
1. Third Generation Language
2. Fourth Generation Language
तृ तीय पीढ़ी भार्ा (Third Generation Language)
तृ तीय पीढ़ी भार्ाएाँ (Third Generation Language) पहली भार्ाएाँ र्ी कजन्होंने प्रोग्रामरो को मशीनी तर्ा असे म्बली भार्ाओ में प्रोग्राम कलखने से
आजाद ककया| तृ तीय पीढ़ी की भार्ाएाँ मशीन पर आकश्रत नही र्ी इसकलए प्रोग्राम कलखने के कलए मशीन के आककाटे क्चर को समझने की जरुरत नही
र्ी | इसके अकतररक्त प्रोग्राम पोटे बल हो गए, कजस कारण प्रोग्राम को उनके कम्पाइलर ि इन्ट्रप्रेटर के सार् एक कम्प्प्यूटर से दु सरे कम्प्प्यूटर में कॉपी
ककया जा सकता र्ा| तृ तीय पीढ़ी के कुछ अत्यकधक लोककप्रय भार्ाओ में फॉरटरै न (FORTRAN), बे कसक (BASIC), कोबोल (COBOL), पास्कल
(PASCAL), सी (C), सी++ (C++) आकद सब्दिकलत है |
चतु र्ा पीढ़ी भार्ा (Fourth Generation Language)
Forth Generation Language, तृ तीय पीढ़ी के भार्ा से उपयोग करने में अकधक सरल है | सामान्यत: चतु र्ा पीढ़ी की भर्ाओ में किजुअल (Visual)
िातािरण होता है जबकक तृ तीय पीढ़ी की भार्ाओ में टे क्सचु अल (Textual) िातािरण होता र्ा | टे क्सचु अल िातािरण में प्रोग्रामर Source Code को
कनकमात करने के कलए अंग्रेजी के शिों का उपयोग करते है | चतु र्ा पीढ़ी की भार्ाओ के एक पंब्दक्त का कर्न तृ तीय पीढ़ी के 8 पं ब्दक्तयों के कर्न के
बराबर होता है | किजुअल िातािरण में, प्रोग्रामर बटन, लेबल तर्ा टे क्स्ट बॉक्सो जैसे आइटमो को डरैग एिं डरॉप करने के कलए टू लबार का उपयोग
करते है | इसकी किशेर्ता IDE (Integrated development Environment) हैं कजनके Application Compiler तर्ा run time को Support करते
है | Microsoft Visual studio and Java Studio इसके दो उदाहरण है |
लाभ (Advantages)
चतु र्ा पीढ़ी की भार्ा को सीखना सरल है तर्ा इसमें सॉफ्टिे यर का किकास करना आसान है |
चतु र्ा पीढ़ी की भार्ाओ में टे क्सचु अलइं टरफेस (Textual Interface) के सार्-सार् ग्राकफकल इं टरफेस (Graphical Interface) भी होता है |
प्रोग्रामरो के कलए चतु र्ा पीढ़ी की भार्ाओ में किकि उपलब्ध रहते है क्योकक इसकी सं ख्या काफी बड़ी होती है |
चतु र्ा पीढ़ी की भार्ाओ में प्रोग्राकमंग कम स्र्ान लेती है क्योकक इस पीढ़ी की भार्ा की एक पंब्दक्त पूिािती पीढ़ी भार्ाओ की कई पंब्दक्तयो के समान
होती है |
चतु र्ा पीढ़ी की भार्ाओ की उपलब्धता ककठन नही ं है |
हाकन (Disadvantages)
चतु र्ा पीढ़ी की भार्ाएाँ उच्च कंकफगरे शन के कंप्यूटरो पर ही सं चाकलत हो सकती है |
इस पीढ़ी की भार्ाओ के कलए किशेर्ज्ञता की कम आिश्यकता होती है | इसका अर्ा है की इसमें प्रोग्राकमंग आसान होने के कारण नौकसब्दखए भी
सॉफ्टिे यर किककसत करने में सिम हो पाते है | पररणामस्वरूप, किशेर्ज्ञों का महत्व कम हो जाता है |
इस पीढ़ी में प्रोग्राकमंग भार्ाओ की एक बड़ी श्रंखला होती है , कजससे यह कनणा य ले पाना ककठन हो जाता है की ककसका प्रयोग ककया जाये तर्ा ककसे
छोड़ा जाये |कम्पाइलर और इं टरप्रेटर के बीच अंतर जानने के पहले हम यह जान ले ते हैं की ये दोनों का क्या अर्ा है
Compiler
Compiler executable file बनाने के कलए Source Code को Machine code में translate करता है | ये code executable file के
object code कहलाते है | Programmer इस executable object file को ककसी दू सरे computer पर copy करने के पश्चात् execute
कर सकते हैं | दू सरे शिों में Program एक बार Compile हो जाने के बाद स्वतंि रूप से executable file बन जाता है कजसको
execute होने के कलए compiler की आिश्यकता नहीं होती है | प्रत्येक Programming language को Compiler की आिश्यकता होती
हैं |
Interpreter
Interpreter एक प्रोग्राम होता हैं जो High level language में कलखे Program को Machine Language में बदलने का काया करता है
Interpreter एक–एक Instruction को बारी-बारी से machine language को Translate करता है |यह High level language के
Program के सभी instruction को एक सार् machine language में translate नहीं करता है |
Assembler
Assembler एक प्रोग्राम है जो Assembly language को machine language में translate करता है | इसके अलािा यह high level
language को Machine language में translate करता है यह कनमोकनक कोड (mnemonic code) जै से- ADD, NOV, SUB आकद को
Binary code में बदलता है |
Difference between compiler and interpreter
SN कम्पाइलर (Compiler) इं टरप्रेटर (Interpreter)
सोसा कोड को अनुिाद करने में सोसा कोड को अनुिाद करने में समय ज्यादा लगता है
3
समय और प्रोसेकसंग कम लगती है | |
MS Office
यह एक आकफकसयल साफ्टिे यर (Official Software) है ।
यह कई Application Software का सं ग्रह है ।जो आकफस कक सभी जरुरतो को पूरा करता है
इसको अमेररका की कम्पनी माइिोसाफ्ट ने किककसत ककया है इस कम्पनी के अध्यि दु कनया के सबसे अमीर व्यब्दक्त Bill Gates है ।
MS office का पूरा नाम Microsoft office है । इसमे ms office के अन्दर पाये जाने िाले software word, excel, Power Point, Outlook
and access है जो आकफस कक सभी जरूरतो को पूरा करते है ।
MS Word
Microsoft Word ऍम एस ऑकफस का ही एक Software हैं | कजसको Microsoft Company द्वारा बनाया गया र्ा यह Software किश्व में सबसे
अकधक प्रयोग में आने िाला Software हैं | इसे सं किप्त में MS Word भी कहा जाता हैं | Microsoft Word का प्रयोग Letter Writing, Resume,
Mail Merge आकद कायों के कलए ककया जाता है इसकलए Microsoft Word को Word Processing के नाम से भी जाना जाता हैं |
शि कलखना, िाक्य बनाना, पैराग्राफ बनाना, पृ ि तै यार करना इस प्रकार की सभी प्रकियाओ के द्वारा अपनी बात को सु कनयोकजत ि़ं ग से प्रस्तु त करना
Word Processing कहलाता हैं अपने हार् से पेंकसल या पे न की सहायता से की गई प्रकिया मानिीय शि प्रकिया कहलाती हैं परन्तु जब यही काया
कंप्यूटर की सहायता से ककया जाता है तब यह इलेक्ट्रोकनक िडा प्रोसे कसं ग कहलाती हैं |
Features of MS Word
Page Formatting
Bullets and Numbering
Editing of text
Spelling and Grammar Check
Use of Thesaurus
Page Numbering
Column
Mail Merge
Create a Table
Auto Text
Auto Correct
Header & Footer
Find & Replace
Styles & Formatting
Use Macro
अगर आप एम् एस िडा 2013 के नोट् स कहं दी में पड़ना और डाउनलोड करना चाहते हैं , तो कृपया नीचे दी गयी कलंक पर ब्दक्लक करें |
कम्प््प्यूटर कोड (Computer Codes)
कम्प््प्यू टर में डाटा अिरों (Alphabets), किशेर् कचन्हों (Special Characters) तर्ा अंकों (Numeric) में हो सकता हैं । अत: इन्हें अल्फान्यु मेररक
डाटा (Alphanumeric Data) कहा जाता हैं । डाटा में प्रत्ये क अिर, कचन्ह या अंक को एक किशेर् कोड द्वारा व्यक्त ककया जाता हैं ।
बाइनरी कोडे ड डे कसमल (BCD – Binary Coded Decimal)
इसमें सं पूणा Decimal Number को Binary में बदलने की बजाय Decimal Number के प्रत्ये क अं क को उसके चार अंकीय बाइनरी
तु ल्यां क(Rating)से प्रकतस््र्ाकपत (Substituted)कर कदया जाता है । इसे 4 Bit BCD Code कहा जाता हैं ।
आस््की (ASCII – American Standard Code for Information Interchange)
आस््की (ASCII) एक्लोककप्रय कोकडं ग कसस््टम है कजसका प्रारं भ आन्सी (ANSI – American National Standards Institute) द्वारा 1963 में ककया
गया। इसमें एक कैरे क्टर के कलए 8 कबट और तीव्र कनरूपण के कलए Hexadecimal number System का प्रयोग ककया गया। कम्प््प्यूटर के की–बोडा में
प्रयु क्त प्रत्ये क कैरे क्टर के कलए एक किशेर् आस््की कोड कनधाा ररत ककया गया हैं । इसमें एक कैरे क्टर के कलए 8 कबट का प्रयोग ककया जाता हैं ।
यूनीकोड (Unicode-Universal Code)
कम्प््प्यू टर के बढ़ते व्यिहार तर्ा अलग-अलग भार्ाओं में कम्प््प्यू टर के उपयोग ने एक Public code की आिश्यकता को जन्म कदया कजसमें सं सार के
प्रत्ये क कैरे क्टर के कलए एक अलग कोड कनधाा ररत हो ताकक प्रत्ये क भार्ा, प्रत्ये क प्रोग्राम तर्ा प्रत्ये क साफ्टिे यर में उसका प्रयोग ककया जा सके। इसके
कलए यू नीकोड की व्यिस््र्ा की गई कजसमें एक लाख कैरे क्टर के कनरूपण की िमता हैं |
यू नीकोड किश्ि की सभी भार्ाओं में प्रयु क्त पहले 256 कैरे क्टर का कनरूपण आस््की कोड के समान ही है । इसमें प्रत्ये क कैरे क्टर को 32 कबट में
कनरूकपत ककया जाता हैं । यू नीकोड में तीन प्रकार की व्यिस््र्ा प्रयोग में लायी जाती हैं ।
i. यू टीएफ – 8 (UTF-8-Unicode Transformation Format-8
यू टीएफ-8 फामेट में समस््त यू नीकोड अिरों को एक्, दो, तीन या चार बाइट के कोड में बदला जाता हैं ।
ii. यू टीएफ – 16 (UTF-16)
इस फामेट में यू नीकोड अिरों को एक या दो शब्दों (1 शब्द = 16 कबट) के कोड में बदला जाता हैं । अत: इसे Word Oriented Format भी
कहते हैं ।
iii. यू टीएफ-32 (UTF-32)
इस कोड में समस््त अिरों को दो शब्दों (Words) यानी 32 कबट के यू नीकोड में बदला जाता हैं ।
Number System
ककसी भी सं ख्या को कनरूकपत(Denote) करने के कलए एक किशे र् Number System का प्रयोग ककया जाता हैं । प्रत्ये क Number System में प्रयोग
ककए जाने िाले अंक या अंको के समूह से उसको दशाा या जाता हैं । प्रत्ये क सं ख्या का एक कनकश्चत आधार (Base) होता हैं । जो उस Number System
में प्रयोग ककए जाने िाले मूल अं कों (Basic Digits) की सं ख्या के बराबर होता हैं । ककसी भी सं खया
् में अंको (Digits) की ब्दस्र्कत दायीं से बायीं ओर
कगनी जाती हैं । ककसी सं ख्या में प्रत्ये क अंक का मान उसके सं ख्यात्मक मान (Face Value) तर्ा स््र्ानीय मान (Position Value) पर कनभा र करता
हैं । ककसी सं ख्या का कुल मान (Value) प्रत्ये क अंक के मान का योगफल होता हैं ।Decimal number System सिाा कधक प्राचीन और सबसे प्रचकलत
सं ख्या पद्धकत हैं ।
आधार (Base)
ककसी सं ख्या को कनरूकपत (Denote) करने के कलए प्रयोग की जाने िाली मूल अंकों (Basic Digits) की कुल सं ख्या उस Number System का
आधार कहलाती हैं । उदाहरण के कलए, Decimal number System में सभी सं खयाओं् को 10 मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, तर्ा 9) से
कनरूकपत ककया जाता हैं । अत: इसका आधार 10 हैं । Binary Number System में 2 मू ल अंकों (0 तर्ा 1 ) का प्रयोग ककया जाता हैं । अत:
इसका आधार 2 हैं । Octal number System में आठ मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, तर्ा 7) का प्रयोग होता हैं , अत: इसका आधार 8 हैं ।
Hexadecimal Number System का आधार 16 है क्योंकक इसमें सभी सं ख्याओं को 16 मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, A, B, C, D तर्ा E) से
दशाा या जाता हैं ।
संख्यात्मक मान (Numerical value)
ककसी सं ख्या में ककसी अंक की Numerical value उस सं ख्या की ब्दस्र्कत पर कनभा र करती हैं । सं ख्या में अंकों की ब्दस्र्कत को दायी ं से बायीं ओर कगना
जाता हैं । सबसे दां यी और अर्ाा त इकाई के स््र्ान पर ब्दस्र्त अंक की Numerical value ‘0’ होगी। दहाई के अंक का सं ख्यात्मक मान ‘1’ , सै कड़े के
अंक का सं ख्यात्मक मान ‘2’ जबकक हजार के अंक का सं ख्यात्मक मान ‘3’ होता हैं ।
स््र्ानीय मान (Position Value)
ककसी सं ख्या में ककसी अंक का स््र्ानीय मान सं ख्या के आधार तर्ा उस्के सं ख्यात्मक मान पर कनभा र करता हैं । ककसी सं ख्या का स््र्ानीय मान सं ख्या
के आधार पर सं ख्यात्मक मान के घात के बराबर होता हैं ।
स््र्ानीय मान = (आधार)सं ख्यात्मक मान
Position Value = (Base)Face Value
ककसी सं ख्या का मान प्रत्ये क अंक के सं ख्यात्मक मान तर्ा स््र्ानीय मान के गु णनफल का योग होता हैं ।
उदाहरण : सं ख्या = 4206(10)
सं ख्या 4 2 0 6
सं ख्यात्मक मान
3 2 1 0
(Face Value)
स््र्ानीय मान
103=1000 102=100 101=10 100=1
(Position Value)
सं ख्या का मान =
4×1000=4000 2×100 =200 0x10 = 0 6×1 = 6
अंक x स््र्ानीय मान
Binary Number
2 0,1 1
System
Octal Number
8 0,1,2,3,4,5,6,7 7
System
Decimal
Number 10 0,1,2,3,4,5,6,7,8,9 9
System
Hexadecimal
0,1,2,3,4,5,6,7,8,9,
Number 16 F (15)
A,B,C,D,E,F
System
Binary Number System में इन दो अंकों 0 और 1 को बाइनरी कडकजट या सं िेप में कबट कहते हैं । Number System में ककसी भी सं ख्या का मान
उसके स््र्ानीय मान पर कनभा र करता हैं ।
Decimal Number System
इसमें आधार 10 होता हैं तर्ा इकाई के अंक का स््र्ानीय मान 100=1 होता हैं , दहाई के अंक का स््र्ानीय मान 101=10 तर्ा सै कड़ा के अंक का
स््र्ानीय मान 102=100 होता हैं । ककसी अंक का कुल मान उस अं क तर्ा उसके स््र्ानीय मान के गु णनफल के बराबर होता हैं ।
इसी प्रकार Binary Number System में आधार 2 होता हैं । इकाई के अंक का स््र्ानीय मान 20=1 होता है , दहाई के अंक का स््र्ानीय मान 21=2
तर्ा सै कड़ा के अंक का स््र्ानीय मान 22=4 होता हैं ।
कद्वआधारी का दशमलि में पररितान (Conversion Binary to Decimal)
Binary अंकों को Decimal में बदलने के कलए उसके अंकों के मान को स््र्ानीय मान से गु णा कर उन्हें जोड़ कदया जाता हैं ।
example :- 10101(2) को Decimal में बदलें।
सं ख्या 1 0 1 0 1
स््र्ानीय मान 24 23 22 21 20
10101(2) = (1×24) + (0x23) + (1×22) + (0x21) + (1×20)
= (1×16) + (0x8) + (1×4) + (0x2) + (1×1)
= 16 + 0 + 4 + 0 + 1
= 21(10)
दशमलि अंकों के बाइनरी तुल्यां क
Decimal Binary
0 0
1 1
2 10
3 11
4 100
5 101
6 110
7 111
8 1000
9 1001
10 1010
दशमलि कभन्न का बाइनरी में पररितान (Conversion of Decimal Fraction to Binary Fraction)
दशमलि कभन्न को 2 से गु णा करते हैं । गु णनफल में पूणा सं ख्या को अलग कलखते हैं जो बाइनरी कभन्न का बायां अंक (MSD) होता है । कभन्न को पुन:
2 से गु णा करते हैं और यह तब तक दु हराते हैं जब तक कभन्न शून्य न हो जाये या बाइनरी कभन्न के आिश्यक अंक पूरे न हो जाए।
कद्वआधारी का दशमलि में पररितान (Conversion Binary to Decimal)
Binary अंकों को Decimal में बदलने के कलए उसके अंकों के मान को स््र्ानीय मान से गु णा कर उन्हें जोड़ कदया जाता हैं ।
example :- 10101(2) को Decimal में बदलें।
सं ख्या 1 0 1 0 1
स््र्ानीय मान 24 23 22 21 20
10101(2) = (1×24) + (0x23) + (1×22) + (0x21) + (1×20)
= (1×16) + (0x8) + (1×4) + (0x2) + (1×1)
= 16 + 0 + 4 + 0 + 1
= 21(10)
दशमलि अंकों के बाइनरी तुल्यां क
Decimal Binary
0 0
1 1
2 10
3 11
4 100
5 101
6 110
7 111
8 1000
9 1001
10 1010
दशमलि कभन्न का बाइनरी में पररितान (Conversion of Decimal Fraction to Binary Fraction)
दशमलि कभन्न को 2 से गु णा करते हैं । गु णनफल में पूणा सं ख्या को अलग कलखते हैं जो बाइनरी कभन्न का बायां अंक (MSD) होता है । कभन्न को पुन:
2 से गु णा करते हैं और यह तब तक दु हराते हैं जब तक कभन्न शून्य न हो जाये या बाइनरी कभन्न के आिश्यक अंक पूरे न हो जाए।
अंकतम पूणाां क बाइनरी कभन्न का दाया अंक (LSD) होता है । दशमलि के बाद बाइनरी कभन्न को ऊपर से नीचे की ओर कलखा जाता हैं ।
Example : 0.8125(10) को बाइनरी में बदले
0.8125 x 2 = 1.625 =1(MSD)
0.625 x 2 =1.250 =1
0.250 x 2 = 0.500 =0
0.500 x 2 =1.000 =1 (LSD)
अत: 0.8125(10) = 0.1101(2)
संचार क्या है ? (What is Communication?)
Communication (सं चार) का अर्ा हैं सू चनाओ का आदान प्रदान करने से हैं | लेककन ये सू चनाये तब तक उपयोगी नही ं हो सकती जब तक कक इन
सू चनाओ का आदान प्रदान न हो| पहले सू चनाओ या सन्दे श को एक स्र्ान से दु सरे स्र्ान पर भे जने में काफी समय लगता र्ा | ककन्तु िता मान में
सं देशों का आदान प्रदान बहुत ही आसान हो गया हैं और समय भी कम लगता है से टेलाइट ि टे लीकिजन ने तो सारी दु कनया को एक नगर में बदल
कदया हैं |
जब दो या दो से अकधक व्यब्दक्त आपस में कुछ सार्ाक कचह्ों, सं केतों या प्रतीकों के माध्यम से किचारों या भािनाओं का आदान-प्रदान करते हैं तो उसे
सं चार कहते हैं ।
“Communication refers to the act by one or more persons of sending and receiving messages – distorted by noise-with some
effect and some opportunity for feedback”
Use of Communication and IT (Information Technology):-
हमारे पास कम्युकनकेशन के सबसे प्रबल माध्यम में हमारी आिाज और भार्ा है और इसके िाहक के रूप में पि, टे लीफोन, फैक्स, टे लीग्राम, मोबाइल
तर्ा इन्ट्रनेट इत्याकद हैं | कम्युकनकेशन का उद्दे श्य सं देशो तर्ा किचारो का आदान प्रदान है | सम्पूणा मानि सभ्यता इसी कम्युकनकेशन पर आधाररत है
तर्ा इस कम्युकनकेशन को ते ज ि सरल बनाने के कलए सू चना प्रोद्योकगकी का जन्म हुआ| कंप्यूटर, मोबाइल, इन्ट्रनेट सबका अकिष्कार इसी
कम्युकनकेशन के कलए हुआ | इन्ट्रनेट एक ऐसा सशक्त माध्यम है कजसके द्वारा हम पूरी दु कनया में कही भी ि ककसी भी समय कम से कम समय ि
कम से कम खचा में सू चनाओ ि किचारो का आदान प्रदान कर सकते हैं |
Communication Process (संचार प्रकिया)
कम्युकनकेशन का मु ख्य उद्दे श्य डाटा ि सू चनाओ का आदान प्रदान करना होता है | डाटा कम्युकनकेशन से तात्पया दो समान या किकभन्न कडिाइसों के
मध्य डाटा का आदान प्रदान से है अर्ाा त कम्युकनकेशन करने के कलए हमारे पास समान कडिाइस होना आिश्यक है | डाटा कम्युकनकेशन के प्रभाि
को तीन मुख्य किशेर्ताओ द्वारा प्रदकशात ककया जा सकता है |
1. कडलीिरी (Delivery) – कडलीिरी से तात्पया डाटा को एक जगह से दु सरे जगह प्राप्त कराने से है |
2. शुद्धता (Accuracy) – यह डाटा की गु णित्ता या डाटा के सही होने को दशाा ता है |
3. समयबधता (Timeliness) – यह गु ण डाटा के कनश्चय समय में कडलीिर होने को दशाा ता है |
संचार के घटक (Components of Communication)
मैसेज (Message)
प्रेर्क (Sender)
माध्यम (Medium)
प्राप्तकताा (Receiver)
प्रोटोकॉल (Protocol)
Message
मैसेज िह जानकारी है जो Sender और Receiver के बीच आदान-प्रदान की जाती है । पहला काया यह तय करना है कक आप क्या मैसेज भे जना
चाहते हैं और आपके मैसेज की सामग्री क्या होगी; आपके मैसेज के मुख्य कबं दु और अन्य जानकारी शाकमल करने के कलए क्या हैं । इसमें टे क्स््ट, नंबसा ,
इमेज, साउं ड, या िीकडयो या कुछ भी हो सकते हैं ।
Sender/Encoder
एनकोडर या से न्डर िह व्यब्दक्त होता है जो मैसेज भे जता है । मौब्दखक कम्युकनकेशन में एन्कोडर स्पीकर होता है , और कलब्दखत कम्युकनकेशन में
एन्कोडर लेखक होता है । एक एन्कोडर ररसीिर द्वारा समझने योग्य प्रतीकों, शिों, ग्राफ और कचिों का उपयोग करता है , ताकक िह अपनी बात को
अच्चेई तरह से समझा सकें|
Medium
Medium िह चै नल है कजसके माध्यम से एन्कोडर अपने मैसेज को भे जता हैं मैसेज भे जने का माध्यम कप्रंट, इलेक्ट्रॉकनक या र्ध्कन हो सकता है ।
डाककया के रूप में एक व्यब्दक्त हो सकता है Medium का काया Sender और Receiver को आपस में जोड़ना होता हैं |
टर ां सकमशन माध्यम (Transmission Medium) िह माध्यम है कजसके माध्यम से हम डे टा एक स्र्ान से दू सरे स्र्ान पर भे जते हैं , कजसे टरां सकमशन या
सं चार मीकडया (Transmission Media) कहा जाता है ।
Receiver/Decoder
कजस व्यब्दक्त को मैसेज भे जा जा रहा है उसे ‘ररसीिर’ / ‘कडकोडर’ कहा जाता है । ररसीिर िह व्यब्दक्त है जो Sender द्वारा भे जे गए मैसेज को ररकसि
करता है । यह एक कंप्यूटर, िकास्टे शन, टे कलफोन हैं डसे ट, टे लीकिज़न भी हो सकता है ।
Protocol
प्रोटोकॉल कनयमों का एक ग्रु प है जो डे टा कम्युकनकेशन को कंटर ोल करता है । यह कम्युकनकेशन कडिाइसे स के बीच एक एग्रीमेंट को ररप्रेसेंट करता है ।
प्रोटोकॉल के कबना, दो कडिाइस कनेक्ट् ककए जा सकते हैं , लेककन कम्युकनकेशन नही ं कर सकते , जैसे जापानी समझने िाले व्यब्दक्त को कहं दी भार्ा
समझ में नही ं आएगी।
Types of Communication (कम्युकनकेशन के प्रकार)
कजस प्रकार सड़क पर िन िे , टू िे होता है | ठीक उसी प्रकार कम्युकनकेशन चै नल के मोड होते हैं | कम्युकनकेशन चैनल तीन प्रकार के होते है
कसम्पलेक्स (Simplex), अद्धा ड्यू लेक्स (Half Duplex) और पूणा ड्यू लेक्स (Full Duplex)|
कसम्पलेक्स (Simplex)
इस अिस्र्ा में डाटा का सं चरण सदै ि एक ही कदशा में होता हैं | अर्ाा त हम अपनी सू चनाओ को केिल भे ज सकते है प्राप्त नही ं कर सकते कसम्पलेक्स
कम्युकनकेशन कहलाता हैं |
उदाहरणार्ा - कीबोडा , कीबोडा से हम केिल सू चनाये भे ज सकते है प्राप्त नही ं कर सकते |
इस अिस्र्ा में डाटा का सं चरण एक समय में दोनों कदशाओं में सं भि होता है हम एक ही समय में दोनों कदशाओ में सू चनाओं का सं चरण कर सकते है
| अर्ाा त हम एक ही समय में सू चनाएं भे ज भी सकते है और प्राप्त भी कर सकते है पूणा ड्यू लेक्स (Full Duplex) कहलाता हैं |
उदाहरणार्ा- Smart Phone
Communication(संचार) क्या है ?
Communication (सं चार) का अर्ा – सू चनाओ का आदान प्रदान करने से हैं | लेककन ये सू चनाये तब तक उपयोगी नही ं हो सकती जब तक कक इन
सू चनाओ का आदान प्रदान न हो| पहले सू चनाओ या सन्दे श को एक स्र्ान से दु सरे स्र्ान पर भे जने में काफी समय लगता र्ा | ककन्तु िता मान में
सं देशों का आदान प्रदान बहुत ही आसान हो गया हैं और समय भी कम लगता है से टेलाइट ि टे लीकिजन ने तो सारी दु कनया को एक नगर में बदल
कदया हैं |
“जब दो या दो से अकधक व्यब्दक्त आपस में कुछ सार्ाक कचह्ों, सं केतों या प्रतीकों के माध्यम से किचारों या भािनाओं का आदान-प्रदान करते हैं तो उसे
सं चार कहते हैं ।”
“Communication refers to the act by one or more persons of sending and receiving messages – distorted by noise-with
some effect and some opportunity for feedback”
संचार के तत्व (Components of Communication)
मैसेज (Message)
प्रेर्क (Sender)
माध्यम (Medium)
प्राप्तकताा (Receiver)
प्रोटोकॉल (Protocol)
Message
मैसेज िह जानकारी है जो Sender और Receiver के बीच आदान-प्रदान की जाती है । पहला काया यह तय करना है कक आप क्या मैसेज भे जना
चाहते हैं और आपके मैसेज की सामग्री क्या होगी; आपके मैसेज के मुख्य कबं दु और अन्य जानकारी शाकमल करने के कलए क्या हैं । इसमें टे क्स््ट, नंबसा ,
इमेज, साउं ड, या िीकडयो या कुछ भी हो सकते हैं ।
Sender/Encoder
एनकोडर या से न्डर िह व्यब्दक्त होता है जो मैसेज भे जता है । मौब्दखक कम्युकनकेशन में एन्कोडर स्पीकर होता है , और कलब्दखत कम्युकनकेशन में
एन्कोडर लेखक होता है । एक एन्कोडर ररसीिर द्वारा समझने योग्य प्रतीकों, शिों, ग्राफ और कचिों का उपयोग करता है , ताकक िह अपनी बात को
अच्चेई तरह से समझा सकें|
Medium
Medium िह चै नल है कजसके माध्यम से एन्कोडर अपने मैसेज को भे जता हैं मैसेज भे जने का माध्यम कप्रंट, इलेक्ट्रॉकनक या र्ध्कन हो सकता है ।
डाककया के रूप में एक व्यब्दक्त हो सकता है Medium का काया Sender और Receiver को आपस में जोड़ना होता हैं |
टर ां सकमशन माध्यम (Transmission Medium) िह माध्यम है कजसके माध्यम से हम डे टा एक स्र्ान से दू सरे स्र्ान पर भे जते हैं , कजसे टरां सकमशन या
सं चार मीकडया (Transmission Media) कहा जाता है ।
Receiver/Decoder
कजस व्यब्दक्त को मैसेज भे जा जा रहा है उसे ‘ररसीिर’ / ‘कडकोडर’ कहा जाता है । ररसीिर िह व्यब्दक्त है जो Sender द्वारा भे जे गए मैसेज को ररकसि
करता है । यह एक कंप्यूटर, िकास्टे शन, टे कलफोन हैं डसे ट, टे लीकिज़न भी हो सकता है ।
Protocol
प्रोटोकॉल कनयमों का एक ग्रु प है जो डे टा कम्युकनकेशन को कंटर ोल करता है । यह कम्युकनकेशन कडिाइसे स के बीच एक एग्रीमेंट को ररप्रेसेंट करता है ।
प्रोटोकॉल के कबना, दो कडिाइस कनेक्ट् ककए जा सकते हैं , लेककन कम्युकनकेशन नही ं कर सकते , जैसे जापानी समझने िाले व्यब्दक्त को कहं दी भार्ा
समझ में नही ं आएगी।
Types of Communication (कम्युकनकेशन के प्रकार)
कजस प्रकार सड़क पर िन िे , टू िे होता है | ठीक उसी प्रकार कम्युकनकेशन चै नल के मोड होते हैं | कम्युकनकेशन चैनल तीन प्रकार के होते है
कसम्पलेक्स (Simplex), अद्धा ड्यू लेक्स (Half Duplex) और पूणा ड्यू लेक्स (Full Duplex)|
कसम्पलेक्स (Simplex)
इस अिस्र्ा में डाटा का सं चरण सदै ि एक ही कदशा में होता हैं | अर्ाा त हम अपनी सू चनाओ को केिल भे ज सकते है प्राप्त नही ं कर सकते कसम्पलेक्स
कम्युकनकेशन कहलाता हैं |
उदाहरणार्ा - कीबोडा , कीबोडा से हम केिल सू चनाये भे ज सकते है प्राप्त नही ं कर सकते |
इस अिस्र्ा में डाटा का सं चरण एक समय में दोनों कदशाओं में सं भि होता है हम एक ही समय में दोनों कदशाओ में सू चनाओं का सं चरण कर सकते है
| अर्ाा त हम एक ही समय में सू चनाएं भे ज भी सकते है और प्राप्त भी कर सकते है पूणा ड्यू लेक्स (Full Duplex) कहलाता हैं |
इस तरह की केबल में दो कॉपर कंडक्ट्र जो खुद को लाब्दस्टक किर से ि़के रहते हैं आपस में गु र्े रहते हैं (प्रत्येक के लाब्दस्टक किर का रं ग कभन्न
होता है जो इन्हें पहचानें एिं दू सरे बं डल में जोड़ने में काम आता है )
पहले कम्युकनकेशन में दोनों तारों को समानां तर रखकर प्रयोग ककया जाता र्ा लेककन इस तरह के सं योजन में किकभन्न कडिाइसों के इलेक्ट्रोमैग्नेकटक
इं टरफेरें स से noise उत्पन्न हो जाता र्ा| कजससे डे ब्दस्टनेशन पर noise signal पहुचाता र्ा|
उपरोक्त कचि से स्पष्ट है कक ररसीिर को Noisy कसग्नल कमला है अब यकद हम इन्हीं तारों को आपस में गू र् दें गे तो noise का प्रभाि खत्म हो जाएगा या
बहुत कम हो जाएगा| इसे कनम्न कचि में कदखाया हैं –
हैं ।
क्लाइं ट / सिा र आककाटे क्चर को नेटिककांग कंप्यूकटं ग मॉडल या क्लाइं ट / सिा र ने टिका के रूप में भी जाना जाता है क्योंकक सभी अनुरोध और
से िाएं नेटिका पर कितररत की जाती हैं । सिा र कंप्यूटर या कडस्क डराइि (फ़ाइल सिा र), कप्रंटर (कप्रंट सिा र), या नेटिका यातायात (नेटिका सिा र) के
प्रबं धन के कलए समकपात प्रकियाएं हैं । क्लाइं ट पीसी या िकास्टे शन हैं कजन पर उपयोगकताा एब्दलकेशन चलाते हैं । क्लाइं ट सं साधनों के कलए सिा र पर
भरोसा करते हैं , जैसे फाइल, कडिाइस और यहां तक कक प्रोसे कसं ग पािर।
जहाीॅ पर कम्प्प्यूटरो की सं ख्या अकधक होती हैं इस प्रकार के िातािरण के कलये क्लाइं ट सिा र आककाटे क्चर को तै यार ककया गया र्ा। उदाहणार्ा, बहुत
सारे कम्प्प्यूटरो को आपस मे नेटिका तकनीक के द्वारा जोड कदये जाते है । इनमे ककसी एक कम्प्प्यूटर को Workstation बना कदया जाता है । Server
पर इन सभी कम्प्प्यूटरो की फाइले से ि होती है इस माडॅ ल को Client Server माीॅ डल कहते है । इस माीॅ डल मे एक या एक से अकधक कम्प्प्यूीूटर
क्लाइं ट होते है तर्ा Server एक होता है । इस माीॅ डल मे क्लाइं ट अपनी ररक्वेस्ट नेटिा क के द्वारा सिा र पर भे जता है तर्ा Server उस ररक्वेस्ट को
Response करता है । इस तरह का नेटिा क सं साधनो का साझा उपयोग करने मे मदद करता है । इस तरह के माीॅ डल मे हम हाडा िेयर तर्ा
साीॅ फ्टिे यर को Share कर सकते है । उदाहरणतः कप्रटं र को Server से Connect कर दे ते है तो कफर ककसी भी िकास्टे शन से ककसी भी फाइल का
कप्रटं आउट कनकाल सकते है ।
क्लाइं ट प्रकिया (Client Process)
क्लाइं ट एक कंप्यूटर कसस्टम हैं जो ककसी तरह के नेटिका के जररय अन्य कंप्यूटरों पर सकिा स एक्सेज करता है क्लाइं ट एक ऐसी प्रकिया है जो सिा र
को सं देश भे जता है और सिा र उस काया को पूरा करता है । क्लाइं ट प्रोग्राम आमतौर पर एब्दलकेशन के User interface कहस्से का प्रबं धन करते हैं ,
क्लाइं ट-आधाररत प्रकिया उस एब्दलकेशन का फ्रंट-एं ड है कजसे उपयोगकताा दे खता है और उससे सं पका करता है । क्लाइं ट प्रकिया स्र्ानीय सं साधनों
का प्रबं धन भी करती है जो उपयोगकताा मॉनीटर, कीबोडा , िकास्टे शन सीपीयू जैसे इं टरै क्ट् करता है । क्लाइं ट िकास्टे शन के प्रमुख तत्वों में से एक
ग्राकफकल यू जर इं टरफेस (जीयू आई) है ।
ररं ग नेटिका (Ring Network) में साधारण गकत से डाटा का आदान-प्रदान होता है तर्ा एक कम्प्प्यूटर से ककसी दु सरे कम्प्प्यूटर को डाटा (Data)
प्राप्त करने पर उसके मध्य के अन्य कंप्यूटरो को यह कनधाा ररत करना होता है कक उक्त डाटा उनके कलए है या नही | यकद यह डाटा उसके कलए नही है
तो उस डाटा को अन्य कम्प्प्यूटर में आगे (Pass) कर कदया जाता है |
लाभ (Advantages) –
यह नेटिका अकधक कुशलता से काया करता है , क्योकक इसमें कोई होस्ट (Host) यह कंटर ोकलंग कम्प्प्यूटर (Controlling Computer) नही होता |
यह स्टार से अकधक किश्वसनीय है , क्योकक यह ककसी एक कम्प्प्यूटर पर कनभा र नही होता है |
इस नेटिका की यकद एक लाइन या कम्प्प्यूटर काया करना बं द कर दे तो दु सरी कदशा की लाइन के द्वारा काम ककया जा सकता है |
हाकन (Disadvantages) –
इसकी गकत नेटिका में लगे कम्प्प्यूटरो पर कनभा र करती है | यकद कम्प्प्यूटर कम है तो गकत अकधक होती है और यकद कंप्यूटरो की सं ख्या अकधक है तो
गकत कम होती है |
यह स्टार नेटिका की तु लना में कम प्रचकलत है , क्योकक इस नेटिका पर काया करने के कलए अत्यंत जकटल साफ्टिे यर की आिश्यकता होती है |
बस टोपोलॉजी (Bus Topology)
बस टोपोलॉजी (Bus Topology) में एक ही तार (Cable) का प्रयोग होता है और सभी कम्प्प्यूटरो को एक ही तार से एक ही िम में जोड़ा जाता है |
तार के प्रारि तर्ा अंत में एक किशेर् प्रकार का सं यंि (Device) लगा होता है कजसे टकमानेटर (Terminator) कहते है | इसका काया सं केतो
(Signals) को कनयं िण करना होता है |
लाभ (Advantages) –
बस टोपोलॉजी को स्र्ाकपत (Install) करना आसान होता है
इसमें स्टार ि टर ी टोपोलॉजी की तु लना में कम केकबल उपयोगी होता है |
हाकन (Disadvantages) –
ककसी एक कम्प्प्यूटर की खराबी से सारा डाटा सं चार रुक जाता है |
बाद में ककसी कम्प्प्यूटर को जोड़ना अपेिाकृत ककठन है |
स्टार टोपोलॉजी (Star Topology)
इस नेटिका में एक होस्ट कम्प्प्यूटर होता है कजसे सीधे किकभन्न लोकल कंप्यूटरो से जोड़ कदया जाता है | लोकल कम्प्प्यूटर आपस में एक-दु सरे से नही
जुड़े होते हैं इनको आपस में होस्ट कम्प्प्यूटर द्वारा जोड़ा जाता है | होस्ट कम्प्प्यूटर द्वारा ही पूरे नेटिका को कंटर ोल ककया जाता है |
लाभ (Advantages) –
इस नेटिका टोपोलॉजी में एक कम्प्प्यूटर से होस्ट (Host) कम्प्प्यूटर को जोड़ने में लाइन कबछाने की लागत कम आती है |
इसमें लोकल कम्प्प्यूटर की सं ख्या बि़ाये जाने पर एक कम्प्प्यूटर से दु सरे कम्प्प्यूटर पर सू चनाओ के आदान-प्रदान की गकत प्रभाकित नही होती है ,
इसके काया करने की गकत कम हो जाती है क्योकक दो कम्प्प्यूटर के बीच केिल होस्ट (Host) कम्प्प्यू टर ही होता है |
यकद कोई लोकल कम्प्प्यूटर ख़राब होता है तो शेर् नेटिका इससे प्रभाकित नही होता है |
हाकन (Disadvantages) –
यह पूरा तं ि होस्ट कम्प्प्यूटर पर कनभा र होता है | यकद होस्ट कम्प्प्यूटर ख़राब हो जाय तो पूरा का पूरा नेटिका फेल हो जाता हैं |
मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology)
मेश टोपोलॉजी को मेश ने टिका (Mesh Network) या मेश भी कहा जाता है | मेश एक नेटिका टोपोलॉजी है कजसमे सं यंि (Devices) नेटिका नोड
(Nodes) के मध्य कई अकतररक्त अंत: सम्बि (Interconnections) से जु ड़े होते है | अर्ाा त मेश टोपोलॉजी में प्रत्येक नोड नेटिका के अन्य सभी
नोड से जुड़े होते है |
मेश टोपोलॉजी में सारे कंप्यूटर कही न कही एक दू सरे से जुड़े रहते हैं और एक दू सरे से जुड़े होने के कारण ये अपनी सू चनाओ का आदान प्रदान
आसानी से कर सकते हैं | इसमें कोई होस्ट कंप्यूटर नही ं होता हैं |
टर ी टोपोलॉजी (Tree Topology)
टर ी टोपोलॉजी में स्टार तर्ा बस दोनों टोपोलॉजी के लिण किधमान होते है | इसमें स्टार टोपोलॉजी की तरह एक होस्ट कंप्यूटर होता है और बस
टोपोलॉजी की तरह सारे कंप्यूटर एक ही केबल से जुड़े रहते हैं | यह नेटिका एक पे ड़ के समान कदखाई दे ता हैं |
लाभ (Advantages) –
प्रत्येक खण्ड (Segment) के कलए प्वाइन्ट् तार कबछाया जाता है |
कई हाडा िेयर तर्ा साफ्टिे यर कििेताओ के द्वारा सपोटा ककया जाता है |
हाकन (Disadvantages) –
प्रत्येक खण्ड (Segment) का कुल लम्बाई प्रयोग में लाये गए तार के द्वारा सीकमत होती है |
यकद बै कबोन लाइन टू ट जाती है तो पूरा खण्ड (Segment) रुक जाता है |
अन्य टोपोलॉजी की अपेिा इसमें तार कबछाना तर्ा इसे कन्फीगर (Configure) करना ककठन होता है |
लेन ने टिका क्या हैं ? और इसके कंपोनेंट्स
(What is LAN Network and its Components)
लेन नेटिका को जानने से पहले हमे नेटिका क्या हैं यह जानना बहुत जरुरी हैं | तो पहले हम जानेंगे की नेटिका क्या हैं ? और इस पोस्ट में हम जानेंगे
की –
1. नेटिका क्या हैं ?
2. लेन नेटिका क्या हैं ?
3. लेन नेटिका की किशेर्ताएं
4. लेन नेटिका के कंपोनेंट्स
5. िायरलेस लेन
नेटिका क्या है ? (what is network)
जब एक से अकधक कंप्यूटर को ककसी माध्यम के द्वारा आपस में जोड़ा जाता हैं और जानकारी को शेयर ककया जाता हैं तब इस तकनीक को नेटिका
कहा जाता हैं यह कनेक्शन तार सकहत और तार रकहत भी हो सकता है , Wire Medium की बात करे तो िो twisted pair cable, Coaxial cable और
Fiber Optics Cable में से कुछ भी हो सकता है | अगर Wireless Medium की बात करें तो िो Radio Wave, Bluetooth, Infrared, Satellite में से
कुछ भी हो सकता है |
कंप्यूकटं ग में एक नेटिका दो या दो से अकधक कडिाइसों का समूह है कजसके द्वारा हम कम्युकनकेशन कर सकते हैं । व्यािहाररक रूप से , नेटिका में
भौकतक और िायरलेस कनेक्शन से जुड़े कई अलग-अलग कंप्यूटर कसस्टम शाकमल होते हैं । ने टिका कंप्यूटर, सिा र, मे नफ्रेम, ने टिका कडिाइस या एक
दू सरे से जुड़े हुए अन्य उपकरणों का एक सं ग्रह है जो आपस में डाटा शेयर करने की अनुमकत प्रदान करता है । नेटिका का एक उत्कृष्ट उदाहरण
इं टरनेट है , जो पूरे किश्व में लाखों लोगों को जोड़ता है |
लेन क्या हैं (What is LAN)
इसका पूरा नाम Local Area Network है यह एक ऐसा नेटिका है कजसका प्रयोग दो या दो से अकधक कंप्यूटर को जोड़ने के कलए ककया जाता है |
लोकल एररया नेटिका स्र्ानीय स्तर पर काम करने िाला नेटिका है इसे सं िेप में लेन कहा जाता हैं | यह एक ऐसा कंप्यू टर नेटिका है जो स्र्ानीय
इलाकों जैसे- घर, कायाा लय, या भिन समूहों को किर करता है |
लेन नेटिका की किशेर्ताये (Features if LAN)
1. यह एक कमरे या एक कबब्दल्डंग तक सीकमत रहता है |
2. इसकी डाटा हस्तां तररत (Data Transfer) Speed अकधक होती है |
3. इसमें बाहरी नेटिका को ककराये पर नही ं ले ना पड़ता है |
4. इसमें डाटा सु रकित रहता है |
5. इसमें डाटा को व्यिब्दस्र्त करना आसान होता है |
लेन नेटिका के कंपोनेंट्स (Components of LAN)
लोकल एररया नेटिका डाटा के आदान प्रदान हे तु कंप्यू टर को जोड़ता है कंप्यूटर तर्ा कप्रंटर फैक्स जैसे अन्य कडिाइस के अलािा लै न में काया हे तु 6
कंपोनेंट का उपयोग ककया जाता है -
नेटिका एडे िर
नेटिका मीकडयम
केबल कनेक्ट्र
पािर सलाई
हब /ब्दस्वच /राउटर
नेटिका सॉफ्टिे यर
नेटिका एडे िर
नेटिका से जुड़ने के कलए कंप्यूटर को नेटिका एडे िर की आिश्यकता होती है , यह कंप्यूटर डाटा को इलेक्ट्रॉकनक कसग्नल में पररिकता त करता है |
नेटिका मीकडयम
िायडा नेटिका के कलए केकबल की आिश्यकता होती है जैसे किस्टे ड केकबल, कोएब्दक्सयल केकबल, फाइबर ऑकिकल केबल आकद| िायरलेस नेटिका में
केकबल की आिश्यकता नही ं होती है इनमें डाटा टर ां सफर के कलए रे कडयो तरं गों का उपयोग ककया जाता है |
केबल कनेक्ट्सा
बायडा नेटिका में RJ45 सबसे ज्यादा प्रचकलत कनेक्ट्र है नेटिककांग योग्यता िाले प्रत्येक कंप्यूटर में RJ45 पोटा होता है इसे कभी-कभी नेटिका पोटा या
इर्रनेट पोटा कहते हैं |
पािर सलाई
िायडा तर्ा िायरलेस दोनों ही प्रकार के नेटिका में पािर सलाई की आिश्यकता होती है | िायरलेस नेटिका में रे कडयो तरं गे उत्पन्न करने के कलए करं ट
का उपयोग होता है केबल ने टिका डाटा को इलेक्ट्रॉकनक पर्ल् के रूप में डां टा भे जते हैं |
हब /ब्दस्वच /राउटर
हब लेन में कंप्यूटसा को डां टा टर ां सकमट करने के कलए एक केंद्रीकृत कबं दु की तरह काया करता है | जब एक कंप्यू टर से डाटा हब को भे जा जाता है तो
िह डाटा नेटिका से जु ड़े सभी कंप्यूटर को टर ां सकमट हो जाता है कफर चाहे िह ककसी भी किकशष्ट कंप्यूटर के कलए हो|
ब्दस्वच हब का एक किकि है यह एक नई नेटिककांग तकनीक है जो नेटिका के प्रत्येक कंप्यूटर को एक किकशष्ट MAC एडरेस प्रदान करता है इसी िजह
से आप पृर्क कंप्यूटर को सू चना लैन मैं ब्दस्वच का उपयोग कर सकते हैं |
ब्दस्वच तर्ा हब के किपरीत राउटर की सहायता से आप कई नेटिक्सा को जोड़ सकते हैं | राउटर दू र इलाकों में ब्दस्र्त कंप्यूटसा को भी कनेक्ट् कर
सकता हैं | राउटर ज्यादा जकटल होते हैं तर्ा किश्व भर में सं देश भे जने की योग्यता रखते हैं बड़े -बड़े ने टिका लै न टर ाकफक के कलए कभी-कभी राउटर
का भी उपयोग करते हैं िायरलेस नेटिककांग कडिाइस को िायरलेस राउटर कहते हैं |
नेटिका सॉफ्टिे यर
सं चाररत कंप्यूटर पर सॉफ्टिे यर डे टा को से गमेंट्स में पैकेज करता है तर्ा उस डाटा को पैकेट नाम की सं रचना में रखता है | पैकेट के स्त्रोत तर्ा
गं तव्य का पता पैकेट के है डर पर कलखा जाता है प्राप्तकताा कंप्यूटर इन पैकेट् स को िाकपस अर्ापूणा डाटा में इं टरप्रेट करता है तर्ा उपयु क्त
एलीकेशन को भे जता है |
िायरलेस लेन (Wireless LAN)
WLAN स्र्ाकनक स्त्रोतों (local resources) को इं टरनेट से जोड़ने के कलए प्रयोग ककया जाता है | WLAN दो कम दू री पर रखी कडिाइसों के मध्य
िायरलेस िगीकरण किकध के द्वारा कड़ी को जोड़ता है एिं इं टरनेट एक्से स करने के कलए कनेक्शन भी प्रदान करता है स्पीड स्पेक्ट्रम (Speed
Specturm) या OFDM तकनीक के प्रयोग से यू जर स्र्ाकनक कनकश्चत िे ि में घूमने पर भी कनेक्ट्ेड रखा जाता है |
Components of Network (ने टिका के अियि)
एक नेटिका में किकभन्न नेटिका उपकरण लगे होते हे इनमे से कुछ नेटिका का उपयोग करते है जैसे node एिं कुछ ने टिका को बनाने में प्रयु क्त होते है
जैसे Bridge, Switch, modem, hub आकद|
Modem (मॉडे म)
मॉडे म शि मोड्यु लेटर – डीमोड्यु लेटर का सकिप्त रूप है | कडकजटल कसग्नल को एनालोग कसग्नल से पररिकता त करने करने की प्रकिया को
मोड्यु लेशन कहते है एनालोग कसग्नल को कडकजटल कसग्नल में पररिकता त करने की प्रकिया को डीमोड्यु लेशन मॉडे म द्वारा कडकजटल माइिो कंप्यूटर
एनालॉग टे लेफोन लाइनों के माध्यम से सं चार कर पाते है | इस सं चार के अंतगा त र्ध्कन तर्ा डाटा दोनों शाकमल होते है |
कंप्यूटर में मॉडे म का अनुप्रयोग
मॉडे म द्वारा डाटा टर ां सकमट करने की गकत पररिता न शील होती है | टर ां सफर गकत अर्िा टर ां सफर दर नामक इस गकत को बाईट प्रकत से केंड (bps) में
मापा जाता है | इसकी गकत कजतनी तीव्र होगी, उतनी ही ते ज आप सू चना को भे ज और प्राप्त कर सकते है | एक कचि को 33.6 kbps मॉडे म से भे जने
में 75 से केंड लगते है , जबकक 56 kbps मॉडे म में माि 45 से केंड लगते है |
मूल रूप से मॉडमो के चार प्रकार होते है – बाह्य, आं तररक, पीसी, काडा और िायरलेस |
1. बाह्य मॉडम (External Modem)
कंप्यूटर के बाहर ब्दस्र्त इसे कंप्यू टर के सीररयल पोटा में एक केबल द्वारा जोड़ा जाता है | एक अन्य तार द्वारा मॉडे म को टे लीफोन लाइन में जोड़ते है |
2. आं तररक मॉडे म (Internal Modem) –
यह कसस्टम यू कनट के भीतर ब्दस्र्त एक लग-इन सककाट बोडा होता है | इस मॉडे म को टे लीफोन केबल द्वारा टे लीफोन लाइन से जोड़ते है |
3. PC Care Modem
िेकडट काडा के आकार िाले इस एक्सपेंशन बोडा को पोटे बल कंप्यूटर के अन्दर लगाते हैं इसे टे लीफ़ोन केबल द्वारा टे लीफ़ोन लाइन से जोड़ते हैं |
4. Wireless Modem
बाह्य, आं तररक अर्िा पीसी काडा ककसी प्रकार का हो सकता हैं अन्य मॉडे मों के किपरीत इसमें ककसी प्रकार के तार का प्रयोग नही ं होता हैं | बब्दल्क
यह िायु के माध्यम से सं केतों को भे जता और प्राप्त करता हैं |
Hub (हब)
यह LAN (Local Area Network) का एक बहुत ही महत्वपूणा घटक हैं इसे कनेक्ट्र भी कहते हैं हब एक ऐसा कडिाइस हैं जो LAN में एक केंद्र कबं दु
(Central Point) का काया करती हैं |LAN के सभी नोड केबल द्वारा हब से जुड़े होते हैं दो नोड् स के बीच कम्युकनकेशन में डाटा कसग्नल हब के माध्यम
से ही भे जा जाता हैं |
हब को कनम्न प्रकार से िगीकृत ककया जा सकता है
Dumb Hub
यह हब केिल एक नोड से कसग्नल प्राप्त करके उसे उसी अिस्र्ा में दु सरे नोड पर भे ज दे ता हैं |
Smart Hub
यह हब कसग्नलों को टर ां सकमट करने के अलािा नेटिका प्रबं धन की िमता भी रखता हैं |
Intelligent Hub
यह हब सभी प्रकार का नेटिका प्रबं धन कर सकता हैं | यह हब एक से अकधक टोपोलॉजी की सु किधा प्रदान करता हैं यह एक से अकधक LANs को भी
जोड़ सकता हैं कुछ हब ररपीटर ि किज का काया भी कर सकते हैं|
Switch (ब्दस्वच)
ब्दस्वच, किज का उन्नत रूप हैं इसकी िमता किज से ज्यादा होती हैं ब्दस्वच एक Multiport bridge के रूप में काया करता हैं जो किकभन्न उपकरणों ि
LAN में से गमेंट (भाग) को जोड़ता हैं उसके कलए एक बफर होता हैं जब िह कोई पैकेट प्राप्त करता हैं तब िह प्राप्त करने िाली कलंक के बफर में
उसे स्टोर कर लेता हैं और एडरेस को Outgoing link के कलए चेक करता हैं ि कभी कभी CRC को भी चैक करता हैं | यकद Outgoing link फ्री होती
हैं तब ब्दस्वच उस कलंक को िह फ्रेम भे ज दे ता हैं
ब्दस्वच का कनमाा ण दो अलग अलग तकनीको पर ककया जाता हैं
1. Store and forward switch
2. Cut through switch
Router (राउटर)
एक ऐसा इं टर नेटिका कडिाइस होता हैं जो किकभन्न आककाटे क्चर जैसे – ईर्रनेट, टोकन ररं ग इत्याकद को जोड़ने के कलए उपयोग ककया जाता हैं इसके
द्वारा एक लॉकजकल नेटिका से दु सरे नेटिका को पैकेट् स भे जे जा सकते हैं राऊटर का उपयोग उन बड़े बड़े इं टर ने टिका में होता हैं जो TCP/IP
Protocol सू ट का उपयोग करते हैं |
राउटर OSI (Open system interconnection) रे फरें स मॉडल की नेटिका लेयर पर काया करते हैं इनकी मदद से लॉकजकल एडरेस का उपयोग
करके नेटिका पर पैकेट् स को भे जते हैं राउटर पैकेट् स को उपलब्ध पार् की कीमत के आधार पर भे जते हैं कजससे मैश नेटिका टोपोलॉजी में अकधक
पार् की समस्या हल हो जाती हैं | राउटर पैकेट् स के Destination नेटिका एडरेस का उपयोग करते हैं और िे केिल तभी काया करते हैं जब उपयोग
ककये गए प्रोटोकॉल राउटे बल हो| ये किज से अलग होते हैं जो प्रोटोकॉल से स्वतं ि होते हैं |
राउटर को दो प्रकार से िगीकृत ककया जा सकता हैं –
1. Static or Non-adaptive Routers
2. Dynamic or adaptive Routers
किज (Bridge)
किज एक ऐसा नेटिककांग अियि हैं जो नेटिक्सा को किभाकजत करता है किज OSI मॉडल की डाटा कलंक लेयर पर काया करता हैं | इनका उपयोग
अलग अलग तरह के मीकडया जो जोड़ने के कलए ककया जाता हैं | किज कसग्नल को पुन: कनकमात तो करते हैं परन्तु ककसी भी तरह का प्रोटोकॉल
पररिता न नही ं करते हैं |
किज को तीन तरह से किभाकजत ककया जा सकता हैं
Local Bridge
Remote Bridge
Wireless Bridge
Gateway (गेटिे )
गे टिे का उपयोग अलग अलग प्रोटोकॉल पर आधाररत नेटिका जोड़ने के कलए ककया जाता हैं | गे टिे एक ऐसा नाम हैं जो नेटिका अियिों की एक
बहुत बड़ी श्रेणी को प्रदकशात करता हैं इसके द्वारा अलग अलग ने टिका आककाटे क्चर ि अलग अलग प्रोटोकॉर्ल् के बीच कम्युकनकेशन सं भि हो पाता
हैं गे टिे ने टिककांग OSI मॉडल के ऊपर िाली लेयसा पर काया करते हैं
डॉस का पररचय (Introduction of DOS)
MS DOS का पूरा नाम Microsoft Disk Operating system है । MS DOS एक Character User Interface Operating System (CUI) है । जो
लगातार अपनी कुछ किशेर्ताओं के सार् यू जर को नई सु किधायें उपलब्ध कराता है । यह सबसे लोककप्रय ऑपरे कटं ग कसस्टम र्ा । माईिो कम्प्प्यूटर में
यह प्रयोग होता र्ा । सन 1984 में इनटे ल 80286 प्रोसे सर यु क्त माईिो कम्प्प्यूटर किककसत ककये गये तब इनमें MS DOS 3.0 और MS DOS 4.0
version का किकास ककया गया ।
माइिोसॉफ्ट के इस आपरे कटं ग कसस्टम को कडस्क आपरे कटं ग कसस्टम कहा गया क्योंकक यह अकधकतर कडस्क से सं बंकधत इनपुट आउटपुट काया करते
र्े। MS DOS एक आपरे कटं ग कसस्टम यू जर और हाडा िेयर के बीच मध्यस्र्ता का काया करता है । आपरे कटं ग कसस्टम कम्प्प्यूटर में हाडा िेयर एिं
सॉफ्टिे यर को कण्टर ोल ही नही ं करता है । उनके बीच परस्पर सं बंध स्र्ाकपत करता है ।कजससे यू जर को कंप्यूटर ऑपरे ट करने में कोई समस्या नही ं
होती है । MS DOS में कीिोडा की सहायता से कमां ड कदये जाते है । डॉस इन कमां ड्स को समझ कर उस काया को समपन्न करता है ,और आउटपुट
को प्रदकशात करता है ।
डॉस के काया (Functions of DOS)
यह कीबोडा से कमां ड लेता है और उनकी व्याख्या करता है ।
यह कसस्टम की सभी फाइलों को कदखाता है ।
यह प्रोग्राम के कलए नई फाइलें और अलॉट् स स्पेस बनाता है ।
यह पुराने नाम के स्र्ान पर एक फ़ाइल का नाम बदलता है ।
यह एक फ्लॉपी में जानकारी की प्रकतकलकप बनाता है ।
यह एक फ़ाइल का पता लगाने में मदद करता है ।
यह खोजकताा ओं को बताता है कक फ़ाइल कडस्क में कहााँ ब्दस्र्त है ।
यकद हम चाहते हैं कक फ़ाइल में जानकारी मुकद्रत हो, तो यह सू चना का कप्रंटआउट दे ता है ।
यह फ़ाइलों और कनदे कशकाओं को छु पाता है ताकक दू सरों द्वारा नही ं दे खा जा सके।
यह फ़ाइल को स्र्ायी रूप से हटा दे ता है ।
डॉस की किशेर्ताएं (Features of DOS)
यह फ़ाइल प्रबं धन को बे हतर बनाने में सहायक है । फाइलें बनाना, सं पाकदत करना, हटाना आकद।
यह उपयोगकताा ऑपरे कटं ग कसस्टम है । कोई भी उपयोगकताा इस ऑपरे कटं ग कसस्टम में एक समय पर काम कर सकता है ।
यह अचरटर ै क्ट्र बे स्डफ़ोटा फेस कसस्टम है । हम पि (या इस ऑपरे कटं ग कसस्टम में िणा ) टाइप कर सकते हैं ।
MS-DOS 16 कबट ऑपरे कटं ग कसस्टम है ।
डॉस सरल टे क्स्ट कमां ड ऑपरे कटं ग कसस्टम है , यह ग्राकफकल इं टरफ़ेस का समर्ान नही ं करता है
डॉस टे क्स्ट आधाररत इं टरफ़ेस का उपयोग करता है और इसे सं चाकलत करने के कलए टे क्स्ट और कोड की आिश्यकता होती है |
DOS में इनपुट बे कसक कसस्टम कमां ड्स के माध्यम से होता है , अर्ाा त इसे सं चाकलत करने के कलए माउस का उपयोग नही ं ककया जा सकता है |
डॉस इस बात का बहुकिकिी समर्ान नही ं करता है कक इसका रै म में एक बार में केिल एक ही प्रकिया हो सकती है |
उपलब्ध स्टोरे ज स्पेस की उच्चतम मािा 2 जीबी है |
What is FAT file system
प्रत्येक ऑपरे कटं ग कसस्टम के अन्दर फाइर्ल् को व्यिब्दस्र्त रूप से रखने के कलए फाइल कसस्टम का प्रयोग ककया जाता है कजसे cluster कहते है |
किकभन्न प्रकार के ऑपरे कटं ग कसस्टम किकभन्न प्रकार के फाइल कसस्टम का प्रयोग करते है | FAT, NTFS इत्याकद कई फाइल कसस्टम है | DOS, FAT
फाइल कसस्टम का प्रयोग करता है |
FAT का पूरा नाम File Allocation Table है कजसका प्रयोग कडस्क में फाईलो के सं ग्रहण का ररकॉडा रखने के कलए होता है |सबसे पहले फैट का
प्रयोग सन 1980 में कटम पैटसा न (Tim paterson ) ने अपने 86-Dos में ककया र्ा | फैट के प्रमुख प्रकार FAT12,FAT16, FAT32,etc |
FAT File हाडा कडस्क को छोटे छोटे खंडो में किभाकजत करती है |कजन्हें क्लस्टर कहते है |क्लस्टर सामान्यतः एक या एक से अकधक से क्ट्सा के समूह
से बनते है |कजनमे से क्ट्सा की सं ख्या कडस्क के घनत्व पर कनभा र करती है , यह सं ख्या 1 से 128 सै क्ट्र प्रकत क्लस्टर हो सकते है | जब हम कोई फाइल
से ि करते है तो यह अपने आकार के अनुसार डाटा एररया में एक या एक से अकधक क्लस्टर में सं ग्रकहत होती है |प्रत्येक क्लस्टर एक यू कनक सीररयल
नंबर द्धारा पहचाना जाता है कजसकी प्रकिकष्ट फाइल एलोकेशन टे बल में होती है | और इस प्रकार फैट में होने िाली प्रत्येक क्लस्टर एं टर ी के सार् एक
छोटा मेमोरी ब्लाक जुड़ा रहता है कजसमे अंक के रूप में शू न्य या ककसी अन्य क्लस्टर का सीररयल नम्बर सं ग्रकहत रहता है जंहा शू न्य यह दशाा ता है
की क्लस्टर खाली है |
जबकक अन्य क्लस्टर का नंबर यह दशाा ता है की क्लस्टर ककसी फाइल द्धारा उपयोग ककया जा रहा है फाइल द्धारा उपयोग ककया गया पहला क्लस्टर
रूट डायरे क्ट्र ी के माध्यम से उपलब्ध खाली क्लस्टर में से कलया जाता है और अगर फाइल का आकार एक क्लस्टर से अकधक बड़ा है तो उसका शेर्
भाग ककसी अन्य क्लस्टर में सं गृहीत होता है कजसका सीररयल नंबर तु रंत पहले क्लस्टर की फैट प्रकिकष्ट (FAT Empty) में स्टोर हो जाता है इस प्रकार
श्रंखला और भी आगे बढ़ जाती है |
File & directory structure
हम अपने दै कनक जीिन में कायाा लयों में दस्तािे जो को रखने के तरीके पर किचार करे तो हम दे खते है की अलग अलग दस्तािे जो, आिे दन आकद को
हम सम्बं कधत फाईलो में सं लग्न करके रखते है , और इन फाइर्ल् को अलमारी में किर्यिार अलग अलग खानों में रखते है ताकक इन्हें खोजने में हमे
आसानी रहे इसी प्रकार कंप्यूटर की हाडा कडस्क भी अलमारी का सामान है कजसमे सभी दस्तािे ज सु रकित रखे जाते है इसी प्रकार जब हम कोई
दस्तािे ज हाडा कडस्क में रखते है तो उसको से ि करते है |और उसको एक नाम दे ते है |इसी प्रकार से ि ककया गया दस्तािे ज फाइल कहलाता है से ि
ककये गए इन दस्तािे जो को किर्यिार अलग अलग समूहों में divide ककया जा सकता है | ये समू ह डायरे क्ट्री कहलाती है और हम डायरे क्ट्र ी में
किकभन्न प्रकार की फाइर्ल् का समािे श कर सकते है –
POST
BOOT RECORD
DOS KERNAL
SYSTEM CONFIGURATION
COMMAND.COM
AUTOEXE.BAT
DOS PROMPT
1. पोस्ट (POST) :-पॉिर ऑन होते ही कंप्यूटर सबसे पहले अपनी स्वयं की मेमोरी तर्ा जुड़े हुए सभी उपकरणों को चेक करता है की िे सही काया कर
रहे है या नही ं और कही कने क्शन कनकला तो नही ं है यह प्रकिया पॉिर ऑन से ल्फ टे स्ट या सं िेप में पोस्ट कहलाती है |ककसी भी प्रकार की समस्या
होने पर सम्बं कधत error message आता है |
2. बू ट ररकॉडा (BOOT RECORD):-पोस्ट द्धारा की जाने िाली चैककंग के बाद कंटर ोल बू ट ररकॉडा को स्र्ान्तररत हो जाता है जो कडस्क के किर्य में सं पूणा
जानकारी कडस्ले करता है यह जानकारी कडस्क से सू चनाये कनकालने के कलए आिश्यक है |
3. डॉस कना ल (DOS KERNAL) :-यह तीसरा और सबसे महत्वपूणा चरण है कजसमे डॉस कनेल में मोरी में लोड होता है डॉस कना ल ऑपरे कटं ग कसस्टम
का केंद्रीय भाग होता है जो दो किशेर् कसस्टम फाइलो से कमलकर बनता है ये दोनों ही फाइले कहडन मोड में होती है |
4. कसस्टम कॉब्दनफ़गरे शन (SYSTEM CONFIGURATION):-डॉस कनाल लोड होने के बाद कंप्यूटर इस चरण में CONFIGURATION FILE को ि़ू ि़ता है
तर्ा इस फाइल के कदए गये पैरामीटर के अनुसार कसस्टम की किकभन्न internal setting करता है | SYS एक ऐसी फाइल है कजसमे प्रयोगकताा स्वयं
अपनी आिश्यकता के अनुसार कसस्टम से कटं ग से सम्बं कधत किकभन्न मानो को कनधाा ररत कर सकता है |
5. कमां ड कोम फाइल (COMMAND.COM):-पां चिे चरण में डॉस की एक और महत्वपूणा फाइल COM मेमोरी में लोड होती है | डॉस के सभी इन्ट्रनल
कमां ड इस फाइल के माध्यम से चलते है |
6. ऑटो एब्दक्सक्यु टेकबल बै च फाइल (BAT):-इस चरण में COMMAND.COM फाइल स्वयं ही AUTOEXEC.BAT फाइल को ि़ू ि़कर चलाता है |
AUTOEXEC.BAT एक बै च फाइल है कजसके द्धारा हम कसस्टम की date, time तर्ा किकभन्न सॉफ्टिेर के पार् से ट कर सकते है |
7. डॉस प्रोम्प्ि (DOS PROMPT):-उपयुा क्त पूरी प्रकिया सं पन्न होने के बाद अंततः मोकनटर पर डॉस प्रोम्प्ि कदखाई दे ता है जो यह बताता की डॉस लोड हो
चुका है , और कंप्यूटर हमारे काया करने के कलए तै यार है |
बूकटं ग प्रकिया के प्रकार (Types of Booting)
1. Cold booting
2. Warm booting
Cold booting: – जब हम कंप्यूटर का main switch off करके on करते है तो यह Cold booting कहलाता है |
Warm booting: – Warm booting में हम कंप्यूटर की reset key and ctrl+alt+delete तीनो keys को एक सार् press करके पु नः boot करते है
कंप्यूटर को boot करने कलए M.S.DOS में तीन फाइर्ल् MSDOS.SYS, IO.SYS एिं COMMAND.COM होना अत्यंत आिश्यक है | इनमे प्रर्म दो files
hidden files होती है तर्ा COMMAND.COM एक file होती है |
Read +R -R
Hidden +H -H
Archive +A -A
System +S -S
Backup Command -इस कमाीॅ ड से ककसी भी डायरे क्ट्री एिं फाईल का बेकप ककसी दू सरी कडस्क मे कलया जा सकता है बे कप लेना इसकलये
जरूरी होता है ।क्योंकक कम्प्प्यूटर में बनी फाईल कई करणों से खराब भी हो सकती है यकद उस फाईल काबे कप कलया है तो उसे पुनः प्राप्त ककया जा
सकता है । फाईल को पु नः प्राप्त करने के कलये restore command का प्रयोग करना पडता है ।
Syntax: – c:\>Backup <source address> < destination disk or address>
Edit [path\file name or new file name]
Example: – c:\>backup c:\micro A:\
Edit Command - इस कमाीॅ ड से पहले से बनी फाईल मे सु धार कर सकते है।एिं नई फाईल का कनमाा ण भी कर सकते है।यह डाीॅ स का editor
है । इसमें मीनू कसस्टम होता है । कजससे हम अपने काया को और असानी से पूरा कर सकते हैं । इसमें माउस का भी प्रयोग कर सकते हैं । Editor से
बाहर कनकलने के कलये फाईल मीनू के सब कमाीॅ ड exit का प्रयोग करते हैं ।
Syntax: – c:\micro>edit student
Example: – c:\micro>edit student
Move Command - इस कमाीॅ ड की सहायता से ककसी भी फाईल को एक स्र्ान से दू सरे स्र्ान पर move कर सकते हैं। मूि होने के बाद 1 file
moved message आता है ।
Syntax:- move <Source address\File Name > <Destination Address>
Example:-move d:\ computer e:\
FORMAT Command - इस कमाीॅ ड का प्रयोग कडस्क को format करने के कलये ककया जाता है। इस कमाीॅ ड को चलाते समय सािधानी रखनी
चाकहये । इसके सार् इसके ब्दस्वच का भी प्रयोग कर सकते हैं । कजससे अलग अलग तरीके से formatting कर सकते है । इस कमाीॅ ड का प्रयोग तब
ककया जाता है जब पूरी कडस्क के डाटा को एक सार् हटाना होता है । /Q इस ब्दस्वच का प्रयोग quick format करने के कलये ककया जाता है ।
Syntax:- c:\>FORMAT/ [SWITCH] Drive Name:
Example:- c:\>FORMAT /Q d:
Warning all data on non – removable disk
Drive d: will be Lost!
Proceed with format (Y/N)? _Y
Volume label (Enter for none)? _
FDISK Command - इस कमाीॅ ड से कडस्क के पाटीशन को delete ककया जाता है और नये पाटीशन को बनाया भी जा सकता है। इस कमाीॅ ड
को बहुत सािधानी एिं ध्यान पूािक चलाना चाकहये ।
कडस्क में तीन प्रकार के पाटीशन होते है ।
1. Primary partition
2. Extend partition
3. Logical partition
Partition Delete करना :- पाकटा शन को delete करने के कलये सबसे पहले लाीॅ कजकल पाकटा शन कडलीट करते हैं । इसके बाद extended partition
delete करते हैं । और अंत में primary partition delete करते हैं ।
Logical>Extend Partition>primary Partition
Partition Create करना :- पाकटा शन को बनाने के कलये सबसे पहले primary partition create करते हैं । इसके बाद extended partition बनाते
हैं । और अंत में लाीॅ कजकल पाकटा शन बनाते हैं ।
Primary>extend>logical
C:\>Fdsisk
Yes
1.Create Partition
2.Delete Partition
3.Display Partition
Choose any
Sort Command
इस की सहायता से फाईल के मेटर को काीॅ लम के आधार पर sort कर सकते हैं । एिं sorted contains को दे ख
सकते एिं नई फाईल में सेि कर सकते हैं।ओपन सोसा तर्ा प्रोपराइटरी सॉफ्टिेयर क्या हैं ?
(What are open source and Proprietary software)
ओपन सोसा सॉफ्टिेयर क्या हैं (What are Open Source Software) - ओपन-सोसा सॉफ्टिेयर (OSS) ऐसा सॉफ्टिेयर है , जो सोसा
कोड के सार् कितररत ककया जाता है , कजसे उपयोगकताा ओं द्वारा पढ़ा या सं शोकधत ककया जा सकता है और इसका सोसा कोड (प्रोग्रामर ने कजस
मीकडयम में सॉफ्टिे यर का कनमाा ण तर्ा पररिता न ककया है ) इं टरनेट पर फ्री रूप से उपलब्ध होता है |
ओपन सोसा सॉफ्टिे यर को स्वतं ि रूप से कितररत ककया जा सकता हैं |
इसमें सोसा कोड को सॉफ्टिे यर के सार् शाकमल ककया जा सकता हैं |
ओपन सोसा सॉफ्टिे यर के सोसा कोड में कोई भी सु धार कर सकता हैं |
सोसा कोड के सं शोकधत िजान को पुनकिा तररत ककया जा सकता है |
सार् ही, एक ओपन-सोसा सॉफ़्टिे यर लाइसें स को अन्य सॉफ़्टिे यर के सं चालन के बकहष्करण या हस्तिे प की आिश्यकता नही ं होती हैं |
Proprietary Software
Microsoft Windows
Microsoft Office
Adobe Flash Player
PS3 OS
Adobe Photoshop
Google Earth
Skype
ओपन सोसा तर्ा प्रोपराइटरी सॉफ्टिेयर में अंतर (Difference between Open Source and Proprietary
Software) -कुछ सॉफ्टिेयर में सोसा कोड होता है कजसमे सु धार और कनयिण केिल उस व्यब्दक्त, टीम, या संगठन के हार् में होता हैं कजसने इसे
बनाया है लोग इस तरह के सॉफ़्टिे यर को “Proprietary” या “Closed Source” सॉफ़्टिे यर कहते हैं ।
Proprietary सॉफ्टिे यर के केिल मूल ले खक कानूनी रूप से उस सॉफ़्टिे यर की प्रकतकलकप बना सकते हैं , कनरीिण कर सकते हैं और बदल सकते हैं
और Proprietary सॉफ्टिे यर का उपयोग करने के कलए, कंप्यूटर उपयोगकताा ओं को सहमत होना चाकहए (आमतौर पर इस सॉफ़्टिे यर को चलाने के
कलए पहली बार प्रदकशात ककए गए लाइसें स पर हस्तािर करके) कक िे सॉफ़्टिे यर के सार् कुछ भी नही ं करें गे माइिोसॉफ्ट ऑकफस और एडोब
फोटोशॉप Proprietary सॉफ्टिे यर के उदाहरण हैं ।
ओपन सोसा सॉफ्टिे यर अलग है । इसके लेखक इसका सोसा कोड दू सरों को उपलब्ध कराते हैं जो उस कोड को दे खना चाहते हैं , उसे कॉपी कर
सकते हैं , उससे सीख सकते हैं , उसे बदल सकते हैं , या शेयर कर सकते हैं । LibreOffice और GNU image Manipulate Program ओपन सोसा
सॉफ्टिे यर के उदाहरण हैं ।
ओपन सोसा लाइसें स, सॉफ्टिे यर के उपयोग, अध्ययन, सं शोधन और कितरण के तरीके को प्रभाकित करते हैं । सामान्य तौर पर, ओपन सोसा लाइसें स
कंप्यूटर उपयोगकताा ओं को ककसी भी उद्दे श्य के कलए ओपन सोसा सॉफ्टिे यर का उपयोग करने की अनुमकत दे ते हैं । कुछ ओपन सोसा लाइसें स-
कजसे कुछ लोग “कॉपीलेफ्ट” लाइसें स कहते हैं – यह कनधाा ररत करते हैं कक जो कोई भी सं शोकधत ओपन सोसा प्रोग्राम जारी करता है , उसे उस प्रोग्राम
के कलए सोसा कोड भी जारी करना चाकहए। इसके अलािा, कुछ ओपन सोसा लाइसें स यह कनधाा ररत करते हैं कक जो कोई भी प्रोग्राम को बदल दे ता है
और दू सरों के सार् साझा करता है , उसे उस प्रोग्राम के सोसा कोड को कबना लाइसें स शुल्क के चाजा करना चाकहए।
कडज़ाइन के अनुसार, ओपन सोसा सॉफ़्टिे यर लाइसें स सहयोग और साझाकरण को बढ़ािा दे ते हैं क्योंकक िे अन्य लोगों को सोसा कोड में सं शोधन
करने की अनुमकत दे ते हैं और उन पररिता नों को अपनी पररयोजनाओं में शाकमल करते हैं । िे कंप्यू टर प्रोग्रामर को जब भी चाहें , ओपन सोसा
सॉफ्टिे यर को एक्सेस करने, दे खने और सं शोकधत करने के कलए प्रोत्साकहत करते हैं , जब तक िे दू सरों को ऐसा करने दे ते हैं जब िे अपना काम साझा
करते हैं ।
कलनक्स का इकतहास (History of Linux) - Linux की लोककप्रयता को समझने के कलये हमे 30 िर्ा पहले जाना होगाा। जब कम्प्प्यूटर
बड़े बड़े घरों में, स्टे कडयमो में होता र्ा तर्ा उस समय उसका आकार ही सबसे बड़ी समस्या होता र्ा, तब यह सोचा गया कक प्रत्येक कम्प्प्यूटर में अलग
अलग आीॅ परे कटं ग कसस्टम होना चाकहये । एक साीॅ फ्टिे यर ककसी कसस्टम मे एक किशे र् उद्दे श्य की पूकता के कलये होता है तर्ा ककसी कसस्टम के कलये
बना साीॅ फ्टिे यर ककसी दू सरे कसस्टम पर काया नही कर सकता है । इसका आशय यह है कक एक कसस्टम में सम्बब्दित काया को करने िाले
साीॅ फ्टिे यर का दू सरे काया के सार् व्यिहार सं भि नही ं होता है । यह काया यू जर तर्ा कसस्टम एडकमकनस्टर े टर दोनों के कलये ही ककठन होता है । उस
समय कम्प्प्यूटर की कीमत बहुत अकधक होती र्ी तो यू जर को अपनी आिश्यकता को दे खते हुये कम्प्प्यूटर को खरीदना चाकहये ,IT की कुल लागत
असीकमत होती र्ी सन् 1969 में Bell Labs लेिोटरी के िै ज्ञाकनकों ने साीॅ फ्टिे यर सम्बब्दित समस्या को हल करने के कलये काया करना शुरू कर
कदया। उन्होंने एक नये आीॅ परे कटं ग कसस्टम का कनमाा ण ककया कजसकी किर्ेर्ताएीॅ ीं र्ी
कसं पल ि सु न्दर
असे म्बली कोड के स्र्ान पर प्रोग्राकमंग लैग्वेज में कलखना।
कोड को ररसाईककल करने की िमता।
Bell Labs लेिोटरी के िै ज्ञाकनकों ने अपने प्रोजेक्ट् का नाम “UNIX” रखा। कोड ररसाईकककलंग का फीचर काीॅ फी महत्वपूणा र्ा और यह तब तक
महत्वपूणा र्ा जब तक कम्प्प्यटू र कसस्टम एक कोड को कलखे ,जो कक कसफा एक कसस्टम के कलये किककसत ककया गया हो। दू सरी तरफ यू कनक्स को
स्पेशल कोड के छोटे -छोटे कहस्सों की आिश्यकता होती है , कजसको हम सामान्य तौर पर कनाल के नाम से जानते है यह कनाल इस कोड का कसफा
एक कहस्सा होता है जो कक एक किशेर् कसस्टम के कलये स्वीकारा जाता है तर्ा यू कनक्स कसस्टम का बे स होता है । आीॅ परे कटं ग कसस्टम तर्ा अन्य सारे
फंक्शन इस कनाल के चारों तरफ कनकमात ककये जाते है । तर्ा यह Higher programming language में कलखे जाते है इस तरह की लै ग्वेंज का कनमाा ण
यू कनक्स कसस्टम के कनमाा ण के कलये ककया जाता है । इस तकनीक का उपयोग करके आीॅ परे कटं ग कसस्टम का कनमाा ण काफी सरल हो गया है कजस पर
हम किकभन्न प्रकार के हाडा िेयरों को रन कर सकते है ।
यू कनक्स यू जरों के सार् ऐसा व्यिहार करती है कक िह किकभन्न कसस्टमों के सार् उसे आसानी से प्रयोग में ला सकें। इसी प्रकार यू कनक्स के किकास का
िम चलता रहा। इसी िम में सारी चीजें सिि हो गयी। हाडा िेयर ि साीॅ फ्टिे यर िे न्डर अपने प्रोडक्ट्ों को सपोटा करने के कलये यू कनक्स की मदद
लेने लगे ।
पहले समय में यू कनक्स कसफा बड़े बड़े िातािरण जहाीॅ मेनफे्रम तर्ा कमनी कम्प्प्यूटर लगे होते र्े उनमें पाया जाता र्ा ।अगर हम सरकारी या ककसी
फाइनेंकशयल कारपोरे शन का काया ककसी यू कनिकसा टी में कर रहे है तो आप अपना काया यू कनक्स कसस्टम के माध्यम से कर सकते र्े परन्तु छोटे
कम्प्प्यूटर किककसत ककये जाने लगे र्े और 80 के दशक में अकधकतर लोगो के पास अपने होम कंप्यूटर र्े ,उस समय पी सी आककाटे क्चर के कलये
यू कनक्स के काफी सारे िजा न उपजब्ध र्े लेककन उनमें से कोई भी पूणा रूप से स्वति नही ं र्ा
Linux B. Torvalds ने 1991 में पहले लाइने क्स कनाल को कलखाा र्ा। लाइने क्स ने काफी प्रकसकद्व प्राप्त की क्योंकक सोसा कोड शीघ्रता से प्राप्त हो
जाता है यू जसा अपनी आिश्याकतानुसार कनाल को स्वति रूप से पररिकता त कर सकते है । कफर भी यह समझना महत्वपूणा है कक लाइने क्स कनाल
कैसे शाकमल ककया जाता है और ये नये कसस्टम प्रोग्राम्स को कलखने से पहले कैसे काया करते है । लाइने क्स कना ल सोसा कोड पर आधाररत काीॅ निीट
आककाटै क्चर एक किश्विसनीय और up-to-date referrer Linux kernel hackers and developers को प्रदान कर सकते है । लाइनेक्स 1991 से कई
बार प्रकतकनकधयों के एक ग्रु प द्वारा दोहरायी जा चुकी है जो इं टरनेट पर Usenet Newsgroups के माध्यम से कम्यूकनकेट करते है ।
Linux an Unix Compatible System अकधकतर काीॅ मन यू कनक्स टू र्ल् और प्रोग्राम्स लाइनेक्स के अंतगा त रन होते है । लाईने क्स िास्तकिक रूप से
इं टेल 80386 माइिोप्रोसे सर पर रन करने के कलये किककसत की गयी र्ी। आीॅ ररजनल िजान अन्य लेटफाीॅ मास के कलये पोटे बल नही ं र्े क्योंकक ये
इं टेल के स्पेकसकफक इं टररि है ण्डकलंग रूटीि को उपयोग करते है । Linux user base बडा होता है 1994 में Ed Chi द्वारा बनायी गयी लाइनेक्स के
कम से कम 40000 यू जसा र्े लाइने क्स डाीॅ क्यू मेंटेशन प्रोजेक्ट् लाइनेक्स कना ल के कलये उपयोगी और किश्विसनीय डाीॅ क्यू मेन्ट्ेशन के किकास के
कलये काया करता है । ये लाइनेक्स यू जसा और लाइने क्स डे िलपसा दोनों के ही द्वारा उपयोग ककये जाते है ।
कलनक्स की किशेर्ताये (FEATURE’S OF LINUX)
1.Linux is portable - Linux को सी प्रोग्राकमंग लेंग्वेज में कलखा गया है कजसका ककसी प्रकार के कम्प्प्यूटर हाडा िेयर से सम्बि नही ं रखा गया यह
ककसी भी प्रकार के कम्प्प्यूटर पर चलाने में सिम है जैसे PCAT, MACINTOS
2.Linux is a multi user and multitasking O.S. - Linux में दी गई मल्टी यूजर सुकिधायें अन्य ऑपरे कटं ग कसस्टमो की तुलना में अकधक
शशक्त है ,लाइने क्स में भी अन्य ऑपरे कटं ग कसस्टम के सामान ही अनेक यू जर अकाउं ट तो रख सकते है , लेककन सार् ही अनेक यू जर एक login
करके अपने काया कर सकते है इसके अलािा यू जर अपना अलग-अलग डे स्क टॉप चु न सकते है । तर्ा स्वतं ि रूप से अपनी अलग डायरे क्ट्री
पासिडा कदया जा सकता है अर्ाा त कोई भी प्रयोक्ता ककसी अन्य प्रयोक्ता की डायरे क्ट्र ी में ककसी तरह का बदलाि नही ं कर सकता है
3.Network information service - किकभन्न प्रकार के कई कम्प्प्यूटर को आपस में जोड़कर उनका उपयोग करने के कलए एक जाल स्वरूप
सं रचना बनायी जाती है । कजसे ने टिककांग कहते है । लाइनेक्स किशे र् रूप से नेटिककांग में काया करने के कलये किककसत ककया गया है। लाइने क्स के
द्वारा हम पासिडा को शेयर कर सकते है तर्ा फाईलो को समूहों में बाटकर नेटिका पर उपयोग में ला सकते है ।
4.Multitasking - लाइनेक्स में ककसी प्रोग्राम को छोटे छोटे कायों में किभाकजत कर कदया जाता है। कई कायों को एक सार् ककसी तरह से करने
की आपरे कटं ग कसस्टम की िमता को ही मल्टीटाब्दस्कंग कहते है ।
5.Virtual Memory - यकद हम ककसी बड़े प्रोग्राम या एलीकेशन को संपाकदत करते है। तो हमें कुछ कफकजकल मेमोरी की आिश्यकता होती है
जो कक हाडा कडस्क में जमा कर दी जाती है और आिश्यकता पड़ने पर इसे उपयोग में लाया जा सकता है ।
6.Linux is network friendly - Linux नेटिका फ्रेंडली ऑपरे कटं ग कसस्टम है , लाइनक्स का उपयोग कदन प्रकतकदन लगातार बढ़ रहा है यहााँ
तक की किकभन्न एलीकेशन सॉफ्टिे यर जैसे एं टीिायरस आकद को भी समय पर इन्ट्रनेट के माध्यम से अपडे ट करना आिश्यक होता जा रहा है
,तात्पया यह है की धीरे धीरे प्रत्येक कंप्यूटर यू जर को इन्ट्रनेट से जुड़े रहना आिश्यक हो गया है अतः यह स्वाभाकिक ही है की इन्ट्रनेट की
लोककप्रयता और किकास के बाद आने िाले सभी ऑपरे कटं ग कसस्टम इन्ट्रनेट से सम्बं कधत शब्दक्तशाली टू ल से सु सब्दित होते है ।आज ककसी भी नेटिका
की सं गतता उसे परखने की महत्वपूणा कसौटी बन चुकी है चूंकक लाइने क्स का किकास अनेक प्रोग्रामरो ने आपस में कमलकर इन्ट्रनेट के माध्यम से ही
ककया अतः इसमें किशेर् रूप से इन्ट्रनेट को अकधक प्रार्कमकता दी गई है लाइनक्स ऑपरे कटं ग कसस्टम अपने आप में सशक्त इन्ट्रनेट से िा प्रदाता
काया करने की िमता रखता है सार् ही यह ककसी भी ऑपरे कटं ग कसस्टम पर क्लाईंट या सिा र के रूप में काया कर सकता है
7.Linux is open - Linux distribution के सार् इसके source code भी उपलब्ध होते है कजसे हम अपनी आिश्यकतानुसार पररितान कर सकते
है ,इस अर्ा में लाइने क्स एक खुला कसस्टम है ।
कलनक्स की हाडा िेयर आिश्यकतायें (Minimum hardware requirement for installing linux)
लाइनेक्स (फेडे रा कोर) या इसका कोई पी. सी. सं स्करण ् को स््र्ाकपत करने के कलए कनम्प््नकलब्दखत आिश्यकताए है , ध्यान रहे नीचे दी गयी
आिश्यकताएं पुराने लाइनेक्स के सं स्करण के कलए हैं , अभी लाइने क्स इनस्टॉल करने के कलए आपको अलग कंप्यूटर हाडा िेयर की आिश्यकता
पड़े गी|
X86 प्रोसेसर (X86 Processor) - आपके कंप्यूटर को इसके कलए इं टेल-संगत सी.पी.यू. की आिश्यकता होती है। हालां कक इसके
इन्स््टॉलेशन के कलए यह आिश्यक नही है कक यह निीनतम पेब्दन्ट्यम प्रोसे सर हो। यघकप लाइनेक्स ककसी पुराने प्रोसे सर जैसे 80386 ले तो उस पर भी
कबना ककसी बाधा के चल सकता है , इसके कलए 80386 से ऊपर का कोई भी प्रोसे सर उपयु क्त हो्गा।
फ्लॉपी कडस््क डराइि या सी. डी. रौम (Floppy Disk Drive or CD-ROM) - आपको इन्स््टॉलेशन प्रकिया को बूट/प्रारम्प््भ करने के
कलए आपके कंप्यू टर मे फ्लॉपी कडस््क या कॉम्प््पैक्ट-कडस््क डराइि लगा होना चाकहए।
हाडा कडस््क (Hard Disk) - आपको लाइनेक्स इन्स््टॉलेशन के कलए एक हाडा कडस््क के पाकटा शन की आिश्यकता होती है कजसमे कम से कम
350 MB स््र्ान मुक्त हो। हाडा कडस््क मे मुक्त स््र्ान की आिश्यकता लाइनेक्स इन्स््टॉलेशन के प्रकार तर्ा पैकेज पर कनभा र करता है ।
यकद आप िकास््टे शन इन्स््टॉल करना चाहते है तो आपके हाडा कडस््क मे 1.5 GB मुक्त स््र्ान रहना आिश्यक है , जबकक “Everything” इन्स््टॉले शन के
कलए 3.5 GB की न्यू नतम आिश्यकता पडती है ।
रै म (RAM) - फेडे रा कोर या रे ड हैट लाइनेक्स का कोई संस्करण
् को स््र्ाकपत करने के कलए कम से कम 32 MB रै म का होना आिश्यक है ।
ग्राकफकल मोड मे सॉफ्टिे यर की आिश्यकता के रूप मे दो चीजे महत्िपूणा है –
बू ट अप कडस््क (Boot Up Disk) – इसका प्रयोग हम लाइनेक्स इन्स््टॉलेशन प्रोग्राम चलाने से पहले कसस््टम को बू ट (Boot) करने के कलए करते है ।
इसी फ्लॉपी मे आिश्यक रूप से FDISK नामक फाइल होना चाकहए।
लाइनेक्स इन्स््टॉलेशन प्रोग्राम (Linux Installation Program) – यह प्रोग्राम लाइनेक्स के सं स्करण
् के ऊपर कनभा र करता है । िस््तु त: पूरा प्रोग्राम 3
या 4 सी. डी. मे आता है । डी.िी.डी. रौम की ब्दस्र्कत मे पूरा प्रोग्राम एक ही डी.िी.डी. रौम मे प्राय: आ जाता है ।
लाइनेक्स मे एक एक समय मे कई प्रोग्राम कायां कित होते रहते है । कायाां कित होने िाले एक प्रोग्राम को प्रोसे स कहा जाता है । लाइनेक्स चलते हुए
प्रोसे स, कसस््टम उददे श्य को मॉनीटर करने तर्ा प्रोसे स को आिश्यकतानुसार रोकने या समाप्त करने को सू चीबध्द करने के कलए टू ल्स प्रदान करता
है ।
चलते हुए प्रोसे सर को जॉचने के कलए सबसे सामान्य यू कटकलटी ps कमाण्ड है । ps कमाण्ड की सहायता से हम ये दे ख सकते है कक कौन सा प्रोग्राम
चल रहा है , ककन सं साधनो का िे प्रयोग कर रहे है तर्ा उन्हे कौन चला रहा है ।
कलनक्स के किकभन्न िजान (Various Flavors of linux) - लाइनक्स के अलग अलग संस्र्ाओ द्धारा जारी ककये गए किकभन्न
सं स्करण ही लाइनक्स के फ्लेिर कहलाते है | इन्हें लाइनक्स कडस्टर ीब्यूशन भी कहा जाता है | लाइनक्स इन्ट्रनेट पर मुफ्त उपलब्ध है अतः कोई भी
व्यब्दक्त या सं स्र्ा इसे प्राप्त कर अपनी सु किधानुसार पररिता न कर इसे नया रूप दे कर या इसमें अपनी और से और एलीकेशन सॉफ्टिे यर जोड़कर
इसे उपयोगकताा ओ को कितररत कर सकते है | इस प्रकार आने िाले लाइनक्स के अलग अलग सं स्करण लाइनक्स के फ्लेिर या कडस्टर ीब्यूशन
कहलाते है | लाइनक्स के कुछ अन्तराा ष्टरीय स्तर पर लोककप्रय फ्लेिर कनम्नानुसार है |
Flavors of Linux
Debian GNU/Linux
Fedora Core
Gentoo Linux
Mandrake Linux
Rad Hat Enterprise Linux
Slackware Linux
SUSE Linux
Red hat enterprise Linux, Mandrake Linux, Suse Linux, Slackware Linux व्यािसाकयक कम्पकनयो द्धारा जारी ककये गए फ्लेिर है , कजनके
माध्यम से इन कम्पकनयों का उद्दे श्य आकर्ाक लाभ प्राप्त करना है |
कलनक्स फाइल कसस्टम (Linux file system) - हाडा कडस्क में हजारो फाईले संग्रकहत रहती है इन फाईलो के अलग- अलग समूहों
को अलग अलग डायरे क्ट्रीयो में रखकर बनने िाली सं रचना फाइल कसस्टम कहलाती है , ककसी भी हाडा कडस्क पाटीशन में सं गृकहत फाईलो की
hierarchy तर्ा डायरे क्ट्री की सं रचना फाइल कसस्टम कहलाती है |
माइिोसॉफ्ट डॉस या किं डोज के समान ही लाइनेक्स में हाडा कडस्क डराइि की प्रर्म या मूल डायरे क्ट्र ी रूट डायरे क्ट्र ी कहलाती है , तर्ा कजस प्रकार
किं डोज िातािरण में रूट डायरे क्ट्र ी के अंतगा त my document, recycle bin ,programs file आकद प्रमुख सबडायरे क्ट्रीया कमलती है ,कजनमे से
प्रत्येक डायरे क्ट्र ी की अपनी किकशष्ट भू कमका होती है उसी प्रकार लाइने क्स में भी हमे रूट डायरे क्ट्र ी के अंतगा त- bin, boot, dev, home, lib, user
आकद सब डायरे क्ट्री बनी बनाई कमलती है कजनमे किकभन्न श्रेकणयों से सम्बं कधत अलग-अलग फाइल सं गृकहत होती है |प्रमुख डायरे क्ट्री कनम्न प्रकार से
है –
Root Directory
|–bin डायरे क्ट्र ी (लाइनक्स के आिश्यक यू कटकलटी प्रोग्रामो का सं ग्रह)
|–boot डायरे क्ट्र ी (लाइनक्स के बू कटं ग सम्बं कधत सू चनाओ का सं ग्रह)
|–dev डायरे क्ट्र ी (उपकरणों जै सि हाडा कडस्क, कप्रंटर आकद से सम्बं कधत फाईले )
|–etc डायरे क्ट्र ी (किकभन्न कोंकफगारे शन फाईलो का सं ग्रह)
|–home डायरे क्ट्र ी (किकभन्न यू जसा डायरे क्ट्रीयो का सं ग्रह)
|–User 1
|–Ravi
|–Ram
|–User 4
|–Lib डायरे क्ट्र ी (सॉफ्टिे यर लायिे रीकनेल मोड्यू ल आकद का सं ग्रह)
|–mnt डायरे क्ट्र ी (इसके अंतगा त हम अन्य सं ग्रहण उपकरणों के फाइल कसस्टम माउन्ट् कर सकते है )
जैसे-:
|–cdrom डायरे क्ट्र ी (CD Rom)
|–floppy डायरे क्ट्र ी (Floppy drive)
|–zap डायरे क्ट्र ी (Zap drive)
|–root डायरे क्ट्र ी (यह एक रूट नाम से सं गृहीत डायरे क्ट्र ी होती है जहा कसस्टम एडकमकनस्टर े टर काया करता है |
|–tmp डायरे क्ट्र ी (इन्ट्रनेट सम्बं कधत अस्र्ायी फाईले यहााँ सं गृहीत होती है कजन्हें हम बाद में कडलीट कर सकते है )
|–user डायरे क्ट्र ी (अकतररक्त यू कटकलटी प्रोग्राम तर्ा यू जर द्धारा बनाये गए प्रोग्रामो का सं ग्रह)
|–games
|–local डायरे क्ट्र ी (यू जर कनकमात प्रोग्राम)
|–src डायरे क्ट्र ी (यू जर द्धारा बनाये गए लोकल प्रोग्रामो का सोसा कोड)
|–ver डायरे क्ट्र ी (कसस्टम लोग फाईलो का सं ग्रह)
.Bin डायरे क्ट्री - कबन डायरे क्ट्र ी लाइनक्स में उपब्दस्र्त यूकटकलटी तर्ा कमां ड्स को संगृहीत करके रखती है | इस डायरे क्ट्र ी में रखे गए सभी
प्रोग्राम तर्ा कमां ड बाइनरी फोमेट में होते है , इसकलए इस डायरे क्ट्र ी को कबन डायरे क्ट्र ी कहते है | इस डायरे क्ट्र ी के अंतगा त आने िाली सभी कमां ड्स
को हम डॉस के सामान ही लाइनक्स के कमां ड प्रां ि (#प्रोम्प्ि/$प्रोम्प्ि) पर चला सकते है |
.dev डायरे क्ट्री - /dev डायरे क्ट्र ी में अकधकां श कंप्यूटर उपकरणों जैसे- कप्रंटर, माईक, श्रिण यंिो (Audio Devices) संग्रहण तंिों (Storage
Device), जैसे- हाडा कडस्क, फ्लॉपी कडस्क, सी.डी.रोम आकद से सम्बं कधत फाईले उपलब्ध होती है
.etc डायरे क्ट्री - जैसा की नाम से स्पष्ट है इस डायरे क्ट्री में किकिध प्रकार की कमकश्रत एिं अकतररक्त फाईले (miscellaneous) एिं डायरे क्ट्रीया
रहती है |
./lib डायरे क्ट्री - इस डायरे क्ट्री में कसस्टम लाइिेरी होती है कजसमे कम्पाइलर के कलए आिश्यक डाटा होता है किकभन्न कमांड तर्ा प्रोग्राम
फायलो के कियािन के कलए कम्पाइलर को इस डाटा की आिश्यकता होती है |
.home डायरे क्ट्री -इस डायरे क्ट्र ी में अकधकां शतः यूजर के द्धारा बनायीं गई डायरे क्ट्रीया होती है |
./user डायरे क्ट्री - इस डायरे क्ट्र ी में हाडा कडस्क के अकतररक्त अन्य संग्रहण उपकरणों जैसे-गेम्स आकद तर्ा स्वयं यूजर द्धारा बनाये गए प्रोग्राम
सं लग्न होते है |जैसे /user/bin डायरे क्ट्री में यू जर के कलए उपयोगी अकतररक्त यूकटकलटी प्रोग्राम है |
./mnt डायरे क्ट्री - इस डायरे क्ट्र ी का उपयोग हाडा कडस्क के अकतररक्त अन्य संग्रहण उपकरणों जैसे- सी.डी रोम आकद को डायरे क्ट्र ी का
कहस्सा बनाने के कलया जाता है | तर्ा इसमें इन सं ग्रहण उपकरणों के फाइल कसस्टम अलग से सं लग्न रहते है |
.tmp डायरे क्ट्री - इस डायरे क्ट्र ी में अस्र्ायी िका फाईले संगृहीत होती है ,जब हम यूकटकलटी प्रोग्रामो को चलाते है , तो कियाब्दित होते समय ये
प्रोग्राम इन अस्र्ायी फाईलो को बनाते है | इस डायरे क्ट्र ी की फाईलो को लाइनक्स स्वयं समय समय पर अपने आप कडलीट करता रहता है |
Types of file in Linux
लाइनक्स में प्रोग्राम डाटा फाइल तर्ा कुछ किशेर् फाइल भी होती है लाइनक्स की इन सभी तरह की फाइर्ल् को मुख्य रूप से दो श्रेकणयों में बााँ ट
सकते है |
Ordinary Files:-(साधारण फाइल )
इसमें यू जर द्धारा बनायी ं गई फाइर्ल् सब्दिकलत होती है जैसे –डाटा फाइल , प्रोग्राम फाइल , ऑब्जेक्ट् फाइल ,करणीय फाइल (executable file)
डायरे क्ट्री फाइल आकद| लाइनक्स में डायरे क्ट्र ी भी अपने आप में एक फाईल होती है | कजसमे दू सरी फाइर्ल् तर्ा सब डायरे क्ट्री रखी जाती है जब
भी हम डायरे क्ट्र ी बनाते है तो लाइनक्स उससे सम्बं कधत डायरे क्ट्र ी फाईल बनाता है |
Special device file :-(किशेर् फाइल)
अकधकां श कसस्टम फाइलें स्पे शल फाइलें होती है ये फाइलें कसस्टम की भौकतक सं रचना को
प्रदकशात करती है । अर्ाा त् इन फाइलों के अन्तगा त किकभन्न भोीै कतक यं िों जैसे कप्रंटर ,मॉकनटर से सं बंकधत फाइलें होती है इन फाइलों का उपयोग
आपरे कटं ग कसस्टम को हाडिे यर से सम्बब्दित करने के कलए ककया जाता है ।
कलनक्स को लॉकगंग-इन, लॉकगंग आउट और शटडाउन कैसे करें
(How to Logging in, log out and Shutdown Linux)
कलनक्स ऑपरे कटं ग कसस्टम का प्रयोग कदनों कदन बढ़ता जा रहा है | यह एक ऐसा ऑपरे कटं ग कसस्टम है कजसे आप किं डोज की तरह ही सरलता पूिाक
प्रयोग कर सकते हैं | यह ऑपरे कटं ग कसस्टम KDE और GNOME यू कटकलटी से भी लैस हैं इस ऑपरे कटं ग कसस्टम पर इं टरनेट को ककसी दू सरे की अपेिा
ज्यादा सरलता और ते जी से प्रयोग ककया जा सकता है |
ऑपरे कटं ग कसस्टम का मुख्य काम कंप्यूटर को काया कारी लेटफामा पर लाकर उसका कनयं िण यू जर को दे ना होता है | इस ब्दस्र्कत में आने के बाद यू जर
कंप्यूटर पर अपना काम प्रारं भ करता है इस काया के तहत कंप्यूटर में लॉगइन करना, पूरे सि को सही तरीके से मैनेज करना, सहायता सु किधा और
कटप्स प्राप्त करना, फाइल कसस्टम में नेकिगे ट करके फाइलों को खोजना, फाइलों को उनकी डायरे क्ट्री को मैनेज करना, फाइलों को कंप्रेस करना,
इं किि करना तर्ा इनकोड करना, कडस्क और डराइि को मैनेज करना, टे क्स्ट, साउं ड, ग्राकफक्स फाइलों के सार् काम करना, फ़ॉन्ट् प्रयोग करना, टे क्स्ट
एकडटर प्रयोग कर कसस्टम को मैनेज करके कॉब्दनफ़गर करना और इं टरनेट तर्ा नेटिका को प्रयोग करना आता है |
यह सभी काम कुछ खास कमां डो के द्वारा ककए जाते हैं िै से तो आप कलनक्स डे क्सटॉप से भी यह सभी काम कर सकते हैं लेककन कमां डो के बारे में
किस्तार से जानकारी हाकसल करके आप इस ऑपरे कटं ग कसस्टम में महारत हाकसल कर सकते हैं |
कलनक्स कमां ड्स (Linux Command)
कलनक्स को लॉगइन, लॉगआउट तर्ा शटडाउन करने की कमां ड
लॉगइन कमां ड (Login]user])
कलनक्स ऑपरे कटं ग कसस्टम में यह ऐसा prompt है जो कंप्यूटर को प्रयोग करने के कलए या कफर कंप्यूटर पर काम करने के कलए यू जर नेम और
पासिडा की सु किधा प्रदान करता है | इस कमां ड का प्रयोग केिल टे क्स्ट मोड से क्शन में होता है | इसे आप x रकनंग मोड में प्रयोग ना करें |
लॉग आउट कमां ड (Logout)
करं ट से शन से बाहर कनकलने के कलए इस कमां ड का प्रयोग ककया जाता है | यह कमां ड भी केिल टे क्स्ट मोड से शन में ही काम करता है |
शटडाउन कमां ड (Shutdown [message])
कलनक्स ऑपरे कटं ग कसस्टम का यह कमां ड फाइल कसस्टम को खराब होने से बचाता है और आप अपने कंप्यूटर को एक्स किं डो कसस्टम से बाहर
कनकलकर इस कमां ड के द्वारा बं द कर सकते हैं | यकद आप GNOME और KDE मोड में काम कर रहे हैं तो मेनू ऑपशन के द्वारा तत्कालीन सि से
पहले बाहर कनकले उसके बाद कंप्यूटर को शटडाउन करें इस कमां ड को तभी प्रयोग ककया जाता है जब एक्स मोड कियाब्दित ना हो और टे क्स्ट मोड
में हो| इस कमां ड के सार् कसस्टम को रीस्टाटा तर्ा हॉल्ट करने के कलए कुछ ऑपशन प्रयोग ककए जाते हैं जो कनम्नकलब्दखत है -
-f
कमां ड के सार् इस ऑपशन का प्रयोग करके आप फाइल कसस्टम की जां च ककए कबना कंप्यूटर को ते जी से ररबू ट कर सकते हैं |
-h
शटडाउन करने के बाद कसस्टम को हॉल्ट करने के कलए इस किकि को प्रयोग ककया जाता है ितामान समय में प्रचकलत सभी पसानल
कंप्यूटर इस किकल पर के द्वारा स्वचाकलत तरीके से ऑफ हो जाते हैं |
-k
यह ऑपशन तब प्रयोग ककया जाता है जब आप िास्ति में शटडाउन ककए कबना चेतािनी मैसेज दे ना चाहते हैं |
-r
इस किकि के द्वारा आप कंप्यूटर को रीस्टाटा कर सकते हैं |
उदाहरण
Shutdown -h
इस कमां ड के द्वारा आप कंप्यूटर को 2 कमनट के समय में हॉल्टर कर सकते हैं |
कलनक्स में प्रोफाइल तर्ा लॉगइन फाइल (Linux Profile and Login File)
कलनक्स में प्रोफाइल फाइल कसस्टम स्टाटा अप फाइर्ल् के अंतगात आती है .profile फाइल आपकी होम डायरे क्ट्री में होती है तर्ा
आपके प्रर्क िककांग िातािरण को कस्टमाइज करने की सुकिधा दे ती है .profile फाइल कडफ़ॉल्ट रूप से कनम्न को कनयंकित करते हैं -
ककन शैर्ल् को खोलना है
Prompt का प्रदशा न
कीबोडा साउं ड
.profile फाइल में आप की सूचना होती है जो /etc/profile फाइल में सेट िेररएबल को ओिरराइट करती है |
प्रत्येक बार जब आप लॉग-इन करते हैं तो यूकनक्स .login फाइल के कलए सचा करता है तर्ा फाइल में उपलब्ध कमां ड्स को
एब्दिक्यूट करता है | .login फाइल में स्टैं डडा कसस्टम लॉगइन फाइल को सोसा (पढ़ने तर्ा एब्दिक्यूट) कलए कमां ड होती है |कना ल
क्या हैं ? (What is kernel)
Kernel Linux Operating System की कोर प्रोग्राम होती है । Kernelएक ऐसा आीॅ परे कटं ग कसस्टम प्रोग्राम हे ीै जो कक कम्प्प्यूटर हाडा िेयर के सं साधनों
को कनयं कित करके उनका उकचत उपयोग यू जर से करिाता है । जै से ही कम्प्प्यूटर Start होता है कनाल लां च हो जाता है । और कम्प्प्यूटर के आीॅ फ होने
तक लोड रहता है । यह इस बात पर कनभा र नही करता कक आप कौन से साफ्टिे यर या शैल को रन कर रहे है ।
ऑपरे कटं ग कसस्टम का मुख्य काम कंप्यूटर को काया कारी लेटफामा पर लाकर उसका कनयं िण यू जर को दे ना होता है | इस ब्दस्र्कत में आने के बाद यू जर
कंप्यूटर पर अपना काम प्रारं भ करता है इस काया के तहत कंप्यूटर में लॉगइन करना, पूरे सि को सही तरीके से मैनेज करना, सहायता सु किधा और
कटप्स प्राप्त करना, फाइल कसस्टम में नेकिगे ट करके फाइलों को खोजना, फाइलों को उनकी डायरे क्ट्री को मैनेज करना, फाइलों को कंप्रेस करना,
इं किि करना तर्ा इनकोड करना, कडस्क और डराइि को मैनेज करना, टे क्स्ट, साउं ड, ग्राकफक्स फाइलों के सार् काम करना, फ़ॉन्ट् प्रयोग करना, टे क्स्ट
एकडटर प्रयोग कर कसस्टम को मैनेज करके कॉब्दनफ़गर करना और इं टरनेट तर्ा नेटिका को प्रयोग करना आता है |
यह सभी काम कुछ खास कमां डो के द्वारा ककए जाते हैं िै से तो आप कलनक्स डे क्सटॉप से भी यह सभी काम कर सकते हैं लेककन कमां डो के बारे में
किस्तार से जानकारी हाकसल करके आप इस ऑपरे कटं ग कसस्टम में महारत हाकसल कर सकते हैं |
कलनक्स कमां ड्स (Linux Command)
कलनक्स को लॉगइन, लॉगआउट तर्ा शटडाउन करने की कमां ड
लॉगइन कमां ड (Login]user])
कलनक्स ऑपरे कटं ग कसस्टम में यह ऐसा prompt है जो कंप्यूटर को प्रयोग करने के कलए या कफर कंप्यूटर पर काम करने के कलए यू जर नेम और
पासिडा की सु किधा प्रदान करता है | इस कमां ड का प्रयोग केिल टे क्स्ट मोड से क्शन में होता है | इसे आप x रकनंग मोड में प्रयोग ना करें |
लॉग आउट कमां ड (Logout)
करं ट से शन से बाहर कनकलने के कलए इस कमां ड का प्रयोग ककया जाता है | यह कमां ड भी केिल टे क्स्ट मोड से शन में ही काम करता है |
शटडाउन कमां ड (Shutdown [message])
कलनक्स ऑपरे कटं ग कसस्टम का यह कमां ड फाइल कसस्टम को खराब होने से बचाता है और आप अपने कंप्यूटर को एक्स किं डो कसस्टम से बाहर
कनकलकर इस कमां ड के द्वारा बं द कर सकते हैं | यकद आप GNOME और KDE मोड में काम कर रहे हैं तो मेनू ऑपशन के द्वारा तत्कालीन सि से
पहले बाहर कनकले उसके बाद कंप्यूटर को शटडाउन करें इस कमां ड को तभी प्रयोग ककया जाता है जब एक्स मोड कियाब्दित ना हो और टे क्स्ट मोड
में हो| इस कमां ड के सार् कसस्टम को रीस्टाटा तर्ा हॉल्ट करने के कलए कुछ ऑपशन प्रयोग ककए जाते हैं जो कनम्नकलब्दखत है -
-f
कमां ड के सार् इस ऑपशन का प्रयोग करके आप फाइल कसस्टम की जां च ककए कबना कंप्यूटर को ते जी से ररबू ट कर सकते हैं |
-h
कलनक्स की कमां ड
उपयुाक्त संरचना से स्पष्ट है की cat कमां ड के सार् ‘>’कचन्ह का उपयोग कर फाइल का नाम दे गे कदए गये नाम से एक नयी फाइल बन
जाएगी|फाइल में मे टर टाइप करते समय प्रत्येक लाइन समाप्त होने पर इं टर दबायेगे तर्ा फाइल को बंद करने के कलए Ctrl+D का
उपयोग करे गे |
Cp command -इस कमां ड का उपयोग फाइल को कॉपी करने के कलए ककया जाता है |
कमां ड सरचना :- $Cp><Source Filename><Target Filename>
Ex- $Cp Maruti Maruti1
Cd command
Cd शि का अर्ा है “change directory” अर्ाा त हम उस कमां ड का उपयोग ककसी डायरे क्ट्र ी तर्ा उसकी सब डायरे क्ट्री में जाने के
कलए करते है यह डॉस के cd कमां ड के समान है जहा cd के सार् ककसी डायरे क्ट्री का नाम दे ने पर दी गई डायरे क्ट्र ी सकिय हो जाती
है
कमां ड सरचना :- $Cd><Diroctoryname>
Ex- $Cd Practical
Chgrp command
यह कमां ड समू ह स्वाकमत्व को बदलने के कलए ककया जाता है
कमां ड सरचना :-$Chrgp[Option]……..<Groupname><Filename>
Command के सार् कनम्न option प्रयोग ककये जाते है
V: प्रत्येक फाइल कजस पर प्रकिया की जा चुकी है | उसका कनदानसूचक (output) प्रदकशा त होता है
Help: कमां ड से सम्बं कधत हेि प्रदकशा त करता है |
Version: संस्करण को प्रदकशात करता है |
Chmod command – यह कमां ड फाइल के एक्सेस अकधकार (Access Permission) बदलने के कलए उपयोग ककया जाता है | अगर
हम Is-1 Command के द्धारा Files की किस्तृ त सूची दे खे या Is-1 के सार् ककसी फाइल का नाम दे कर उस फाइल का किस्तृ त कििरण
दे खे तो कनम्नानु सार कदखाई दे ता है |
उपयुाक्त आउटपुट फाइल के किर्य में कनम्न कििरण दे रहा है
एक्सेस अकधकार (Access) स्वामी (Owner) का नाम ,फाइल का आकार(Size), कदनां क एिं समय (Date and Time),एिं का फाइल
का नाम जै सा की स्पष्ट है की उपयुाक्त कििरण में पहली जानकारी एक्सेस अकधकारों को प्रदकशा त कर रही है | यहााँ कलए गए उदाहरण में
हमें कििरण के एक्सेस अकधकार िाले खं ड rwx rwx rwx कलखा कदखाई दे रहा उपयुाक्त जहा r,w, and x का अर्ा है
r – read
w – write
x – execute
Chown Command
यह कमां ड ककसी भी फाइल का स्वाकमत्व पररिकतात करने के कलए उपयोग ककया जाता है कजस यूजर ने कजस फाइल को बनाया है िह
उसका स्वामी (owner) होता है | अगर फाइल का स्वामी स्वयं चाहे तो खु द या कसस्टम एडकमकनस्टर े टर root के माध्यम से file का
स्वाकमत्व ककसी अन्य यूजर को दे सकता है इस कमां ड एक और किशेर्ता है की इसके द्धारा हम फाइल का समू ह भी बदल सकते है
अर्ाा त यह कमां ड chgrp का भी काया करती है |
कमां ड सरचना :-
$Chown<ownername>[:>groupname]>filename>
यहााँ ग्रुप का नाम कदया जाना िैकब्दिक है जब फाइल का स्वामी एिं ग्रुप दोनों बदलना हो |
Ex. $ 1s – Maruti
$1s-rw-1 users 35 june 15 18:35 Maruti
स्पष्ट है की अब फाइल का स्वाकमत्व user 1 को कमल गया है कजसका समू ह users नाम से है
Ex2. $Chown user 1: Manager Maruti
$1s:– Maruti
Rwxr-
Who
इस कमाण्ड के प्रयोग से कसस्टम पर ितामान में Login ककये हुए यूजर की कलस्ट प्रदकशा त होती है इस कमाण्ड के द्वारा सभी यूजर के
सम्बि में किकभन्न जानकारी जैसे नाम, टकमा नल नं ., लॉग इन का समय, ि कदनाीॅक प्रदकशा त होती है ।
$who {enter}
User names Terminal no. Login date Login Time
Ravi tty10 Jan 14 12:30
Rahul tty10 Jan 14 13:00
Who command के द्वारा हम ककसी किशेर् यूजर के सम्बि में समस्त जानकारी प्राप्त कर सकते है इसके कलये कनम्न कमाण्ड प्रयोग
ककया जाता है ।
कमां ड सरचना :-
$who <user name> {enter}
Ex. :- $who gour {enter}
उक्त कमाण्ड कियाब्दित होने पर यकद gour user उपब्दस्र्त नहीं होगा तो कनम्न सूचना प्रदकशा त होती है
gour does not exit
यकद यह यूजर उपब्दस्र्त है तो पूिाा नूसार केिल यूजरने म के सम्बि में जानकारी प्रदकशा त होती है ।
यकद यूजर यह जानना चाहता है कक िह ितामान में ककस लॉग इन पर काया कर रहा है तो उसके कलए कनम्न कमाण्ड प्रयोग ककया जाता है
$who I am {enter}
इससे कजस यूजर पर लाीॅकगंन ककये हुये है उससे सम्बब्दित सूचना प्रदकशा त होती है ।