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  • कविता की परिभाषा,
  • कविता की विषयवस्तु,
  • कविता का महत्व,
  • कविता की रचना,
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  • कहानी,
  • कविता की परंपरा,
  • कविता की संरचना,
  • कविता का विश्लेषण,
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आदश नप

ह द (201)
कुल अंक:- 100 समय: 3 घंटे

ट पणी :

1. नप के दोन खंड म न क सं या 37 है और सभी न के उ र दे ना अ नवाय है।


2. न के लए नधा रत अंक उनके सम दये गए ह।
3. इस नप म दो खंड ह - खंड ‘अ’ और खंड ‘ब’ ।
4. खंड ‘अ’ म व तु न ठ/बहु वक पी और खंड ‘ब’ म वषय न ठ/वणना मक न दए गए ह।
5. खंड ‘अ’ म कुल 27 न ह। इसम न सं या 1-5 प ठत क वता पर , न सं या 6 अप ठत क वता
पर, न सं या 7-19 प ठत ग य पर, न सं या 20 अप ठत गदयांश पर और न सं या 21-27
याकरण पर आधा रत न ह। न के साथ नदशानस
ु ार उनके आंत रक वक प भी दए गए ह।
6. खंड ‘ब’ म कुल 10 न ह। इसम न सं या 28-30 प ठत क वता पर, न सं या 31-34 प ठत
ग य पर तथा न सं या 35-37 ले खन कौशल पर आधा रत न ह। न के साथ उनके आंत रक
वक प भी दए गए ह। नदशानस
ु ार वक प का यान रखते हुए सभी न के उ र द िजए।

खंड ‘अ’(व तु न ठ/बहु वक पीय)


न न न ल खत न के र त थान भ रए और अपनी उ र पुि तका म ल खए :- अंक कुल
सं. अंक
1. (I) ‘चं गहना से लौटती बेर’ म चं गहना एक ................... है। 1 1
अथवा
(II) ‘आजाद ’ क वता के अनस
ु ार ....................... आजाद है।
2. (I) कबीर ने बढ़ते जल क तुलना क है ................................... 1 1
(क) बर
ु ाइय से
(ख) धन से
(ग) बाढ़ से
(घ) चतुराई से

अथवा
(II) न न ल खत क वताओं और क वय का सह मलानवाला वक प चन
ु :
(क) बूढ़ प ृ वी का दख
ु ’ (i) मै थल शरण गु त
(ख) आजाद (ii) बालचं न चिु ल काड़
(ग) आ वान (iii) केदारनाथ अ वाल
(घ) चं गहना से लौटती बेर (iv) नमला पत
ु ल

A. (क) (i); घ(ii), (ग)(iii), (ख)(iv)
1
B. (घ) (i), (ग)(ii), (क)(iii), (ख)(iv)
C. (घ) (iii), (ख)(ii), (क)(iv), (ग)(i)
D. (क) (i), (ख)(ii), (ग)(iii), (घ)(iv)
3. न न ल खत न म से क ह ं तीन न के र त थान एक श द या वा यांश से भ रए
3
और अपनी उ र पुि तका म ल खए :-
(i) ‘बूढ़ प ृ वी का दख
ु ’ क वता म ‘पेड़ के हज़ार हज़ार हाथ के हलने’ से अ भ ाय है क 1
.....................
(ii) ‘चं गहना से लौटती बेर’ क वता म ‘पोखर’ श द .................... के लए आया है। 1

(iii)‘आ वान’ क वता म पीछे रह गए लोग,आगे .........................करके बढ़ गए। 1

(iv)‘चं गहना से लौटती बेर’ क वता म ‘फाग गाता मास फागुन आ गया है जैसे’ 1
.....................अलंकार का उदाहरण है।
4 न न ल खत न म से क ह ं दो न के र त थान भ रए और अपनी उ र पुि तका 4
म ल खए :-
(i) ..............................क वता म यु त हुए अनंत कपड़े,ग तमान प हये ......................ह। 1X2

(ii) कबीर ने एक दोहे म कु हार क तुलना .......................से और घड़े क तल


ु ना ................से 1X2
क है ।
(iii) ‘चं गहना से लौटती बेर’ क वता म ‘बांधे मुरैठा शीश पर’ .................के लए और ‘दे ह क 1X2
पतल , कमर क है लचील ’ ......................के लए यु त हुए ह।
5. न न ल खत न म से क ह ं दो न के र त थान एक श द या वा यांश से भर कर 4
अपनी उ र पिु तका म ल खए :-
(i) खैर,खन
ू ,खांसी,खस
ु ी म ..................... अलंकार है य क ................................... 1X2
(ii) आजाद क वता म यु त श द शा गद, तनहाई .............भाषा के ह और लै पो ट श द 1X2
................. भाषा का है ।
(iii) ऊंचे कुल का जन मया दोहे म ..................क ेरणा द गई है । इस दोहे म 1X2
..................अलंकार का योग हुआ है।
6. न न ल खत का यांश को यानपूवक प ढ़ए और उ र के प म दए गए वक प म से सवा धक
4
उपयु त वक प छांट कर अपनी उ र पिु तका म ल खए :-

पव
ू चलने के बटोह , बाट क पहचान कर ले,
पु तक म है नह ं छापी गई इसक कहानी,
हाल इसका ात होता है न और क ज़बानी,
अन गनत राह गए इस राह से, उनका पता या,
पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैर क नशानी,
यह नशानी मक
ू होकर भी बहुत कुछ बोलती है ,
खोल इसका अथ, पंथी, पंथ का अनम
ु ान कर ले
पूव चलने के बटोह , बाट क पहचान कर ले।

2
है अ नि चत कस जगह पर स रत, ग र, ग वर मलगे,
है अ नि चत कस जगह पर बाग, वन सुंदर मलगे,
कस जगह या ा ख़तम हो जाएगी, यह भी अ नि चत,
है अ नि चत कब सम
ु न, कब कंटक के शर मलगे,
कौन सहसा छूट जाएँगे, मलगे कौन सहसा,
आ पड़े कुछ भी, केगा तू न, ऐसी आन कर ले।
पूव चलने के बटोह , बाट क पहचान कर ले।

(I) ‘खोल इसका अथ, पंथी, पंथ का अनम


ु ान कर ले’ का भाव है ... 1
(क)बाधाओं से बच कर या ा करना
(ख)या ा से पहले राह जान कर अपना ल य सु नि चत करना
(ग)य द आव यक न हो तो या ा न करना
(घ)अ ात राह क या ा न करना

(II) क वता म ‘स रत, ग र, ग वर’ तीक ह... 1

(क)दे श के ाकृ तक सौ दय के
(ख)पयावरण के
(ग) हमालय के पयटन थल के
(घ)माग क बाधाओं के

(III) का यांश का मल
ू वषय है.....
1
(क)माग क बाधाएं
(ख)जीवन क अ नि चतता म या ा क नर तरता
(ग)जीवन म सम याओं का समाधान
(घ)सावधानी से जीवन जीना

1
(IV) का यांश म ......................... और.........................अलंकार का सौ दय है।
(क)अनु ास, उपमा
(ख)मानवीकरण, अनु ास
(ग)अनु ास, वरोधाभास
(घ)अनु ास, पक
न न ल खत न म दये र त थान भ रए और अपनी उ र पुि तका म ल खए :-
7. (I) ‘अंधेर नगर ’ नाटक म राजा के लए कस वशेषण का योग कया गया? 1 1
(क) बहादरु
(ख) चौपट
(ग) याय य
(घ) वलासी

3
अथवा
(II) ‘बहादरु ’ शीषक कहानी म लेखक के पु का नाम है........................
(क) कशोर
(ख) कुमार
(ग) कृ ण कुमार
(घ) कृश
8. (I) फोटो के नीचे छपी सूचना को अखबार क भाषा म............................ कहते ह। 1 1
(क) इं ो
(ख) सब हे डंग
(ग) कै शन
(घ) समाचार ोत
अथवा
(II) शतरं ज के खलाड़ी कहानी का उ दे य .................................. करना है ।
(क) उस समय के समाज का च ण करना
(ख) शतरं ज के खेल क नंदा करना
(ग) गुलामी के कारण के त सचेत करना
(घ) मीर और मज़ा के जीवन च ण करना
न न ल खत न के उ र के प म दए गए वक प म से सवा धक उपयु त वक प छांट कर
अपनी उ र पिु तका म ल खए :-
9. (I) ‘बहादरु घर म फरक क तरह नाचता रहता था’ का आशय है क वह- 1 1
(क) वह काम करने के लए इधर-उधर दौड़ता रहता था।
(ख) वह बहुत शोर मचाता रहता था।
(ग) वह दन भर खब ू शरारत करता था
(घ) काम से बचने के बहाने ढूंढा करता था।
अथवा
(II) मां-बाप का कज़ा तो ज म भर भरा जाता है’बहादरु के इस कथन से ात होता है ...
(क) उसने माँ-बाप से बहुत सारा कज़ा लया है ।
(ख) उसे माँ-बाप वारा लया गया कज़ा चक ु ाना है ।
(ग) उसे मां-बापके त अपने कत य का एहसास है।
(घ) उसके मां-बापभी परू ा जीवन कज़ा चक
ु ाते रहे ह।
10. (I) शतरं ज के खलाड़ी कहानी म बना यु ध के नवाब को बंद बनाए जाने पर भी मीर 1 1
और मरज़ा पर कोई भाव नह ं पड़ा य क ..............................................
(क) वे उसके श ु थे।
(ख) मीर और मरज़ा अं ेज के समथक थे ।
(ग) शतरं ज के बादशाह को बचाना अ धक आव यक था।
(घ) यु ध करना उनका उ रदा य व नह ं था।
अथवा

4
( II) शतरं ज के खलाड़ी कहानी का यह संवाद-‘घास तो आपके अ बाजान छ लते ह गे।यहाँ तो
पी ढ़य से शतरं ज खेलते चले आ रहे ह’ संकेत करता है.....
(क) मीर का मज़ाक
(ख) मरजा क हार
(ग) मीर क तकार भावना
(घ) मरज़ा क अस लयत

11. (I) आपने अपने म को प लखा है । यह प कस कार का होगा ? 1 1

(क) यावसा यक प
(ख) अनौपचा रक प
(ग) कायालयी प
(घ) औपचा रक प
अथवा
(II) व तार से कह गई बात को कम श द म य त करने क कला कहलाती है ....
(क) भाव प लवन
(ख) सार लेखन
(ग) नबंध ले खन
(घ) या या ले खन
न न ल खत न के र त थान एक श द या वा यांश से भ रए और अपनी उ र
पुि तका म ल खए :-
12. (I) अंधेर नगर पाठ म ‘टके सेर भाजी टके सेर खाजा’ कथन म न हत यं य अथ है ................ 1 1
अथवा
(II) अंधेर नगर पाठ म महंत ने नगर छोड़कर जाने का नणय लया य क...........
13. (I) समाचार ोत म यह शा मल नह ं होता क............................... 1 1
अथवा
(II) अखबार का संपादक य ..............................पर आधा रत होता है।
14. न न ल खत म से क ह ं 02 र त थान क पू त क िजये: 1X2 2
(क) ‘नाखन
ू य बढ़ते ह’ पाठ के लेखक ह ........................................।
(ख) ‘नाखन
ू य बढ़ते ह’ पाठ म लेखक ने ....................... क वचारधारा का संकेत कया है ।
(ग) अंधेर नगर ’ नाटक के लेखक ह ......................................
(घ) अंधेर नगर ’नाटक के ............................त व के कारण वह अ य वधाओं से भ न है
15. न न ल खत संवाद कस पा के ह? क ह ं दो क पहचान क िजये और र त थान भ रए : 1X2 2
(क) “दे ख बे,मेरा काम सबसे पहले होना चा हए”। .......................
(ख) “ब चा,बहुत लोभ नह ं करना”। ...............................
(ग) “इतनी लौ खदु ा से लगते तो वल हो जाते”।.......................
(घ) ‘म समझ रह थी क शहर मेरा वागत करे गा”। .................
16. नीचे दये गए कथन म से क ह ं दो कथन उ र पिु तका म ल खए औए बताइये वे सह ह या 1X2 2
5
गलत।
(क) ‘नाखन
ू य बढ़ते ह’ पाठ म पशुता से आशय है बुर व ृ याँ
(ख) व ापन का उ दे य भाषा श ण होता है
(ग) यापार जगत के समाचार क भाषा म बनावट श द का योग कया जाता है।
(घ) बहादरु चोर के झठ
ू े आरोप के कारण घर से भाग जाता है।
17. (I) ...................क मदद से सख
ु ी राजकुमार नगर के लोग के दख
ु दरू करता है और 1X2 2
................... का संदेश दे ता है।
(क) मैना, आ म व ले षण
(ख) बया , प र म
(ग) गौरै या, नः वाथ ेम
(घ) कोयल, शां त
अथवा
(II) ‘सुखी राजकुमार’ कहानी म ...................... के वारा बार-बार म दे श जाने क बात
क गयी है। इससे हम समझ सकते ह क उसम .....................................
(क) गौरै या, काम से जी चुराने क वृ है।
(ख) मेयर, दखावा करने क वृ है।
(ग) अंगर का, नगर म रहने के त उदासीनता है।
(घ) गौरै या, ऐ वय के त आकषण है
18. नीचे दये गए पाठ और पा के दो सह यु म चु नये और अपनी उ र पिु तका म ल खए – 1X2 2

पाठ का नाम पा का नाम


बहादरु गौरैया
शतरं ज के खलाड़ी गोबरधनदास
सख
ु ी राजकुमार मरजा
अंधेर नगर कशोर

19. न न ल खत म से क ह ं 02 र त थान क पू त क िजये: 1X2 2


(क) नबंध के मु यतः तीन अंग होते ह: भू मका,..................तथा उपसंहार ।
(ख) ........................... नबंध म क पना क धानता रहती है।
(ग) वचारा मक नबंध म ...................... त व क धानता रहती है।
(घ) कसी दशनीय थल पर आधा रत नबंध .......................... नबंध के अंतगत आएंगे।

न न ल खत ग यांश को यानपव
ू क प ढ़ए और उ र के प म दए गए वक प म से सवा धक
उपयु त वक प छांट कर अपनी उ र पुि तका म ल खए :
20. वकास और पयावरण के मु दे और उनके पर पर संबध
ं आ याि मक मह व के ह खासकर भारत 4
के संदभ म। पहल ाथ मकता तो यह है क सभी लोग को जीवन क मल
ू भत
ू आव यकताएं परू

6
क जा सक और पयावरण और उनक संपदाओं का कसी कार का अवां छत दोहन ना हो सके।
आ थक वकास क उ च ऊजा पर आधा रत जीवन शैल ने भौ तक सम ृ ध को बढ़ाया है ।
वकासशील दे श आज पयावरण संकट और वकास के संकट दोन से घरे हुए ह। यह दोन ह
संकट एक दस
ू रे क ती ता और पर पर त या से सम या को और गहरा बना रहे ह। एक तरफ
तो असमानता नधनता, बेरोजगार क सम याओं का कोई अंतर नह ं दखाती और िज ह वकास
क या वारा सल
ु झाना है , दस
ू र तरफ पयावरण का शोषण बढ़ता ह जा रहा है । रोचक त य
यह है क वायु और जल के दष
ू ण क सम याएं वकासशील व व म बढ़ती ह जा रह ह और
अ धकांश थान पर इ ह ने वकराल प धारण कर लया है। भारत को वतमान सम याओं का
थायी समाधान खोजने के साथ-साथ भावी पीढ़ को भी इन चन
ु ौ तय का सामना करने के लए
तैयार करना होगा।

(I) भारत के संदभ म वकास और पयावरण के मु दे का अ याि मक होने का कारण हो सकता है


(क) मल
ू भूत आव यकताओं क पू त हे तु नभरता 1
(ख) पयावरण क सुर ा म ह जीवन सरु त।
(ग)पयावरण के मह व के त आ था।
(घ) वै ा नक आधार न होना।

(II) वकासशील दे श का पयावरण और वकास म उलझे होने से अ भ ाय है .......................


(क)पयावरण क सरु ा तथा वकास क इ छा रखना
(ख) वकास को नह ं छोड़ पाना
1
(ग)पयावरण को न ट नह ं होने दे ना
(घ)भौ तकता क इ छा रखने रखना

(III) ‘अवां छत दोहन’ से आप या समझते ह?


(क)ज रत के अनुसार कृ त से ा त करना
(ख)मन
ु ाफाखोर को मख
ु ता दे ना
1
(ग)अनाव यक प से कृ त को न ट करना
(घ) वकास के लए पयावरण को अ हत पहुँचाना

(IV) हम.........................................अब भी सचेत नह ं ह।


(क)आ थक वकास को दे खकर
(ख)पयावरण के मह व को अनदे खा करने से
(ग)पयावरण के लगातार शोषण बढ़ने से
1
(घ) वायु और जल दष
ू ण क बढ़ती सम या से
न न ल खत न के उ र के प म दए गए वक प म से सवा धक उपयु त वक प छांट कर
अपनी उ र पिु तका म ल खए:-

7
21. (I) बुर तरह हारना के लए सह मुहावरा है - 1 1

(क) मुंह खून से भर जाना


(ख) मुंह ताकते रहना
(ग) मुंह क खाना
(घ) मुंह उतरना
अथवा
(II) गागर म सागर भरना मुहावरे से आशय है -
(क) सरस दोह क रचना करना
(ख) मख
ू तापण
ू काम करना
(ग) असंभव काम करना
(घ) थोड़े श द म अ धक कहना
22. (I)‘ तरं गा’म ........................... समास है 1 1
(क) वं व,
(ख) वगु, ,

(ग) अ ययीभाव,
(घ) त पु ष
अथवा
(II)‘यथाशि त’ म ....................समास है
(क) बहु ी ह
(ख) त पु ष
(ग) अ ययीभाव
(घ) कमधारय
23. न न ल खत वा य म से शु ध वा य है ....................... 1 1
(I)
(क) वहाँ भार भीड़ लगी थी।
(ख) वहाँ भरकम भीड़ थी।
(ग) वहाँ भार भीड़ जमा थी ।
(घ) वहाँ भार भीड़ इक ठा थी।
वहाँ भार भीड़-भाड़ जमा थी ।
अथवा
(II)
(क) ई वर के अनेक नाम ह।
(ख) ई वर के अनेक नाम ह।
(ग) ई वर के नाम अनेक ह।
(घ) ई वर के अनेक कार के नाम ह।

8
24. (I) न न ल खत म से म वा य है ......................................... 1 1

(क) मेरा सपना फौजी बनने का है .


(ख) जो मेहनती होते ह, उ ह सभी सराहते ह।
(ग) वे दौड़ते-दौड़ते दरू नकल गए।
(घ) यह कताब अ छ तो है पर महंगी है।
अथवा
(II) न न ल खत म से संयु त वा य है .......
(क) आप चाय पएंगे या ल सी ?
(ख) सुबह होते ह काम शु हो गया ।
(ग) जैसे ह शाम हुई, वह घर आ गया।
(घ) कप गरते ह टूट गया।
25. न न ल खत न म क ह ं दोके उ र अपनी उ रपिु तका म ल खए : 1X2 2
(क) महे का सि ध व छे द……………….. है ।
(ख) पयावरण का सि ध व छे द……………….. है ।
(ग) इ त+आ द का सं ध …………………. होगा।
(घ) सत+ आनंद का सं ध …………………. होगा।
26. न न ल खत न म क ह ं दो के उ र अपनी उ रपुि तका म ल खए 1X2 2
(क) ‘मा य मक’ श द म ............................. यय का योग कया गया है।
(ख) था य व श द म ............................. यय का योग कया गया है।
(ग) ‘अनाव यक’ श द म ............................. उपसग का योग कया गया है।
(घ) ‘अपमान’ श द म ............................. उपसग का योग कया गया है।
27. न न ल खत न म क ह ं दो के उ र अपनी उ रपुि तका म ल खए : 1X2 2

(क) शत, अंग ,ष ठ, बीस म से त भव श द है .................................


(ख) नकास, नेह, नज व, नौकर म से त सम श द है .............................
(ग) डॉ टर, िज़ंदगी,ड गा, कूल म से दे शज श द है ............................
(घ) भात, रोड़ा, अि न, एहसान म से वदे शज श द है ............................

खंड ‘ब’( वषय न ठ/वणना मक)


28. न न ल खत का यांश के क व और क वता का नामो लेख करते हुए का य सौ दय प ट 4 4
क िजए:

जो जल बाढ़ै नाव म,घर म बाढ़ै दाम


दोऊ हाथ उल चए,यह सयान काम

अथवा

“उ ताद जी,आजाद या होती है?”

9
-पूछा दज से उसके शा गद ने,
“ या वह चारागाह म उछल-कूद मचाता
न हा-सा बछड़ा है?
या उ र दशा म दौड़ती सीट बजाती रे लगाड़ी?

29. न न ल खत अवतरण क स संग या या क िजए: 3 3

पर,जो कपड़े नह ं सएगा,


सपने भी नह ं दे ख सकेगा।
सुई क चमक ल न क पर टक है आज़ाद ।

अथवा

करत-करत अ यास त, जड़म त होत सज


ु ान।
रसर आवत-जात त, सल पर परत नसान।।

30. न न ल खत न म से क ह ं तीन के उ र 20-25 श द म ल खए :- 2x3 6


(क) ‘नैना दे त बताय सब... दोहे म आँख क कस वशेषता का उ लेख कया गया है ?
(ख) ‘आज़ाद ’ क वता म या संदेश दया गया है?
(ग) नंदक को नकट रखने का या कारण है ?
(घ) ‘आज़ाद ’ क वता के अंत म शा गद ने सुई म धागा परोने का नणय य लया?

31. न न ल खत न म से क ह ं तीन के उ र 20-25 श द म ल खए :- 2x3 6


(क)‘शतरंज के खलाड़ी’ कहानी म मु य पा कौन ह और उनके आपसी संबध
ं का मल
ू आधार या है ?
(ख)‘सख
ु ी राजकुमार’ कहानी म राजकुमार के वभाव म या प रवतन आया?
(ग)‘शतरं ज के खलाड़ी’ कहानी म च त नगर कैसा था?
(घ)‘सख
ु ी राजकुमार’ कहानी म प और कम म से कसे मह व दया गया है?

32. न न ल खत न म से क ह ं दो के उ र 20-25 श द म ल खए: 2x2 4


(क)‘सख
ु ी राजकुमार’ कहानी म गौरै या को वग म थान य मलता है ?
(ख)‘शतरं ज के खलाड़ी’ कहानी का अंत दख
ु द य था?
(ग)‘ कसी भी काय क अ त दख
ु दायी होती है’–‘शतरंजके खलाड़ी’ पाठ के आधार पर कथन क
समी ा क िजए।

10
33. न न ल खत ग यांश को यानपव
ू क प ढ़ए और पछ
ू े गए न के उ र ल खए: 5 5

दस
ू रे दन मेयर अ य सद य के साथ टहल रहा था। जब वह वहां से गुज़रे , तो मेयर ने उसक ओर
दे खा और कहा- “ कतनी भ द लग रह है यह तमा!”“हां कतनी भ द है,” सद य ने कहा, जो
हमेशा मेयर क हां-म-हां मलाते थे। “उसक तलवार से लाल गर गया है, उसक आंख गायब ह और
उसका सोना उतर गया है। यह तो ब कुल प थर का भखार मालम
ू देता है।”

उपयु त ग यांश के पाठ और लेखक का नामो लेख करते हुए बताइए क -


(क)‘प थर का भखार ’ कसे कहा गया है?
(ख)ग यांश का मूलभाव प ट क िजए।

अथवा

दोन ज़ म खाकर गरे , और दोन ने वह ं तड़प-तड़प कर जान दे द ं। अपने बादशाह के लए िजनक


आंख से एक बूंद आंसू न नकला, उ ह ं दोन ा णय ने शतरं ज के वज़ीर क र ा म ाण दे दए।
अंधेरा हो चला था बाज़ी बछ हुई थी। दोन बादशाह अपने-अपने संहासन पर बैठे हुए मानो इन दोन
वीर क म ृ यु पर रो रहे थे।

उपयु त ग यांश के पाठ और लेखक का नामो लेख करते हुए बताइए क -


(क) दोन ने शतरंज के वजीर क र ा म ाण य दे दए?
(ख) दोन बादशाह इन दोन वीर क म ृ यु पर य रो रहे थे?
34. न न ल खत अवतरण क स संग या या क िजए: 5 5

‘...शहर म न कोई हलचल थी, न मार-काट। एक बद


ूं भी खन
ू नह ं गरा था। आज तक कसी वाधीन
दे श के राजा क पराजय इतनी शां त से, इस तरह खन
ू बहे बना न हुई होगी। यह वह अ हंसा न थी,
िजस पर दे वगण स न होते ह। यह वह कायरपन था िजस पर बड़े-बड़े कायर भी आंसू बहाते ह।...’

अथवा

“आज जब म मर गया हूं, तो उ ह ने मुझे इतने ऊंचे पर था पत कर दया है क म संसार क सार


कु पता और दख
ु -दद दे ख सकता हूं। मे रे ह नगर म इतना दख
ु है क य य प मेरा दय ज ते का है,
मगर फर भी फटा जा रहा है ”

35. न न ल खत ग यांश का सार एक तहाई श द म ल खए: 5 5

रा य जाग ृ त तभी सश त होती है , तभी कारगर होती है , जब उसके पीछे सं कृ त क जाग ृ त हो और


यह तो व दत ह है क कसी भी सं कृ त क आ मा उसके सा ह य म, अथात उसक भाषा म है। इसी
बात को हम यूं कह सकते ह क बना सं कृ त के रा नह ं और बना भाषा के सं कृ त नह ं। कसी
दे श क सं कृ त को जानने के लए, वहां के सा ह य का परू ा अ ययन नतांत आव यक है । सा ह य
कसी दे श या जा त के वकास का च ह है । सा ह य से उस समाज के धा मक वचार , सामािजक
संगठन , ऐ तहा सक घटना च तथा राजनी तक प रि थ तय का त बंब मल जाता है। भारतीय
सं कृ त के मल
ू आधार हमारे सा ह य के अमल
ू ंथ र न ह, िजनके वचार से भारत क आंत रक
एकता का ान हो जाता है। हमारे दे श क वचारधारा और सं कृ त एकता को सश त करती है । नई
पीढ़ को दे श क सम ृ ध सं कृ त के त सचेत रहते हुए उसके संर ण के लए नरं तर यासरत रहना
11
होगा।

36. अपने बड़े भाई को प लखकर जानकार द क आप बोड क आगामी पर ा के लए कस 5 5


कार से तैयार कर रहे ह।
अथवा
अपने े म बढ़ रहे अपराध क ओर यान आक षत करते हुए थानीय पु लस अ धकार
को प ल खए।
37. न न ल खत म से कसी एक वषय पर लगभग 300 श द म नबंध ल खए : 7 7
(क) पयावरण हमारा : उ रदा य व हमारा
(ख) सब पढ़, आगे बढ़
(ग) व छ भारत- व थ भारत
(घ) ये सद ि य क है

12
आदश नप क अंक योजना
ह द (201)
कुल अंक:- 100 समय: 3 घंटे

खंड ‘अ’(व तु न ठ/बहु वक पीय)

अंक कुल अंक

न न न ल खत न के र त थान भ रए और अपनी उ र पुि तका म ल खए :-

सं या

1. (I) थान 1 1

अथवा
(II) अ नवाय आव यकता क पू त

2. (I) (ख) धन से 1 1
अथवा
(II) C (घ) (iii), (ख)(ii), (क)(iv), (ग)(i)
3. कोई तीन

(i) वे र ा के लए ाथना कर रहे ह 1

(ii) तालाब 1 3

(iii) क ठन प र म 1

(iv) मानवीकरण 1

4. कोई दो 4

(i)‘आजाद ’क वता म यु त हुए ‘अनंत कपड़े’, ‘ग तमान प हये’ म वशेषण ह। 1x2


1x2
(ii)कबीर ने एक दोहे म कु हार क तुलना गु से और घड़े क तुलना श य से क है
1x2
(iii)‘चं गहना से लौटती बेर’ क वता म बांधे मुरैठा शीश पर चनेके लए और ‘दे ह क

13
पतल , कमर क है लचील ’ अलसी के लए यु त हुए ह।

5. कोई दो
(i)खैर,खून,खांसी,खस अनु ास ख वण क आव ृ त 1x2 4
ु ी म अलंकार है य क है।
1x2
(ii)आजाद क वता म यु त श द शा गद, तनहाई फारसी भाषा के ह और

लै पो ट श द अं ेज़ी भाषा का है 1x2


(iii)ऊंचे कुल का जन मया दोहे म कम क ेरणा द गई है । इस दोहे म टांत
अलंकार का योग हुआ है।

6. (I) (ख) या ा से पहले राह जान कर अपना ल य सु नि चत करना 1 4


(II)(घ) माग क बाधाओं के 1
(III)(ख) जीवन क अ नि चतता म या ा क नर तरता 1
(IV)(घ) अनु ास, पक 1
7. (I) ‘अंधेर नगर ’ नाटक म राजा के लए (ख)चौपट वशेषण का योग कया 1 1

गया।
अथवा

(II) ‘बहादरु ’ शीषक कहानी म लेखक के पु का नाम (क) कशोर है।

8. (I) ू ना को अखबार क भाषा म (ग)कै


फोटो के नीचे छपी सच शन कहते ह। 1 1

अथवा
(II) शतरं ज के खलाड़ी कहानी का उ दे य (ग) गुलामी के कारण के
त सचेत करना है।

9. (I) बहादरु घर म फरक क तरह नाचता रहता था’ का आशय है क वह- 1 1


(क)वह काम करने के लए इधर-उधर दौड़ता रहता था।
अथवा
(II) मां-बाप का कज़ा तो ज म भर भरा जाता है ’बहादरु के इस कथन से ात होता है
(ग) उसे मां-बाप के त अपने कत य का एहसास है।
10. (I) (ग)शतरंज के बादशाह को बचाना अ धक आव यक था। 1 1
अथवा
(II) (ग)मीर क तकार भावना
11. (I) (क)अनौपचा रक प 1 1
अथवा
(II) (क)सार लेखन

14
12. (I) अंधरे नगर पाठ म ‘टके सेर भाजी टके सेर खाजा’ कथन म न हत यं य 1 1
अथ है गुण और मू य क कदर नह ं है ।
अथवा
(II) अंधरे नगर पाठ म महंत ने नगर छोड़कर जाने का नणय लया य क
भावी संकट क आशंका थी ।

13. (I) समाचार ोत म यह शा मल नह ं होता क समाचार कैसे ा त हुआ। 1 1

(घ)
अथवा

(II)अखबार का संपादक य समाचार पर आधा रत होता है।

14. ( क ह ं दो) 1x2 2

(क) ‘नाखन
ू य बढ़ते ह’ पाठ के लेखक ह हजार साद ववेद
(ख) ‘नाखन
ू य बढ़ते ह’ पाठ म लेखक ने महा मा गांधी क वचारधारा का
संकेत कया है।
(ग) अंधेर नगर ’ नाटक के लेखक ह जयशंकर साद।
(घ) अंधेर नगर ’ नाटक के अ भनेयतात व के कारण वह अ य वधाओं से भ न
है।

15. (क) कशोर (कोई दो) 1x2 2


(ख) महंत
(ग) बेगम
(घ) गौरै या
16. (कोई दो) 1x2 2
(क)सह
(ख) गलत
(ग) गलत
(घ) सह
17. (I) (ग)गौरैया, नः वाथ ेम 1x2 2
अथवा
(II) (घ)गौरैया, ऐ वय के त आकषण है

18. ( क ह ं दो) 1x2 2

पाठ का नाम पा का नाम


बहादरु कशोर
शतरं ज के खलाड़ी मरजा
सख
ु ी राजकुमार गौरै या
अंधेर नगर गोबरधनदास

15
19. (1) वषयव तु (कोई दो) 2
(2) भावा मक
(3) .बु ध
(4) वणना मक

20. वकास और पयावरण के मु दे ...........................तैयार करना होगा। 4

(I) (घ) वै ा नक आधार न होना। 1


(II) (ग) पयावरण को न ट नह ं होने दे ना 1
(III) (घ) वकास के लए पयावरण को अ हत पहुँचाना 1
(IV) (घ) वायु और जल दष
ू ण क बढ़ती सम या से 1

21. (I) बुर तरह हारना के लए सह मुहावरा है – (ख)मुंह क खाना 1 1


अथवा
(II) गागर म सागर भरना मुहावरे से आशय है - (घ)थोड़े श द म अ धक
कहना
22. ‘ तरं गा’ म (ख) वगु समास है 1 1
अथवा

‘यथाशि त’ म (ग)अ ययीभाव समास है


23. (I) (ग) वहाँ भार भीड़ जमा थी । 1 1
अथवा
(II) (ख)ई वर के अनेक नाम ह।
24. (I)(ख) जो मेहनती होते ह, उ ह सभी सराहते ह। 1 1

अथवा

(II) (क) आप चाय पएंगे या ल सी ?

25. ( क ह ं दो) 1x2 2


(क) महे का सि ध व छे द महा + इ है।

(ख) पयावरण का सि ध व छे द प र+ आवरण है।


(ग) इ त+आ द का सं ध इ या द होगा।
(घ) सत+ आनंद का सं ध सदानंद होगा।

26. ( क ह ं दो) 1x2 2

(क) ‘मा य मक’ श द म इक यय का योग कया गया है।

(ख) था य व श द म व त ्यय का योग कया गया है।

(ग) ‘अनाव यक’ श द म अन उपसग का योग कया गया है ।

16
(घ) ‘अपमान’ श द म अप उपसग का योग कया गया है ।

27. ( क ह ं दो) 1x2 2

(क) बीस
(ख) नज व
(ग) ड गा
(घ) एहसान.

खंड ‘ब’( वषय न ठ/वणना मक)


28 4
जो जल……………….सयान काम
पाठ – दोहे ½
क व - कबीर ½
काव ्य स दय – य द नाव म पानी भरने लगे और घर म धन क अ धकता हो जाए तो
समझदार इसी म है क दोन हाथ से उल चना शु कर द िजए। नाव म पानी बढ़ने
से उसका डूबना नि चत है। इसी तरह य द घर म आव यकता से अ धक धन आ जाए
1
तो उसे दान कर दे ना चा हए य क धन क अ धकता अपने साथ ऐसी वकृ तयां लेकर
आती है िजससे घर का वनाश होना नि चत है।
नाव म जल और घर म धन जैसी दो भ न ि थ तय म समानता था पत क गई है।
साथ ह , इससे नी तगत उ दे श को सरल और बोधग य बनाया गया है।
2
-कबीर ने धन क आव यकता को नकारा नह ं है , उस क अ धकता -को हा नकारक
बताया है
-नी त और उपदे श क बात
-कबीर क सधुक्कड़ी भाषा
-सहज भाषा म गहर बात उदाहरण के माध ्यम से कह गई है।

अथवा

“उस ्ताद जी, ................................. उड़ी जाती च डया


़ ?

पाठ – आज़ाद
½

क व – बालचं न चुि लकाड


½

इस न के साथ-साथ शा गद ने कई संदभ का वणन करके आज़ाद का अथ जानना


चाहा उसने अपने हसाब अपने उ ताद के सामने है िज ासा रखी क या चरागाह म
न हे से बछड़े का उछल कूद करने को ,बे फ और खश
ु रहने को आज़ाद कहगे।
दस
ू रा संदभ दे ते हुए शा गद पछ
ू ता है क या असंभव समझे जाने वाले काम को परू ा
1
करने का नाम आज़ाद है य क सरू ज म घ सला बनाने के लए उड़ान भरने वाल

17
च ड़या का द ु साहस ऐसा ह है।
भाषा सरल, सहज, आसान बोलचाल के श द
अरबी शब ्द – मुसा फर

2
फारसी शब ्द – उ ताद, दज , शा गद
वशेषण – न हा-सा
ू भाषा – मलयालम। सहज भाषा म कया गया अनुवाद है।
क वता क मल
29 पर,जो कपड़े नह ं सएगा…. टक है आज़ाद । 3

1
संग – तुत अंश बालचं न चुि लक् काड क क वता ‘आज़ाद ’ से लया गया है। इसम

दज का शा गद आज़ाद के बारे म न करता है और वह अलग-अलग ढं ग से अपनी

िज ासा को शांत करना चाहता है। इस पर दज उसे कम क ओर े रत कर रहा है।

व ्याख ्या – सल क न क पर आज़ाद टक हुई है ।सुई चलती रहे गी, कपड़े सए

जाएंगेअथात कम जार रहे गा तो आज़ाद बनी रहे गी। कम करने म ह आज़ाद है।
येक यि त के लए उससे अपे त काय को परू न ठा से करना ह आज़ाद है।
आज़ाद का आनंद वह ले सकता है िजसने उसके लए प र म कया है। िजसने काय
नह ं कया है उसे सपने दे खने और आज़ाद भोगने का अ धकार नह ं है। आज़ाद को 2

भोगने के लए कत यबोध अ त आव यक है।

अथवा

करत-करत ............................ परत नसान

संग – तुत दोहा क व वंद


ृ वारा र चत है। इस म अभ ्यास क म हमा उदाहरण के

माध ्यम से बहुत ह सश त प म य त क गई है।


1
या या – नरं तर अ यास करने से मख
ू लोग भी व वान बन जाते ह। िजस कार कुएं

के कठोर प थर पर भी र सी के बार-बार आने-जाने से नशान पड़ जाते ह।

उदाहरण – ‘ सल पर परत नसान’ उदाहरण होने से टांत अलंकार


2
करत-करत म अनु ास ,

छं द – दोहा ।

18
30 (कोई तीन)
2x3=6
(क) ‘नैना दे त बताय सब....... दोहे म आंख के भाव क स ्पष ्ट दशन का

उल ्लेख कया गया है। नैना के मा यम से दय म सकारा मक और 2


नकारा मक दोन भाव को दे खा जा सकता है। ठ क उसी कार -जैसे साफ

दपण प ट प से जो जैसा है ,वैसा ह त बंब दखाता है ।

(ख) आज़ाद गण
ु व ा म कत यबोध क ेरणा दे ती है और कहा गया है क मेहनत,
2
न ठा और लगन से अपना कत य करने वाला यि त ह आज़ाद का सह
मायने म अ धकार है।
(ग) नंदक को नकट रखना लाभकार है। वह हमारे स ्वभाव के सभी नकारा मक 2
प को उजागर करता है िज ह सुधारकर हम अपने स ्वभाव को उ कृ ट बना
सकते ह।

(घ) ‘आज़ाद ’ क वता के अंत म शा गद को दज वारा दए गए उ र से संतुि ट


2
मल , उसक िज ासा शांत हुई क आज़ाद कम करने का नाम है। वह अपने

काय क ओर े रत हुआ और सूई म धागा परोने लगा।

(कोई तीन) 2x3=6


31.
(क) ‘शतरं ज के खलाड़ी’ कहानी म मु य पा मरज़ा स जाद अल और मीर रौशन 2
अल ह। दोन समृ ध प रवार से ह अतः जी वका चलाने क कोई चंता नह ं है ।
उनके आपसी संबध
ं का मल
ू आधार उनका शतरं ज खेलने का यसन है ।

(ख)जब राजकुमार जी वत था, वह केवल अपने सख


ु और ऐ वय म ह च लेता था।

वह आ मक त था। परं तु मरने के बाद उसे सबके दख


ु दखाई दे ने लगे। वह दख
ु ी
रहने लगा। मानवीय संवेदनाओं का संचार हुआ।

(ग) ‘शतरं ज के खलाड़ी’ कहानी म वािजद अल शाह का समय था, लखनऊ वला सता 2
के रं ग म डूबा हुआ था। अमीर-गर ब सभी कसी-न- कसी लत तथा वला सता म

डूबे हुए थे& सभी एक-दस


ू रे से नरपे थे।
2
(घ)कम को मह व। ारं भ म राजकुमार क तमा क सब सराहना करते ह पर अंत

तक यह तमा अ यंत कु प हो जाती है।य य प मेयर आ द को यह प थर का


2
भखार मालूम होता है परंत,ु गौरै या राजकुमार के कम सौ दय के कारण ह ेम करती

है।ई वर गौरै या और राजकुमार को वग म थान दे ते ह।

19
32 (कोई दो) 2x2=4

2
(क) गौरै या राजकुमार क संग त म लोग के दख
ु -दद बांटती है ,राजकुमार के

गण
ु से भा वत है , वयं अपने ाण दे दे ती है। उसके ेम, समपण और

याग के कारण उसे वग म थान मलता है।

(ख) कहानी ‘शतरं ज के खलाड़ी’ के अंत म समाज के वला सता म डूबे होने के 2
कारण न तो दे श बचता है , न ह यि त। नवाब बंद हो गए और मीर

ू शान के कारण एक-दस


और मरज़ा अपनी झठ ू रे क ह या कर दे ते ह।

(ग) ‘शतरं ज के खलाड़ी’ कहानी म परू जनता राग-रं ग म डूबी हुई है। संसार म
होने वाल घटनाओं म कसी क दलच पी नह ं थी। अ य धक

ऐ वय,अकम यता के कारण जनता गल 2


ु ाम रह गयी। नवाब बंद हो गए और
मीर एवं मजा जान से हाथ धो बैठे। अ य धक वला सता अ यंत घटक
स ध हुई।

33 पाठ- सख
ु ी राजकुमार ½ 5

½
लेखक : ऑ कर वाइ ड

(क) जब राजकुमार अपने अंग पर लगे बहुमू य र न को दान कर लोग का दख



2
दरू करता है तो उसक पहचान सुखी राजकुमार से ‘प थर का भखार ’ हो जाती

है।

(ख) नगर का मेयर अपने चाटुकार के साथ मण के दौरान दे खता है क राजकुमार


क तमा पर लगे बहुमू य र न नह ं ह िजनके अभाव म तमा कु प लग 2
रह है। इस लए राजकुमार क तमा को प थर का भखार कहा गया है। मेयर
को नगर क जनता के दख
ु नह ं दखते परंतु मू त का भ दापन द ख जाता है।
सभासद भी चापलस
ू ह। वे हर बात म हाँ भरते ह। प का वच व है। कम का
अभाव है।

अथवा
½
पाठ - शतरं ज के खलाड़ी
½
लेखक – मुंशी ेमचंद

(क) मीर और मरजा शतरं ज क बाजी के दौरान अ यंत हंसक हो उठे और बसात 2
के मोहर पर हुए झगड़े म अ ासं गक बात भी होने लगीं और दोन ने एक-दस
ू रे
से ज मी हो ाण दे दए।
2
(ख) दोन बादशाह इन दोन वीर क म ृ यु पर इस लए रो रहे थे य क शतरंज क

20
लत के चलते िज ह ने अपने कत य से सदै व मुंह चुराया,िज ह ने अपने शासक

वािजद अल शाह क साथ मलकर दे श को गल


ु ामी से मु त करने के लए

अपना जीवन अपण करने के बजाय, वह मीर और मरज़ा शतरं ज के खेल पर

अपनी जान से हाथ धो बैठे। उनका जीवन यथ गया।

34 ‘...शहर म न कोई हलचल थी….. बड़े बड़े कायर भी आंसू बहाते ह। 5

संग : यह ग यांश मंश


ु ी ेमचंद क कहानी ‘शतरं ज के खलाड़ी’ से लया गया है। 1

या या : वािजद अल शाह को अं ेज सेना वारा गर तार कर लया जाता है। अवध

जैसे वशाल रा य का शासक बना कसी संघष के बंद हो जाता है। उसके लए संघष 2

करने वाला कोई नह ं। सब वलास म मगन ह । अ हंसा और कायरता म बहुत अंतर है।
यह अ हंसा नह ं कायरता क पराका ठा थी।

आगत श द का योग: शहर, कायरपन


त सम श द: वाधीन, अ हंसा,दे वगण
2
मुहावरे : खन
ू बहाना , आँसू बहाना
ह द भाषा के ह द ु तानी प का योग
अथवा

‘आज जब म मर गया हूं…. मगर फर भी फटा जा रहा है ’

संग : यह ग यांश ऑ कर वाइ ड क कहानी ‘सुख ी राजकुमार’ से लया गया है।

या या : जब राजकुमार जी वत था तब उसे अपने सख


ु के अ त र त कुछ भी

ु -सु वधाएं थीं। वह आ म क त था।


दखाई नह ं दे ता था। उसके चार तरफ सख
1
उसे दस
ू र के दख
ु का कोई ान नह ं था परं तु म ृ यु के बाद जब वह तमा प
म था पत हुआ तो उसे वहां से सभी दख
ु दखाई दे ने लगे और अपने नगर म
इतने अ धक दख
ु से वह अ यंत य थत हो गया। 2

- आ मकथन शैल ,जीवन के त नई ि ट से सा ा कार


- मुहावरे का योग: दय फटना 2

35 सार लेखन – मूल बंदओ


ु ं का उ लेख 2 5
एक तहाई श द म सार 2
भाषा शु धता 1
36 प लेखन- प क औपचा रकताऐं 1 5
नानुसार वषयव तु 2
तु त और भाषा
2

21
37 नबंध लेखन – ारं भ/भू मका 1 7
वषयव तु 2
तु त 2
भाषा कौशल 2

22

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